गिरिडीह जिले के देवरी और जमुआ प्रखंड में आहरों के जीर्णोद्धार को लेकर चल रहे विवाद के बीच उपायुक्त (DC) स्वयं मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान देवरी के लबनिया स्थित बड़की आहर और जमुआ के सुराज गांव स्थित दसोंधी आहर का निरीक्षण किया गया, जहाँ ग्रामीणों की समस्याओं को सुना गया। निरीक्षण के दौरान, ग्रामीणों ने अपनी मांगें और आपत्तियां उपायुक्त के समक्ष प्रस्तुत कीं। मौके पर तकनीकी खामियां पाए जाने के बाद, उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को इन मामलों में आवश्यक जांच और कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि दोनों ही मामलों में निर्णय जनता के हित को ध्यान में रखते हुए और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही लिया जाएगा। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता बनी रहे और सभी पक्षों की बात सुनी जाए।
गिरिडीह जिले के देवरी और जमुआ प्रखंड में आहरों के जीर्णोद्धार को लेकर चल रहे विवाद के बीच उपायुक्त (DC) स्वयं मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान देवरी के लबनिया स्थित बड़की आहर और जमुआ के सुराज गांव स्थित दसोंधी आहर का निरीक्षण किया गया, जहाँ ग्रामीणों की समस्याओं को सुना गया। निरीक्षण के दौरान, ग्रामीणों ने अपनी मांगें और आपत्तियां उपायुक्त के समक्ष प्रस्तुत कीं। मौके पर तकनीकी खामियां पाए जाने के बाद, उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को इन मामलों में आवश्यक जांच और कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि दोनों ही मामलों में निर्णय जनता के हित को ध्यान में रखते हुए और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही लिया जाएगा। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता बनी रहे और सभी पक्षों की बात सुनी जाए।
- सोशल मीडिया पर 'यही कड़वा सत्य है' नामक एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। यह पोस्ट एक सामान्य, लेकिन कड़वी सच्चाई को उजागर करती है और इसे अक्सर कॉमेडी, प्रैंक तथा ट्रेंडिंग वीडियो के रूप में साझा किया जा रहा है।1
- कोडरमा के मरकच्चो स्थित इंडेन गैस एजेंसी, त्रिदेव ग्रामीण वितरक, में भारी भीड़ और अव्यवस्था के कारण लोग बेहद परेशान हैं। शिकायत है कि कई उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, जिसके चलते लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। एजेंसी पर यह भी बड़ा सवाल उठाया जा रहा है कि 10 मिनट में गैस की बुकिंग और डिलीवरी कैसे दिखाई जा रही है। इस पूरी स्थिति के मद्देनजर, प्रशासन से तत्काल इस मामले की जांच करने और उचित कार्रवाई करने की मांग की गई है।1
- एबीपी न्यूज़ द्वारा की गई कवरेज को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। यह रिपोर्टिंग अब गहन जांच और आलोचना के घेरे में आ गई है, जिससे उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।1
- मध्य प्रदेश में पुलिस की गंभीर दुर्दशा सामने आई है, जहां एक भीड़ ने एक टीआई (थाना प्रभारी) को बंधक बना लिया। इस घटना के दौरान, भीड़ ने पुलिस जवानों को भी दौड़ा-दौड़ाकर बेरहमी से पीटा, जिसका एक वायरल वीडियो भी सामने आया है।1
- सर्रा क्षेत्र में पिछले कुछ घंटों से जारी मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। जहाँ एक ओर लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, वहीं सड़कों पर बाढ़ जैसे हालात के बीच कुछ ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जो पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई हैं। सर्रा के मुख्य बाजार और सड़कों पर घुटनों तक बह रहे तेज पानी के वीभत्स रूप के कारण स्थानीय लोगों का कीमती सामान और फुटवियर (चप्पल-जूते) बहने की खबरें आ रही हैं। ऐसी ही एक घटना आज दोपहर सर्रा के मुख्य चौराहे पर देखने को मिली, जब सड़क पार करते समय एक राहगीर का संतुलन बिगड़ गया। पानी का बहाव इतना तेज था कि उसकी कीमती चप्पलें देखते ही देखते पैर से निकलकर पानी में तैरती हुई आगे बढ़ गईं। पीड़ित राहगीर असहाय होकर चिल्लाता रहा, "वह गया दो, चप्पल!", लेकिन पानी की रफ्तार के आगे उसकी एक न चली। आस-पास खड़े लोग भी इस नजारे को देखकर हैरान रह गए। यह घटना अब पूरे इलाके में इस बात को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई है कि बारिश ने लोगों को पैदल चलने लायक भी नहीं छोड़ा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण सर्रा की सड़कें पूरी तरह तालाब में तब्दील हो चुकी हैं। जल निकासी प्रणाली (ड्रेनेज सिस्टम) फेल होने की वजह से पानी अब दुकानों और घरों के अंदर प्रवेश कर रहा है, जिससे दुकानदारों को लाखों के सामान के बर्बाद होने का डर सता रहा है। पैदल चलने वाले लोगों, विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए स्थिति बेहद खतरनाक हो गई है, क्योंकि सड़कों पर गड्ढे नहीं दिख रहे और पानी का तेज करंट उन्हें फिसलने पर मजबूर कर रहा है, जिससे उनके जूते-चप्पल बह रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने नगर निकाय और प्रशासन से तत्काल सड़कों पर जमे पानी को निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक पानी का स्तर कम नहीं होता, तब तक लोगों का घरों से निकलना और सुरक्षित वापस आना मुश्किल रहेगा। इस बीच, मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों तक बारिश जारी रहने की चेतावनी दी है, जिससे स्थानीय लोगों की चिंताएं और बढ़ गई हैं।1
- खान सर का कुछ दिन पहले का एक वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में, खान सर लड़कियों के बीच जागरूकता बढ़ाने का काम कर रहे हैं।1
- बंगाल की राजनीति में मचे उथल-पुथल के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या दिल्ली तक के सियासी गलियारों में इंडिया गठबंधन, ममता बनर्जी का समर्थन करेगा। इस मुद्दे पर जनता से अपनी राय साझा करने का आग्रह किया गया है।1
- हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों के प्रति लापरवाही और असंवेदनशीलता अपने चरम पर पहुँच गई है, जहाँ अव्यवस्थाओं में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा। हाल ही में, बरकठा निवासी नारायण दास को खून की उल्टी होने के बाद गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया, जहाँ परिजनों को अस्पताल कर्मियों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इसके चलते, गंभीर हालत में मरीज को इमरजेंसी वार्ड से न्यू बिल्डिंग तक परिजनों को स्वयं ले जाना पड़ा। इतना ही नहीं, मरीज को प्रथम तल्ले पर ले जाने के लिए लिफ्ट की अनिवार्यता के बावजूद, इसकी स्थिति भी बेहद भयावह और चिंताजनक पाई गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अस्पताल की लिफ्ट में एक बुजुर्ग महिला मरीज कई मिनटों तक फंसी रही, जिससे मरीजों और उनके परिजनों में दहशत फैल गई। लगातार सामने आ रही ये घटनाएँ दर्शाती हैं कि अस्पताल प्रशासन वार्ड बॉय, नर्सिंग स्टाफ और बुनियादी सुविधाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में पूरी तरह विफल रहा है, और इस प्रकार की असुरक्षित बुनियादी सुविधाएँ मरीजों की जान के साथ गंभीर खिलवाड़ मानी जा रही हैं। गंभीर मरीजों को समय पर सहायता न मिलना और लिफ्ट जैसी आवश्यक सुविधा का असुरक्षित होना अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है। इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लेते हुए, हेल्पिंग इंडिया ट्रस्ट ने अस्पताल अधीक्षक, सिविल सर्जन और जिला प्रशासन से तत्काल मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। ट्रस्ट ने यह भी मांग की है कि अस्पताल की लिफ्ट व्यवस्था, वार्ड बॉय सेवा और मरीज सहायता प्रणाली को बिना किसी देरी के दुरुस्त किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज की जान प्रशासनिक लापरवाही की भेंट न चढ़े।1
- झारखंड के कोडरमा में ट्रांसफार्मर जलने के कारण कई दिनों से बिजली आपूर्ति ठप रहने से ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लगातार बिजली न होने से उनका दैनिक जीवन पूरी तरह से प्रभावित हो गया था, जिसके चलते ग्रामीण प्रशासन के खिलाफ बेहद नाराज थे। अपनी इस गंभीर समस्या को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने उपायुक्त (डीसी) के काफिले को रोककर सड़क जाम कर दी। इस दौरान उन्होंने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। ग्रामीणों की मुख्य मांग थी कि जल्द से जल्द नया ट्रांसफार्मर लगाया जाए ताकि बिजली आपूर्ति बहाल हो सके। अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों की समस्या के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिए जाने के बाद ही यह मामला शांत हुआ और प्रदर्शन समाप्त किया गया।1