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जिला बांदा स्मार्ट मीटर हटाओ धरना प्रदर्शन में गूंजे बिजली विभाग हाय हाय के नारे जिस धरना प्रदर्शन में पांच पांच साल के बच्चे महिलाएं एवं वरिष्ठ नागरिक मौजूद है वहीं जिला अधिकारी बांदा को स्मार्ट मीटर को बदलने व विधुत विभाग की खुलेआम लूट के संबंध में प्रार्थना पत्र दिया जिसमें जनता का कहना है कि बलखंडी नाका पुलिस चौकी निवासी है कुश महीनों पहले विधुत विभाग के कर्मचारियों द्वारा जबरन गरीब और मजदूर लोगों के घर में लगा दिय पहले जोन बिजली बिल तीन सो से चार सो आता था अब वहीं बिल 15 दिन में सोलह सो से अठारह सो तक आता है इसी कारण स्मार्ट मीटर हटकर पुराने मीटर लगने चाहिए
Ashok kumar News repoter
जिला बांदा स्मार्ट मीटर हटाओ धरना प्रदर्शन में गूंजे बिजली विभाग हाय हाय के नारे जिस धरना प्रदर्शन में पांच पांच साल के बच्चे महिलाएं एवं वरिष्ठ नागरिक मौजूद है वहीं जिला अधिकारी बांदा को स्मार्ट मीटर को बदलने व विधुत विभाग की खुलेआम लूट के संबंध में प्रार्थना पत्र दिया जिसमें जनता का कहना है कि बलखंडी नाका पुलिस चौकी निवासी है कुश महीनों पहले विधुत विभाग के कर्मचारियों द्वारा जबरन गरीब और मजदूर लोगों के घर में लगा दिय पहले जोन बिजली बिल तीन सो से चार सो आता था अब वहीं बिल 15 दिन में सोलह सो से अठारह सो तक आता है इसी कारण स्मार्ट मीटर हटकर पुराने मीटर लगने चाहिए
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- आरपीएफ की लापरवाही से महिला यात्री की दर्दनाक मौत, ट्रेन से गिरकर सरोज की मौके पर ही गई जान स्टेशन पर घंटों तड़पती रही महिला, आरपीएफ नदारद ट्रेन में चढ़ते समय पैर फिसलने से हुआ हादसा, ट्रेन की चपेट में आने से महिला का हाथ भी कटा, अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया, शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर पुलिस जांच में जुटी महोबा जंक्शन रेलवे स्टेशन का मामला1
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- हमीरपुर के मौदहा में 14 साल की बच्ची का अपहरण का मामला सामने आया है। गांव के ही दो युवकों पर आरोप है कि उन्होंने बच्ची को बहला-फुसलाकर ले गए। पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में ले लिया है और दूसरे की तलाश में दबिश दी जा रही है। बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया गया है और मेडिकल जांच के लिए भेजा गया है ¹। पुलिस अधीक्षक शुभम पटेल ने बताया कि दोनों आरोपी सुमित व सोमेश घटना को अंजाम देने से एक दिन पूर्व घर से निकले थे। जब दो दिन तक घर नहीं लौटे तो परिजनों ने इस घटना के दूसरे दिन पास के ही थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और बच्ची को बरामद कर लिया ²।1
- बांदा जनपद के बिसंडा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आया वायरल वीडियो केवल एक चौंकाने वाली घटना नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की जमीनी सच्चाई का आईना है। जिस अस्पताल में मरीजों को राहत, सेवा और संवेदनशीलता मिलनी चाहिए, वहीं मेडिकल स्टाफ का चेम्बर में बैठकर शराब पार्टी करना न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि यह अपने कर्तव्य और समाज के विश्वास के साथ खुला खिलवाड़ है।विडंबना यह है कि जहां मरीज इलाज के लिए दर-दर भटकते हैं, वहीं उसी परिसर में जिम्मेदार लोग बेफिक्री से जाम छलका रहे हैं। इससे भी अधिक गंभीर बात यह है कि संबंधित कर्मचारी ने स्वयं इस घटना का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया—मानो यह कोई उपलब्धि हो। यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि सिस्टम में जवाबदेही और भय का अभाव किस हद तक गहराई तक पैठ चुका है।वीडियो के सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) द्वारा कर्मचारी को निलंबित कर जांच के आदेश देना एक आवश्यक कदम जरूर है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। सवाल उठता है कि क्या यह कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी, या वास्तव में इससे व्यवस्था में सुधार की कोई ठोस पहल होगी? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का परिणाम है। आरोप यह भी हैं कि कई डॉक्टर निजी नर्सिंग होम पर अधिक ध्यान देते हैं, जबकि सरकारी अस्पतालों में उनकी उपस्थिति और जिम्मेदारी गौण हो जाती है। यह स्थिति न केवल गरीब और जरूरतमंद मरीजों के अधिकारों का हनन है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को खोखला करने वाली प्रवृत्ति भी है। सरकार भले ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे करती रहे, लेकिन इस तरह की घटनाएं उन दावों की सच्चाई को उजागर कर देती हैं। यह मामला किसी एक कर्मचारी की गलती भर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में व्याप्त ढीलापन, लापरवाही और जवाबदेही की कमी का प्रमाण है।अब असली परीक्षा इस बात की है कि जांच कितनी निष्पक्ष होती है और क्या दोषियों पर ऐसी कार्रवाई होती है, जो भविष्य में किसी को भी इस तरह की हरकत करने से पहले सोचने पर मजबूर कर दे।बाइट – स्थानीय ग्रामीण: “हम लोग इलाज कराने आते हैं, लेकिन यहां स्टाफ खुद ही शराब पीता है। ऐसे में मरीजों का क्या होगा? सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”1
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