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उमरिया जिले से गुजर रहे नेशनल हाईवे-43 पर निर्माणाधीन चार ओवरब्रिजों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। तिरुपति बिल्डकॉन कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (टीबीसीएल) को निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा न करने के कारण नॉन-परफॉर्मर घोषित किया गया था। हालाँकि, कंपनी की मशीनें और वाहन आज भी निर्माण स्थलों पर धड़ल्ले से काम करते दिखाई दे रहे हैं, जिससे यह चर्चा तेज़ हो गई है कि आखिर यह कार्रवाई थी या केवल जनता के गुस्से को शांत करने के लिए किया गया एक प्रशासनिक दिखावा। एमपी आरडीसी ने पहले टीबीसीएल को नॉन-परफॉर्मर घोषित करते हुए दावा किया था कि कंपनी ने समय पर ओवरब्रिज निर्माण पूरा नहीं किया, जिससे परियोजना पिछड़ती रही और आम लोगों को भारी परेशानी हुई। इस कार्रवाई के तहत कंपनी को दो वर्षों तक राज्य और केंद्र सरकार की नई निर्माण परियोजनाओं में भाग लेने से वंचित कर दिया गया था। लेकिन ज़मीनी तस्वीर विभागीय दावों से बिल्कुल अलग है, जहाँ निर्माण स्थलों पर आज भी वही मशीनें, वही संसाधन और काम की गति लगभग वैसी ही बनी हुई है, जैसी कार्रवाई से पहले थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में इतनी बड़ी कार्रवाई हुई थी तो उसके परिणाम ज़मीन पर क्यों नहीं दिख रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी घुनघुटी और आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिल रही है, जहाँ सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए सफर चुनौती भरा है। सड़क पर बने गहरे गड्ढे और अधूरे निर्माण कार्य के कारण आए दिन लोग फिसलकर गिर रहे हैं और कई वाहन चालक चोटिल हो चुके हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे ओवरब्रिज निर्माण के नाम पर वर्षों से धूल, गड्ढे और जाम झेल रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियां केवल आश्वासन देने में व्यस्त हैं। उनका आरोप है कि सवाल उठने पर कार्रवाई की खबरें सामने आ जाती हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति जस की तस बनी रहती है। इस मामले पर एमपी आरडीसी शहडोल के संभागीय प्रबंधक अवधेश कुमार स्वर्णकार ने स्पष्ट किया कि मूल ठेका जेवीआर कंपनी के पास था, जिसने काम बैक-टू-बैक व्यवस्था के तहत टीबीसीएल को सौंपा था। कार्य में देरी और संतोषजनक प्रगति न होने के कारण टीबीसीएल को नॉन-परफॉर्मर घोषित किया गया। जब उनसे पूछा गया कि नॉन-परफॉर्मर घोषित होने के बावजूद टीबीसीएल की मशीनें काम कैसे कर रही हैं, तो उन्होंने बताया कि कंपनी का नॉन-परफॉर्मर होना एक सरकारी कार्रवाई है और यदि उसकी मशीनें या संसाधन किराए पर लिए गए हैं, तो यह संबंधित कंपनियों के बीच का मामला है। यह जवाब अपने आप में कई सवाल छोड़ जाता है, क्योंकि यदि कार्रवाई के बाद भी वही संसाधन, वही मशीनें और वही व्यवस्था बनी रहती है, तो आम जनता यह कैसे मानेगी कि वास्तव में कोई सख्त कदम उठाया गया है। लोगों का कहना है कि कार्रवाई का मकसद केवल दंड देना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाना भी होता है, जो धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। विभाग खुद भी काम की गति धीमी होने की बात स्वीकार कर रहा है, हालाँकि अधिकारियों का तर्क है कि कुछ तकनीकी कार्य ऐसे होते हैं जिनकी प्रगति तुरंत दिखाई नहीं देती। लेकिन आम नागरिकों का कहना है कि उन्हें तकनीकी शब्दावली से कोई सरोकार नहीं है; वे केवल इतना जानते हैं कि वर्षों से अधूरे पड़े ओवरब्रिज, खराब सड़कें और रोज़ाना बढ़ती दुर्घटनाओं का खतरा उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या टीबीसीएल को नॉन-परफॉर्मर घोषित करना वास्तव में एक कठोर प्रशासनिक कार्रवाई थी या फिर यह केवल कागज़ों तक सीमित एक औपचारिकता साबित हो रही है, क्योंकि यदि कार्रवाई के बाद भी मैदान में सब कुछ पहले जैसा ही चलता रहे, तो जनता के मन में संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। एनएच-43 जिले की सबसे महत्वपूर्ण सड़कों में से एक है, और इस मार्ग पर अधूरे ओवरब्रिज और बदहाल सड़कें केवल विकास कार्यों की धीमी रफ्तार का उदाहरण नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल भी बन चुकी हैं।

5 hrs ago
user_Neeraj Singh Raghuvanshi
Neeraj Singh Raghuvanshi
बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
5 hrs ago
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उमरिया जिले से गुजर रहे नेशनल हाईवे-43 पर निर्माणाधीन चार ओवरब्रिजों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। तिरुपति बिल्डकॉन कंस्ट्रक्शन लिमिटेड (टीबीसीएल) को निर्माण कार्य में भारी लापरवाही और निर्धारित समय सीमा के भीतर काम पूरा न करने के कारण नॉन-परफॉर्मर घोषित किया गया था। हालाँकि, कंपनी की मशीनें और वाहन आज भी निर्माण स्थलों पर धड़ल्ले से काम करते दिखाई दे रहे हैं, जिससे यह चर्चा तेज़ हो गई है कि आखिर यह कार्रवाई थी या केवल जनता के गुस्से को शांत करने के लिए किया गया एक प्रशासनिक दिखावा। एमपी आरडीसी ने पहले टीबीसीएल को नॉन-परफॉर्मर घोषित करते हुए दावा किया था कि कंपनी ने समय पर ओवरब्रिज निर्माण पूरा नहीं किया, जिससे परियोजना पिछड़ती रही और आम लोगों को भारी परेशानी हुई। इस कार्रवाई के तहत कंपनी को दो वर्षों तक राज्य और केंद्र सरकार की नई निर्माण परियोजनाओं में भाग लेने से वंचित कर दिया गया था। लेकिन ज़मीनी तस्वीर विभागीय दावों से बिल्कुल अलग है, जहाँ निर्माण स्थलों पर आज भी वही मशीनें, वही संसाधन और काम की गति लगभग वैसी ही बनी हुई है, जैसी कार्रवाई से पहले थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में इतनी बड़ी कार्रवाई हुई थी तो उसके परिणाम ज़मीन पर क्यों नहीं दिख रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी घुनघुटी और आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिल रही है, जहाँ सड़क की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए सफर चुनौती भरा है। सड़क पर बने गहरे गड्ढे और अधूरे निर्माण कार्य के कारण आए दिन लोग फिसलकर गिर रहे हैं और कई वाहन चालक चोटिल हो चुके हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वे ओवरब्रिज निर्माण के नाम पर वर्षों से धूल, गड्ढे और जाम झेल रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार एजेंसियां केवल आश्वासन देने में व्यस्त हैं। उनका आरोप है कि सवाल उठने पर कार्रवाई की खबरें सामने आ जाती हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति जस की तस बनी रहती है। इस मामले पर एमपी आरडीसी शहडोल के संभागीय

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प्रबंधक अवधेश कुमार स्वर्णकार ने स्पष्ट किया कि मूल ठेका जेवीआर कंपनी के पास था, जिसने काम बैक-टू-बैक व्यवस्था के तहत टीबीसीएल को सौंपा था। कार्य में देरी और संतोषजनक प्रगति न होने के कारण टीबीसीएल को नॉन-परफॉर्मर घोषित किया गया। जब उनसे पूछा गया कि नॉन-परफॉर्मर घोषित होने के बावजूद टीबीसीएल की मशीनें काम कैसे कर रही हैं, तो उन्होंने बताया कि कंपनी का नॉन-परफॉर्मर होना एक सरकारी कार्रवाई है और यदि उसकी मशीनें या संसाधन किराए पर लिए गए हैं, तो यह संबंधित कंपनियों के बीच का मामला है। यह जवाब अपने आप में कई सवाल छोड़ जाता है, क्योंकि यदि कार्रवाई के बाद भी वही संसाधन, वही मशीनें और वही व्यवस्था बनी रहती है, तो आम जनता यह कैसे मानेगी कि वास्तव में कोई सख्त कदम उठाया गया है। लोगों का कहना है कि कार्रवाई का मकसद केवल दंड देना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाना भी होता है, जो धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। विभाग खुद भी काम की गति धीमी होने की बात स्वीकार कर रहा है, हालाँकि अधिकारियों का तर्क है कि कुछ तकनीकी कार्य ऐसे होते हैं जिनकी प्रगति तुरंत दिखाई नहीं देती। लेकिन आम नागरिकों का कहना है कि उन्हें तकनीकी शब्दावली से कोई सरोकार नहीं है; वे केवल इतना जानते हैं कि वर्षों से अधूरे पड़े ओवरब्रिज, खराब सड़कें और रोज़ाना बढ़ती दुर्घटनाओं का खतरा उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या टीबीसीएल को नॉन-परफॉर्मर घोषित करना वास्तव में एक कठोर प्रशासनिक कार्रवाई थी या फिर यह केवल कागज़ों तक सीमित एक औपचारिकता साबित हो रही है, क्योंकि यदि कार्रवाई के बाद भी मैदान में सब कुछ पहले जैसा ही चलता रहे, तो जनता के मन में संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। एनएच-43 जिले की सबसे महत्वपूर्ण सड़कों में से एक है, और इस मार्ग पर अधूरे ओवरब्रिज और बदहाल सड़कें केवल विकास कार्यों की धीमी रफ्तार का उदाहरण नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल भी बन चुकी हैं।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • उमरिया जिले के घुलघुली क्षेत्र में आज, 21 जून 2026 को, लगातार दूसरे दिन तेज आंधी-तूफान के साथ झमाझम बारिश दर्ज की गई है। इस बारिश के चलते आम जनता को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत मिली है, वहीं खेतों में भी रौनक लौट आई है। ग्रामीण इलाकों में खेती-किसानी की गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है, जिससे पूरे क्षेत्र के किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं और उनमें भारी उत्साह की लहर देखी जा रही है।
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    उमरिया जिले के घुलघुली क्षेत्र में आज, 21 जून 2026 को, लगातार दूसरे दिन तेज आंधी-तूफान के साथ झमाझम बारिश दर्ज की गई है। इस बारिश के चलते आम जनता को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत मिली है, वहीं खेतों में भी रौनक लौट आई है। ग्रामीण इलाकों में खेती-किसानी की गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है, जिससे पूरे क्षेत्र के किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं और उनमें भारी उत्साह की लहर देखी जा रही है।
    user_Neeraj Singh Raghuvanshi
    Neeraj Singh Raghuvanshi
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने योग के महत्व पर प्रकाश डाला है। अपने संदेश में, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि योग सभी को जोड़ने और साथ लाने का कार्य करता है।
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    अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने योग के महत्व पर प्रकाश डाला है। अपने संदेश में, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि योग सभी को जोड़ने और साथ लाने का कार्य करता है।
    user_जिला ब्यूरो चीफ/बाल्मीकि यादव
    जिला ब्यूरो चीफ/बाल्मीकि यादव
    Carpenter बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • नौरोजाबाद नगर परिषद में उस समय माहौल गरमा गया जब जनप्रतिनिधियों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की कार्यशैली को लेकर खुलकर नाराजगी जताई। पार्षदों ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए सीएमओ पर गंभीर आरोप लगाए। पार्षदों का आरोप है कि सीएमओ नियमित रूप से समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते और कई बार कार्यालय से भी अनुपस्थित रहते हैं, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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    नौरोजाबाद नगर परिषद में उस समय माहौल गरमा गया जब जनप्रतिनिधियों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की कार्यशैली को लेकर खुलकर नाराजगी जताई। पार्षदों ने मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए सीएमओ पर गंभीर आरोप लगाए।

पार्षदों का आरोप है कि सीएमओ नियमित रूप से समय पर कार्यालय नहीं पहुंचते और कई बार कार्यालय से भी अनुपस्थित रहते हैं, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
    user_पत्रकारिता
    पत्रकारिता
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • शहडोल में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 'स्वस्थ आयु के लिए योग' थीम के तहत धूमधाम से आयोजित किया गया। इस गरिमामय कार्यक्रम में सांसद ने मुख्य अतिथि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
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    शहडोल में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 'स्वस्थ आयु के लिए योग' थीम के तहत धूमधाम से आयोजित किया गया। इस गरिमामय कार्यक्रम में सांसद ने मुख्य अतिथि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
    user_Angad Tiwari
    Angad Tiwari
    पत्रकार जयसिंहनगर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • सोशल मीडिया पर भगवान श्रीराम के विरुद्ध आपत्तिजनक चित्र और अभद्र टिप्पणी युक्त पोस्ट करने के मामले में प्रबोध पांडे के खिलाफ थाना में एक शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ताओं ने बताया है कि इस पोस्ट से करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तथा समाज में वैमनस्य एवं तनाव की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी व्यक्ति के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई किए जाने की मांग की है। शिकायत दर्ज कराते समय सिल्लू रजक, अविनाश मिश्रा, धीरू मिश्रा, मुकेश दुवेदी, विकाश जोतवानी, अमन यादव, देव केवट, मोनु सेन, अमित धुर्वे, शनि रिशु पनिका, नितिन सूरी, रज्जन रजक एवं अन्य लोग उपस्थित थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी धर्म, देवी-देवता अथवा धार्मिक प्रतीकों का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता। इन सभी ने कहा कि सभी धर्मों एवं आस्थाओं का सम्मान बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। प्रशासन से यह भी मांग की गई है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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    सोशल मीडिया पर भगवान श्रीराम के विरुद्ध आपत्तिजनक चित्र और अभद्र टिप्पणी युक्त पोस्ट करने के मामले में प्रबोध पांडे के खिलाफ थाना में एक शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ताओं ने बताया है कि इस पोस्ट से करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तथा समाज में वैमनस्य एवं तनाव की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी व्यक्ति के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई किए जाने की मांग की है।

शिकायत दर्ज कराते समय सिल्लू रजक, अविनाश मिश्रा, धीरू मिश्रा, मुकेश दुवेदी, विकाश जोतवानी, अमन यादव, देव केवट, मोनु सेन, अमित धुर्वे, शनि रिशु पनिका, नितिन सूरी, रज्जन रजक एवं अन्य लोग उपस्थित थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी भी धर्म, देवी-देवता अथवा धार्मिक प्रतीकों का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता। इन सभी ने कहा कि सभी धर्मों एवं आस्थाओं का सम्मान बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

प्रशासन से यह भी मांग की गई है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
    user_पार्षद सिल्लू रजक
    पार्षद सिल्लू रजक
    Animal Protection Organisation सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • Post by पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
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    Post by पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    user_पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    Astrologer सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • बड़वारा क्षेत्र की पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि वे क्षेत्र के दलित और आदिवासी बच्चों को नशे की आग में धकेल रहे हैं। आरोप है कि लगातार विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, पुलिस और प्रशासन शराब माफियाओं पर लगाम लगाने में पूरी तरह असमर्थ हैं। इस स्थिति पर यह सवाल भी उठाया गया है कि आखिर किसके इशारे पर यह सब हो रहा है।
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    बड़वारा क्षेत्र की पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि वे क्षेत्र के दलित और आदिवासी बच्चों को नशे की आग में धकेल रहे हैं। आरोप है कि लगातार विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, पुलिस और प्रशासन शराब माफियाओं पर लगाम लगाने में पूरी तरह असमर्थ हैं। इस स्थिति पर यह सवाल भी उठाया गया है कि आखिर किसके इशारे पर यह सब हो रहा है।
    user_Jay Suryavanshi
    Jay Suryavanshi
    बड़वारा, कटनी, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • कुछ लोगों द्वारा भरत तिवारी के एनकाउंटर पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन पर सवाल उठाने के बीच, उनकी कहानी रोंगटे खड़े कर देने वाली है, जो किसी फिल्म की पटकथा सी लगती है। एक गांव, जो गंगा की बाढ़ में समा गया था, वहां के अधिकतर पिछड़े और दलित आबादी वाले लोगों ने दोबारा बसना शुरू किया। भरत तिवारी ने इन लोगों की बुनियादी जरूरतों के लिए आवाज उठाना शुरू किया, जिसमें नई बस्ती तक सड़क, बिजली, चापाकल और राशन जैसी सुविधाएं शामिल थीं। जिस जगह पर लोग बसे थे, वह काफी नीचे थी और पानी भरने की समस्या थी, जिसके लिए भरत तिवारी लगातार अधिकारियों से मिट्टी भराव की गुहार लगा रहे थे ताकि लोगों को बाढ़ से बचाया जा सके। पिछले एक साल से वह स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों से ज्ञापन, बातचीत, दबाव और विरोध प्रदर्शन सहित सभी माध्यमों से लगातार प्रयास कर रहे थे। धीरे-धीरे, प्रशासन ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान करना शुरू किया, जिससे वह व्यवस्था से निराश होने लगे और बाद में उन्हें 'मानसिक विक्षिप्त' करार दिया गया। भरत तिवारी को एक सच्चा हिन्दुस्तानी, देशभक्त और राष्ट्रवादी बताया गया, जो जनता के लिए काम करता था और देश से प्रेम करता था। लेकिन जब वह व्यवस्था से हार गया, और "काले अंग्रेजों वाले सिस्टम" ने उसे मजबूर कर दिया, तो इस नौजवान को लगा कि "बहरों को सुनाने के लिए धमाके की जरूरत है।" उसने अपने गले का महावीरी बेचकर हथियार खरीदा और पुलिस वालों को इस बात का आश्वासन देने के लिए मजबूर करने की कोशिश की कि वे झूठे वादे नहीं करेंगे और लोगों का काम पूरा करेंगे। पुलिस ने पहले आश्वासन दिया कि हथियार डालने पर उसके वादे पूरे किए जाएंगे। हालांकि, जैसे ही भरत तिवारी ने हथियार डाला, उन्हें गोली मार दी गई। भरत तिवारी को एक क्रांतिकारी बताया गया है, जिसके अंतिम संस्कार में उमड़ी भारी भीड़ का वीडियो और उन लोगों की बातें, जिनके लिए उन्होंने काम किया, उन्हें 'भगवान' मानती हैं। यह दावा किया जा रहा है कि एनकाउंटर वैसे भी कानूनी रास्ता नहीं है, और एक ऐसे समाजसेवी नौजवान का एनकाउंटर, जिसका कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं था, जो व्यवस्था से निराश होकर भटक गया और जिसने सरेंडर भी कर दिया था, "एक सरकारी हत्या" है।
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    कुछ लोगों द्वारा भरत तिवारी के एनकाउंटर पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन पर सवाल उठाने के बीच, उनकी कहानी रोंगटे खड़े कर देने वाली है, जो किसी फिल्म की पटकथा सी लगती है। एक गांव, जो गंगा की बाढ़ में समा गया था, वहां के अधिकतर पिछड़े और दलित आबादी वाले लोगों ने दोबारा बसना शुरू किया। भरत तिवारी ने इन लोगों की बुनियादी जरूरतों के लिए आवाज उठाना शुरू किया, जिसमें नई बस्ती तक सड़क, बिजली, चापाकल और राशन जैसी सुविधाएं शामिल थीं। जिस जगह पर लोग बसे थे, वह काफी नीचे थी और पानी भरने की समस्या थी, जिसके लिए भरत तिवारी लगातार अधिकारियों से मिट्टी भराव की गुहार लगा रहे थे ताकि लोगों को बाढ़ से बचाया जा सके। पिछले एक साल से वह स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों से ज्ञापन, बातचीत, दबाव और विरोध प्रदर्शन सहित सभी माध्यमों से लगातार प्रयास कर रहे थे।

धीरे-धीरे, प्रशासन ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान करना शुरू किया, जिससे वह व्यवस्था से निराश होने लगे और बाद में उन्हें 'मानसिक विक्षिप्त' करार दिया गया। भरत तिवारी को एक सच्चा हिन्दुस्तानी, देशभक्त और राष्ट्रवादी बताया गया, जो जनता के लिए काम करता था और देश से प्रेम करता था। लेकिन जब वह व्यवस्था से हार गया, और "काले अंग्रेजों वाले सिस्टम" ने उसे मजबूर कर दिया, तो इस नौजवान को लगा कि "बहरों को सुनाने के लिए धमाके की जरूरत है।" उसने अपने गले का महावीरी बेचकर हथियार खरीदा और पुलिस वालों को इस बात का आश्वासन देने के लिए मजबूर करने की कोशिश की कि वे झूठे वादे नहीं करेंगे और लोगों का काम पूरा करेंगे।

पुलिस ने पहले आश्वासन दिया कि हथियार डालने पर उसके वादे पूरे किए जाएंगे। हालांकि, जैसे ही भरत तिवारी ने हथियार डाला, उन्हें गोली मार दी गई। भरत तिवारी को एक क्रांतिकारी बताया गया है, जिसके अंतिम संस्कार में उमड़ी भारी भीड़ का वीडियो और उन लोगों की बातें, जिनके लिए उन्होंने काम किया, उन्हें 'भगवान' मानती हैं। यह दावा किया जा रहा है कि एनकाउंटर वैसे भी कानूनी रास्ता नहीं है, और एक ऐसे समाजसेवी नौजवान का एनकाउंटर, जिसका कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं था, जो व्यवस्था से निराश होकर भटक गया और जिसने सरेंडर भी कर दिया था, "एक सरकारी हत्या" है।
    user_पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    Astrologer सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
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