सिरमौर जिले के गिरीपार क्षेत्र में मौसम की बेरुखी ने सेब उत्पादन की आर्थिकी पर संकट खड़ा कर दिया है। राजगढ़ के रासू, मांदर, परघेल, पझोता, हाब्बन के साथ-साथ हरिपुरधार और नौहराधार क्षेत्रों में समय पर बारिश और बर्फबारी न होने से आगामी सेब सीजन में उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। बागवानों का कहना है कि यदि मौसम की यही स्थिति बनी रही तो सेब उत्पादन में भारी कमी आ सकती है, जिससे करोड़ों रुपये की आर्थिक हानि होने की संभावना है। सेब उत्पादक क्षेत्रों में चिलिंग आवर्स आमतौर पर 15 दिसंबर से शुरू हो जाते हैं। अच्छी और गुणवत्तापूर्ण सेब फसल के लिए 7 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान में 700 से 1600 घंटे के चिलिंग आवर्स की आवश्यकता होती है। लेकिन इस वर्ष अक्तूबर, नवंबर, दिसंबर और जनवरी की 20 तारीख तक क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी लगभग न के बराबर रही है। ऐसे में चिलिंग आवर्स पूरे हो पाना मुश्किल नजर आ रहा है। बागवानों के अनुसार, प्रदेश के सेब उत्पादक इलाकों में इन दिनों अधिकतम तापमान लगभग 10 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच चल रहा है, जबकि न्यूनतम तापमान में भी लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। चिलिंग आवर्स के लिए अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान का कम रहना बेहद जरूरी होता है। तापमान में यह असंतुलन सेब के पौधों की प्राकृतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सेब के पौधों को समय पर और पर्याप्त चिलिंग आवर्स नहीं मिलते हैं तो इसका सीधा असर फ्लावरिंग पर पड़ता है। ठंड के घंटे कम होने पर पौधों में जल्दी फूल आ जाते हैं, जो सेब की पैदावार के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। पर्याप्त चिलिंग आवर्स मिलने पर फ्लावरिंग देर से होती है, जिससे फल की गुणवत्ता बेहतर रहती है और उत्पादन भी संतुलित होता है। क्या कहते हैं विषय बाद विशेषज्ञ बागवानी विभाग राजगढ़ विनोद वोल्टा बाईट……………………
सिरमौर जिले के गिरीपार क्षेत्र में मौसम की बेरुखी ने सेब उत्पादन की आर्थिकी पर संकट खड़ा कर दिया है। राजगढ़ के रासू, मांदर, परघेल, पझोता, हाब्बन के साथ-साथ हरिपुरधार और नौहराधार क्षेत्रों में समय पर बारिश और बर्फबारी न होने से आगामी सेब सीजन में उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। बागवानों का कहना है कि यदि मौसम की यही स्थिति बनी रही तो सेब उत्पादन में भारी कमी आ सकती है, जिससे करोड़ों रुपये की आर्थिक हानि होने की संभावना है। सेब उत्पादक क्षेत्रों में चिलिंग आवर्स आमतौर पर 15 दिसंबर से शुरू हो जाते हैं। अच्छी और गुणवत्तापूर्ण सेब फसल के लिए 7 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान में 700 से 1600 घंटे के चिलिंग आवर्स की आवश्यकता होती है। लेकिन इस वर्ष अक्तूबर, नवंबर, दिसंबर और जनवरी की 20 तारीख तक क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी लगभग न के बराबर रही है। ऐसे में चिलिंग आवर्स पूरे
हो पाना मुश्किल नजर आ रहा है। बागवानों के अनुसार, प्रदेश के सेब उत्पादक इलाकों में इन दिनों अधिकतम तापमान लगभग 10 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच चल रहा है, जबकि न्यूनतम तापमान में भी लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है। चिलिंग आवर्स के लिए अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान का कम रहना बेहद जरूरी होता है। तापमान में यह असंतुलन सेब के पौधों की प्राकृतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सेब के पौधों को समय पर और पर्याप्त चिलिंग आवर्स नहीं मिलते हैं तो इसका सीधा असर फ्लावरिंग पर पड़ता है। ठंड के घंटे कम होने पर पौधों में जल्दी फूल आ जाते हैं, जो सेब की पैदावार के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। पर्याप्त चिलिंग आवर्स मिलने पर फ्लावरिंग देर से होती है, जिससे फल की गुणवत्ता बेहतर रहती है और उत्पादन भी संतुलित होता है। क्या कहते हैं विषय बाद विशेषज्ञ बागवानी विभाग राजगढ़ विनोद वोल्टा बाईट……………………
- पिंजौर कालका में आंधी तूफान से हुआ भारी नुकसान, कहीं पेड़ टूटे तो कहीं बिजली के पोल गिरे, कहीं पेड़ तारों पर गिरे, बिजली आपूर्ति गुल हुई, लोग परेशान।1
- 23/01/26 जनपद देहरादून चकराता 📍लोखंडी उत्तराखंड के चकराता क्षेत्र में स्थित लोखंडी में साल और सीजन की पहली बर्फबारी दर्ज की गई। बर्फ गिरने से इलाके में ठंड बढ़ गई है और पहाड़ों पर सफेद चादर बिछ गई। बर्फबारी के कारण सड़कों पर फिसलन देखी गई, जबकि पर्यटकों में खासा उत्साह है।1
- किन्नौर जिले के तरांडा के जवान शहीद जयकृष्ण का शव पहुंचा पैतृक गांव #kullutodaynews #SachKiAwaaz #MediaPower #HimachalNews #himachalkiawaaz #himachalpradesh #rampur #BreakingNews #shimla #kullu1
- Post by Kuldeep Singh1
- Post by Joginder Kumar San off Jay Kishan Thakur district Bilaspur1
- एक मासूम सा पागल सा दिखने वाला लड़का माता रानी के जागरण में क्या बवाल मचा देता है । गायकी का असली आनन्द देखिए इस वीडियो में!1
- बसंत पंचमी पर मौसम की सौगात: गिरीपार में साढ़े तीन महीने बाद टूटा ड्राई स्पेल, बारिश-बर्फबारी से किसानों में लौटी उम्मीद तेज हवाओं के साथ ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात, निचले क्षेत्रों में झमाझम बारिश | फसलों को मिली संजीवनी | तापमान में भारी गिरावट, जनजीवन प्रभावित सिरमौर जिले के समूचे गिरीपार क्षेत्र में बसंत पंचमी का पावन पर्व इस बार किसानों और बागवानों के लिए नई उमंग और उत्साह लेकर आया है। लगभग 110 दिनों के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार क्षेत्र में साढ़े तीन महीने से चला आ रहा ड्राई स्पेल टूट गया, जिससे कृषि और बागवानी क्षेत्र में राहत की लहर दौड़ गई है। सुबह चार बजे से बदला मौसम का मिजाज आज तड़के करीब सुबह चार बजे से ऊंचाई वाले इलाकों में तेज हवाओं के साथ हिमपात शुरू हुआ, जबकि निचले क्षेत्रों में लगातार वर्षा हो रही है। अचानक बदले मौसम और तेज तूफान ने लोगों को हैरान कर दिया है। कई स्थानों पर तेज हवाओं और बारिश-बर्फबारी के कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। सेब सहित बागवानी फसलों के लिए अमृत समान हरिपूरधार, नौहराधार, गहनोग, घोटाड़ी, ठंडीधार, बथाऊधार, बनालीधार, हाब्बन, ठारू देवठी मंझगाव सहित आसपास के क्षेत्रों में सुबह से लगातार हिमपात हो रहा है। वहीं अन्य निचले इलाकों में जारी बारिश सेब, नाशपाती, आडू, प्लम, खुमानी जैसी बागवानी फसलों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं मानी जा रही है। लंबे समय से नमी की कमी के कारण बागवानी पर मंडरा रहा संकट फिलहाल टलता नजर आ रहा है। खेतों में भी लौटी जान सिर्फ बागवानी ही नहीं, बल्कि लहसुन, मटर, आलू, गेहूं, जौ और सरसों जैसी रबी फसलों के लिए भी यह बारिश और बर्फबारी वरदान साबित हो रही है। साढ़े तीन महीने के लंबे सूखे के चलते कई फसलें तबाही के कगार पर पहुंच गई थीं, लेकिन अब खेतों में फिर से हरियाली लौटने की उम्मीद जगी है। तापमान में गिरावट, बिजली आपूर्ति बाधित बारिश और बर्फबारी के चलते क्षेत्र में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ठंड बढ़ने से लोगों ने फिर से गर्म कपड़ों का सहारा ले लिया है। वहीं, मौसम की मार के चलते आज सुबह से ही क्षेत्र में बार-बार बिजली कट लग रहे हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों-बागवानों के चेहरे खिले बसंत पंचमी के दिन मिली इस प्राकृतिक सौगात से किसानों और बागवानों के चेहरों पर रौनक लौट आई है। लंबे समय बाद हुई वर्षा और बर्फबारी ने न सिर्फ खेतों और बागों को जीवनदान दिया है, बल्कि आने वाले कृषि और बागवानी सीजन को लेकर उम्मीदें भी मजबूत कर दी हैं। अगर सड़कों की बात करें तो राजगढ़ हाब्बन सड़क पर हाब्बन पालू तथा राजगढ़ नौहराधार सड़क पर चुरवाधार के पास सड़क पर हिमपात के कारण वाहन फिसल रहे हैं मौसम के तेवर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है । और लोगों से अपील कर रहा है कि वे अति आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकले और फिसलन वाले स्थानों पर अपने वाहन ना लें जाए ।4
- Distrtic Uttrakhand जिला रुद्रप्रयाग आज दिनांक 23/01/26📍 केदारनाथ मंदिर मे सीजन की पहली बर्फबारी मंदिर के चारों ओर बर्फ की सफेद चादर बिछी1
- 2026 की पहली और 3 महीने के लंबे अंतराल के बाद आई बारिश और बर्फबारी से बागबानों के चेहरों पर लौट आई रौनक #kullutodaynews #SachKiAwaaz #MediaPower #HimachalNews #himachalkiawaaz #himachalpradesh #rampur #BreakingNews #shimla #kullu1