भारत के प्रसिद्ध शिक्षक, यूट्यूबर और मोटिवेशनल वक्ता खान सर अपने सरल, रोचक और हास्यपूर्ण पढ़ाने के अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों विद्यार्थियों को कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई है। उनका शिक्षण संस्थान और ऑनलाइन कक्षाएँ विशेष रूप से सामान्य ज्ञान, करंट अफेयर्स, इतिहास, भूगोल तथा अन्य विषयों के लिए लोकप्रिय हैं। खान सर विद्यार्थियों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि अनुशासन, मेहनत और देशभक्ति का संदेश भी देते हैं। उनकी वीडियो भारत के युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं और उन्हें व्यापक सम्मान प्राप्त है। हालांकि, कुछ वर्गों में यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या खान सर का कम पैसों में पढ़ाना गलत है। इसी के साथ यह प्रश्न भी पूछा गया है कि क्या उनका कम पैसों में इलाज करना गलत है। इस पूरे मामले पर पाठकों से अपनी राय साझा करने और टिप्पणी में यह बताने का आग्रह किया गया है कि क्या सच में खान सर ने कोई गलत काम किया है।
भारत के प्रसिद्ध शिक्षक, यूट्यूबर और मोटिवेशनल वक्ता खान सर अपने सरल, रोचक और हास्यपूर्ण पढ़ाने के अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों विद्यार्थियों को कम खर्च में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई है। उनका शिक्षण संस्थान और ऑनलाइन कक्षाएँ विशेष रूप से सामान्य ज्ञान, करंट अफेयर्स, इतिहास, भूगोल तथा अन्य विषयों के लिए लोकप्रिय हैं। खान सर विद्यार्थियों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि अनुशासन, मेहनत और देशभक्ति का संदेश भी देते हैं। उनकी वीडियो भारत के युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं और उन्हें व्यापक सम्मान प्राप्त है। हालांकि, कुछ वर्गों में यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या खान सर का कम पैसों में पढ़ाना गलत है। इसी के साथ यह प्रश्न भी पूछा गया है कि क्या उनका कम पैसों में इलाज करना गलत है। इस पूरे मामले पर पाठकों से अपनी राय साझा करने और टिप्पणी में यह बताने का आग्रह किया गया है कि क्या सच में खान सर ने कोई गलत काम किया है।
- मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एनएचएम संविदा कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे इन स्वास्थ्य कर्मियों ने, जिनमें शाजापुर के संविदा स्वास्थ्य कर्मी भी शामिल हैं, अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए एक मार्मिक रास्ता अपनाया है। मंगलवार, 9 जून 2026 को दोपहर 12.51 बजे, उन्होंने अपने खून से एक भावुक पत्र लिखकर प्रदेश के मुख्यमंत्री से अपनी सेवाओं के नियमितीकरण की पुरजोर मांग की। इस पत्र में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि 'संविदा कर्मी का निवेदन, सभी कर्मचारियों को नियमित किया जाए।' कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कोरोना जैसी भीषण महामारी के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर हजारों जिंदगियां बचाईं और प्रदेश की सेवा में अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे, जब आम जनता घरों में थी। अस्पतालों, जांच केंद्रों और टीकाकरण केंद्रों पर 24 घंटे लगातार ड्यूटी देकर इन 'कोरोना योद्धाओं' ने हजारों मरीजों को मौत के मुंह से निकाला था। हालांकि, महामारी का दौर बीत जाने के बाद उन्हें लग रहा है कि सरकार उनके त्याग और बलिदान को भूल गई है, जिसके चलते वे अब असुरक्षा महसूस कर रहे हैं। संविदा कर्मियों का आरोप है कि वर्षों तक स्वास्थ्य विभाग में निष्ठावान सेवा देने के बावजूद उनके भविष्य पर अनिश्चितता की तलवार लटकी हुई है। समान कार्य करने के बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों की तुलना में बहुत कम वेतन मिलता है, और लगातार छंटनी का डर तथा भविष्य की चिंता ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने इस कदम को कर्मचारियों की घोर हताशा का परिणाम बताया है। संघ ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि स्वास्थ्य सेवाओं को अनवरत चलाने वाले इन कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित किया जाए और उन्हें तत्काल प्रभाव से नियमित कर उनका जायज हक दिया जाए, ताकि उन्हें भविष्य में ऐसे कदम उठाने पर मजबूर न होना पड़े।2
- Post by मंगल भिलाला1
- मोहन बड़ोदिया के ग्राम मोहना के किसान सुरेश ईटावदिया ने बदलते समय के साथ खेती के आधुनिक तौर-तरीकों को अपनाकर एक मिसाल कायम की है। उन्होंने यूट्यूब के माध्यम से उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी हासिल कर गर्मी के मौसम में भिंडी की खेती की है, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है। यह दर्शाता है कि अब किसान केवल पारंपरिक अनुभवों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि डिजिटल माध्यमों और आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। किसान सुरेश ईटावदिया ने बताया कि जहाँ क्षेत्र के अधिकांश किसान पारंपरिक फसलें लगाते हैं, वहीं उन्होंने कुछ अलग करने का निर्णय लिया। यूट्यूब पर कृषि विशेषज्ञों और सफल किसानों के वीडियो देखकर उन्होंने गर्मी में भिंडी की खेती की योजना बनाई। इन वीडियो से उन्हें बीज चयन, खेत की तैयारी, सिंचाई प्रबंधन, उर्वरक उपयोग और रोग-कीट नियंत्रण जैसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिलीं, जिन्हें उन्होंने अपने खेत में सफलतापूर्वक लागू किया। उन्होंने भिंडी को कम समय में तैयार होने वाली नकदी फसल बताया, जिसकी बाज़ार में पूरे वर्ष अच्छी माँग बनी रहती है, और गर्मियों में इसकी अच्छी गुणवत्ता के बेहतर दाम भी मिलते हैं। वर्तमान में सुरेश ईटावदिया प्रतिदिन अपने खेत से भिंडी की तुड़ाई कर रहे हैं और स्थानीय बाज़ार में इसकी बिक्री से उन्हें रोज़ाना लगभग 1500 से 2000 रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। उन्होंने बताया कि इस फसल में लागत अपेक्षाकृत कम आई है, जिससे खेती का खर्च निकलने के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। सुरेश ईटावदिया का मानना है कि मोबाइल और इंटरनेट अब किसानों के लिए ज्ञान और जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत बन चुके हैं। क्षेत्र के कृषि जानकार भी सब्जी वर्गीय फसलों को किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए कम क्षेत्रफल में भी अच्छा लाभ देने वाला मानते हैं। सुरेश ईटावदिया की यह सफलता आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है, जो उनके खेत का निरीक्षण कर भिंडी की खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। ग्राम मोहना के इस प्रगतिशील किसान ने सिद्ध कर दिया है कि यदि किसान नई सोच, तकनीक और नवाचार को अपनाएं तो खेती को एक लाभ का व्यवसाय बनाया जा सकता है।1
- मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया है। इस घटनाक्रम पर उन्होंने क्या प्रतिक्रिया दी, इसको लेकर एक खास बयान का इंतज़ार है, जिसे 'सुनिए' कहकर संदर्भित किया गया है।1
- Post by Manish Dhakd1
- जीवन में सभी को सदैव प्रसन्न रहना चाहिए, क्योंकि मनुष्य का जीवन बार-बार प्राप्त नहीं होता है।1
- देवास में कलेक्टर श्री ऋतुराज सिंह की अध्यक्षता में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन और समीक्षा के उद्देश्य से जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक संपन्न हुई। इस दौरान कलेक्टर श्री सिंह ने विभागीय अधिकारियों को जिले में मिलावटखोरी और अस्वच्छ खान-पान पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए निरंतर जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने के निर्देश दिए। उन्होंने खाद्य सुरक्षा दल को लगातार औचक निरीक्षण और जांच कार्यवाहियां करने, साथ ही खाद्य लाइसेंस के निर्धारित नियमों और शर्तों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित कराने के आदेश दिए। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्यवाही की जाए। बैठक में कलेक्टर श्री सिंह ने स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल, स्थानीय बाजार, औद्योगिक क्षेत्र और सभी नगर पालिक परिषदों के अंतर्गत आने वाली चौपाटियों पर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की सघन जांच के निर्देश दिए। बच्चों के स्वास्थ्य को विशेष रूप से ध्यान में रखते हुए, उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे स्वयं स्कूलों का दौरा करें और बच्चों को सुरक्षित, पौष्टिक तथा स्वच्छ भोजन के चयन के संबंध में जानकारी दें। अधिकारियों को दैनिक आहार में 'क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए' इसकी जानकारी देने और बच्चों को जंक फूड या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य सामग्रियों के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करने के लिए भी कहा गया। इस दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्री सुरेन्द्र ठाकुर ने जिले में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत की गई कार्यवाहियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विगत वर्ष में जांच कार्यवाही कर 39 प्रकरण बनाकर वैधानिक कार्यवाही की गई थी, और इस वित्तीय वर्ष में अब तक कुल 06 प्रकरण बनाए गए हैं। कलेक्टर श्री सिंह ने पुनः निर्देशित किया कि खाद्य सुरक्षा दल लगातार औचक निरीक्षण और जांच कार्यवाहियां करें।4
- शाजापुर के ग्राम पनवाड़ी स्थित एबी रोड के एक ब्लैक स्पॉट (डेंजर जोन) पर मंगलवार दोपहर सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए 'जीवन रक्षक पाठशाला' का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों में होने वाली जनहानि को रोकना और आम नागरिकों को शुरुआती कुछ मिनटों, यानी 'गोल्डन आवर' में मददगार बनने के लिए प्रेरित करना था, जो घायल की जान बचाने के लिए सबसे अहम होते हैं। उज्जैन रेंज के डीआईजी नवनीत भसीन और शाजापुर पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह राजपूत के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक घनश्याम मालवीय, एसडीओपी अजय मिश्रा, रक्षित निरीक्षक वंदना सिंह, यातायात प्रभारी सौरव शुक्ला और सुनेरा थाना प्रभारी अंकित मुकाती सहित पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण जीवन रक्षक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण रहा। शाजापुर जिला अस्पताल से आई चिकित्सकों की टीम ने मौके पर मौजूद ग्रामीणों को सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) देने का सही तरीका सिखाया। डॉक्टरों ने जोर देकर बताया कि किसी भी दुर्घटना या कार्डियक अरेस्ट जैसी आपात स्थिति में यदि मरीज को तुरंत और सही तरीके से सीपीआर दिया जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। जागरूकता शिविर में ग्रामीणों को दुर्घटना से जुड़ी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं से भी अवगत कराया गया। अधिकारियों ने जानकारी दी कि हादसे में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले नेक नागरिक को अब पुलिस परेशान नहीं करती, बल्कि उन्हें 'राहवीर योजना' के तहत ₹25,000 तक की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया जाता है। साथ ही, 'प्रधानमंत्री राहत योजना' के अंतर्गत सड़क दुर्घटना के पात्र घायलों को ₹1.50 लाख तक का कैशलेस (मुफ्त) उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान भी समझाया गया। कार्यक्रम के अंत में, अधिकारियों ने सभी उपस्थित लोगों से अपील की कि वे सड़क पर घायल पड़े व्यक्ति को देखकर कतराएं नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक की तरह आगे बढ़कर उसकी मदद करें। इसके अतिरिक्त, दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करने की हिदायत भी दी गई। इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर आपातकालीन सहायता संबंधी अहम जानकारियाँ प्राप्त कीं।3