दृष्टिबाधित बच्चों को सफल जीवन के सपने दिखाना अभिभावकों का प्रथम दायित्व: चितरंजय पटेल, दृष्टिबाधित विशेष विद्यालय में अभिभावक समागम संपन्न, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य पर दिया जोर, दृष्टिबाधित बच्चों को सफल जीवन के सपने दिखाना अभिभावकों का प्रथम दायित्व: चितरंजय पटेल, दृष्टिबाधित विशेष विद्यालय में अभिभावक समागम संपन्न, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य पर दिया जोर, दृष्टिबाधित बच्चों को सफलता के सपने दिखाना अभिभावकों का प्रथम दायित्व है, वहीं उन्हें उन सपनों को साकार करने योग्य बनाना शिक्षकों का कर्तव्य है। यह बात राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग के प्रदेश अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने दृष्टिबाधित विशेष विद्यालय में आयोजित अभिभावक समागम में कही। उन्होंने कहा कि दृष्टिबाधित बच्चे भले ही प्रत्यक्ष रूप से देख नहीं पाते, लेकिन उनकी स्पर्श शक्ति और अन्य इंद्रियां विलक्षण होती हैं। आज ब्रेल लिपि के माध्यम से वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर समाज और राष्ट्र की सेवा में योगदान दे रहे हैं। ऐसे बच्चों को स्नेह, प्रोत्साहन और बेहतर अवसर देना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में सर्व विकलांग कल्याण समिति के संरक्षक जसबीर सिंह चावला ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चे वर्ष के लगभग 300 दिन विद्यालय में बिताते हैं, इसलिए शेष 65 दिन उन्हें बच्चों के साथ समय बिताकर स्नेह और मार्गदर्शन देना चाहिए। जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष मांगेराम अग्रवाल ने जानकारी दी कि विद्यालय का निजी भवन जल्द ही तैयार होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विद्यालय अध्यक्ष बिंदेश्वरी आदिले ने बच्चों को छुट्टियों का सदुपयोग करने और समय पर विद्यालय लौटने की सलाह दी। वहीं, संस्थापक जसवंत आदिले ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सभी से मिलकर प्रयास करने का आग्रह किया। कार्यक्रम की शुरुआत दृष्टिबाधित बच्चों के स्वागत गीत से हुई। प्राचार्य ज्योति महंत ने अतिथियों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन एल्डरमैन दादू केवट ने किया तथा अंत में स्वल्पाहार के साथ समागम संपन्न हुआ।
दृष्टिबाधित बच्चों को सफल जीवन के सपने दिखाना अभिभावकों का प्रथम दायित्व: चितरंजय पटेल, दृष्टिबाधित विशेष विद्यालय में अभिभावक समागम संपन्न, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य पर दिया जोर, दृष्टिबाधित बच्चों को सफल जीवन के सपने दिखाना अभिभावकों का प्रथम दायित्व: चितरंजय पटेल, दृष्टिबाधित विशेष विद्यालय में अभिभावक समागम संपन्न, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य पर दिया जोर, दृष्टिबाधित बच्चों को सफलता के सपने दिखाना अभिभावकों का प्रथम दायित्व है, वहीं उन्हें उन सपनों को साकार करने योग्य बनाना शिक्षकों का कर्तव्य है। यह बात राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग के प्रदेश अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने दृष्टिबाधित विशेष विद्यालय में आयोजित अभिभावक समागम में कही। उन्होंने कहा कि दृष्टिबाधित बच्चे भले ही प्रत्यक्ष रूप से देख नहीं पाते, लेकिन उनकी स्पर्श शक्ति और अन्य इंद्रियां विलक्षण होती हैं। आज ब्रेल लिपि के माध्यम से वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर समाज और राष्ट्र की सेवा में योगदान दे रहे हैं। ऐसे बच्चों को स्नेह, प्रोत्साहन और बेहतर अवसर देना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में सर्व विकलांग कल्याण समिति के संरक्षक जसबीर सिंह चावला ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चे वर्ष के लगभग 300 दिन विद्यालय में बिताते हैं, इसलिए शेष 65 दिन उन्हें बच्चों के साथ समय बिताकर स्नेह और मार्गदर्शन देना चाहिए। जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष मांगेराम अग्रवाल ने जानकारी दी कि विद्यालय का निजी भवन जल्द ही तैयार होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विद्यालय अध्यक्ष बिंदेश्वरी आदिले ने बच्चों को छुट्टियों का सदुपयोग करने और समय पर विद्यालय लौटने की सलाह दी। वहीं, संस्थापक जसवंत आदिले ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सभी से मिलकर प्रयास करने का आग्रह किया। कार्यक्रम की शुरुआत दृष्टिबाधित बच्चों के स्वागत गीत से हुई। प्राचार्य ज्योति महंत ने अतिथियों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन एल्डरमैन दादू केवट ने किया तथा अंत में स्वल्पाहार के साथ समागम संपन्न हुआ।
- दृष्टिबाधित बच्चों को सफल जीवन के सपने दिखाना अभिभावकों का प्रथम दायित्व: चितरंजय पटेल, दृष्टिबाधित विशेष विद्यालय में अभिभावक समागम संपन्न, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य पर दिया जोर, दृष्टिबाधित बच्चों को सफल जीवन के सपने दिखाना अभिभावकों का प्रथम दायित्व: चितरंजय पटेल, दृष्टिबाधित विशेष विद्यालय में अभिभावक समागम संपन्न, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य पर दिया जोर, दृष्टिबाधित बच्चों को सफलता के सपने दिखाना अभिभावकों का प्रथम दायित्व है, वहीं उन्हें उन सपनों को साकार करने योग्य बनाना शिक्षकों का कर्तव्य है। यह बात राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग के प्रदेश अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने दृष्टिबाधित विशेष विद्यालय में आयोजित अभिभावक समागम में कही। उन्होंने कहा कि दृष्टिबाधित बच्चे भले ही प्रत्यक्ष रूप से देख नहीं पाते, लेकिन उनकी स्पर्श शक्ति और अन्य इंद्रियां विलक्षण होती हैं। आज ब्रेल लिपि के माध्यम से वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर समाज और राष्ट्र की सेवा में योगदान दे रहे हैं। ऐसे बच्चों को स्नेह, प्रोत्साहन और बेहतर अवसर देना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में सर्व विकलांग कल्याण समिति के संरक्षक जसबीर सिंह चावला ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चे वर्ष के लगभग 300 दिन विद्यालय में बिताते हैं, इसलिए शेष 65 दिन उन्हें बच्चों के साथ समय बिताकर स्नेह और मार्गदर्शन देना चाहिए। जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष मांगेराम अग्रवाल ने जानकारी दी कि विद्यालय का निजी भवन जल्द ही तैयार होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विद्यालय अध्यक्ष बिंदेश्वरी आदिले ने बच्चों को छुट्टियों का सदुपयोग करने और समय पर विद्यालय लौटने की सलाह दी। वहीं, संस्थापक जसवंत आदिले ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सभी से मिलकर प्रयास करने का आग्रह किया। कार्यक्रम की शुरुआत दृष्टिबाधित बच्चों के स्वागत गीत से हुई। प्राचार्य ज्योति महंत ने अतिथियों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम का संचालन एल्डरमैन दादू केवट ने किया तथा अंत में स्वल्पाहार के साथ समागम संपन्न हुआ।1
- Sarangarh news : कंगाल जिला प्रशासन || लाखो का जश्न : chhattisgarh महतारी बदहाल || स्थापना दिवस पुरे छत्तीसगढ़ मे राज्य स्थापना दिवस मनाया जा रहा हर जिले मे लाखो खर्च कर राज्य महोत्सव को धूम धाम से मनाया जा रहा लेकिन जिस छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा करेंगे उसकी प्रतिमा के आगे शीश नवाएंगे आज ऐसे हमारे छत्तीसगढ़ की पहचान हमारे महतारी के लिए सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला इतना कंगाल हो गया की रंग रोहन करने तक के लिए पैसे नहीं देखिए खबर1
- 54 करोड़ की सड़क निर्माण परियोजना में बाल श्रम का आरोप, PWD की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल, 54 करोड़ की सड़क निर्माण परियोजना में बाल श्रम का आरोप, PWD की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल, छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के मालखरौदा क्षेत्र में करीब 54 करोड़ रुपये की लागत से बन रही सक्ती-मालखरौदा-छपोरा सड़क निर्माण परियोजना में बाल श्रम कराए जाने का आरोप सामने आया है। मामला मिशन चौक से कलमी के बीच चल रहे निर्माण कार्य का है, जहां सड़क किनारे नाली निर्माण के दौरान नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराए जाने की बात कही जा रही है। आरोप है कि ठेकेदार द्वारा छोटे बच्चों को निर्माण कार्य में लगाया गया है। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है, तो यह बाल श्रम से जुड़े नियमों के उल्लंघन का गंभीर मामला होगा। स्थानीय लोगों ने इस मामले में लोक निर्माण विभाग (PWD) की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये की परियोजना में इस तरह का मामला सामने आने के बावजूद संबंधित अधिकारी और कर्मचारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। अब सवाल यह है कि निर्माण कार्य में नाबालिग बच्चों से मजदूरी क्यों कराई जा रही है और जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है? स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोप सही पाए जाने पर ठेकेदार सहित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल, मामले में संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।1
- हसौद में स्कूल निर्माण सामग्री चोरी करने वाले छय आरोपी गिरफ्तार, तीस सेटरिंग प्लेट बरामद। हसौद में स्कूल निर्माण सामग्री चोरी करने वाले छय आरोपी गिरफ्तार, तीस सेटरिंग प्लेट बरामद।1
- #Shastrarth_Ka_ShankhnadPart9 Sant RampalJi YtChannel देखना न भूलें शास्त्ररार्थ का शंखनाद 31 अक्टूबर शाम 7:30 बजे Sant Rampal Ji Maharaj YouTube Channel और साधना चैनल पर।1
- रायगढ़ जिले में 33 हजार से अधिक उपभोक्ताओं ने 3 साल से जमा नहीं किया बिजली बिल।1
- कोरबा में रफ्तार का कहर, सीसीटीवी कैमरे में क़ैद हादसे की घटना1
- कुपोषण मुक्त जिले की दिशा में विशेष स्वास्थ्य शिविर, 44 बच्चों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण सारंगढ़ बिलाईगढ़ को कुपोषण मुक्त जिला बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू के मार्गदर्शन में जिला अस्पताल सारंगढ़ में कुपोषित बच्चों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया गया। स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से हुए शिविर में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनकी जरूरत के अनुसार दवाएं और पोषण सामग्री उपलब्ध कराई गई। शिविर में कुल 44 बच्चों की जांच की गई। इनमें सारंगढ़ परियोजना के 35 और कोसीर परियोजना के 9 बच्चे शामिल रहे। बच्चों को कैल्शियम, जिंक, सिट्रीजिन, पैरासिटामोल, आयरन, एंजाइम और एल्बेंडाजोल सहित आवश्यक दवाएं वितरित की गईं। साथ ही प्रोटीन पाउडर तथा कैल्शियम और मल्टीविटामिन सिरप भी उपलब्ध कराया गया। कुपोषण से प्रभावित बच्चों के स्वास्थ्य की समय पर जांच और उन्हें आवश्यक उपचार एवं पोषण सहयोग उपलब्ध कराना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। शिविर में विभागीय अमले ने बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के साथ उनके उपचार और पोषण संबंधी जरूरतों पर ध्यान दिया। इस सफल आयोजन के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के योगदान की सराहना की गई। इसी क्रम में आगामी सप्ताह परियोजना भटगांव, बिलाईगढ़, लेन्ध्रा और बरमकेला में भी विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। शिविरों की तिथि स्वास्थ्य विभाग से समन्वय के बाद संबंधितों को सूचित की जाएगी। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी करने और आपसी समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।1