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बुलंदशहर चंदपुरा आज 22जनवरी को भाकियू चढूनी संगठन की पंचायत जिला बुलंदशहर की सदर तहसील के गांव आस्फाबाद चंदपुरा में 11000
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बुलंदशहर चंदपुरा आज 22जनवरी को भाकियू चढूनी संगठन की पंचायत जिला बुलंदशहर की सदर तहसील के गांव आस्फाबाद चंदपुरा में 11000
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- बुलंदशहर चंदपुरा आज 22जनवरी को भाकियू चढूनी संगठन की पंचायत जिला बुलंदशहर की सदर तहसील के गांव आस्फाबाद चंदपुरा में 110002
- छिन्दवाड़ा जिलें के इमलीखेडा इंडस्ट्रियल एरिया की प्लास्टिक पाइप फैक्ट्री में भीषण आग से फेक्ट्री सोहा फैक्ट्री में आग लगने से लाखो रुपये का नुकसान का अनुमान इमली खेड़ा औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक पाइप फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। आग से फैक्ट्री में रखा कच्चा माल और तैयार पाइप जलकर खाक हो गए। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार करीब लाखो रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का प्रयास किया गया ।1
- इमली खेड़ा औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक पाइप फैक्ट्री में भीषण आग छिंदवाड़ा जिलें के इमलीखेडा इंडस्ट्रियल एरिया की प्लास्टिक पाइप फैक्ट्री में भीषण आग की धटना सामने आई है…. फैक्ट्री में आग लगने से 50 लाख रुपये का नुकसान का अनुमान.. इमली खेड़ा औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक पाइप फैक्ट्री में भीषण आग लग गई। आग से फैक्ट्री में रखा कच्चा माल और तैयार पाइप जलकर खाक हो गए। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार करीब 50 लाख रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का प्रयास जारी है। इमली खेड़ा औद्योगिक क्षेत्र की पाइप फैक्ट्री में भीषण आग, 50 लाख के नुकसान की आशंका पाइप फैक्ट्री में लगी आग, दमकल कर्मी मौके पर, लाखों का नुकसान इमली खेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में आग का तांडव, फैक्ट्री जलकर खाक ।नुकसान: प्राथमिक तौर पर लाखों (कुछ स्रोतों के अनुसार 80 लाख से 1 करोड़ तक) के नुकसान की आशंका है, लेकिन अभी तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। 11दमकल की गाड़ी लगाई गई है आग का कारण: अभी तक आग लगने के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल पाया है, हालांकि शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। स्थिति: फैक्ट्री में मौजूद प्लास्टिक के कारण आग ने विकराल रूप ले लिया। स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर मौजूद है और मामले की जांच की1
- Post by Mohit Yadav1
- *कुरई जनपद में प्रशासनिक भूचाल: सचिवों और रोजगार सहायकों का कलमबंद आंदोलन, प्रभारी सीईओ पर अभद्र भाषा के गंभीर आरोप* कुरई - कुरई जनपद पंचायत में आज उस समय हालात बेकाबू हो गए जब सचिव संघ और रोजगार सहायकों ने प्रभारी सीईओ अर्जुन सिंह ठाकुर एवं एपीओ संजय डेहरिया पर अभद्र भाषा के उपयोग और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए खुला मोर्चा खोल दिया। कर्मचारियों ने एक सुर में कहा कि अब अपमान और दबाव की राजनीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सचिवों और रोजगार सहायकों का आरोप है कि प्रभारी सीईओ अर्जुन सिंह ठाकुर तथा एपीओ संजय डेहरिया द्वारा लगातार अपशब्दों का प्रयोग, अनावश्यक टारगेट थोपना और कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि बिना संसाधन और जमीनी हकीकत को समझे केवल दबाव बनाकर काम कराया जा रहा है। “सम्मान से काम चाहिए, तानाशाही नहीं” आक्रोशित कर्मचारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक प्रभारी सीईओ अर्जुन सिंह ठाकुर और एपीओ संजय डेहरिया को उनके पद से नहीं हटाया जाता, तब तक समस्त सचिव एवं रोजगार सहायक कलम बंद हड़ताल पर रहेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सम्मान, गरिमा और कार्यस्थल की मर्यादा के लिए है। जनहित कार्यों पर पड़ सकता है असर कलम बंद हड़ताल के चलते जनपद क्षेत्र में चल रही कई महत्वपूर्ण योजनाएं, पंचायत कार्य, रोजगार गारंटी से जुड़े काम और विकास गतिविधियां ठप होने की आशंका है। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ सकता है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। प्रशासन की चुप्पी, बढ़ता आक्रोश मामले में अब तक न तो प्रभारी सीईओ और न ही जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। प्रशासन की चुप्पी से कर्मचारियों का गुस्सा और भड़कता नजर आ रहा है। अब सवाल यह है… क्या कर्मचारियों के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या मामला दबा दिया जाएगा? क्या प्रशासन कर्मचारियों की गरिमा बचाने के लिए ठोस कदम उठाएगा? फिलहाल कुरई जनपद पंचायत में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और सभी की नजरें अब जिला प्रशासन और शासन के अगले कदम पर टिकी हैं।2
- वनग्राम लादी में वनकर्मी के द्वारा ग्रामीणों से भूमि नपाने के नाम पर अवैध वसूली करने का लगा आरोप, वन अधिकारी कों सौपा ज्ञापन, जांच करने की मांग1
- नगर परिषद की पहल: बाजार में सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर समझाइश बनखेड़ी। स्वच्छ सर्वेक्षण–2025 के अंतर्गत नगर परिषद बनखेड़ी द्वारा गुरुवार को वार्ड क्रमांक 6 की सब्जी मंडी एवं व्यावसायिक क्षेत्रों में सिंगल यूज़ पॉलीथिन प्रतिबंध जनजागरूकता अभियान चलाया गया। नगर परिषद अध्यक्ष हरीश मालानी एवं सीएमओ निशांत श्रीवास्तव के निर्देशानुसार, स्वच्छता प्रभारी मदन मोहन चौकसे के मार्गदर्शन में यह अभियान आयोजित हुआ। अभियान के तहत सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल की छात्राओं ने महात्मा गांधी का रूप धारण कर रैली निकालते हुए दुकानदारों व ग्राहकों को पॉलीथिन के दुष्प्रभावों से अवगत कराया और इसके उपयोग से बचने की अपील की। नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण हेतु वैकल्पिक थैलों के उपयोग का संदेश दिया गया।1
- *“गरीब के घर पर सौदा”: पीएम आवास की किश्त पर रिश्वत, ग्राम पंचायत साले में लोकायुक्त की दबिश* लोकेशन -- बरघाट/सिवनी संवाददाता - मोहित यादव जिला ब्यूरो चीफ़ सिवनी *9584667143* सिवनी/बरघाट। गरीबों को पक्की छत देने के उद्देश्य से चल रही प्रधानमंत्री आवास योजना में रिश्वत का खेल सामने आने से एक बार फिर सिस्टम की संवेदनहीनता उजागर हुई है। बरघाट जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत साले में लोकायुक्त जबलपुर की टीम ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए पदस्थ रोजगार सहायक ओमेंद्र परिधि को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।जानकारी के अनुसार, रोजगार सहायक ओमेंद्र परिधि पर आरोप है कि उसने प्रधानमंत्री आवास योजना की किश्त जारी करने के एवज में ग्राम पंचायत के उप सरपंच वहाब खान एवं एक हितग्राही से कुल 10,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी। योजना से जुड़ा हितग्राही लंबे समय से किश्त के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहा था, लेकिन हर बार उसे टाल दिया जाता रहा। रिश्वत की मांग से मानसिक रूप से प्रताड़ित होकर उप सरपंच वहाब खान ने पूरे मामले की शिकायत लोकायुक्त कार्यालय जबलपुर में दर्ज कराई।शिकायत की सत्यता की पुष्टि के बाद लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। तय योजना के अनुसार जैसे ही आरोपी रोजगार सहायक ने रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 5,000 रुपये स्वीकार किए, मौके पर मौजूद लोकायुक्त टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। कार्रवाई के दौरान टीम ने रिश्वत की रकम बरामद की और आवश्यक पंचनामा तैयार किया।इसके बाद आरोपी को लेकर लोकायुक्त टीम बरघाट स्थित रेस्ट हाउस पहुंची, जहां उससे गहन पूछताछ की जा रही है। इस कार्रवाई से पूरे जनपद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसी कार्रवाई पहले होती, तो गरीबों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए रिश्वत नहीं देनी पड़ती। यह मामला साबित करता है कि “गरीब के घर पर सौदा” सिर्फ एक हेडलाइन नहीं, बल्कि उस सच की तस्वीर है, जहां छोटी सी रिश्वत भी बड़े भ्रष्टाचार की कहानी कह देती है।1