पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल) के तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट में आई रुकावट से भारत में एलपीजी आयात प्रभावित हुआ है। इसके जवाब में, केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य संचालित तेल कंपनियों (आईओसीएल, बीपीसीएल, एचपीसीएल) को कम से कम 30 दिनों की एलपीजी मांग के बराबर भंडारण क्षमता तैयार रखने का निर्देश दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने यह निर्देश जारी किए हैं। देश में एलपीजी की दैनिक मांग, जो पहले 80,000 मीट्रिक टन के आसपास थी, अब घटकर 72,000 मीट्रिक टन रह गई है, जबकि भारतीय रिफाइनरियां प्रतिदिन 52,000 मीट्रिक टन एलपीजी का उत्पादन कर रही हैं। शेष मांग के लिए भारत अभी भी आयात पर निर्भर है, जो वर्तमान में चुनौतीपूर्ण है। सरकार ने पैनिक बुकिंग को रोकने और मांग को नियंत्रित करने के लिए भी कई कदम उठाए हैं। इस संकट का असर छत्तीसगढ़ पर भी पड़ सकता है, जहां उज्ज्वला योजना के तहत लाखों कनेक्शन हैं और आयातित एलपीजी पर निर्भरता अधिक है। मार्च 2026 में, छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष (कांग्रेस) ने एलपीजी सिलेंडर की कमी को लेकर हंगामा किया था, जिससे रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, रायगढ़ जैसे कई जिलों में होटल-रेस्तरां और घरेलू उपभोक्ताओं को परेशानी हुई थी और ब्लैक मार्केटिंग की शिकायतें भी सामने आई थीं। वर्तमान में, राज्य में घरेलू एलपीजी की आपूर्ति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन व्यावसायिक एलपीजी अभी भी सीमित है। केंद्र के इस नए आदेश से रायपुर, बिलासपुर, कोरबा जैसे बड़े शहरों और आदिवासी क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी, तथा आईओसीएल और बीपीसीएल के रायपुर और जगदलपुर जैसे डिपो में अतिरिक्त भंडारण क्षमता बढ़ाई जाएगी। स्वतंत्र न्यूज़ छत्तीसगढ़ के विश्लेषण के अनुसार, यह आदेश केवल सावधानी नहीं बल्कि एक रणनीतिक तैयारी है, क्योंकि होर्मुज संकट के लंबा खिंचने पर छत्तीसगढ़ जैसे उपभोक्ता-राज्यों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। हालांकि गर्मी के मौसम में राज्य में एलपीजी की मांग थोड़ी कम रहती है, लेकिन मानसून में परिवहन बाधित होने पर समस्या बढ़ सकती है। इसलिए राज्य सरकार को अब केंद्र के इस आदेश के साथ मिलकर स्थानीय वितरकों को मजबूत करने की आवश्यकता है। सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने और पीएनजी पाइपलाइन को बढ़ावा देने पर भी जोर दे रही है।
पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल) के तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट में आई रुकावट से भारत में एलपीजी आयात प्रभावित हुआ है। इसके जवाब में, केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य संचालित तेल कंपनियों (आईओसीएल, बीपीसीएल, एचपीसीएल) को कम से कम 30 दिनों की एलपीजी मांग के बराबर भंडारण क्षमता तैयार रखने का निर्देश दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने यह निर्देश जारी किए हैं। देश में एलपीजी की दैनिक मांग, जो पहले 80,000 मीट्रिक टन के आसपास थी, अब घटकर 72,000 मीट्रिक टन रह गई है, जबकि भारतीय रिफाइनरियां प्रतिदिन 52,000 मीट्रिक टन एलपीजी का उत्पादन कर रही हैं। शेष मांग के लिए भारत अभी भी आयात पर निर्भर है, जो वर्तमान में चुनौतीपूर्ण है। सरकार ने पैनिक बुकिंग को रोकने और मांग को नियंत्रित करने के लिए भी कई कदम उठाए हैं। इस संकट का असर छत्तीसगढ़ पर भी पड़ सकता है, जहां उज्ज्वला योजना के तहत लाखों कनेक्शन हैं और आयातित एलपीजी पर निर्भरता अधिक है। मार्च 2026 में, छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष (कांग्रेस) ने एलपीजी सिलेंडर की कमी को लेकर हंगामा किया था, जिससे रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, रायगढ़ जैसे कई जिलों में होटल-रेस्तरां और घरेलू उपभोक्ताओं को परेशानी हुई थी और ब्लैक मार्केटिंग की शिकायतें भी सामने आई थीं। वर्तमान में, राज्य में घरेलू एलपीजी की आपूर्ति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन व्यावसायिक एलपीजी अभी भी सीमित है। केंद्र के इस नए आदेश से रायपुर, बिलासपुर, कोरबा जैसे बड़े शहरों और आदिवासी क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी, तथा आईओसीएल और बीपीसीएल के रायपुर और जगदलपुर जैसे डिपो में अतिरिक्त भंडारण क्षमता बढ़ाई जाएगी। स्वतंत्र न्यूज़ छत्तीसगढ़ के विश्लेषण के अनुसार, यह आदेश केवल सावधानी नहीं बल्कि एक रणनीतिक तैयारी है, क्योंकि होर्मुज संकट के लंबा खिंचने पर छत्तीसगढ़ जैसे उपभोक्ता-राज्यों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। हालांकि गर्मी के मौसम में राज्य में एलपीजी की मांग थोड़ी कम रहती है, लेकिन मानसून में परिवहन बाधित होने पर समस्या बढ़ सकती है। इसलिए राज्य सरकार को अब केंद्र के इस आदेश के साथ मिलकर स्थानीय वितरकों को मजबूत करने की आवश्यकता है। सरकार घरेलू उत्पादन बढ़ाने और पीएनजी पाइपलाइन को बढ़ावा देने पर भी जोर दे रही है।
- हमीरपुर जिले में बेतवा नदी पर बन रहे एक पुल का बड़ा हिस्सा 29 मई 2026 की रात करीब 2-3 बजे आए भारी तूफान और तेज हवाओं के कारण अचानक ढह गया। इस भीषण हादसे में 6 मजदूरों की मौत हो गई। यह दुर्घटना कुरारा क्षेत्र के मोरकंदर (मौराकंदर) और नैथी/कंदौर गांवों के बीच घटी, जहाँ निर्माणाधीन पुल की कंक्रीट स्लैब नीचे गिर गई। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त मजदूर घटनास्थल पर सो रहे थे। मृतकों की पहचान लोकेंद्र निषाद, कुलदीप निषाद, सावंत यादव, सभाजीत, पुष्पेंद्र सिंह चौहान और राजेश पाल के रूप में हुई है, जबकि तीन अन्य मजदूर घायल हुए हैं। घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस मामले में सहायक अभियंता को निलंबित कर दिया गया है, ठेकेदार के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश भी दिए गए हैं।1
- एक मैच में हार के बाद वैभव सूर्यवंशी पूरी तरह टूट गए, जिसका एक भावुक कर देने वाला वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में वैभव सूर्यवंशी अपनी टोपी से अपना चेहरा छिपाकर खूब रोते हुए दिखाई दे रहे हैं।1
- भीषण गर्मी के इस दौर में एक मेडिकल कॉलेज अस्पताल की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ गई है।1
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोबरा नवापारा में 108 और 102 आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं का स्थायी स्टॉपेज न होने के कारण मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आपातकाल में कॉल करने पर एंबुलेंस के देर से पहुँचने के कारण कई मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है। स्वास्थ्य केंद्र प्रबंधन ने शासन को पत्र लिखकर इस समस्या से अवगत कराया है, जहाँ बताया गया कि आपात स्थिति में एंबुलेंस दूर-दराज से आती हैं, जिससे महत्वपूर्ण 'गोल्डन आवर' निकल जाता है और मरीजों को समय पर रेफर या उपचार नहीं मिल पाता। प्रसव, सड़क हादसे और हार्ट अटैक जैसी स्थितियों में यह देरी जानलेवा साबित हो रही है। गौरतलब है कि केंद्र के पास केवल एक शासकीय वाहन चालक है, जिसकी ड्यूटी केवल कार्यदिवस में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक रहती है, जिसके चलते रात और अवकाश के दिनों में आपातकालीन सेवाएं पूरी तरह ठप रहती हैं। इस गंभीर विषय पर विधायक इंद्रकुमार साहू ने बताया कि उन्होंने मंत्री और संबंधित जिला स्वास्थ्य अधिकारी को इसकी जानकारी दी है और जल्द ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एंबुलेंस स्टॉपेज की व्यवस्था कराई जाएगी। वहीं, नगर के लोग सुशासन तिहार शिविर में उच्च अधिकारियों को लिखित में इस समस्या से दोबारा अवगत कराने की तैयारी में हैं। क्षेत्रवासियों ने कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग से जनहित में गोबरा नवापारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तत्काल 108 और 102 एंबुलेंस की तैनाती की मांग की है, ताकि आपातकाल में मरीजों को समय पर जीवनरक्षक सेवा मिल सके।1
- राज टॉकीज रायपुर अब दर्शकों के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा प्रदान कर रहा है। दर्शक बुक माय शो (Book My Show) के माध्यम से अपनी टिकटें ऑनलाइन बुक कर सकते हैं। अधिक जानकारी या सहायता के लिए 0771-2229223 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके साथ ही, राज टॉकीज ने एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया है, जिसमें जुड़ने के लिए लिंक दिया गया है। दर्शकों से अनुरोध किया गया है कि वे खुद ग्रुप से जुड़ें और यह लिंक अन्य लोगों के साथ भी साझा करें।1
- राजनांदगांव के घुमका में नगर पंचायत चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच पूर्व सांसद अभिषेक सिंह घुमका पहुंचे, जहाँ उन्होंने एक आमसभा को संबोधित करते हुए भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। अपने संबोधन में अभिषेक सिंह ने कांग्रेस और भाजपा के घोषणा पत्रों की तुलना करते हुए कहा कि उन्होंने दोनों घोषणा पत्र पढ़े हैं। उन्होंने बताया कि जहाँ कांग्रेस अपने घोषणा पत्र में 'प्रयास करेंगे' लिखती है, वहीं भाजपा अपने घोषणा पत्र में साफ तौर पर 'हम करेंगे' का संकल्प लेती है। अभिषेक सिंह ने इसे दोनों दलों की सोच का अंतर बताया और कहा कि कांग्रेस सिर्फ प्रयास की बात करती है, जबकि भाजपा विकास कार्यों को हिम्मत और अधिकार के साथ पूरा करने का संकल्प लेती है। सिंह ने आगे कहा कि भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में शहर और गाँव के विकास के लिए स्पष्ट वादे किए हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए पार्टी प्रतिबद्ध है। उन्होंने लोगों से घुमका के विकास के लिए मजबूत नेतृत्व और स्पष्ट नीति की आवश्यकता बताते हुए भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने की अपील की।1
- छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समस्याओं के समाधान हेतु 'सुशासन तिहार' शिविर लगाए जा रहे हैं, लेकिन दुर्ग जिले में अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों की समस्या सुलझाने के बजाय बदसलूकी करने का मामला सामने आया है। हाल ही में थनौद गाँव में चल रहे एक 'सुशासन तिहार' शिविर के दौरान एक बड़ा विवाद हुआ, जहाँ भाजपा विधायक ललित चंद्राकर की मौजूदगी में एक शिकायतकर्ता और जनपद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के बीच तीखी बहस हो गई। यह पूरा मामला गाँव के सरकारी स्कूल की ज़मीन पर बने एक सामुदायिक भवन से जुड़ा है। भाजपा मंडल महामंत्री पुराण देशमुख ने पूर्व में इस निर्माण का विरोध किया था, जिसके बाद जनपद CEO रूपेश पांडेय ने इस पर स्टे लगा दिया था। हालाँकि, स्टे के बावजूद अधूरा भवन धीरे-धीरे पूरा कर दिया गया और जनपद मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा राशि भी जारी कर दी गई। पुराण देशमुख ने इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की थी, जिसके बाद दुर्ग कलेक्टर ने कथित तौर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी को राशि वसूली के मौखिक आदेश दिए थे, पर अब तक यह वसूली नहीं की गई है। आज जब पुराण देशमुख इसी बात को लेकर फिर से आवेदन देने पहुँचे, तो आयोजन स्थल पर जनपद मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने उन्हें शिकायत न करने के लिए धमकाया। विधायक के सामने ही जनपद मुख्य कार्यकारी अधिकारी रूपेश पांडेय ने भाजपा कार्यकर्ता को उंगलियाँ दिखाते हुए अपनी मर्यादाएँ लांघीं। रिपोर्ट के अनुसार, दुर्ग जनपद मुख्य कार्यकारी अधिकारी रूपेश पांडेय का यह विवादित और अव्यवहारिक बर्ताव पहला नहीं है। इससे पूर्व भी उनके खिलाफ ऐसे व्यवहार की कई शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। हाल ही में दुर्ग जनपद के अंतर्गत ही एक महिला सचिव ने भी मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा प्रताड़ित किए जाने की शिकायत की थी, और वह मामला भी अब तक लंबित है। इस पूरे घटनाक्रम पर विधायक ललित चंद्राकर ने कहा है कि किसी भी अधिकारी का ऐसा व्यवहार करना बिल्कुल ठीक नहीं है, और उन्होंने ऐसे अधिकारियों पर निश्चित रूप से कार्रवाई करने की बात कही है।1