भीलवाड़ा जिले के मांडल स्थित मलगानी गांव में रविवार देर रात सरकारी चरागाह भूमि से कथित अवैध मिट्टी दोहन को लेकर भारी हंगामा हो गया, जिसके बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बन गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रात के अंधेरे में जेसीबी मशीन और डंपरों की मदद से चरागाह भूमि से बड़े पैमाने पर मिट्टी निकाली जा रही थी। सूचना मिलने पर ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर खनन कार्य में लगे वाहनों को घेर लिया, जिसमें डंपर संख्या RJ 09 GC 4001 सहित अन्य वाहन शामिल थे। हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि उनके विरोध के दौरान खनन कार्य से जुड़े लोग दबाव बनाकर वाहनों को मौके से छुड़ाकर ले गए। ग्रामीणों के अनुसार, चरागाह भूमि से मिट्टी दोहन का यह “खेल” काफी समय से चल रहा है। ग्रामीणों, जिनमें ओमप्रकाश, बालूराम, राहुल, रतनलाल जाट, हनुमान जाट, बालूलाल जाट, सूरजमल और जगदीश शामिल हैं, ने आरोप लगाया है कि इस अवैध गतिविधि की शिकायत कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को की जा चुकी है। इसके बावजूद समय पर प्रभावी कार्रवाई न होने के कारण इन अवैध गतिविधियों पर रोक नहीं लग पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बाद कुछ समय के लिए काम रुक जाता है, लेकिन फिर से मिट्टी निकालने का कार्य शुरू हो जाता है, जिससे उनमें गहरा रोष है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि निकाली गई मिट्टी का उपयोग स्थानीय ईंट भट्ठे पर किया जा रहा है, और उन्होंने भट्ठे के आसपास मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर होने का दावा किया है। उन्होंने चिंता जताई कि चरागाह भूमि, जो पशुओं के लिए चारागाह का मुख्य स्रोत है, पर लगातार मिट्टी खनन से गहरे गड्ढे बन रहे हैं, जिससे भविष्य में पशुपालकों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसे देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर मिट्टी के स्रोत की पुष्टि करने, खनन में प्रयुक्त जेसीबी और डंपरों को जब्त करने, भूमि को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, और मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। यह समस्त जानकारी ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और शिकायतों पर आधारित है।
भीलवाड़ा जिले के मांडल स्थित मलगानी गांव में रविवार देर रात सरकारी चरागाह भूमि से कथित अवैध मिट्टी दोहन को लेकर भारी हंगामा हो गया, जिसके बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बन गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रात के अंधेरे में जेसीबी मशीन और डंपरों की मदद से चरागाह भूमि से बड़े पैमाने पर मिट्टी निकाली जा रही थी। सूचना मिलने पर ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर खनन कार्य में लगे वाहनों को घेर लिया, जिसमें डंपर संख्या RJ 09 GC 4001 सहित अन्य वाहन शामिल थे। हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि उनके विरोध के दौरान खनन कार्य से जुड़े लोग दबाव बनाकर वाहनों को मौके से छुड़ाकर ले गए। ग्रामीणों के अनुसार, चरागाह भूमि से मिट्टी दोहन का यह “खेल” काफी समय से चल रहा है। ग्रामीणों, जिनमें ओमप्रकाश, बालूराम, राहुल, रतनलाल जाट, हनुमान जाट, बालूलाल जाट, सूरजमल और जगदीश शामिल हैं, ने आरोप लगाया है कि इस अवैध गतिविधि की शिकायत कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को की जा चुकी है। इसके बावजूद समय पर प्रभावी कार्रवाई न होने के कारण इन अवैध गतिविधियों पर रोक नहीं लग पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बाद
कुछ समय के लिए काम रुक जाता है, लेकिन फिर से मिट्टी निकालने का कार्य शुरू हो जाता है, जिससे उनमें गहरा रोष है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि निकाली गई मिट्टी का उपयोग स्थानीय ईंट भट्ठे पर किया जा रहा है, और उन्होंने भट्ठे के आसपास मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर होने का दावा किया है। उन्होंने चिंता जताई कि चरागाह भूमि, जो पशुओं के लिए चारागाह का मुख्य स्रोत है, पर लगातार मिट्टी खनन से गहरे गड्ढे बन रहे हैं, जिससे भविष्य में पशुपालकों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसे देखते हुए ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर मिट्टी के स्रोत की पुष्टि करने, खनन में प्रयुक्त जेसीबी और डंपरों को जब्त करने, भूमि को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, और मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। यह समस्त जानकारी ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और शिकायतों पर आधारित है।
- न्यू द्वारकेश न्यूज़ चैनल के रिपोर्टर नंदलाल पुरबिया ने नांदोली, राजसमंद, राजस्थान से जनहित में एक रिपोर्ट प्रसारित की है।1
- शाहपुरा स्थित जाट छात्रावास के निर्विरोध अध्यक्ष के रूप में राजकुमार खीखड़ेल को चुना गया है। जाट छात्रावास अध्यक्ष चुनाव संचालन समिति ने एक लंबे सदस्यता अभियान के बाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करते हुए इस चुनाव को संपन्न कराया। जाट छात्रावास के विधिक सलाहकार और प्रवक्ता एडवोकेट रामप्रसाद जाट के अनुसार, अध्यक्ष पद को लेकर वरिष्ठ और युवा दोनों वर्गों में अत्यधिक उत्साह देखा गया। नामांकन प्रक्रिया से पहले, सर्वसम्मति से चुनाव कराने का प्रयास किया गया था। हालांकि, निर्विरोध निर्वाचन की मांग उठने के बाद इच्छुक व्यक्तियों से विधिवत नामांकन पत्र जमा कराए गए। इसमें कार्यकारी अध्यक्ष रामधन थरोदा, एडवोकेट रामलाल जाट, एडवोकेट रामेश्वर लाल जाट और पूर्व सरपंच ठिठोडी राजकुमार जाट ने अपना नामांकन दाखिल किया था। बाद में, रामधन जाट, रामेश्वर जाट और रामलाल जाट ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जिसके परिणामस्वरूप चुनाव संचालन समिति ने राजकुमार जाट को दो साल के कार्यकाल के लिए जाट छात्रावास का निर्विरोध अध्यक्ष घोषित कर दिया। निर्वाचन के बाद की योजना के अनुसार, आगामी 28 जून को राजकुमार जाट समाज के वरिष्ठ जनों से राय-मशविरा करने के बाद अपनी कार्यकारिणी की घोषणा करेंगे। इसके बाद, 5 जुलाई 2026 को वे नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के साथ औपचारिक रूप से अध्यक्ष पद का कार्यभार संभालेंगे। राजकुमार जाट के निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने पर जाट समाज के सभी लोगों ने गहरी खुशी व्यक्त की है। इस अवसर पर चुनाव संचालन समिति के जगदीश जाट, रतनलाल जाट, ओम प्रकाश जाट, सुवालाल जाट, बेनाथ जाट, चांदमल जाट और मोती जाट सहित कई प्रमुख व्यक्ति उपस्थित थे। उपस्थित वरिष्ठ जनों में जहाजपुर से रतनलाल जाट, अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी रामनिवास जाट, शिवराज जाट, शोकरण जाट, रामप्रसाद गोरा, जिला परिषद सदस्य सीताराम जाट, विवाह सम्मेलन के महामंत्री शंकर लाल कुड़ी और शोभाराम तोगड़ा शामिल रहे। वहीं, युवा समाज जनों में प्रधान चड्ढा राजाराम जाट, कैलाश गोरा, अर्जुन गोरा, अनिल गोरा, सरपंच सत्यनारायण जाट, सांवरलाल गोरा, रामदयाल जाट, गजराज जाट, शंकर लाल जाट, नारायण जाट, सुखपाल जाट और शंकर लाल नागा सहित सैकड़ों वरिष्ठ और युवा समाज के सदस्य मौजूद रहे।3
- केन्द्रीय श्रम संगठनों के देशव्यापी आह्वान पर सोमवार दोपहर करीब 12 बजे भारतीय ट्रेड यूनियन सीटू (CITU) सहित अन्य श्रमिक संगठनों के नेतृत्व में श्रमिकों ने मुखर्जी पार्क से एक विशाल रैली निकाली। यह रैली कलेक्ट्रेट पहुंची, जहाँ श्रमिकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान केंद्र सरकार की श्रम नीतियों, निजीकरण और लगातार बढ़ती महंगाई के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई, जिसके बाद प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार को 12 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन सौंपा गया। सभा को संबोधित करते हुए श्रमिक नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार श्रम संहिताएं (लेबर कोड) लागू की हैं, जो मजदूरों के हितों के बजाय बड़े पूंजीपतियों को लाभ पहुंचा रही हैं। वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि बैंक, बीमा, रेलवे, एयरलाइंस, कोयला और स्टील जैसे सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण कर उन्हें देशी-विदेशी कॉर्पोरेट घरानों के हवाले किया जा रहा है, जिसका देशभर के मजदूर और कर्मचारी संगठन लगातार विरोध कर रहे हैं। श्रमिक नेताओं ने कहा कि संगठित संघर्षों के कारण केंद्र सरकार को कई बार अपने फैसलों पर पुनर्विचार करना पड़ा है, और वे आगे भी अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। ज्ञापन में रखी गई 12 प्रमुख मांगों में मजदूर विरोधी बताए जा रहे चारों लेबर कोड को तत्काल वापस लेना, सरकारी संपत्तियों के निजीकरण पर रोक लगाना तथा नई पेंशन योजना (NPS) को समाप्त करना शामिल है। श्रमिकों ने संयुक्त किसान मोर्चा के छह सूत्रीय मांग पत्र को स्वीकार करने और कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी देने की भी मांग की। इसके अतिरिक्त, सभी श्रमिकों, जिनमें योजना कर्मी भी शामिल हैं, के लिए न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित करने, सभी को रोजगार की गारंटी देने और बेरोजगारों को 5 हजार रुपये प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता देने की अपील की गई। मनरेगा में 200 दिन रोजगार और 600 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित करने के साथ-साथ शहरी बेरोजगारों को भी इस योजना के दायरे में लाने की मांग रखी गई। पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण तथा उत्पाद शुल्क में कटौती की भी बात कही गई। ज्ञापन में ठेका एवं योजना कर्मियों को स्थायी करने, समान काम के लिए समान वेतन लागू करने, तथा वृद्धजन, विधवा एवं दिव्यांगजन पेंशन बढ़ाकर 5 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की गई। मजदूर आंदोलनों में पुलिस-प्रशासन के हस्तक्षेप पर रोक लगाने और आठ घंटे कार्य दिवस को सख्ती से लागू कर ओवरटाइम का दोगुना भुगतान व सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में श्रमिक, कर्मचारी और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। श्रमिक नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।1
- फादर्स डे के अवसर पर वरिष्ठ नागरिक मंच द्वारा एक प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और योग से जुड़ा महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। इस आयोजन के दौरान गोविंद सोनी को सम्मानित किया गया।1
- हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक स्टेडियम की खाली सीटें दिखाई दे रही हैं। यह वीडियो खेल समाचारों से संबंधित है और दर्शकों से इस पर अपनी राय साझा करने का आग्रह किया गया है। लोगों को इसी प्रकार की और खेल खबरें जानने तथा प्लेटफॉर्म से जुड़े रहने के लिए सब्सक्राइब करने का निमंत्रण दिया गया है।1
- रेलमगरा के ग्राम जुणदा में रघुनाथ भगवान मंदिर के जीर्णोद्धार, मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा, कलश एवं ध्वजा स्थापना के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय वैदिक धार्मिक महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हो गया है। इस महोत्सव के दौरान पूरे गांव को भक्तिमय माहौल में सराबोर करने के लिए पूजा-अर्चना, यज्ञ-हवन और वैदिक अनुष्ठानों के साथ एक विशाल प्रभात फेरी का आयोजन किया गया। इस प्रभात फेरी में करीब 150 प्रभात फेरियों ने सहभागिता की। बैंड-बाजों एवं भजन-कीर्तन के साथ श्रद्धालुओं ने पूरे गांव में घूमकर धर्म और भक्ति का संदेश दिया। मूर्ति, कलश एवं ध्वजा स्थापना का कार्यक्रम मां जावास नर्सिंग धाम, गोडास आश्रम एवं सा करोदा आश्रम के संत-महात्माओं के सानिध्य में संपन्न हुआ। वैदिक अनुष्ठान आचार्य राहुल कुमार शर्मा, विष्णु कुमार शर्मा एवं सहयोगी विद्वानों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्ण कराए गए। मंदिर निर्माण एवं जीर्णोद्धार कार्य में देशनोक (बीकानेर) के भामाशाह मुकेश कुमार नाहटा ने 7 लाख 21 हजार रुपये का सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम की सफलता में ग्राम जुणदा के समस्त ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों एवं धर्मप्रेमियों ने सक्रिय सहयोग दिया। आयोजन समिति ने सभी संत-महात्माओं, भामाशाहों एवं ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया है।1
- भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में चयनित होने के बाद अपना प्रशिक्षण पूर्ण कर पहली बार अपने पैतृक गांव गेणोली लौटे अग्निवीर जवान दिनेश माली का ग्रामीणों ने बड़े उत्साह और गौरव के साथ भव्य स्वागत किया। भीलवाड़ा जिले के मांडलगढ़ स्थित उनके गांव गेणोली में जवान के सम्मान में पूरे क्षेत्र में देशभक्ति का माहौल देखने को मिला, जहां जगह-जगह पुष्पवर्षा कर उनका अभिवादन किया गया। गेणोली निवासी किसान कालूलाल माली के बेटे दिनेश माली का मांडलगढ़ चौराहे पर पहुंचते ही ग्रामीणों ने 'भारत माता के जयकारों' के साथ अभिनंदन किया। इसके उपरांत गांव में ढोल नगाड़े और डीजे पर एक भव्य जुलूस निकाला गया, जिसमें फूल मालाएं पहनाकर और साफ़ बांधकर उनका सम्मान किया गया, जिससे पूरा गांव देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। ग्रामीणों ने इस अवसर पर कहा कि दिनेश माली की यह उपलब्धि क्षेत्र के युवाओं को सेना में भर्ती होकर देश सेवा के लिए प्रेरित करेगी। इस भव्य स्वागत समारोह में युवाओं से लेकर बड़े बुजुर्गों तक ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और जवान के उज्जवल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता किशन माली, दुर्गा माली, भूरालाल माली, देव माली, गणपत माली, नाथू माली, लादू माली, जगदीश माली सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।4
- हरमैन शरीफैन से लौटे हाजियों का भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर खान परिवार ने शहर क़ाज़ी, पेश इमामों और विभिन्न धार्मिक तंजीमों के साथ मिलकर मोहब्बत व अकीदत की एक विशेष महफिल सजाई।1
- लखनऊ में एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लग गई, जिसके कारण कई परिवारों के 'चिराग बुझ गए'। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर से सुरक्षा व्यवस्था, समग्र प्रबंधन और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।1