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उत्तरकाशी के राजगढ़ी के खरादी में 13 जुलाई 2026 को यमुना नदी के तेज बहाव के बीच फंसे एक मवेशी (बछड़े) को पुलिस जवानों और स्थानीय युवाओं ने अपनी सूझबूझ से सुरक्षित बचा लिया। नदी के तेज बहाव में इस बेजुबान के फंसने की सूचना मिलते ही सीजनल पुलिस चौकी खरादी में तैनात पुलिस जवान राकेश चौहान और कैलाश चौहान ने बिना समय गंवाए स्थानीय युवाओं के साथ मिलकर तुरंत रेस्क्यू शुरू किया। इस काम के लिए समीप ही स्थित एक क्रेशर से जेसीबी मशीन की सहायता ली गई, जिसके जरिए पुलिस टीम नदी के बीच तक पहुंची और सूझबूझ का परिचय देते हुए बेजुबान का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। नदी से सुरक्षित बाहर निकालने के बाद बछड़े का आवश्यक उपचार भी करवाया गया। संकट की इस स्थिति में पुलिस के जवानों और स्थानीय युवाओं ने मिलकर इस बेजुबान की जान बचाई।
Shanti Tamta
उत्तरकाशी के राजगढ़ी के खरादी में 13 जुलाई 2026 को यमुना नदी के तेज बहाव के बीच फंसे एक मवेशी (बछड़े) को पुलिस जवानों और स्थानीय युवाओं ने अपनी सूझबूझ से सुरक्षित बचा लिया। नदी के तेज बहाव में इस बेजुबान के फंसने की सूचना मिलते ही सीजनल पुलिस चौकी खरादी में तैनात पुलिस जवान राकेश चौहान और कैलाश चौहान ने बिना समय गंवाए स्थानीय युवाओं के साथ मिलकर तुरंत रेस्क्यू शुरू किया। इस काम के लिए समीप ही स्थित एक क्रेशर से जेसीबी मशीन की सहायता ली गई, जिसके जरिए पुलिस टीम नदी के बीच तक पहुंची और सूझबूझ का परिचय देते हुए बेजुबान का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। नदी से सुरक्षित बाहर निकालने के बाद बछड़े का आवश्यक उपचार भी करवाया गया। संकट की इस स्थिति में पुलिस के जवानों और स्थानीय युवाओं ने मिलकर इस बेजुबान की जान बचाई।
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- देहरादून जिले के रायपुर-ऋषिकेश रोड पर सड़क चौड़ीकरण के एवज में हजारों पेड़ों को काटा जा रहा है, जिससे पर्यावरण प्रेमियों में गहरा रोष व्याप्त है। विशेष रूप से सात मोड़ पर स्थित पेड़ों को काटे जाने को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब इस रोड पर कभी जाम भी नहीं लगता, तो फिर यहां के प्राकृतिक सौंदर्य का विनाश क्यों किया जा रहा है। इस स्थिति को लेकर किसान मजदूर महासंग्राम संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोबीन अहमद भी बेहद दुखी हैं और उन्हें इसका विरोध करने के लिए लगातार फोन आ रहे हैं। हरे-भरे पेड़ों को काटे जाने का विरोध कर रहे विभिन्न संगठनों को अपना समर्थन देते हुए उन्होंने भारत सरकार और प्रदेश सरकार से अनुरोध किया है कि पेड़ों को न काटा जाए। उन्होंने मांग की है कि इसके लिए कोई दूसरा रास्ता निकाला जाए ताकि वन संपदा और जंगलों का मूल स्वरूप सुरक्षित रह सके।1
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