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टांडा कोतवाली क्षेत्र के मीरानपुर मोहल्ले का है जहां, शीला गुप्ता पत्नी गणेश गुप्ता अपनी दस वर्षीय बेटी परी के साथ रहते थे , गणेश की शादी ग्यारह साल पहले सुलतान पुर जनपद में हुई थी, पड़ोसियों ने बताया कि शीला किसी के यहां आती जाती नहीं थी और मोहल्ले में न ही किसी से मेलजोल रखती थी, दोपहर में बेटी ने अपने पिता को फोन करके बताया कि मम्मी फंदे से लटक रही हैं, गणेश पर मानो पहाड़ टूट पड़ा वो दौड़ता हुआ घर आया देख तो पत्नी शीला कमरे में फंदे से झूल रही थी, गणेश ने पहले अपने बगल को सूचना दी और पुलिस को भी ,जिसने भी सुना सब हैरान रह गए मौके पर पहुंची पुलिस ने पहले फॉरेंसिक टीम को सूचना दी फॉरेंसिक टीम मौके पर पर पहुंच कर जांच प्रक्रिया को पूरा किया और पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया,

3 hrs ago
user_Anant kushwaha
Anant kushwaha
Local News Reporter अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
3 hrs ago

टांडा कोतवाली क्षेत्र के मीरानपुर मोहल्ले का है जहां, शीला गुप्ता पत्नी गणेश गुप्ता अपनी दस वर्षीय बेटी परी के साथ रहते थे , गणेश की शादी ग्यारह साल पहले सुलतान पुर जनपद में हुई थी, पड़ोसियों ने बताया कि शीला किसी के यहां आती जाती नहीं थी और मोहल्ले में न ही किसी से मेलजोल रखती थी, दोपहर में बेटी ने अपने पिता को फोन करके बताया कि मम्मी फंदे से लटक रही हैं, गणेश पर मानो पहाड़ टूट पड़ा वो दौड़ता हुआ घर आया देख तो पत्नी शीला कमरे में फंदे से झूल रही थी, गणेश ने पहले अपने बगल को सूचना दी और पुलिस को भी ,जिसने भी सुना सब हैरान रह गए मौके पर पहुंची पुलिस ने पहले फॉरेंसिक टीम को सूचना दी फॉरेंसिक टीम मौके पर पर पहुंच कर जांच प्रक्रिया को पूरा किया और पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया,

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    अम्बेडकरनगर 
चलती कार मे अचानक लगी आग,
कूद कर लोगो ने बचाई अपनी जान
कार में अचानक शार्ट सर्किट से लगी आग 
फायर ब्रिगेड के आने से पहले स्थानीय लोगों ने बाल्टी से पानी डाल, आग को किया काबू
कार मे आग लगने से आस पास रहा अफरा तफरी का माहौल
मामला शहजादपुर स्थित गांधी चौक के समीप  का
    user_Anant kushwaha
    Anant kushwaha
    Local News Reporter अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • Post by Dushyant Kumar Journalist
    1
    Post by Dushyant Kumar Journalist
    user_Dushyant Kumar Journalist
    Dushyant Kumar Journalist
    City Star अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी
    1
    Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी
    user_द कहर न्यूज़ एजेंसी
    द कहर न्यूज़ एजेंसी
    Journalist Bikapur, Ayodhya•
    7 hrs ago
  • अजीत मिश्रा (खोजी) "गैस एजेंसी या दलालों का अड्डा? कलवारी में सिस्टम पंगु, जनता बेहाल!" एजेंसी या 'भ्रष्टाचार का अड्डा'? बस्ती में भरत सरल गैस एजेंसी का काला खेल बेनकाब! उज्ज्वला के अरमानों पर पानी फेरता कलवारी का 'गैस सिंडिकेट', प्रशासन आखिर मौन क्यों? धूप में जलती जनता, दफ्तर में सोते अधिकारी: कलवारी में गैस के लिए हाहाकार! "गैस चाहिए तो दलाल लाओ!" – भरत सरल गैस एजेंसी की खुली मनमानी। बस्ती मंडल की शर्मनाक तस्वीर: धूप में बिलखते बच्चे और सिलेंडर के लिए तरसती मां! दलाली के चक्रव्यूह में फंसी कलवारी की जनता, क्या डीएम बस्ती करेंगे एक्शन? ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश ​दिनांक: 16 अप्रैल, 2026 स्थान: कलवारी, बस्ती ​कलवारी (बस्ती): एक तरफ सरकार 'उज्ज्वला' के दम पर गरीबों के चूल्हे जलाने का दम भरती है, तो दूसरी तरफ बस्ती जिले के कलवारी स्थित 'भरत सरल गैस एजेंसी' में यह दम घुटता नजर आ रहा है। यहाँ अव्यवस्था का आलम यह है कि गरीब जनता सुबह की पहली किरण के साथ ही लाइन में लग जाती है, लेकिन शाम ढलने तक उनके हाथ लगती है तो सिर्फ मायूसी और पसीना। ​धूप में जलती जनता, दलालों की चाँदी! ​भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में घंटों भूखे-प्यासे खड़े उपभोक्ताओं का धैर्य अब जवाब दे रहा है। स्थानीय लोगों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि एजेंसी के भीतर 'दलाल राज' हावी है। आम आदमी जो कतार में खड़ा है, उसे "स्टॉक खत्म" का बोर्ड दिखा दिया जाता है, जबकि पिछले दरवाजे से दलाल बेखौफ होकर सिलेंडर पार कर रहे हैं। ​बड़ा सवाल: क्या गैस एजेंसी के कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना यह 'काला खेल' मुमकिन है? आखिर क्यों गरीब के हक पर डाका डालने वाले इन दलालों पर नकेल नहीं कसी जा रही? ​प्रशासन की चुप्पी पर खड़े होते सवाल ​जनता का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायत की, लेकिन नतीजा 'सिफर' रहा। ऐसा लगता है कि जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे या उग्र प्रदर्शन का इंतजार कर रहे हैं।​मुख्य बिंदु जो जांच के घेरे में हैं: ​अघोषित वेटिंग: सुबह से शाम तक लाइन लगवाने के पीछे की मंशा क्या है? ​दलाल सक्रियता: दलालों को प्राथमिकता और आम जनता को दुत्कार क्यों? ​सुविधाओं का अभाव: क्या एजेंसी परिसर में पीने के पानी या छाँव की कोई व्यवस्था है? पसीने से लथपथ बुजुर्ग और बिलखते बच्चे: यह कैसी व्यवस्था? ​अप्रैल की इस झुलसा देने वाली गर्मी में, जहाँ पारा 40 डिग्री के पार जा रहा है, वहाँ कलवारी की सड़कों पर लगी यह लंबी कतार प्रशासन की नाकामी की गवाही दे रही है। इस लाइन में कोई 70 साल का बुजुर्ग अपनी लाठी टेक कर खड़ा है, तो कोई महिला अपने दूधमुंहे बच्चे को आंचल में छिपाए घंटों से अपनी बारी का इंतजार कर रही है। ​लेकिन विडंबना देखिए, घंटों के इस 'अग्निपरीक्षा' के बाद भी जब उपभोक्ता काउंटर तक पहुँचता है, तो उसे सर्द जवाब मिलता है— "गैस खत्म हो गई है, कल आना।" ​दलाली का 'नेक्सस': पर्दे के पीछे का काला सच ​स्थानीय लोगों का आरोप है कि एजेंसी के भीतर एक समानांतर अर्थव्यवस्था चल रही है। ​पहुंच वाले 'खास' लोग: कतार में लगे गरीब को जो सिलेंडर 'नसीब' नहीं हो रहा, वही सिलेंडर दलालों के जरिए ऊंचे दामों पर कालाबाजारी के लिए पिछले दरवाजे से निकाल दिया जाता है। ​मिलीभगत का खेल: सूत्रों की मानें तो एजेंसी प्रबंधन और स्थानीय दलालों के बीच एक गहरा गठजोड़ है। दलाल बीच में आकर न केवल कतार तोड़ते हैं, बल्कि गैस की कृत्रिम किल्लत पैदा करके आम जनता को परेशान करते हैं ताकि वे मजबूरी में ज्यादा पैसे देकर सिलेंडर खरीदें। ​सरकारी दावों की उड़ी धज्जियाँ ​एक तरफ देश के प्रधानमंत्री 'ईज ऑफ लिविंग' (Ease of Living) की बात करते हैं, डिजिटल इंडिया का ढिंढोरा पीटा जाता है, लेकिन कलवारी की इस एजेंसी पर आकर सारे दावे दम तोड़ देते हैं। यहाँ न तो पानी की व्यवस्था है, न बैठने का कोई शेड, और न ही कतार को व्यवस्थित करने के लिए कोई सुरक्षाकर्मी। उपभोक्ता यहाँ इंसान नहीं, बल्कि भेड़-बकरियों की तरह हांक दिए जाते हैं। ​प्रशासनिक मौन: क्या रसूखदारों के आगे नतमस्तक है विभाग? ​हैरानी की बात यह है कि दिनदहाड़े हो रही इस लूट और अव्यवस्था की जानकारी स्थानीय पुलिस और रसद विभाग (Supply Department) को भी है, फिर भी उनकी 'रहस्यमयी चुप्पी' कई सवाल खड़े करती है। ​क्या अधिकारियों को जनता की तकलीफें नजर नहीं आतीं? ​क्या जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाएगी? ​गरीबों के हक का निवाला छीनने वाली इस एजेंसी का लाइसेंस आखिर रद्द क्यों नहीं किया जाता? ​ अब आर-पार की लड़ाई! ​भरत सरल गैस एजेंसी के बाहर जमा हुए आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटों के भीतर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और दलालों के प्रवेश पर प्रतिबंध नहीं लगा, तो वे तहसील मुख्यालय का घेराव करेंगे। बस्ती जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के आला अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागें। भरत सरल गैस एजेंसी के रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं। अगर जल्द ही इन 'सफेदपोश' दलालों और लापरवाह एजेंसी संचालकों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो आक्रोशित जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
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    अजीत मिश्रा (खोजी)
"गैस एजेंसी या दलालों का अड्डा? कलवारी में सिस्टम पंगु, जनता बेहाल!"
एजेंसी या 'भ्रष्टाचार का अड्डा'? बस्ती में भरत सरल गैस एजेंसी का काला खेल बेनकाब! उज्ज्वला के अरमानों पर पानी फेरता कलवारी का 'गैस सिंडिकेट', प्रशासन आखिर मौन क्यों?
धूप में जलती जनता, दफ्तर में सोते अधिकारी: कलवारी में गैस के लिए हाहाकार! "गैस चाहिए तो दलाल लाओ!" – भरत सरल गैस एजेंसी की खुली मनमानी।
बस्ती मंडल की शर्मनाक तस्वीर: धूप में बिलखते बच्चे और सिलेंडर के लिए तरसती मां! दलाली के चक्रव्यूह में फंसी कलवारी की जनता, क्या डीएम बस्ती करेंगे एक्शन?
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
​दिनांक: 16 अप्रैल, 2026
स्थान: कलवारी, बस्ती
​कलवारी (बस्ती): एक तरफ सरकार 'उज्ज्वला' के दम पर गरीबों के चूल्हे जलाने का दम भरती है, तो दूसरी तरफ बस्ती जिले के कलवारी स्थित 'भरत सरल गैस एजेंसी' में यह दम घुटता नजर आ रहा है। यहाँ अव्यवस्था का आलम यह है कि गरीब जनता सुबह की पहली किरण के साथ ही लाइन में लग जाती है, लेकिन शाम ढलने तक उनके हाथ लगती है तो सिर्फ मायूसी और पसीना।
​धूप में जलती जनता, दलालों की चाँदी!
​भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप में घंटों भूखे-प्यासे खड़े उपभोक्ताओं का धैर्य अब जवाब दे रहा है। स्थानीय लोगों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि एजेंसी के भीतर 'दलाल राज' हावी है। आम आदमी जो कतार में खड़ा है, उसे "स्टॉक खत्म" का बोर्ड दिखा दिया जाता है, जबकि पिछले दरवाजे से दलाल बेखौफ होकर सिलेंडर पार कर रहे हैं।
​बड़ा सवाल: क्या गैस एजेंसी के कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना यह 'काला खेल' मुमकिन है? आखिर क्यों गरीब के हक पर डाका डालने वाले इन दलालों पर नकेल नहीं कसी जा रही?
​प्रशासन की चुप्पी पर खड़े होते सवाल
​जनता का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिकायत की, लेकिन नतीजा 'सिफर' रहा। ऐसा लगता है कि जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे या उग्र प्रदर्शन का इंतजार कर रहे हैं।​मुख्य बिंदु जो जांच के घेरे में हैं:
​अघोषित वेटिंग: सुबह से शाम तक लाइन लगवाने के पीछे की मंशा क्या है?
​दलाल सक्रियता: दलालों को प्राथमिकता और आम जनता को दुत्कार क्यों?
​सुविधाओं का अभाव: क्या एजेंसी परिसर में पीने के पानी या छाँव की कोई व्यवस्था है?
पसीने से लथपथ बुजुर्ग और बिलखते बच्चे: यह कैसी व्यवस्था?
​अप्रैल की इस झुलसा देने वाली गर्मी में, जहाँ पारा 40 डिग्री के पार जा रहा है, वहाँ कलवारी की सड़कों पर लगी यह लंबी कतार प्रशासन की नाकामी की गवाही दे रही है। इस लाइन में कोई 70 साल का बुजुर्ग अपनी लाठी टेक कर खड़ा है, तो कोई महिला अपने दूधमुंहे बच्चे को आंचल में छिपाए घंटों से अपनी बारी का इंतजार कर रही है।
​लेकिन विडंबना देखिए, घंटों के इस 'अग्निपरीक्षा' के बाद भी जब उपभोक्ता काउंटर तक पहुँचता है, तो उसे सर्द जवाब मिलता है— "गैस खत्म हो गई है, कल आना।"
​दलाली का 'नेक्सस': पर्दे के पीछे का काला सच
​स्थानीय लोगों का आरोप है कि एजेंसी के भीतर एक समानांतर अर्थव्यवस्था चल रही है।
​पहुंच वाले 'खास' लोग: कतार में लगे गरीब को जो सिलेंडर 'नसीब' नहीं हो रहा, वही सिलेंडर दलालों के जरिए ऊंचे दामों पर कालाबाजारी के लिए पिछले दरवाजे से निकाल दिया जाता है।
​मिलीभगत का खेल: सूत्रों की मानें तो एजेंसी प्रबंधन और स्थानीय दलालों के बीच एक गहरा गठजोड़ है। दलाल बीच में आकर न केवल कतार तोड़ते हैं, बल्कि गैस की कृत्रिम किल्लत पैदा करके आम जनता को परेशान करते हैं ताकि वे मजबूरी में ज्यादा पैसे देकर सिलेंडर खरीदें।
​सरकारी दावों की उड़ी धज्जियाँ
​एक तरफ देश के प्रधानमंत्री 'ईज ऑफ लिविंग' (Ease of Living) की बात करते हैं, डिजिटल इंडिया का ढिंढोरा पीटा जाता है, लेकिन कलवारी की इस एजेंसी पर आकर सारे दावे दम तोड़ देते हैं। यहाँ न तो पानी की व्यवस्था है, न बैठने का कोई शेड, और न ही कतार को व्यवस्थित करने के लिए कोई सुरक्षाकर्मी। उपभोक्ता यहाँ इंसान नहीं, बल्कि भेड़-बकरियों की तरह हांक दिए जाते हैं।
​प्रशासनिक मौन: क्या रसूखदारों के आगे नतमस्तक है विभाग?
​हैरानी की बात यह है कि दिनदहाड़े हो रही इस लूट और अव्यवस्था की जानकारी स्थानीय पुलिस और रसद विभाग (Supply Department) को भी है, फिर भी उनकी 'रहस्यमयी चुप्पी' कई सवाल खड़े करती है।
​क्या अधिकारियों को जनता की तकलीफें नजर नहीं आतीं?
​क्या जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाएगी?
​गरीबों के हक का निवाला छीनने वाली इस एजेंसी का लाइसेंस आखिर रद्द क्यों नहीं किया जाता?
​ अब आर-पार की लड़ाई!
​भरत सरल गैस एजेंसी के बाहर जमा हुए आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटों के भीतर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और दलालों के प्रवेश पर प्रतिबंध नहीं लगा, तो वे तहसील मुख्यालय का घेराव करेंगे। बस्ती जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के आला अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागें। भरत सरल गैस एजेंसी के रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं। अगर जल्द ही इन 'सफेदपोश' दलालों और लापरवाह एजेंसी संचालकों पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो आक्रोशित जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • Post by Dinesh yadav
    1
    Post by Dinesh yadav
    user_Dinesh yadav
    Dinesh yadav
    Political party office Harraiya, Basti•
    9 hrs ago
  • 🙏👍
    1
    🙏👍
    user_Santosh Jaiswal
    Santosh Jaiswal
    Basti, Uttar Pradesh•
    9 hrs ago
  • Post by Dushyant Kumar Journalist
    1
    Post by Dushyant Kumar Journalist
    user_Dushyant Kumar Journalist
    Dushyant Kumar Journalist
    City Star अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • 📰 “केवटला परिवार रजिस्टर विवाद: जमीनी हकीकत में नया मोड़” अम्बेडकरनगर (बसखारी)। विकासखंड बसखारी के ग्राम सभा केवटला में परिवार रजिस्टर को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार मीडिया में खबरें प्रकाशित हो रही हैं। लेकिन जब इस पूरे मामले की जमीनी स्तर पर पड़ताल की गई, तो तस्वीर कुछ अलग ही सामने आई। स्थानीय स्तर पर की गई जांच में यह संकेत मिले हैं कि मामला जितना सीधा दिखाया जा रहा है, उतना है नहीं। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि —पूर्व सेक्रेटरी—को निशाना बनाकर झूठे तथ्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। कई लोगों का मानना है कि सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है। ग्राम सभा केवटला में इस समय एक ही विषय चर्चा का केंद्र बना हुआ है—मनीष दास और अंकुर से जुड़ा यह विवाद। लोग अपने-अपने स्तर पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर वास्तविक दोषी कौन है और किसके इशारे पर यह पूरा घटनाक्रम सामने आया। ग्रामीणों का कहना है कि “झूठ कब तक टिकेगा, अंततः सच सामने आकर ही रहेगा।” वहीं प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी नजरें टिकी हुई हैं। अब यह देखना अहम होगा कि अधिकारी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई को सामने लाते हैं या नहीं। 📌 सवाल अभी भी बाकी हैं: परिवार रजिस्टर में वास्तविक छेड़छाड़ किसने की? क्या किसी को जानबूझकर फंसाने की कोशिश हो रही है? प्रशासन कब तक इस मामले में स्पष्ट स्थिति देगा? 👉 कुल मिलाकर, यह मामला अब केवल एक रजिस्टर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा और जांच का विषय बन चुका है। अब सबकी निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और सच्चाई के खुलासे पर टिकी हैं।
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    📰 “केवटला परिवार रजिस्टर विवाद: जमीनी हकीकत में नया मोड़”
अम्बेडकरनगर (बसखारी)।
विकासखंड बसखारी के ग्राम सभा केवटला में परिवार रजिस्टर को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार मीडिया में खबरें प्रकाशित हो रही हैं। लेकिन जब इस पूरे मामले की जमीनी स्तर पर पड़ताल की गई, तो तस्वीर कुछ अलग ही सामने आई।
स्थानीय स्तर पर की गई जांच में यह संकेत मिले हैं कि मामला जितना सीधा दिखाया जा रहा है, उतना है नहीं। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि —पूर्व सेक्रेटरी—को निशाना बनाकर झूठे तथ्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। कई लोगों का मानना है कि सच्चाई को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है।
ग्राम सभा केवटला में इस समय एक ही विषय चर्चा का केंद्र बना हुआ है—मनीष दास और अंकुर से जुड़ा यह विवाद। लोग अपने-अपने स्तर पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर वास्तविक दोषी कौन है और किसके इशारे पर यह पूरा घटनाक्रम सामने आया।
ग्रामीणों का कहना है कि “झूठ कब तक टिकेगा, अंततः सच सामने आकर ही रहेगा।” वहीं प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी नजरें टिकी हुई हैं। अब यह देखना अहम होगा कि अधिकारी निष्पक्ष जांच कर सच्चाई को सामने लाते हैं या नहीं।
📌 सवाल अभी भी बाकी हैं:
परिवार रजिस्टर में वास्तविक छेड़छाड़ किसने की?
क्या किसी को जानबूझकर फंसाने की कोशिश हो रही है?
प्रशासन कब तक इस मामले में स्पष्ट स्थिति देगा?
👉 कुल मिलाकर, यह मामला अब केवल एक रजिस्टर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा और जांच का विषय बन चुका है। अब सबकी निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और सच्चाई के खुलासे पर टिकी हैं।
    user_Khan Rizwan
    Khan Rizwan
    Farmer अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    22 hrs ago
  • 14 प्रैल को मनाया जाता है
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    14 प्रैल को मनाया जाता है
    user_Rohit Rajbhar
    Rohit Rajbhar
    Artist शाहगंज, जौनपुर, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
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