logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

केवल सुंदरकांड पढ़ने और सुनने से कोई लाभ नहीं होगा - पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज केवल सुंदरकांड पढ़ने और सुनने से कोई लाभ नहीं होगा - पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह श्रीराम कथा में शामिल हुए, दक्षिणमुखी हनुमान जी की आरती उतारी सागर। श्री रामचरितमानस में भगवान की पूरी कथा है। मानस जी में ही लिखा है कि भगवान की कथा अति हरि कृपा होने से ही प्राप्त होती है। कथा प्रारंभ से अंत तक पढ़नीऔर सुननी चाहिए, खंडित करके नहीं। कक्षा 2, 4, 5 में नहीं पढ़कर सीधे मास्टर की पढ़ाई की जा सकती है क्या? उक्त बातें मध्य प्रदेश के सागर स्थित रुद्राक्ष धाम में निर्मित भव्य कथा मंडप में सप्त दिवसीय श्री राम कथा का गायन के क्रम में पूर्णाहुति सत्र की कथा का गायन करते हुए पूज्यश्री प्रेमभूषण जी महाराज ने व्यासपीठ से कहीं। श्रीराम कथा के पूर्णाहुति सत्र में केंद्रीय कृषि कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मंत्री पं गोपाल भार्गव,अनेक विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायकों सहित अनेक जनप्रतिनिधि शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान कथा पंडाल के पश्चात रुद्राक्ष धाम प्रांगण पहुंच कर दक्षिणमुखी हनुमान जी मंदिर के दर्शन किए और आरती की। सरस् श्रीराम कथा गायन के लिए लोक ख्याति प्राप्त प्रेममूर्ति प्रेमभूषण जी महाराज ने प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री एवं वर्तमान विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह जी के पावन संकल्प से आयोजित रामकथा के क्रम में किष्किंधा कांड, सुंदरकांड, लंका कांड और श्री राम राज्याभिषेक तक की कथा का गायन करते हुए कहा कि सनातन समाज में अखंड रामायण की परंपरा रही है। इस परंपरा का ही पालन किया जाना सबके हित में है। गृहस्थी में रहने वाले लोगों को भी क्रम से ही मानस जी का पाठ करना चाहिए। क्रम से पढ़ने और सुनने से ही कुछ प्राप्त हो पाता है।महाराज जी ने कहा कि कथा तो भगवान की ही सुनने लायक है। हर जीव के पास उसकी कथा से ज्यादा उसकी व्यथा है। भगवान की कथा जीव की व्यथा का हरण कर लेती है। प्रभु की कथा हम जितनी बार सुनते हैं नित्य नई लगती है और मन को शांति प्रदान करती है। महाराज जी ने कहा कि मनुष्य का मूल कार्य है सत्कर्म में लगे रहना, लेकिन अधिकांश लोग तो मूल को ही भूल कर बैठ जाते हैं। मनुष्य को संसार की चर्चा और चिंता करने से पहले स्वयं के बारे में विचार करने की आवश्यकता है। हमें अपने स्वयं के लिए भगवान के आश्रय में ले जाने की आवश्यकता होती है किसी और के लिए नहीं। भक्ति पथ पर बने रहने के लिए ही निरंतर भगवान की कथा का श्रवण करना आवश्यक है। केवल जगदीश में रमने से ही कल्याण होगा। पूज्य श्री ने कहा कि अपने घर में अगर हम भाव के साथ भगवान की सेवा करें तो भगवान खाते भी हैं, नहाते भी हैं, सोते भी हैं और मनुष्य जो भी उत्तम व्यवहार करता है, वह सब करते हैं। समस्या यह है कि सामान्य मनुष्य ने भगवान की जीव भाव रख कर उनकी सेवा कभी की ही नहीं। हमारे घर में जो भगवान हैं या हमारे साथ जो भगवान चलते हैं। सुबह स्नान करते हैं, जलपान करते हैं और वह भोग भी लगाते हैं और वही प्रसाद हम पाते हैं। आम आदमी जो कुछ भी सात्विक भोजन करता है, हमारे भगवान वही पाते हैं। पूज्यश्री ने कहा कि आश्चर्य तो तब होता है जब भगवान को लोग एक छोटी सी कटोरी में मिश्री के चार दाने भोग लगा देते हैं और खुद तरह-तरह के पकवान खाते रहते हैं। महाराज श्री ने बताया कि हमारे सनातन सदग्रंथों में यह स्पष्ट बताया गया है कि हर वस्तु की अंतिम इच्छा अपने उद्गम में ही समाहित होने की होती है। जिस प्रकार धरती पर कहीं भी जल हो उसकी इच्छा नदियों के माध्यम से जाकर समुद्र में ही समाहित होना होता है। इसी प्रकार ईश्वर का अंश, हर जीव पुनः ईश्वर में ही समाहित होने के लिए ही प्रयासरत होता है। यही उसका अंतिम लक्ष्य होता है। यह अलग बात है कि अपने लक्ष्य के बारे में जानने वाले लोग बहुत कम होते हैं। लक्ष्य को जानने और पाने में कई जन्म बीत जाते हैं। पूज्य महाराज श्री ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि व्यक्ति अपने शरीर को ही स्वयं की उपस्थिति मान लेता है। जबकि वास्तविकता यह है कि शरीर तो एक माध्यम है, उस आत्मा का जो परमात्मा से यह कह कर धरती पर आता है कि हम आप का ही गुणगान करते हुए आपके चरणों तक पहुंचने का प्रयास करेंगे। पूज्य महाराज श्री ने कहा कि भगवान को पहले मानें फिर उन्हें जान लेंगे। अगर सामान्य मनुष्य को भगवान तक पहुंचने की यात्रा करनी है तो सबसे पहले उन्हें सदगुरु के आश्रय में जाने की आवश्यकता है। भगवान की अति कृपा के बिना धाम में किसी मनुष्य का पहुंचना भी संभव नहीं हो पाता है। गृहस्थ जीवन में रहने वाले लोगों को अपने सारे कार्य करते हुए साल में एक दो बार किसी न किसी धाम में पहुंचने का प्रयास अवश्य करना चाहिए। पूज्य श्री ने कहा कि अपने जीवन मे मनुष्य अपनी संपत्ति का उत्तराधिकारी तो तय कर देता है, लेकिन उसने जो परमार्थ कार्य किया है, उसे भी आगे बढ़ाने की कोई व्यवस्था नहीं सोचता है। महाराज जी ने कई सुमधुर भजनों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। हजारों की संख्या में उपस्थित रामकथा के प्रेमी भजनों का आनन्द लेते और झूमते रहे। धर्म का महायज्ञ मानव को सेवा और प्रेम का मार्ग दिखाता है : श्री शिवराज सिंह चौहान सागर। धर्म का वास्तविक स्वरूप सेवा और प्रेम में निहित है। केन्द्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धर्म का महायज्ञ मानव को स्वार्थ से ऊपर उठकर सेवा, भक्ति और प्रेम का मार्ग दिखाता है। परमपूज्य पं. प्रेमभूषण जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मानव जीवन का परम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति और समाज के कल्याण के लिए कर्मरत रहना है।यह उद्गार केंद्रीय कृषि कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रुद्राक्ष धाम मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीराम कथा मंच से अपने संबोधन में व्यक्त किए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि व्यासपीठ पर विराजमान परमपूज्य पं. प्रेमभूषण जी महाराज का जीवन प्रेम, ज्ञान और भक्ति का अनुपम उदाहरण है। आत्मा के मोक्ष और जगत के कल्याण के लिए की जाने वाली उनकी कथाएं समाज को सही दिशा देती हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिणमुखी हनुमान जी के भव्य मंदिर का निर्माण कराने वाले आदरणीय भूपेन्द्र सिंह जी वास्तव में सौभाग्यशाली हैं। ऐसे कार्य केवल ईश्वर की विशेष कृपा से ही संभव होते हैं। उन्होंने सभी संतगणों एवं उपस्थित अतिथियों को सादर प्रणाम किया। श्री चौहान ने कहा कि अभी उन्हें नेता कहकर संबोधित किया गया, लेकिन सच्चा आनंद नेता बनने में नहीं बल्कि सेवक बनकर कार्य करने में है। मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति और आनंद की अनुभूति है। शास्त्रों में भगवान को प्राप्त करने के तीन मार्ग बताए गए हैंकृज्ञान, भक्ति और कर्म। उन्होंने कहा कि ज्ञान मार्ग में यह बताया गया है कि सत्य केवल ब्रह्म है और शेष सब मिथ्या है, जैसा कि प्रेमभूषण जी महाराज अपने उपदेशों से समझा रहे हैं। भक्ति मार्ग पर चलने वाला भक्त भगवान की भक्ति में पूर्णतः रम जाता हैकृकोई उन्हें स्वामी मानता है तो कोई पिता। कर्म मार्ग में भगवान द्वारा निर्धारित कर्तव्यों को ईमानदारी और परिश्रम से निभाने की प्रेरणा दी गई है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी कहा है कि कर्म किए बिना कोई रह नहीं सकता। अपने संबोधन में श्री चौहान ने रामायण की एक प्रेरक कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि माता सीता द्वारा हनुमान जी को दी गई मोतियों की माला को हनुमान जी ने इसलिए तोड़ दिया क्योंकि उसमें उन्हें अपने प्रभु श्रीराम और माता सीता दिखाई नहीं दिए। उन्होंने अपने सीने को चीरकर राम-सीता को प्रकट कर यह सिद्ध किया कि उनके लिए वही वस्तु मूल्यवान है जिसमें प्रभु का वास हो। उन्होंने कहा कि सृष्टि के कण-कण में सीता-राम विराजमान हैं, इसलिए सभी को अपने समान मानना चाहिए। प्रेम ही भगवान की सबसे बड़ी पूजा है और सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं। जितनी सेवा संभव हो, उतनी सेवा करनी चाहिए, क्योंकि वास्तव में दूसरा कोई है ही नहीं। श्री चौहान ने कहा कि जब तक जीवन है, तब तक दूसरों के सुख और आनंद के लिए कार्य करना ही सच्ची साधना है, और वे स्वयं भी निरंतर इसी प्रयास में लगे हुए हैं। पूर्व गृहमंत्री, विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह ने आभार ज्ञापित किया आभार ज्ञापन करते हुए पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक श्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले सात दिनों में भगवान श्री राधाकृष्ण जी व दक्षिण मुखी हनुमान जी के दर्शन और श्री राम कथा का आप सभी ने धर्म लाभ लिया। रुद्राक्ष धाम भगवान की जागृत भूमि है। यहां हमारे गुरु देव प्रभाकर शास्त्री दद्दा के सानिंध्य में 2014 में सात दिवस में 39 करोड़ पार्थिव शिवलिंग का निर्माण हुआ था और उनका रुद्र अभिषेक हुआ था। ऐसा सौभाग्य प्राप्त करने वाली यह भारत की इकलौती भूमि है। 108 पुराण, श्री मद्भागवत कथा भी उन सात दिनों में हुई, इसीलिए इसका नाम रुद्राक्ष धाम रखा गया, यहां के कण कण में शिव हैं। भगवान श्री राम ने लंका विजय प्राप्त करने से पूर्व रामेश्वरम में बालू के शिवलिंग बना कर अभिषेक किया और लंका पर विजय प्राप्त कर ली थी। पूज्य गुरु दद्दा जी ने 4 जुलाई,2016 को राधाकृष्ण जी की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की, प्रतिमा का चयन भी उन्हीं ने किया था। पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि रुद्राक्ष धाम मंदिर में कभी भी किसी भी निर्माण, व्यवस्था, कथा आदि के लिए कभी एक रुपए का चंदा, आर्थिक सहयोग नहीं लिया गया। जो भी हुआ वह भगवान की कृपा थी मुझे निमित्त मात्र बनाया है भगवान ने। उन्होंने कहा कि जब तक भारत में श्री राम कथा है तब तक भारत का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यह कथा भारत की संस्कृति और अस्तित्व की संरक्षक है।

3 hrs ago
user_नीरज वैद्यराज पत्रकार
नीरज वैद्यराज पत्रकार
पत्रकार Sagar, Madhya Pradesh•
3 hrs ago

केवल सुंदरकांड पढ़ने और सुनने से कोई लाभ नहीं होगा - पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज केवल सुंदरकांड पढ़ने और सुनने से कोई लाभ नहीं होगा - पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह श्रीराम कथा में शामिल हुए, दक्षिणमुखी हनुमान जी की आरती उतारी सागर। श्री रामचरितमानस में भगवान की पूरी कथा है। मानस जी में ही लिखा है कि भगवान की कथा अति हरि कृपा होने से ही प्राप्त होती है। कथा प्रारंभ से अंत तक पढ़नीऔर सुननी चाहिए, खंडित करके नहीं। कक्षा 2, 4, 5 में नहीं पढ़कर सीधे मास्टर की पढ़ाई की जा सकती है क्या? उक्त बातें मध्य प्रदेश के सागर स्थित रुद्राक्ष धाम में निर्मित भव्य कथा मंडप में सप्त दिवसीय श्री राम कथा का गायन के क्रम में पूर्णाहुति सत्र की कथा का गायन करते हुए पूज्यश्री प्रेमभूषण जी महाराज ने व्यासपीठ से कहीं। श्रीराम कथा के पूर्णाहुति सत्र में केंद्रीय कृषि कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व मंत्री पं गोपाल भार्गव,अनेक विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायकों सहित अनेक जनप्रतिनिधि शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान कथा पंडाल के पश्चात रुद्राक्ष धाम प्रांगण पहुंच कर दक्षिणमुखी हनुमान जी मंदिर के दर्शन किए और आरती की। सरस् श्रीराम कथा गायन के लिए लोक ख्याति प्राप्त प्रेममूर्ति प्रेमभूषण जी महाराज ने प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री एवं वर्तमान विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह जी के पावन संकल्प से आयोजित रामकथा के क्रम में किष्किंधा कांड, सुंदरकांड, लंका कांड और श्री राम राज्याभिषेक तक की कथा का गायन करते हुए कहा कि सनातन समाज में अखंड रामायण की परंपरा रही है। इस परंपरा का ही पालन किया जाना सबके हित में है। गृहस्थी में रहने वाले लोगों को भी क्रम से ही मानस जी का पाठ करना चाहिए। क्रम से पढ़ने और सुनने से ही कुछ प्राप्त हो पाता है।महाराज जी ने कहा कि कथा तो भगवान की ही सुनने लायक है। हर जीव के पास उसकी कथा से ज्यादा उसकी व्यथा है। भगवान की कथा जीव की व्यथा का हरण कर लेती है। प्रभु की कथा हम जितनी बार सुनते हैं नित्य नई लगती है और मन को शांति प्रदान करती है। महाराज जी ने कहा कि मनुष्य का मूल कार्य है सत्कर्म में लगे रहना, लेकिन अधिकांश लोग तो मूल को ही भूल कर बैठ जाते हैं। मनुष्य को संसार की चर्चा और चिंता करने से पहले स्वयं के बारे में विचार करने की आवश्यकता है। हमें अपने स्वयं के लिए भगवान के आश्रय में ले जाने की आवश्यकता होती है किसी और के लिए नहीं। भक्ति पथ पर बने रहने के लिए ही निरंतर भगवान की कथा का श्रवण करना आवश्यक है। केवल जगदीश में रमने से ही कल्याण होगा। पूज्य श्री ने कहा कि अपने घर में अगर हम भाव के साथ भगवान की सेवा करें तो भगवान खाते भी हैं, नहाते भी हैं, सोते भी हैं और मनुष्य जो भी उत्तम व्यवहार करता है, वह सब करते हैं। समस्या यह है कि सामान्य मनुष्य ने भगवान की जीव भाव रख कर उनकी सेवा कभी की ही नहीं। हमारे घर में जो भगवान हैं या हमारे साथ जो भगवान चलते हैं। सुबह स्नान करते हैं, जलपान करते हैं और वह भोग भी लगाते हैं और वही प्रसाद हम पाते हैं। आम आदमी जो कुछ भी सात्विक भोजन करता है, हमारे भगवान वही पाते हैं। पूज्यश्री ने कहा कि आश्चर्य तो तब होता है जब भगवान को लोग एक छोटी सी कटोरी में मिश्री के चार दाने भोग लगा देते हैं और खुद तरह-तरह के पकवान खाते रहते हैं। महाराज श्री ने बताया कि हमारे सनातन सदग्रंथों में यह स्पष्ट बताया गया है कि हर वस्तु की अंतिम इच्छा अपने उद्गम में ही समाहित होने की होती है। जिस प्रकार धरती पर कहीं भी जल हो उसकी इच्छा नदियों के माध्यम से जाकर समुद्र में ही समाहित होना होता है। इसी प्रकार ईश्वर का अंश, हर जीव पुनः ईश्वर में ही समाहित होने के लिए ही प्रयासरत होता है। यही उसका अंतिम लक्ष्य होता है। यह अलग बात है कि अपने लक्ष्य के बारे में जानने वाले लोग बहुत कम होते हैं। लक्ष्य को जानने और पाने में कई जन्म बीत जाते हैं। पूज्य महाराज श्री ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि व्यक्ति अपने शरीर को ही स्वयं की उपस्थिति मान लेता है। जबकि वास्तविकता यह है कि शरीर तो एक माध्यम है, उस आत्मा का जो परमात्मा से यह कह कर धरती पर आता है कि हम आप का ही गुणगान करते हुए आपके चरणों तक पहुंचने का प्रयास करेंगे। पूज्य महाराज श्री ने कहा कि भगवान को पहले मानें फिर उन्हें जान लेंगे। अगर सामान्य मनुष्य को भगवान तक पहुंचने की यात्रा करनी है तो सबसे पहले उन्हें सदगुरु के आश्रय में जाने की आवश्यकता है। भगवान की अति कृपा के बिना धाम में किसी मनुष्य का पहुंचना भी संभव नहीं हो पाता है। गृहस्थ जीवन में रहने वाले लोगों को अपने सारे कार्य करते हुए साल में एक दो बार किसी न किसी धाम में पहुंचने का प्रयास अवश्य करना चाहिए। पूज्य श्री ने कहा कि अपने जीवन मे मनुष्य अपनी संपत्ति का उत्तराधिकारी तो तय कर देता है, लेकिन उसने जो परमार्थ कार्य किया है, उसे भी आगे बढ़ाने की कोई व्यवस्था नहीं सोचता है। महाराज जी ने कई सुमधुर भजनों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। हजारों की संख्या में उपस्थित रामकथा के प्रेमी भजनों का आनन्द लेते और झूमते रहे। धर्म का महायज्ञ मानव को सेवा और प्रेम का मार्ग दिखाता है : श्री शिवराज सिंह चौहान सागर। धर्म का वास्तविक स्वरूप सेवा और प्रेम में निहित है। केन्द्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धर्म का महायज्ञ मानव को स्वार्थ से ऊपर उठकर सेवा, भक्ति और प्रेम का मार्ग दिखाता है। परमपूज्य पं. प्रेमभूषण जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मानव जीवन का परम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति और समाज के कल्याण के लिए कर्मरत रहना है।यह उद्गार केंद्रीय कृषि कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रुद्राक्ष धाम मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीराम कथा मंच से अपने संबोधन में व्यक्त किए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि व्यासपीठ पर विराजमान परमपूज्य पं. प्रेमभूषण जी महाराज का जीवन प्रेम, ज्ञान और भक्ति का अनुपम उदाहरण है। आत्मा के मोक्ष और जगत के कल्याण के लिए की जाने वाली उनकी कथाएं समाज को सही दिशा देती हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिणमुखी हनुमान जी के भव्य मंदिर का निर्माण कराने वाले आदरणीय भूपेन्द्र सिंह जी वास्तव में सौभाग्यशाली हैं। ऐसे कार्य केवल ईश्वर की विशेष कृपा से ही संभव होते हैं। उन्होंने सभी संतगणों एवं उपस्थित अतिथियों को सादर प्रणाम किया। श्री चौहान ने कहा कि अभी उन्हें नेता कहकर संबोधित किया गया, लेकिन सच्चा आनंद नेता बनने में नहीं बल्कि सेवक बनकर कार्य करने में है। मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य परमात्मा की प्राप्ति और आनंद की अनुभूति है। शास्त्रों में भगवान को प्राप्त करने के तीन मार्ग बताए गए हैंकृज्ञान, भक्ति और कर्म। उन्होंने कहा कि ज्ञान मार्ग में यह बताया गया है कि सत्य केवल ब्रह्म है और शेष सब मिथ्या है, जैसा कि प्रेमभूषण जी महाराज अपने उपदेशों से समझा रहे हैं। भक्ति मार्ग पर चलने वाला भक्त भगवान की भक्ति में पूर्णतः रम जाता हैकृकोई उन्हें स्वामी मानता है तो कोई पिता। कर्म मार्ग में भगवान द्वारा निर्धारित कर्तव्यों को ईमानदारी और परिश्रम से निभाने की प्रेरणा दी गई है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी कहा है कि कर्म किए बिना कोई रह नहीं सकता। अपने संबोधन में श्री चौहान ने रामायण की एक प्रेरक कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि माता सीता द्वारा हनुमान जी को दी गई मोतियों की माला को हनुमान जी ने इसलिए तोड़ दिया क्योंकि उसमें उन्हें अपने प्रभु श्रीराम और माता सीता दिखाई नहीं दिए। उन्होंने अपने सीने को चीरकर राम-सीता को प्रकट कर यह सिद्ध किया कि उनके लिए वही वस्तु मूल्यवान है जिसमें प्रभु का वास हो। उन्होंने कहा कि सृष्टि के कण-कण में सीता-राम विराजमान हैं, इसलिए सभी को अपने समान मानना चाहिए। प्रेम ही भगवान की सबसे बड़ी पूजा है और सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं। जितनी सेवा संभव हो, उतनी सेवा करनी चाहिए, क्योंकि वास्तव में दूसरा कोई है ही नहीं। श्री चौहान ने कहा कि जब तक जीवन है, तब तक दूसरों के सुख और आनंद के लिए कार्य करना ही सच्ची साधना है, और वे स्वयं भी निरंतर इसी प्रयास में लगे हुए हैं। पूर्व गृहमंत्री, विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह ने आभार ज्ञापित किया आभार ज्ञापन करते हुए पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक श्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले सात दिनों में भगवान श्री राधाकृष्ण जी व दक्षिण मुखी हनुमान जी के दर्शन और श्री राम कथा का आप सभी ने धर्म लाभ लिया। रुद्राक्ष धाम भगवान की जागृत भूमि है। यहां हमारे गुरु देव प्रभाकर शास्त्री दद्दा के सानिंध्य में 2014 में सात दिवस में 39 करोड़ पार्थिव शिवलिंग का निर्माण हुआ था और उनका रुद्र अभिषेक हुआ था। ऐसा सौभाग्य प्राप्त करने वाली यह भारत की इकलौती भूमि है। 108 पुराण, श्री मद्भागवत कथा भी उन सात दिनों में हुई, इसीलिए इसका नाम रुद्राक्ष धाम रखा गया, यहां के कण कण में शिव हैं। भगवान श्री राम ने लंका विजय प्राप्त करने से पूर्व रामेश्वरम में बालू के शिवलिंग बना कर अभिषेक किया और लंका पर विजय प्राप्त कर ली थी। पूज्य गुरु दद्दा जी ने 4 जुलाई,2016 को राधाकृष्ण जी की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की, प्रतिमा का चयन भी उन्हीं ने किया था। पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि रुद्राक्ष धाम मंदिर में कभी भी किसी भी निर्माण, व्यवस्था, कथा आदि के लिए कभी एक रुपए का चंदा, आर्थिक सहयोग नहीं लिया गया। जो भी हुआ वह भगवान की कृपा थी मुझे निमित्त मात्र बनाया है भगवान ने। उन्होंने कहा कि जब तक भारत में श्री राम कथा है तब तक भारत का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यह कथा भारत की संस्कृति और अस्तित्व की संरक्षक है।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • सागर क्षेत्र कई थाना क्षेत्रों में जुआ चल रहा है। वहीं एक जुआ की वीडियो शोसल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। जो सागर के देवरी क्षेत्र की बताई जा रही है। जिसकी हम पुष्टि नहीं करते हैं।
    4
    सागर क्षेत्र कई थाना क्षेत्रों में जुआ चल रहा है। वहीं एक जुआ की वीडियो शोसल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। जो सागर के देवरी क्षेत्र की बताई जा रही है। जिसकी हम पुष्टि नहीं करते हैं।
    user_गजेन्द्र सिंह लोधी बंडा
    गजेन्द्र सिंह लोधी बंडा
    बांदा, सागर, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • आज विश्व हिंदू सम्मेलन देव रघुनाथ जी स्कूल प्रांगण में मनाया गया जिसमें सरस्वती स्कूल के बच्चों ने रंगारंग प्रस्तुति दी एवं उसमें मां मोतीचूर समिति को सम्मानित किया गया ईश्वर
    1
    आज विश्व हिंदू सम्मेलन देव रघुनाथ जी स्कूल प्रांगण में मनाया गया जिसमें सरस्वती स्कूल के बच्चों ने रंगारंग प्रस्तुति दी एवं उसमें मां मोतीचूर समिति को सम्मानित किया गया ईश्वर
    user_बिजय चोहन
    बिजय चोहन
    वीडियो क्रिएटर बीना, सागर, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • UGC रेगुलेशन के समर्थन में OBC-SC-ST संगठनों का शक्ति प्रदर्शन, गांधी चौराहे से अंबेडकर तिराहे तक शांति मार्च शिक्षा में अधिकार की मांग को लेकर गांधी से अंबेडकर तक गूंजा अधिकारों का स्वर
    1
    UGC रेगुलेशन के समर्थन में OBC-SC-ST संगठनों का शक्ति प्रदर्शन, गांधी चौराहे से अंबेडकर तिराहे तक शांति मार्च
शिक्षा में अधिकार की मांग को लेकर गांधी से अंबेडकर तक गूंजा अधिकारों का स्वर
    user_RAJENDRA GOUTAM JOURNALIST
    RAJENDRA GOUTAM JOURNALIST
    पत्रकार बीना, सागर, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • उपकाशी नगरी में आयोजित श्री अति रुद्र महायज्ञ के दूसरे दिन शिवलिंग निर्माण कर धूमधाम से हुआ घाट पर विसर्जन
    1
    उपकाशी नगरी में आयोजित श्री अति रुद्र महायज्ञ के दूसरे दिन शिवलिंग निर्माण कर धूमधाम से हुआ घाट पर विसर्जन
    user_Vikas Soni
    Vikas Soni
    दन्यांतिनगर, दमोह, मध्य प्रदेश•
    42 min ago
  • *मोबाइल की बैट्री चबाते समय मुंह पर हुआ जोरदार विस्फोट। वीडियो हुआ वायरल।* एक शख्स मोबाइल बैटरी पर अपनी जीभ से थूक लगाकर चेक करना या उसे दांतो के बीच दबाकर चेक करना दोनों बेहद ही खतरनाक साबित हो सकता है। मोबइल में लगने वाली बैटरी के अंदर लिथियिम और केमिकल इलेक्ट्रोलाइट जैसी चीजें होती है। उसे पता नहीं था कि लिथियम बैटरीज को अगर जबरदस्ती दबाया जाए तो लिथियम आयन के स्पार्किंग से ब्लास्ट हो सकता है। फिर उस व्यक्ति के मुंह में ही ब्लास्ट हो गया।
    1
    *मोबाइल की बैट्री चबाते समय मुंह पर हुआ जोरदार विस्फोट। वीडियो हुआ वायरल।*
एक शख्स मोबाइल बैटरी पर अपनी जीभ से थूक लगाकर चेक करना या उसे दांतो के बीच दबाकर चेक करना दोनों बेहद ही खतरनाक साबित हो सकता है। मोबइल में लगने वाली बैटरी के अंदर लिथियिम और केमिकल इलेक्ट्रोलाइट जैसी चीजें होती है। उसे पता नहीं था कि लिथियम बैटरीज को अगर जबरदस्ती दबाया जाए तो लिथियम आयन के स्पार्किंग से ब्लास्ट हो सकता है। फिर उस व्यक्ति के मुंह में ही ब्लास्ट हो गया।
    user_Bhupendra Rai दबंग इंडिया
    Bhupendra Rai दबंग इंडिया
    Journalist Damoh, Madhya Pradesh•
    3 hrs ago
  • इलाज कराने गया था… मारपीट, झूठा केस और कर्ज ने महेंद्र को तोड़ दिया। आज पत्नी की गोद में मासूम बच्चा है… और सवाल – इंसाफ कब मिलेगा? 💔 #JusticeForMahendraLodhi #DamohNews #MPNews #GroundReport #VoiceForJustice
    1
    इलाज कराने गया था…
मारपीट, झूठा केस और कर्ज ने महेंद्र को तोड़ दिया।
आज पत्नी की गोद में मासूम बच्चा है… और सवाल – इंसाफ कब मिलेगा? 💔
#JusticeForMahendraLodhi #DamohNews #MPNews #GroundReport #VoiceForJustice
    user_Pushpendra Lodhi
    Pushpendra Lodhi
    Damoh, Madhya Pradesh•
    7 hrs ago
  • बंडा के दलपतपुर के नेनागिर तिराहे पर एक मकान में अवैध रूप से भारी मात्रा गांजा बरामद किया। जिसके साथ एक बोलेरो कार भी जब्त कर ली। वहीं तस्करी जानकारी के मुताबिक कई बर्षो से चल रही है। गांजे के मामले में पुलिस थाना बंडा में मामला दर्ज कर लिया है। जिसमें दो आरोपी बनाएं गए हैं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए, आरोपियों को बंडा में पेश कर जेल भेजा गया।
    4
    बंडा के दलपतपुर के नेनागिर तिराहे पर एक मकान में अवैध रूप से भारी मात्रा गांजा बरामद किया। जिसके साथ एक बोलेरो कार भी जब्त कर ली। वहीं तस्करी जानकारी के मुताबिक कई बर्षो से चल रही है। गांजे के मामले में पुलिस थाना बंडा में मामला दर्ज कर लिया है। जिसमें दो आरोपी बनाएं गए हैं। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए, आरोपियों को बंडा में पेश कर जेल भेजा गया।
    user_गजेन्द्र सिंह लोधी बंडा
    गजेन्द्र सिंह लोधी बंडा
    बांदा, सागर, मध्य प्रदेश•
    22 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर स्थित इंटर कॉलेज के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। उसके बाद वे रात्रि विश्राम के लिए अपने पैतृक गांव पंचूर पहुंचे। यहाँ पर वे अपने परिवार के सदस्यों से मिले। इस मौके पर उन्होंने परिवार के बच्चों के साथ भी समय बिताया।
    1
    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर स्थित इंटर कॉलेज के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। उसके बाद वे रात्रि विश्राम के लिए अपने पैतृक गांव पंचूर पहुंचे। यहाँ पर वे अपने परिवार के सदस्यों से मिले। इस मौके पर उन्होंने परिवार के बच्चों के साथ भी समय बिताया।
    user_Bhupendra Rai दबंग इंडिया
    Bhupendra Rai दबंग इंडिया
    Journalist Damoh, Madhya Pradesh•
    8 hrs ago
  • Post by Jya yadav Naresh
    1
    Post by Jya yadav Naresh
    user_Jya yadav Naresh
    Jya yadav Naresh
    तेंदूखेड़ा, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.