भोजपुर जिले के चरपोखरी प्रखंड के अंतर्गत आने वाले बरनी-इटौर नहर पथ की स्थिति अब बद से बदतर हो चुकी है। सैकड़ों गांवों को प्रखंड मुख्यालय से जोड़ने वाले इस मुख्य मार्ग पर आज हालात ऐसे हैं कि लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि चुनाव के समय बिहार सरकार ने विकास का दिखावा करने के लिए इस सड़क का निर्माण कार्य शुरू कराया था, लेकिन चुनाव खत्म होते ही काम ठप कर दिया गया। सड़क बनवाने के नाम पर खुदाई करके उसे उसी बदहाल स्थिति में छोड़ दिया गया, जिसके कारण अब यह सड़क लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी है। सड़क निर्माण की तय समय सीमा समाप्त होने के बावजूद कार्य पूरा नहीं किया गया है। बारिश होते ही सड़क की स्थिति और भयावह हो जाती है; जगह-जगह कीचड़ और गहरे गड्ढों के कारण आए दिन वाहन इसमें फंस जाते हैं और घंटों जाम लगा रहता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस रास्ते पर प्रतिदिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन प्रशासन पूरी तरह मौन साधे बैठा है। इस संबंध में जब कार्यपालक पदाधिकारी से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनका फोन बंद मिला, जो प्रशासनिक लापरवाही को साफ बयां करता है। इस बेहद विकट परिस्थिति में पंचायत समिति सदस्य अभिषेक यादव ने पहल करते हुए कई खतरनाक गड्ढों में ईंट के टुकड़े डलवाकर किसी तरह अस्थायी तौर पर आवागमन बहाल कराया है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि हर बारिश में घंटों जाम और गाड़ियों के कीचड़ में फंसने से भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बरनी-इटौर नहर पथ की यह बदहाली अब बिहार सरकार के विकास के दावों की पोल खोल रही है और सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर कब तक जनता इस बदहाल सड़क पर अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर रहेगी।
भोजपुर जिले के चरपोखरी प्रखंड के अंतर्गत आने वाले बरनी-इटौर नहर पथ की स्थिति अब बद से बदतर हो चुकी है। सैकड़ों गांवों को प्रखंड मुख्यालय से जोड़ने वाले इस मुख्य मार्ग पर आज हालात ऐसे हैं कि लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि चुनाव के समय बिहार सरकार ने विकास का दिखावा करने के लिए इस सड़क का निर्माण कार्य शुरू कराया था, लेकिन चुनाव खत्म होते ही काम ठप कर दिया गया। सड़क बनवाने के नाम पर खुदाई करके उसे उसी बदहाल स्थिति में छोड़ दिया गया, जिसके कारण अब यह सड़क लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी है। सड़क निर्माण की तय समय सीमा समाप्त होने के बावजूद कार्य पूरा नहीं किया गया है। बारिश होते ही सड़क की स्थिति और भयावह हो जाती है; जगह-जगह कीचड़ और गहरे गड्ढों के कारण आए दिन वाहन इसमें फंस जाते हैं और घंटों जाम लगा रहता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस रास्ते पर प्रतिदिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन प्रशासन पूरी तरह मौन साधे बैठा है। इस संबंध में जब कार्यपालक पदाधिकारी से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनका फोन बंद मिला, जो प्रशासनिक लापरवाही को साफ बयां करता है। इस बेहद विकट परिस्थिति में पंचायत समिति सदस्य अभिषेक यादव ने पहल करते हुए कई खतरनाक गड्ढों में ईंट के टुकड़े डलवाकर किसी तरह अस्थायी तौर पर आवागमन बहाल कराया है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि हर बारिश में घंटों जाम और गाड़ियों के कीचड़ में फंसने से भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बरनी-इटौर नहर पथ की यह बदहाली अब बिहार सरकार के विकास के दावों की पोल खोल रही है और सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर कब तक जनता इस बदहाल सड़क पर अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर रहेगी।
- गोरखपुर में पुलिस द्वारा पूर्व मंत्री मुकेश साहनी के काफिले को रोके जाने के बाद बिहार के भोजपुर जिले के पीरो में राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। रविवार की शाम करीब 6:00 बजे हुई इस घटना को लेकर इलाके के चौक-चौराहों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चाओं और तीखी बहस का दौर तेज हो गया है। घटना से नाराज मुकेश साहनी के समर्थकों का आरोप है कि दलितों और गरीबों की आवाज उठाने वाले नेता को निशाना बनाकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। समर्थक इस कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे महज एक प्रशासनिक कार्रवाई करार दे रहे हैं। इस मुद्दे पर पीरो में समर्थक और विरोधी आमने-सामने आ गए हैं और सियासी सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है।1
- बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर में बजरंग दल के सेवा सप्ताह के तहत निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया है।1
- Post by CHANDAN KUMAR1
- बिहार के भोजपुर में सर्वोदय हाई स्कूल के शिक्षक धीरज कुमार की एक बहुत अच्छी पहल सामने आई है, जहाँ स्कूल के बच्चे अपने गीत के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहे हैं। शिक्षक धीरज कुमार के इस प्रयास के तहत बच्चों द्वारा गाए गए इस सॉन्ग को देखने और सुनने की बात कही गई है।1
- बांकीपुर की जनता को अपने लिए कैसा उम्मीदवार चाहिए, यह फैसला अब खुद वहां की जनता को ही करना है। लोगों के बीच यह सवाल उठाया गया है कि वे अपने भविष्य के लिए किस तरह का उम्मीदवार चुनेंगे, क्योंकि इसका अंतिम निर्णय पूरी तरह से मतदाताओं के हाथ में है।1
- भोजपुर के आरा में भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है, जहां मामले की जांच कर रहे आयोग के समक्ष भरत तिवारी की भाभी सुमन देवी और घटना के दो प्रत्यक्षदर्शियों मंटू कमकर तथा सत्य नारायण चौधरी ने अपने बयान दर्ज कराए हैं। गवाहों की इस गवाही के बाद से इस पूरे मामले को लेकर नई चर्चाएं काफी तेज हो गई हैं। अब जांच आयोग इन दर्ज किए गए बयानों के साथ-साथ अन्य उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों का भी विस्तृत परीक्षण करेगा, जिसके बाद आयोग अपनी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई के संबंध में निर्णय लेगा। चूंकि यह मामला अभी न्यायिक जांच के अधीन है, इसलिए आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।1
- भोजपुर के आरा में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच के तहत सोमवार को बड़ी गवाही हुई। सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा के समक्ष बने न्यायिक जांच आयोग के सामने भरत भूषण तिवारी की भाभी सुमन देवी और सत्यनारायण चौधरी सहित दो लोगों ने अपने बयान दर्ज कराए। यह पूरी गवाही प्रक्रिया करीब 3 घंटे तक चली, जिसके मद्देनजर कार्यालय के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। इस सुनवाई के दौरान भरत भूषण तिवारी की भाभी सुमन देवी ने अपनी गवाही देते हुए मामले में फांसी की मांग की है। इस एनकाउंटर मामले में सुमन देवी और सत्यनारायण चौधरी से पहले भरत तिवारी के माता और पिता के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं।2
- भोजपुर जिले के चरपोखरी प्रखंड के अंतर्गत आने वाले बरनी-इटौर नहर पथ की स्थिति अब बद से बदतर हो चुकी है। सैकड़ों गांवों को प्रखंड मुख्यालय से जोड़ने वाले इस मुख्य मार्ग पर आज हालात ऐसे हैं कि लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि चुनाव के समय बिहार सरकार ने विकास का दिखावा करने के लिए इस सड़क का निर्माण कार्य शुरू कराया था, लेकिन चुनाव खत्म होते ही काम ठप कर दिया गया। सड़क बनवाने के नाम पर खुदाई करके उसे उसी बदहाल स्थिति में छोड़ दिया गया, जिसके कारण अब यह सड़क लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी है। सड़क निर्माण की तय समय सीमा समाप्त होने के बावजूद कार्य पूरा नहीं किया गया है। बारिश होते ही सड़क की स्थिति और भयावह हो जाती है; जगह-जगह कीचड़ और गहरे गड्ढों के कारण आए दिन वाहन इसमें फंस जाते हैं और घंटों जाम लगा रहता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस रास्ते पर प्रतिदिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन प्रशासन पूरी तरह मौन साधे बैठा है। इस संबंध में जब कार्यपालक पदाधिकारी से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनका फोन बंद मिला, जो प्रशासनिक लापरवाही को साफ बयां करता है। इस बेहद विकट परिस्थिति में पंचायत समिति सदस्य अभिषेक यादव ने पहल करते हुए कई खतरनाक गड्ढों में ईंट के टुकड़े डलवाकर किसी तरह अस्थायी तौर पर आवागमन बहाल कराया है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि हर बारिश में घंटों जाम और गाड़ियों के कीचड़ में फंसने से भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बरनी-इटौर नहर पथ की यह बदहाली अब बिहार सरकार के विकास के दावों की पोल खोल रही है और सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर कब तक जनता इस बदहाल सड़क पर अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर रहेगी।1