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अचानक बदले मौसम ने सर्दी का एहसास फिर से कर दिया है शीतकालीन प्रवास मुखवार गंगोत्री धाम में एक फिर से ऊपर बर्फबारी पड़ चुकी है,,,, अचानक बदले मौसम ने पूरे क्षेत्र में एक बार फिर सर्दी का अहसास करा दिया है। जहां कुछ दिनों पहले गर्मी ने दस्तक दे दी थी, वहीं अब मौसम ने करवट बदलते हुए निचले इलाकों में झमाझम बारिश का दौर शुरू कर दिया है। अगर ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों की बात करें, तो गंगोत्री शीतकालीन प्रभास मुखवा हर्षिल नेशनल पार्क और गंगोत्री धाम में भारी बर्फबारी दर्ज की गई है। यहां करीब डेढ़ फीट से अधिक बर्फ गिर चुकी है और बर्फबारी का सिलसिला अभी भी लगातार जारी है। वहीं शीतकालीन प्रवास मुखवा और हर्षिल समेत आसपास के तमाम क्षेत्रों में भी एक फीट से अधिक बर्फबारी हो चुकी है। इस अचानक हुए मौसम परिवर्तन से जहां जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। यह बर्फबारी और बारिश फसलों के लिए काफी लाभदायक मानी जा रही है। फिलहाल मौसम विभाग के अनुसार क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी का दौर अभी जारी रह सकता है, जिससे ठंड एक बार फिर लौट आई है।

16 hrs ago
user_सुमित कुमार
सुमित कुमार
Court reporter भटवारी, उत्तर काशी, उत्तराखंड•
16 hrs ago

अचानक बदले मौसम ने सर्दी का एहसास फिर से कर दिया है शीतकालीन प्रवास मुखवार गंगोत्री धाम में एक फिर से ऊपर बर्फबारी पड़ चुकी है,,,, अचानक बदले मौसम ने पूरे क्षेत्र में एक बार फिर सर्दी का अहसास करा दिया है। जहां कुछ दिनों पहले गर्मी ने दस्तक दे दी थी, वहीं अब मौसम ने करवट बदलते हुए निचले इलाकों में झमाझम बारिश का दौर शुरू कर दिया है। अगर ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों की बात करें, तो गंगोत्री शीतकालीन प्रभास मुखवा हर्षिल नेशनल पार्क और गंगोत्री धाम में भारी बर्फबारी दर्ज की गई है। यहां करीब

डेढ़ फीट से अधिक बर्फ गिर चुकी है और बर्फबारी का सिलसिला अभी भी लगातार जारी है। वहीं शीतकालीन प्रवास मुखवा और हर्षिल समेत आसपास के तमाम क्षेत्रों में भी एक फीट से अधिक बर्फबारी हो चुकी है। इस अचानक हुए मौसम परिवर्तन से जहां जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। यह बर्फबारी और बारिश फसलों के लिए काफी लाभदायक मानी जा रही है। फिलहाल मौसम विभाग के अनुसार क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी का दौर अभी जारी रह सकता है, जिससे ठंड एक बार फिर लौट आई है।

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  • अचानक बदले मौसम ने पूरे क्षेत्र में एक बार फिर सर्दी का अहसास करा दिया है। जहां कुछ दिनों पहले गर्मी ने दस्तक दे दी थी, वहीं अब मौसम ने करवट बदलते हुए निचले इलाकों में झमाझम बारिश का दौर शुरू कर दिया है। अगर ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों की बात करें, तो गंगोत्री शीतकालीन प्रभास मुखवा हर्षिल नेशनल पार्क और गंगोत्री धाम में भारी बर्फबारी दर्ज की गई है। यहां करीब डेढ़ फीट से अधिक बर्फ गिर चुकी है और बर्फबारी का सिलसिला अभी भी लगातार जारी है। वहीं शीतकालीन प्रवास मुखवा और हर्षिल समेत आसपास के तमाम क्षेत्रों में भी एक फीट से अधिक बर्फबारी हो चुकी है। इस अचानक हुए मौसम परिवर्तन से जहां जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। यह बर्फबारी और बारिश फसलों के लिए काफी लाभदायक मानी जा रही है। फिलहाल मौसम विभाग के अनुसार क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी का दौर अभी जारी रह सकता है, जिससे ठंड एक बार फिर लौट आई है।
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    अचानक बदले मौसम ने पूरे क्षेत्र में एक बार फिर सर्दी का अहसास करा दिया है। जहां कुछ दिनों पहले गर्मी ने दस्तक दे दी थी, वहीं अब मौसम ने करवट बदलते हुए निचले इलाकों में झमाझम बारिश का दौर शुरू कर दिया है।
अगर ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों की बात करें, तो गंगोत्री शीतकालीन प्रभास मुखवा हर्षिल नेशनल पार्क और गंगोत्री धाम में भारी बर्फबारी दर्ज की गई है। यहां करीब डेढ़ फीट से अधिक बर्फ गिर चुकी है और बर्फबारी का सिलसिला अभी भी लगातार जारी है।
वहीं शीतकालीन प्रवास मुखवा और हर्षिल समेत आसपास के तमाम क्षेत्रों में भी एक फीट से अधिक बर्फबारी हो चुकी है। इस अचानक हुए मौसम परिवर्तन से जहां जनजीवन प्रभावित हुआ है, वहीं किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। यह बर्फबारी और बारिश फसलों के लिए काफी लाभदायक मानी जा रही है।
फिलहाल मौसम विभाग के अनुसार क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी का दौर अभी जारी रह सकता है, जिससे ठंड एक बार फिर लौट आई है।
    user_सुमित कुमार
    सुमित कुमार
    Court reporter भटवारी, उत्तर काशी, उत्तराखंड•
    16 hrs ago
  • कल रात्रि से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में लगातार बर्फबारी देखने को मिल रही है। मार्च के मध्य में उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के ऊँचाई वाले क्षेत्रों में मौसम ने अचानक करवट ली है, और दो धामों में (खासकर गंगोत्री-यमुनोत्री) में ताजा बर्फबारी से पूरा इलाका सफेद चादर ओढ़े हुए है।वहीं निचले क्षेत्रों में भी लगातार बारिश देखने को मिल रही हैं. Vol. आज 20 मार्च को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में लगातार बर्फबारी हो रही है। पिछले 4-5 दिनों से जारी इस ताजा हिमपात ने इलाके को फिर से कड़ाके की ठंड में लपेट दिया है।उत्तरकाशी जिले के ऊँचे इलाकों में सुबह से ज्यादा बर्फवारी हो रहा है। गंगोत्री धाम के आसपास और यमुनोत्री के रास्ते (राना चट्टी से जानकी चट्टी तक) बर्फ की मोटी चादर बिछ गई है। निचले इलाकों में बारिश के साथ तापमान में तेज गिरावट आई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 1-2 दिन भी ऐसे ही हालात बने रह सकते हैं। Vol. अभी गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट बंद हैं (2026 में ये 19 अप्रैल को खुलेंगे)।प्रकृति की ये खूबसूरती और चुनौती दोनों हमें याद दिलाती है कि हिमालय हमेशा अप्रत्याशित रहता है। उत्तराखंड की इन वादियों में बर्फबारी का ये दौर अभी आगे भी जारी रह सकता हैं ।
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    कल रात्रि से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में लगातार बर्फबारी देखने को मिल रही है। मार्च के मध्य में उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के ऊँचाई वाले क्षेत्रों में मौसम ने अचानक करवट ली है, और दो धामों में   (खासकर गंगोत्री-यमुनोत्री) में ताजा बर्फबारी से पूरा इलाका सफेद चादर ओढ़े हुए है।वहीं निचले क्षेत्रों में भी लगातार बारिश देखने को मिल रही हैं. 
Vol. आज 20 मार्च को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में लगातार बर्फबारी हो रही है। पिछले 4-5 दिनों से जारी इस ताजा हिमपात ने इलाके को फिर से कड़ाके की ठंड में लपेट दिया है।उत्तरकाशी जिले के ऊँचे इलाकों में सुबह से ज्यादा बर्फवारी  हो रहा है। गंगोत्री धाम के आसपास और यमुनोत्री के रास्ते (राना चट्टी से जानकी चट्टी तक) बर्फ की मोटी चादर बिछ गई है। निचले इलाकों में बारिश के साथ तापमान में तेज गिरावट आई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 1-2 दिन भी ऐसे ही हालात बने रह सकते हैं।
Vol. अभी गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट बंद हैं (2026 में ये 19 अप्रैल को खुलेंगे)।प्रकृति की ये खूबसूरती और चुनौती दोनों हमें याद दिलाती है कि हिमालय हमेशा अप्रत्याशित रहता है। उत्तराखंड की इन वादियों में बर्फबारी का ये दौर अभी आगे भी जारी रह सकता हैं ।
    user_Virendra singh negi
    Virendra singh negi
    डुंडा, उत्तर काशी, उत्तराखंड•
    16 hrs ago
  • चारधाम यात्रा से पहले बड़ा फैसला, केदारनाथ-बद्रीनाथ में नई व्यवस्था लागू केदारनाथ मंदिर और बद्रीनाथ मंदिर को लेकर चारधाम यात्रा से पहले अहम फैसला लिया गया है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने घोषणा की है कि यात्रा के दौरान दोनों मंदिरों के गर्भगृह में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक रहेगी। समिति के अनुसार यह निर्णय मंदिरों की परंपराओं, धार्मिक मर्यादाओं और आस्था की पवित्रता बनाए रखने के लिए लिया गया है। हालांकि मंदिर परिसर में सभी श्रद्धालुओं का स्वागत रहेगा, लेकिन गर्भगृह में प्रवेश केवल सनातन परंपरा को मानने वाले भक्तों तक सीमित रहेगा। चारधाम यात्रा से पहले लिए गए इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है, वहीं प्रशासन भी व्यवस्थाओं को लेकर सतर्क नजर आ रहा है।
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    चारधाम यात्रा से पहले बड़ा फैसला, केदारनाथ-बद्रीनाथ में नई व्यवस्था लागू
केदारनाथ मंदिर और बद्रीनाथ मंदिर को लेकर चारधाम यात्रा से पहले अहम फैसला लिया गया है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने घोषणा की है कि यात्रा के दौरान दोनों मंदिरों के गर्भगृह में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक रहेगी।
समिति के अनुसार यह निर्णय मंदिरों की परंपराओं, धार्मिक मर्यादाओं और आस्था की पवित्रता बनाए रखने के लिए लिया गया है। हालांकि मंदिर परिसर में सभी श्रद्धालुओं का स्वागत रहेगा, लेकिन गर्भगृह में प्रवेश केवल सनातन परंपरा को मानने वाले भक्तों तक सीमित रहेगा।
चारधाम यात्रा से पहले लिए गए इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है, वहीं प्रशासन भी व्यवस्थाओं को लेकर सतर्क नजर आ रहा है।
    user_Sadhna yadav
    Sadhna yadav
    Rajgarhi, Uttar Kashi•
    29 min ago
  • जिला प्रशासन ने पेट्रोलियम पदार्थों एवं गैस की कालाबाजारी की अवैध संग्रहण एवं दुरुप्रयोग रोकने हेतु नोडल अधिकारी नामित किए जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने वर्तमान खाड़ी देशों उत्पन्न परिदृश्य के दृष्टिगत पेट्रोलियम पदार्थों के कालाबाजारी, अवैध संग्रहण एवं दुरुप्रयोग रोकने के दृष्टिगत जनपद टिहरी गढ़वाल मे नोडल / सहायक नोडल अधिकारी नामित किये । अपर जिलाधिकारी अवधेश कुमार सिंह नोडल अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी मनोज कुमार डोभाल व जिला आपदा प्रबन्धन अधिकारी ब्रिजेश भट्ट तथा डिवीजनल हेड (एल०पी०जी०-एस) आई०ओ०सी०एल० द्वारा नामित सक्षम अधिकारी को सहायक नोडल अधिकारी नामित किया गया है । वहीं जिलाधिकारी ने त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) का गठन कर सम्बन्धित क्षेत्र के उपजिलाधिकारी, पुलिस क्षेत्राधिकारी, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी तथा सम्बन्धित पूर्ति निरीक्षक को नियुक्त कर नियमित निरीक्षण / प्रवर्तन कार्य करने के निर्देश दिए । साथ ही उन्होंने कहा कालाबाजारी रोकने के दृष्टिगत जिला आपदा परिचालन केन्द्र नई टिहरी (टि०ग०) में कन्ट्रोल रूम स्थापित किया जिसमें शिकायतकर्ता दूरभाष नम्बरों :- *01376-234793, 01376-233433,* *9456533332, 8126268098,* *7465809009, 7983340807 तथा तेल* *कंपनियों के नम्बर 18002333555* पर शिकायत दर्ज करा सकते है । जिला पूर्ति अधिकारी मनोज कुमार डोभाल ने बताया कि अब तक निरीक्षण दल द्वारा गैस गोदाम पर 50, पेट्रोल पम्प 28, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर 164 सहित एक सप्ताह के भीतर 242 निरीक्षण कर 14 घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए ।
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    जिला प्रशासन ने पेट्रोलियम पदार्थों  एवं गैस की कालाबाजारी की अवैध संग्रहण एवं दुरुप्रयोग रोकने हेतु  नोडल अधिकारी नामित किए
जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने वर्तमान खाड़ी देशों उत्पन्न परिदृश्य के दृष्टिगत पेट्रोलियम पदार्थों के कालाबाजारी, अवैध संग्रहण एवं दुरुप्रयोग रोकने के दृष्टिगत जनपद टिहरी गढ़वाल मे नोडल / सहायक नोडल अधिकारी नामित किये ।  
अपर जिलाधिकारी अवधेश कुमार सिंह नोडल अधिकारी,  जिला पूर्ति अधिकारी मनोज कुमार डोभाल व जिला आपदा प्रबन्धन अधिकारी ब्रिजेश भट्ट  तथा डिवीजनल हेड (एल०पी०जी०-एस) आई०ओ०सी०एल० द्वारा नामित सक्षम अधिकारी को सहायक नोडल अधिकारी नामित किया गया है । वहीं जिलाधिकारी ने त्वरित प्रतिक्रिया दल  (QRT) का गठन कर सम्बन्धित क्षेत्र के उपजिलाधिकारी, पुलिस क्षेत्राधिकारी, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी तथा सम्बन्धित पूर्ति निरीक्षक को नियुक्त कर नियमित निरीक्षण / प्रवर्तन कार्य करने के निर्देश दिए । 
साथ  ही उन्होंने कहा  कालाबाजारी रोकने के दृष्टिगत जिला आपदा परिचालन केन्द्र नई टिहरी (टि०ग०) में कन्ट्रोल रूम स्थापित किया जिसमें शिकायतकर्ता दूरभाष नम्बरों :-
*01376-234793,    01376-233433,* *9456533332,        8126268098,* 
*7465809009,     7983340807 तथा तेल* *कंपनियों के नम्बर 18002333555* 
पर शिकायत दर्ज करा सकते है । 
जिला पूर्ति अधिकारी मनोज कुमार डोभाल ने बताया कि अब तक निरीक्षण दल द्वारा गैस गोदाम पर 50, पेट्रोल पम्प 28, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर 164 सहित एक सप्ताह के भीतर 242 निरीक्षण कर 14 घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए ।
    user_Vijaypal Rana
    Vijaypal Rana
    टिहरी, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड•
    13 hrs ago
  • Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी
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    Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी
    user_द कहर न्यूज़ एजेंसी
    द कहर न्यूज़ एजेंसी
    Journalist Rudraprayag, Rudra Prayag•
    15 hrs ago
  • Post by Dehradun City News
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    Post by Dehradun City News
    user_Dehradun City News
    Dehradun City News
    News Anchor विकास नगर, देहरादून, उत्तराखंड•
    7 hrs ago
  • राजपुर रोड से विधायक खजान दास मंत्री बने. देहरादून हरिद्वार विधानसभा सीट से विधायक मदन कौशिक ने मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ली. भीमताल से विधायक राम सिंह कैड़ा मंत्री बने रुद्रप्रयाग से विधायक भरत चौधरी भी धामी मंत्रिमंडल में शामिल हो गए हैं रुड़की से विधायक प्रदीप बत्रा मंत्री बने हैं।
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    राजपुर रोड से विधायक खजान दास मंत्री बने.
देहरादून 
हरिद्वार विधानसभा सीट से विधायक मदन कौशिक ने मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ली.
भीमताल से विधायक राम सिंह कैड़ा मंत्री बने
रुद्रप्रयाग से विधायक भरत चौधरी भी धामी मंत्रिमंडल में शामिल हो गए हैं 
रुड़की से विधायक प्रदीप बत्रा मंत्री बने हैं।
    user_Rajkumar mehra press reporter
    Rajkumar mehra press reporter
    Real Estate Agent विकास नगर, देहरादून, उत्तराखंड•
    19 hrs ago
  • विज्ञान संचारक डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल कहते हैं गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि एक जीवित पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसकी धड़कनों में जीवन, संस्कृति और विज्ञान कि धारा एक साथ प्रवाहित होते हैं। हिमालय से निकलकर मैदानों तक बहने वाली यह नदी अनगिनत जीवों का घर है.गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल, कछुए, सैकड़ों मछलियाँ और हजारों पक्षी प्रजातियाँ इसके जीवन तंत्र का हिस्सा हैं। आज गंगा की जैव विविधता एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहाँ चुनौतियाँ और संभावनाएँ साथ-साथ मौजूद हैं। प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते मानवीय दबाव ने नदी के संतुलन को प्रभावित किया है. लेकिन इसी बीच विज्ञान और समाज मिलकर एक नई उम्मीद भी जगा रहे हैं। गंगा के जल का एक अनोखा वैज्ञानिक पहलू है.बैक्टीरियोफेज (Bacteriophage)। ये सूक्ष्म वायरस हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं. जिससे जल की स्वाभाविक शुद्धता बनी रहती है। वैज्ञानिकों के अनुसार गंगा की आत्मशुद्धि क्षमता के पीछे इन सूक्ष्म जीवों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है.जो इसे अन्य नदियों से अलग बनाती है। इस बीच गंगा संरक्षण में समुदाय की भागीदारी एक नई ताकत के रूप में उभरी है.नदी किनारे सफाई अभियान, पौधारोपण, प्लास्टिक मुक्त पहल और जैव विविधता के प्रति जागरूकता कार्यक्रमों में स्थानीय लोगों की सक्रिय भूमिका दिखाई दे रही है.ग्रामीण समुदाय, युवा और स्वयंसेवी संगठन मिलकर गंगा को पुनर्जीवित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। भविष्य की गंगा की कल्पना अब केवल एक सपना नहीं रही. नई तकनीकों के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान का समावेश इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.यदि समाज और विज्ञान मिलकर कार्य करें. तो गंगा एक बार फिर अपनी स्वाभाविक शक्ति और समृद्ध जैव विविधता को प्राप्त कर सकती है। विज्ञान संचारक डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल का कहना हैं. गंगा (भागीरथी नदी )का भविष्य केवल योजनाओं पर नहीं,बल्कि समाज की जागरूकता और विज्ञान की समझ पर निर्भर करता है। बैक्टीरियोफेज जैसे सूक्ष्म तंत्र हमें यह सिखाते हैं कि प्रकृति स्वयं में समाधान छिपाए हुए है.जरूरत है उसे समझने और संरक्षित करने की। स्पष्ट है कि गंगा की रक्षा केवल पर्यावरण का प्रश्न नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ विषय है। यदि आज हम सजग होकर सामूहिक प्रयास करें, तो गंगा की धारा हमेशा की तरह जीवनदायिनी बनी रहेगी।
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    विज्ञान संचारक डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल कहते हैं गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि एक जीवित पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसकी धड़कनों में जीवन, संस्कृति और विज्ञान कि धारा एक साथ प्रवाहित होते हैं। हिमालय से निकलकर मैदानों तक बहने वाली यह नदी अनगिनत जीवों का घर है.गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल, कछुए, सैकड़ों मछलियाँ और हजारों पक्षी प्रजातियाँ इसके जीवन तंत्र का हिस्सा हैं।
आज गंगा की जैव विविधता एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहाँ चुनौतियाँ और संभावनाएँ साथ-साथ मौजूद हैं। प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते मानवीय दबाव ने नदी के संतुलन को प्रभावित किया है. लेकिन इसी बीच विज्ञान और समाज मिलकर एक नई उम्मीद भी जगा रहे हैं।
गंगा के जल का एक अनोखा वैज्ञानिक पहलू है.बैक्टीरियोफेज (Bacteriophage)। ये सूक्ष्म वायरस हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं. जिससे जल की स्वाभाविक शुद्धता बनी रहती है। वैज्ञानिकों के अनुसार गंगा की आत्मशुद्धि क्षमता के पीछे इन सूक्ष्म जीवों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है.जो इसे अन्य नदियों से अलग बनाती है।
इस बीच गंगा संरक्षण में समुदाय की भागीदारी एक नई ताकत के रूप में उभरी है.नदी किनारे सफाई अभियान, पौधारोपण, प्लास्टिक मुक्त पहल और जैव विविधता के प्रति जागरूकता कार्यक्रमों में स्थानीय लोगों की सक्रिय भूमिका दिखाई दे रही है.ग्रामीण समुदाय, युवा और स्वयंसेवी संगठन मिलकर गंगा को पुनर्जीवित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
भविष्य की गंगा की कल्पना अब केवल एक सपना नहीं रही. नई तकनीकों के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान का समावेश इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.यदि समाज और विज्ञान मिलकर कार्य करें. तो गंगा एक बार फिर अपनी स्वाभाविक शक्ति और समृद्ध जैव विविधता को प्राप्त कर सकती है।
विज्ञान संचारक डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल का कहना हैं.
गंगा (भागीरथी नदी )का भविष्य केवल योजनाओं पर नहीं,बल्कि समाज की जागरूकता और विज्ञान की समझ पर निर्भर करता है। बैक्टीरियोफेज जैसे सूक्ष्म तंत्र हमें यह सिखाते हैं कि प्रकृति स्वयं में समाधान छिपाए हुए है.जरूरत है उसे समझने और संरक्षित करने की।
स्पष्ट है कि गंगा की रक्षा केवल पर्यावरण का प्रश्न नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ विषय है। यदि आज हम सजग होकर सामूहिक प्रयास करें, तो गंगा की धारा हमेशा की तरह जीवनदायिनी बनी रहेगी।
    user_Virendra singh negi
    Virendra singh negi
    डुंडा, उत्तर काशी, उत्तराखंड•
    21 hrs ago
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