Suresh Chandra Agrawal: सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 2 *श्लोक:* 7 *श्लोक:* कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः पृच्छामि त्वां धर्मसम्मूढचेताः । यच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मे शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम् ॥ ७ ॥ *अनुवाद:* अब मैं अपनी कृपण-दुर्बलता के कारण अपना कर्तव्य भूल गया हूँ और सारा धैर्य खो चुका हूँ। ऐसी अवस्था में मैं आपसे पूछ रहा हूँ कि जो मेरे लिए श्रेयस्कर हो उसे निश्चित रूप से बताएँ। अब मैं आपका शिष्य हूँ और आपका शरणागत हूँ। कृपया मुझे उपदेश दें। *तात्पर्य:* यह प्राकृतिक नियम है कि भौतिक कार्यकलाप की प्रणाली ही हर एक के लिए चिन्ता का कारण है। पग-पग पर उलझन मिलती है, अत: प्रामाणिक गुरु के पास जाना आवश्यक है, जो जीवन के उद्देश्य को पूरा करने के लिए समुचित पथ-निर्देश दे सके। समग्र वैदिक ग्रंथ हमें यह उपदेश देते हैं कि जीवन की अनचाही उलझनों से मुक्त होने के लिए प्रामाणिक गुरु के पास जाना चाहिए। ये उलझनें उस दावाग्नि के समान हैं जो किसी के द्वारा लगाये बिना भभक उठती हैं। इसी प्रकार विश्व की स्थिति ऐसी है कि बिना चाहे जीवन की उलझनें स्वत: उत्पन्न हो जाती हैं। कोई नहीं चाहता कि आग लगे, किन्तु फिर भी वह लगती है और हम अत्यधिक व्याकुल हो उठते हैं। अत: वैदिक वाङ्मय उपदेश देता है कि जीवन की उलझनों को समझने तथा उनका समाधान करने के लिए हमें परम्परागत गुरु के पास जाना चाहिए। जिस व्यक्ति का प्रामाणिक गुरु होता है वह सब कुछ जानता है। अत: मनुष्य को भौतिक उलझनों में न रहकर गुरु के पास जाना चाहिए। यही इस श्लोक का तात्पर्य है। आखिर भौतिक उलझनों में कौन सा व्यक्ति पड़ता है? वह जो जीवन की समस्याओं को नहीं समझता। बृहदारण्यक उपनिषद् में (३.८.१०) व्याकुल (व्यग्र) मनुष्य का वर्णन इस प्रकार हुआ है—यो वा एतदक्षरं गार्ग्यविदित्वास्माँल्लोकात्प्रैति स कृपण:—“कृपण वह है जो मानव जीवन की समस्याओं को हल नहीं करता और आत्म-साक्षात्कार के विज्ञान को समझे बिना कूकर-सूकर की भाँति इस संसार को त्यागकर चला जाता है।” जीव के लिए यह मनुष्य जीवन अत्यन्त मूल्यवान निधि है, जिसका उपयोग वह अपने जीवन की समस्याओं को हल करने में कर सकता है, अत: जो इस अवसर का लाभ नहीं उठाता वह कृपण है। ब्राह्मण इसके विपरीत होता है जो इस शरीर का उपयोग जीवन की समस्त समस्याओं को हल करने में करता है। य एतदक्षरं गार्गि विदित्वास्माँल्लोकात्प्रैति स ब्राह्मण:। देहात्मबुद्धि वश कृपण या कंजूस लोग अपना सारा समय परिवार, समाज, देश आदि के अत्यधिक प्रेम में गँवा देते हैं। मनुष्य प्राय: चर्मरोग के आधार पर अपने पारिवारिक जीवन अर्थात् पत्नी, बच्चों तथा परिजनों में आसक्त रहता है। कृपण यह सोचता है कि वह अपने परिवार को मृत्यु से बचा सकता है अथवा वह यह सोचता है कि उसका परिवार या समाज उसे मृत्यु से बचा सकता है। ऐसी पारिवारिक आसक्ति निम्न पशुओं में भी पाई जाती है क्योंकि वे भी बच्चों की देखभाल करते हैं। बुद्धिमान् होने के कारण अर्जुन समझ गया था कि पारिवारिक सदस्यों के प्रति उसका अनुराग तथा मृत्यु से उनकी रक्षा करने की उसकी इच्छा ही उसकी उलझनों का कारण है। यद्यपि वह समझ रहा था कि युद्ध करने का कर्तव्य उसकी प्रतीक्षा कर रहा था, किन्तु कृपण—दुर्बलता (कार्पण्यदोष) के कारण वह अपना कर्तव्य नहीं निभा रहा था। अत: वह परम गुरु भगवान् कृष्ण से कोई निश्चित हल निकालने का अनुरोध कर रहा है। वह कृष्ण का शिष्यत्व ग्रहण करता है। वह मित्रतापूर्ण बातें बन्द करना चाहता है। गुरु तथा शिष्य की बातें गम्भीर होती हैं और अब अर्जुन अपने मान्य गुरु के समक्ष गम्भीरतापूर्वक बातें करना चाहता है। इसीलिए कृष्ण भगवद्गीता-ज्ञान के आदि गुरु हैं और अर्जुन गीता समझने वाला प्रथम शिष्य है। अर्जुन भगवद्गीता को किस तरह समझता है यह गीता में वर्णित है। तो भी मूर्ख संसारी विद्वान् बताते हैं कि किसी को मनुष्य-रूप कृष्ण की नहीं बल्कि “अजन्मा कृष्ण” की शरण ग्रहण करनी चाहिए। कृष्ण के अन्त: तथा बाह्य में कोई अन्तर नहीं है। इस ज्ञान के बिना जो भगवद्गीता को समझने का प्रयास करता है, वह सबसे बड़ा मूर्ख है। जय श्री कृष्ण 🌹🙏 *जय श्री कृष्ण 🙏🌹 *एक मासूम प्रार्थना* एक बच्चा प्रतिदिन अपने दादा जी को सायंकालीन पूजा करते देखता था। बच्चा भी उनकी इस पूजा को देखकर अंदर से स्वयं इस अनुष्ठान को पूर्ण करने की ईच्छा रखता था, परन्तु दादा जी की उपस्थिति उसे अवसर नहीं देती थी। एक दिन दादा जी को शाम को आने में विलम्ब हुआ, इस अवसर का लाभ लेते हुए बच्चे ने समय पर पूजा प्रारम्भ कर दी। जब दादा जी आये, तो वे दीवार के पीछे से बच्चे की पूजा देखने लगे। बच्चा बहुत सारी अगरबत्ती एवं अन्य सभी सामग्री का अनुष्ठान में यथाविधि प्रयोग करता है और फिर अपनी प्रार्थना में कहता है- भगवान जी प्रणाम। आप मेरे दादा जी को स्वस्थ रखना और दादी के घुटनों के दर्द को ठीक कर देना क्योंकि दादा-दादी को कुछ हो गया, तो मुझे चॉकलेट कौन देगा। फिर आगे कहता है- भगवान जी मेरे सभी दोस्तों को अच्छा रखना, वरना मेरे साथ कौन खेलेगा। फिर कहता है- मेरे पापा और मम्मी को ठीक रखना, घर के कुत्ते को भी ठीक रखना, क्योंकि उसे कुछ हो गया, तो घर को चोरों से कौन बचाएगा। *लेकिन भगवान यदि आप बुरा न मानो तो एक बात कहूँ, सबका ध्यान रखना, लेकिन उससे पहले आप अपना ध्यान रखना, क्योंकि आपको कुछ हो गया, तो हम सबका क्या होगा।* इस सहज प्रार्थना को सुनकर दादा की आँखों में भी आंसू आ गए, क्योंकि ऐसी प्रार्थना उन्होंने न कभी की थी और न सुनी थी। *घर के संस्कार अच्छे हों, वातावरण अच्छा हो, तो बच्चों में अच्छाईयाँ ही अंकुरित होगीं।* 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 *कमजोरी और थकान को कहें अलविदा! अपनाएं ये असरदार घरेलू उपाय और पाएं दिनभर की एनर्जी* चना और गुड़- रोज सुबह खाली पेट चना और गुड़ खाना कमजोरी दूर करने का बहुत ही आसान और असरदार देसी उपाय माना जाता है. चने में भरपूर प्रोटीन और ऊर्जा होती है, जबकि गुड़ शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद करता है. जब इन दोनों का सेवन साथ में किया जाता है तो शरीर को तुरंत ताकत मिलती है और दिनभर थकान कम महसूस होती हैं. बड़ी इलायची- बड़ी इलायची सिर्फ मसाला नहीं है, यह एक बढ़िया घरेलू औषधि भी है. हफ्ते में एक बार बड़ी इलायची को धीरे-धीरे चबाने से सांस की समस्या में आराम मिल सकता है.इसके सेवन से कफ बाहर निकलने में मदद होती है. और यह मुंह की बदबू दूर करता है. इससे पाचन भी अच्छा रहता है. केला और शहद- अगर आपको जल्दी थकान होती है या शरीर कमजोर लगता है तो केला और शहद का सेवन बहुत असरदार है. रोज सुबह 1 केला लें और ऊपर से 1 चम्मच शहद डालकर खाएं. इससे तुरंत एनर्जी मिलती है और शरीर में ताकत आती है. इससे कमजोरी दूर होती हैं और दिमाग भी एक्टिव रहता है. दूध व मखाना- मखाना एक बहुत ही पौष्टिक चीज है. अगर आप इसे गर्म दूध में डालकर खाते हैं तो शरीर को ताकत मिलती है और हड्डियां मजबूत होती हैं. यह कैल्शियम की कमी दूर होती है जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं. शरीर में कमजोरी में बहुत फायदा मिलता है. इसका सेवन बच्चों और बुजुर्गों के लिए अच्छा माना जाता है. रात को सोने से पहले दूध में मखाना डालकर खा ले.
Suresh Chandra Agrawal: सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 2 *श्लोक:* 7 *श्लोक:* कार्पण्यदोषोपहतस्वभावः पृच्छामि त्वां धर्मसम्मूढचेताः । यच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मे शिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम् ॥ ७ ॥ *अनुवाद:* अब मैं अपनी कृपण-दुर्बलता के कारण अपना कर्तव्य भूल गया हूँ और सारा धैर्य खो चुका हूँ। ऐसी अवस्था में मैं आपसे पूछ रहा हूँ कि जो मेरे लिए श्रेयस्कर हो उसे निश्चित रूप से बताएँ। अब मैं आपका शिष्य हूँ और आपका शरणागत हूँ। कृपया मुझे उपदेश दें। *तात्पर्य:* यह प्राकृतिक नियम है कि भौतिक कार्यकलाप की प्रणाली ही हर एक के लिए चिन्ता का कारण है। पग-पग पर उलझन मिलती है, अत: प्रामाणिक गुरु के पास जाना आवश्यक है, जो जीवन के उद्देश्य को पूरा करने के लिए समुचित पथ-निर्देश दे सके। समग्र वैदिक ग्रंथ हमें यह उपदेश देते हैं कि जीवन की अनचाही उलझनों से मुक्त होने के लिए प्रामाणिक गुरु के पास जाना चाहिए। ये उलझनें उस दावाग्नि के समान हैं जो किसी के द्वारा लगाये बिना भभक उठती हैं। इसी प्रकार विश्व की स्थिति ऐसी है कि बिना चाहे जीवन की उलझनें स्वत: उत्पन्न हो जाती हैं। कोई नहीं चाहता कि आग लगे, किन्तु फिर भी वह लगती है और हम अत्यधिक व्याकुल हो उठते हैं। अत: वैदिक वाङ्मय उपदेश देता है कि जीवन की उलझनों को समझने तथा उनका समाधान करने के लिए हमें परम्परागत गुरु के पास जाना चाहिए। जिस व्यक्ति का प्रामाणिक गुरु होता है वह सब कुछ जानता है। अत: मनुष्य को भौतिक उलझनों में न रहकर गुरु के पास जाना चाहिए। यही इस श्लोक का तात्पर्य है। आखिर भौतिक उलझनों में कौन सा व्यक्ति पड़ता है? वह जो जीवन की समस्याओं को नहीं समझता। बृहदारण्यक उपनिषद् में (३.८.१०) व्याकुल (व्यग्र) मनुष्य का वर्णन इस प्रकार हुआ है—यो वा एतदक्षरं गार्ग्यविदित्वास्माँल्लोकात्प्रैति स कृपण:—“कृपण वह है जो मानव जीवन की समस्याओं को हल नहीं करता और आत्म-साक्षात्कार के विज्ञान को समझे बिना कूकर-सूकर की भाँति इस संसार को त्यागकर चला जाता है।” जीव के लिए यह मनुष्य जीवन अत्यन्त मूल्यवान निधि है, जिसका उपयोग वह अपने जीवन की समस्याओं को हल करने में कर सकता है, अत: जो इस अवसर का लाभ नहीं उठाता वह कृपण है। ब्राह्मण इसके विपरीत होता है जो इस शरीर का उपयोग जीवन की समस्त समस्याओं को हल करने में करता है। य एतदक्षरं गार्गि विदित्वास्माँल्लोकात्प्रैति स ब्राह्मण:। देहात्मबुद्धि वश कृपण या कंजूस लोग अपना सारा समय परिवार, समाज, देश आदि के अत्यधिक प्रेम में गँवा देते हैं। मनुष्य प्राय: चर्मरोग के आधार पर अपने पारिवारिक जीवन अर्थात् पत्नी, बच्चों तथा परिजनों में आसक्त रहता है। कृपण यह सोचता है कि वह अपने परिवार को मृत्यु से बचा सकता है अथवा वह यह सोचता है कि उसका परिवार या समाज उसे मृत्यु से बचा सकता है। ऐसी पारिवारिक आसक्ति निम्न पशुओं में भी पाई जाती है क्योंकि वे भी बच्चों की देखभाल करते हैं। बुद्धिमान् होने के कारण अर्जुन समझ गया था कि पारिवारिक सदस्यों के प्रति उसका अनुराग तथा मृत्यु से उनकी रक्षा करने की उसकी इच्छा ही उसकी उलझनों का कारण है। यद्यपि वह समझ रहा था कि युद्ध करने का कर्तव्य उसकी प्रतीक्षा कर रहा था, किन्तु कृपण—दुर्बलता (कार्पण्यदोष) के कारण वह अपना कर्तव्य नहीं निभा रहा था। अत: वह परम गुरु भगवान् कृष्ण से कोई निश्चित हल निकालने का अनुरोध कर रहा है। वह कृष्ण का शिष्यत्व ग्रहण करता है। वह मित्रतापूर्ण बातें बन्द करना चाहता है। गुरु तथा शिष्य की बातें गम्भीर होती हैं और अब अर्जुन अपने मान्य गुरु के समक्ष गम्भीरतापूर्वक बातें करना चाहता है। इसीलिए कृष्ण भगवद्गीता-ज्ञान के आदि गुरु हैं और अर्जुन गीता समझने वाला प्रथम शिष्य है। अर्जुन भगवद्गीता को किस तरह समझता है यह गीता में वर्णित है। तो भी मूर्ख संसारी विद्वान् बताते हैं कि किसी को मनुष्य-रूप कृष्ण की नहीं बल्कि “अजन्मा कृष्ण” की शरण ग्रहण करनी चाहिए। कृष्ण के अन्त: तथा बाह्य में कोई अन्तर नहीं है। इस ज्ञान के बिना जो भगवद्गीता को समझने का प्रयास करता है, वह सबसे बड़ा मूर्ख है। जय श्री कृष्ण 🌹🙏 *जय श्री कृष्ण 🙏🌹 *एक मासूम प्रार्थना* एक बच्चा प्रतिदिन अपने दादा जी को सायंकालीन पूजा करते देखता था। बच्चा भी उनकी इस पूजा को देखकर अंदर से स्वयं इस अनुष्ठान को पूर्ण करने की ईच्छा रखता था, परन्तु दादा जी की उपस्थिति उसे अवसर नहीं देती थी। एक दिन दादा जी को शाम को आने में विलम्ब हुआ, इस अवसर का लाभ लेते हुए बच्चे ने समय पर पूजा प्रारम्भ कर दी। जब दादा जी आये, तो वे दीवार के पीछे से बच्चे की पूजा देखने लगे। बच्चा बहुत सारी अगरबत्ती एवं अन्य सभी सामग्री का अनुष्ठान में यथाविधि प्रयोग करता है और फिर अपनी प्रार्थना में कहता है- भगवान जी प्रणाम। आप मेरे दादा जी को स्वस्थ रखना और दादी के घुटनों के दर्द को ठीक कर देना क्योंकि दादा-दादी को कुछ हो गया, तो मुझे चॉकलेट कौन देगा। फिर आगे कहता है- भगवान जी मेरे सभी दोस्तों को अच्छा रखना, वरना मेरे साथ कौन खेलेगा। फिर कहता है- मेरे पापा और मम्मी को ठीक रखना, घर के कुत्ते को भी ठीक रखना, क्योंकि उसे कुछ हो गया, तो घर को चोरों से कौन बचाएगा। *लेकिन भगवान यदि आप बुरा न मानो तो एक बात कहूँ, सबका ध्यान रखना, लेकिन उससे पहले आप अपना ध्यान रखना, क्योंकि आपको कुछ हो गया, तो हम सबका क्या होगा।* इस सहज प्रार्थना को सुनकर दादा की आँखों में भी आंसू आ गए, क्योंकि ऐसी प्रार्थना उन्होंने न कभी की थी और न सुनी थी। *घर के संस्कार अच्छे हों, वातावरण अच्छा हो, तो बच्चों में अच्छाईयाँ ही अंकुरित होगीं।* 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏 *कमजोरी और थकान को कहें अलविदा! अपनाएं ये असरदार घरेलू उपाय और पाएं दिनभर की एनर्जी* चना और गुड़- रोज सुबह खाली पेट चना और गुड़ खाना कमजोरी दूर करने का बहुत ही आसान और असरदार देसी उपाय माना जाता है. चने में भरपूर प्रोटीन और ऊर्जा होती है, जबकि गुड़ शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में मदद करता है. जब इन दोनों का सेवन साथ में किया जाता है तो शरीर को तुरंत ताकत मिलती है और दिनभर थकान कम महसूस होती हैं. बड़ी इलायची- बड़ी इलायची सिर्फ मसाला नहीं है, यह एक बढ़िया घरेलू औषधि भी है. हफ्ते में एक बार बड़ी इलायची को धीरे-धीरे चबाने से सांस की समस्या में आराम मिल सकता है.इसके सेवन से कफ बाहर निकलने में मदद होती है. और यह मुंह की बदबू दूर करता है. इससे पाचन भी अच्छा रहता है. केला और शहद- अगर आपको जल्दी थकान होती है या शरीर कमजोर लगता है तो केला और शहद का सेवन बहुत असरदार है. रोज सुबह 1 केला लें और ऊपर से 1 चम्मच शहद डालकर खाएं. इससे तुरंत एनर्जी मिलती है और शरीर में ताकत आती है. इससे कमजोरी दूर होती हैं और दिमाग भी एक्टिव रहता है. दूध व मखाना- मखाना एक बहुत ही पौष्टिक चीज है. अगर आप इसे गर्म दूध में डालकर खाते हैं तो शरीर को ताकत मिलती है और हड्डियां मजबूत होती हैं. यह कैल्शियम की कमी दूर होती है जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं. शरीर में कमजोरी में बहुत फायदा मिलता है. इसका सेवन बच्चों और बुजुर्गों के लिए अच्छा माना जाता है. रात को सोने से पहले दूध में मखाना डालकर खा ले.
- राजस्थान विधानसभा में गो हत्या को लेकर सदन में भिड़े भाजपा कांग्रेस के विधायक , कांग्रेस विधायकों ने पोस्टर लहराए धक्का मुक्की की नौबत सदन दो बार स्थगित #बीजेपी #कांग्रेस #गौहत्या #विधानसभा #सदन1
- जयपुर : भालू ने किया ग्रामीण पर हमला भालू ने ग्रामीण के ऊपर हमला कर घायल कर दिया , जिसके चलते ग्रामीण लहुलुहान हो गया मामला करौली सपोटरा के करणपुर क्षेत्र महाराजपुर गांव का बताया जा रहा है1
- जयपुर, 17 फरवरी। जयपुर पुलिस में आयोजित एक सम्मान समारोह में पुलिस आयुक्त सचिन मित्तल ने उत्कृष्ट, सराहनीय और समर्पित सेवा देने वाले छह पुलिसकर्मियों को ‘कानिस्टेबल ऑफ द मंथ’ अवार्ड से सम्मानित किया। इस अवसर पर पुलिस आयुक्त ने कहा कि पुलिस का ध्येय वाक्य “आमजन में विश्वास, अपराधियों में भय” को साकार करने के लिए जयपुर पुलिस निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि इस तरह के सम्मान से पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ता है और वे बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित होते हैं। जनवरी 2026 के ‘कानिस्टेबल ऑफ द मंथ’ सम्मानित पुलिसकर्मी: 1. रामवतार (कांस्टेबल), थाना बजाज नगर – जिला पूर्व नौकर द्वारा मालिक के घर से लाखों रुपये की नकदी चोरी की वारदात का पर्दाफाश करते हुए आरोपी मोन्टू उर्फ रामू उर्फ मनोज ठाकुर को बिहार से गिरफ्तार करने में अहम भूमिका निभाई। आरोपी के कब्जे से 22 लाख रुपये सहित कुल 27.50 लाख रुपये बरामद करवाए। 2. मोतीलाल (कांस्टेबल), थाना सेज – जिला पश्चिम अज्ञात मृतक की शिनाख्त कर तकनीकी व अन्य स्रोतों से जानकारी जुटाते हुए आरोपियों सूरज सैन उर्फ दिलावर उर्फ दिल्लों और रोहित बैरवा को गिरफ्तार करवाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 3. गिर्राज प्रसाद (कांस्टेबल), थाना आमेर – जिला उत्तर वांछित अपराधियों के विरुद्ध जारी सम्मन और वारंटों की प्रभावी तामील कर 28 स्थायी वारंटियों को गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 4. जीत सिंह (कांस्टेबल), थाना सांगानेर सदर – जिला दक्षिण राजस्थान डिजीपेस्ट 2026 के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने में उत्कृष्ट पुलिस प्रबंधन किया। साथ ही लंबे समय से लंबित स्थायी और गिरफ्तारी वारंटों का निस्तारण कराया। 5. राजपाल (कांस्टेबल), यातायात प्रशासन जयपुर इंटरसेप्टर वाहन पर तैनात रहकर तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की। एमवी एक्ट के तहत 5060 चालान कर यातायात नियमों की पालना सुनिश्चित कराई। 6. चेतन प्रकाश (कांस्टेबल), कार्यालय अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (अन्वेषण), पुलिस आयुक्तालय जयपुर चिटफंड से जुड़े धोखाधड़ी मामलों के रिकॉर्ड संधारण, लंबित प्रकरणों के निस्तारण और 3 माह से अधिक लंबित एफआर व 6 माह से अधिक लंबित चालानों को न्यायालय में प्रस्तुत करवाने हेतु प्रभावी पत्राचार कर सराहनीय कार्य किया।1
- 🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | जयपुर 🚨 जयपुर के झोटवाड़ा इलाके में टायर और केमिकल के गोदाम में भीषण आग लगने की खबर सामने आई है। आग इतनी विकराल थी कि काला धुआं आसमान तक फैल गया और दूर-दूर तक दिखाई दिया। स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया, वहीं सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का प्रयास जारी रहा। केमिकल और टायर होने के कारण आग ने तेजी से विकराल रूप ले लिया। फिलहाल राहत एवं बचाव कार्य जारी है। आसपास के लोगों को सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई है। ⚠️ प्रशासन से अपील है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए उचित जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। 👉 ताज़ा अपडेट के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ।1
- Post by Love Guru Meena DJ RK Khori Love Guru Meena1
- 🐘 हाथी पर सवार कृषि मंत्री… इटावा में ‘राजसी’ अंदाज में निकला जुलूस सवाई माधोपुर। सवाई माधोपुर जिले के खंडार क्षेत्र के इटावा गांव में रविवार शाम उस वक्त सियासी रंग और गहरा हो गया, जब राजस्थान सरकार के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का ग्रामीणों ने अनोखे अंदाज में स्वागत किया। राज्य बजट की घोषणाओं पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जब मंत्री इटावा ग्राम पंचायत में आयोजित पद दंगल कार्यक्रम में पहुंचे, तो ग्रामीणों ने उन्हें हाथी पर सवार करवाकर भव्य जुलूस निकाला। डीजे की धुन, ढोल-नगाड़ों की गूंज और नाचते-गाते ग्रामीणों के बीच पूरा गांव उत्साह से झूम उठा। सड़कों पर मानो मेले जैसा माहौल था। 🎤 आरक्षण पर दो टूक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. मीणा ने आरक्षण के मुद्दे पर स्पष्ट और भावनात्मक बयान दिया— “आरक्षण को बचाने के लिए मैं अपनी जान भी लगा दूंगा।” उन्होंने कहा कि जब-जब आरक्षण पर संकट आया, उन्होंने सत्ता की परवाह नहीं की। पूर्व में कैबिनेट मंत्री पद तक छोड़ने की बात दोहराते हुए उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया था कि आरक्षण से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी, लेकिन भ्रम की राजनीति के कारण सवाई माधोपुर, भरतपुर समेत कई सीटों पर पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा। 👥 जनता से सीधा संवाद मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों और किसानों की समस्याएं भी गंभीरता से सुनीं। पानी, बिजली, फसल मुआवजा और राजस्व मामलों से जुड़ी शिकायतों पर उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए कि समाधान में देरी न हो। ग्रामीणों का कहना था कि मंत्री का गांव में आकर सीधे संवाद करना भरोसा बढ़ाने वाला कदम है। 📌 सियासी संदेश भी साफ इटावा का यह राजसी स्वागत सिर्फ एक समारोह नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है। हाथी पर सवारी और जोशीला जुलूस यह संकेत देता है कि जमीनी स्तर पर मंत्री की पकड़ और समर्थकों का उत्साह अभी भी मजबूत है। ग्रामीण राजनीति में जनसमर्थन की यह तस्वीर बताती है कि जनता का जुड़ाव और सीधा संवाद ही किसी भी नेता की असली ताकत है।1
- हिंदू विराट सम्मेलन कार्यक्रम का भव्य आयोजन आगामी 22 फरवरी 2026 को सीता महल मैरिज गार्डन, करतारपुरा में किया जाएगा। इसी क्रम में आज दीपक वाटिका, चौधरी कॉलोनी, हनुमान कॉलोनी, करतारपुरा फाटक एवं विजयनगर सेकंड कॉलोनी से प्रभात फेरी निकाली गई। प्रभात फेरी में बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी नागरिकों, मातृशक्ति एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे मार्ग में जय श्री राम के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। प्रभात फेरी का समापन श्री सीताराम जी मंदिर में विधिवत आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ किया गया। आयोजकों ने सभी क्षेत्रवासियों से 22 फरवरी को होने वाले विराट हिंदू सम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में पधारने की अपील की है।1
- महाराष्ट्र के वर्धा के सिंधी सेवाग्राम इलाके में एक कोच में आग लगने की घटना सामने आई है। अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन को तुरंत रोक दिया गया और प्रभावित कोच को अलग कर दिया गया। यात्री सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की खबर नहीं है। दमकल विभाग ने आग को काबू में कर लिया है।1