लखीमपुर खीरी: लेखपाल पर लगा पीड़ित के फर्जी हस्ताक्षर कर झूठी IGRS आख्या लगाने का गंभीर आरोप, हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी रास्ता बंद। उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी की तहसील धौरहरा के अंतर्गत आने वाले ग्राम मूडी (परगना फिरोज़ाबाद) का मैं निवासी हूँ। मेरे घर आने-जाने का आम रास्ता दबंगई के कारण पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इस रास्ते को खुलवाने के लिए मैंने माननीय हाईकोर्ट (HC) से आदेश भी प्राप्त कर लिया है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद मौके पर आज भी मेरा रास्ता बंद पड़ा है, जिससे मुझे और मेरे परिवार को आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है। लेखपाल द्वारा की गई जालसाजी: जब मैंने इस संबंध में IGRS (जनसुनवाई पोर्टल) पर शिकायत दर्ज कराई, तो क्षेत्र के जिम्मेदार लेखपाल ने मामले को सुलझाने के बजाय मेरे साथ बड़ी धोखाधड़ी की। लेखपाल ने पोर्टल पर अपनी झूठी आख्या (रिपोर्ट) लगाने के लिए मेरे फर्जी हस्ताक्षर (नकली साइन) बना दिए। उन्होंने रिपोर्ट में यह झूठा दावा कर दिया कि रास्ता बहाल हो चुका है और शिकायत का निस्तारण कर दिया गया है, जो कि पूरी तरह झूठ है। मेरी मांग: सरकारी पद पर बैठकर इस तरह की खुली जालसाजी और धोखाधड़ी करना बेहद गंभीर मामला है। मेरी जिले के उच्च अधिकारियों और शासन से गुहार है कि इस मामले की तुरंत जांच कराई जाए। मेरे फर्जी हस्ताक्षर करने वाले दोषी लेखपाल के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) किया जाए ताकि मुझे न्याय मिल सके और मेरा रास्ता खुलवाया जा सके।
लखीमपुर खीरी: लेखपाल पर लगा पीड़ित के फर्जी हस्ताक्षर कर झूठी IGRS आख्या लगाने का गंभीर आरोप, हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी रास्ता बंद। उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी की तहसील धौरहरा के अंतर्गत आने वाले ग्राम मूडी (परगना फिरोज़ाबाद) का मैं निवासी हूँ। मेरे घर आने-जाने का आम रास्ता दबंगई के कारण पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इस रास्ते को खुलवाने के लिए मैंने माननीय हाईकोर्ट (HC) से आदेश भी प्राप्त कर लिया है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद मौके पर आज भी मेरा रास्ता बंद पड़ा है, जिससे मुझे और मेरे परिवार को आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है। लेखपाल द्वारा की गई जालसाजी: जब मैंने इस संबंध में IGRS (जनसुनवाई पोर्टल) पर शिकायत दर्ज कराई, तो क्षेत्र के जिम्मेदार लेखपाल ने मामले को सुलझाने के बजाय मेरे साथ बड़ी धोखाधड़ी की। लेखपाल ने पोर्टल पर अपनी झूठी आख्या (रिपोर्ट) लगाने के लिए मेरे फर्जी हस्ताक्षर (नकली साइन) बना दिए। उन्होंने रिपोर्ट में यह झूठा दावा कर दिया कि रास्ता बहाल हो चुका है और शिकायत का निस्तारण कर दिया गया है, जो कि पूरी तरह झूठ है। मेरी मांग: सरकारी पद पर बैठकर इस तरह की खुली जालसाजी और धोखाधड़ी करना बेहद गंभीर मामला है। मेरी जिले के उच्च अधिकारियों और शासन से गुहार है कि इस मामले की तुरंत जांच कराई जाए। मेरे फर्जी हस्ताक्षर करने वाले दोषी लेखपाल के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) किया जाए ताकि मुझे न्याय मिल सके और मेरा रास्ता खुलवाया जा सके।
- लखीमपुर खीरी: लेखपाल पर लगा पीड़ित के फर्जी हस्ताक्षर कर झूठी IGRS आख्या लगाने का गंभीर आरोप, हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी रास्ता बंद। उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी की तहसील धौरहरा के अंतर्गत आने वाले ग्राम मूडी (परगना फिरोज़ाबाद) का मैं निवासी हूँ। मेरे घर आने-जाने का आम रास्ता दबंगई के कारण पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। इस रास्ते को खुलवाने के लिए मैंने माननीय हाईकोर्ट (HC) से आदेश भी प्राप्त कर लिया है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद मौके पर आज भी मेरा रास्ता बंद पड़ा है, जिससे मुझे और मेरे परिवार को आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है। लेखपाल द्वारा की गई जालसाजी: जब मैंने इस संबंध में IGRS (जनसुनवाई पोर्टल) पर शिकायत दर्ज कराई, तो क्षेत्र के जिम्मेदार लेखपाल ने मामले को सुलझाने के बजाय मेरे साथ बड़ी धोखाधड़ी की। लेखपाल ने पोर्टल पर अपनी झूठी आख्या (रिपोर्ट) लगाने के लिए मेरे फर्जी हस्ताक्षर (नकली साइन) बना दिए। उन्होंने रिपोर्ट में यह झूठा दावा कर दिया कि रास्ता बहाल हो चुका है और शिकायत का निस्तारण कर दिया गया है, जो कि पूरी तरह झूठ है। मेरी मांग: सरकारी पद पर बैठकर इस तरह की खुली जालसाजी और धोखाधड़ी करना बेहद गंभीर मामला है। मेरी जिले के उच्च अधिकारियों और शासन से गुहार है कि इस मामले की तुरंत जांच कराई जाए। मेरे फर्जी हस्ताक्षर करने वाले दोषी लेखपाल के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) किया जाए ताकि मुझे न्याय मिल सके और मेरा रास्ता खुलवाया जा सके।1
- 🚨 साध्यापुर में राहत किट कहां गई? बाढ़ पीड़ितों का सवाल—गरीबों को न्याय कब मिलेगा? प्रशासन जवाब दे! 🚨 साध्यापुर में बाढ़ पीड़ितों का दर्द या सरकारी व्यवस्था की नाकामी? महिलाओं का सवाल—राहत किट आखिर गई कहां? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजनाओं का लाभ गरीबों तक क्यों नहीं पहुंच रहा? किसान-मजदूर परेशान, विधवा और बुजुर्ग महिलाएं राहत की आस में! जिम्मेदार अधिकारी जवाब देंगे या गरीबों की आवाज यूं ही दबती रहेगी? 📍 धौरहरा, लखीमपुर खीरी। हक की आवाज न्यूज़ चैनल की जमीनी पड़ताल में साध्यापुर से एक ऐसा सवाल सामने आ रहा है, जिसे जिम्मेदार व्यवस्था को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बाढ़ की मार झेल चुके किसान, मजदूर और जरूरतमंद परिवार राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। महिलाओं की मांग है कि उन्हें अब तक राहत सामग्री की किट क्यों नहीं मिली? आखिर गरीब परिवारों को सहायता के लिए दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर क्यों होना पड़ रहा है? एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार गरीबों, किसानों, मजदूरों, विधवा महिलाओं और बुजुर्गों के कल्याण के लिए योजनाएं चलाती है, तो दूसरी तरफ यदि पात्र परिवार सहायता से वंचित होने की शिकायत कर रहे हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि सरकारी योजनाओं और गांव की जमीनी हकीकत के बीच इतनी बड़ी दूरी क्यों है? 🔥 अधिकारियों से सीधे सवाल—गरीबों की सुनवाई कब होगी? उपजिलाधिकारी राशि कृष्णा, तहसीलदार आदित्य विशाल, तहसीलदार वीरेंद्र यादव और संबंधित लेखपाल प्रतिनिधि विनोद के स्तर पर साध्यापुर के बाढ़ पीड़ित परिवारों की शिकायतों की जांच और राहत वितरण की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। जनता पूछ रही है: - राहत किट किन-किन परिवारों को दी गई और किन पात्र परिवारों को अब तक नहीं मिली? - क्या गांव में बाढ़ पीड़ितों का निष्पक्ष सर्वेक्षण हुआ? - विधवा महिलाओं, बुजुर्गों और गरीब मजदूर परिवारों को सहायता देने के लिए क्या कदम उठाए गए? - यदि राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई थी, तो उसका वितरण रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता? - जिन परिवारों के नाम पात्रता सूची में हैं, लेकिन जिन्हें सहायता नहीं मिली, उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा? ⚡ सरकार की छवि का सवाल—योजनाएं कागजों पर या जमीन पर? मुख्यमंत्री की जनकल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब सहायता जरूरतमंदों के घर तक पहुंचेगी। यदि किसी गांव में पात्र परिवार राहत के लिए आवाज उठा रहे हैं, तो संबंधित विभाग को तत्काल उनकी शिकायतों का सत्यापन करना चाहिए। सवाल तीखा है, लेकिन जरूरी है: क्या सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने की निगरानी पर्याप्त है? क्या स्थानीय स्तर पर कोई चूक हुई है? या फिर लाभार्थियों की पहचान और वितरण में कोई बाधा है? बिना जांच किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि को दोषी ठहराना उचित नहीं, लेकिन गरीबों की शिकायतों का जवाब मांगना जनता का अधिकार है। राहत वितरण की सूची, पात्रता का आधार और वास्तविक लाभार्थियों का विवरण सामने आने से ही सच्चाई स्पष्ट होगी। 📰 हक की आवाज न्यूज़ चैनल की मांग साध्यापुर की महिलाओं और बाढ़ पीड़ित परिवारों की शिकायतों पर प्रशासन संज्ञान ले। संबंधित अधिकारी गांव में स्थिति का सत्यापन करें, पात्र परिवारों की सूची की जांच करें और वंचित लोगों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराएं। आखिर कब तक गरीब राहत की उम्मीद में इंतजार करेगा? कब तक किसान-मजदूर अपनी पीड़ा लेकर अधिकारियों के दरवाजे तक पहुंचेंगे? और कब सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम जरूरतमंद तक पहुंचेगा? यह केवल राहत किट का सवाल नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान, अधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल है। हक की आवाज न्यूज़ चैनल — जमीनी पड़ताल, पैनी नजर। जनहित • जनसेवा • निर्भीक पत्रकारिता जनता की आवाज उठाना हमारा संकल्प है, और जरूरतमंदों को न्याय तथा सहायता मिलना व्यवस्था की जिम्मेदारी है।1
- निघासन में किसानों की समस्याओं पर गरजा संगठन, सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर उठाई मांगें निघासन, लखीमपुर खीरी। किसानों, मजदूरों और आम जनता की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान मजदूर यूनियन सिंहानिया ने निघासन तहसील में आवाज उठाई। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पहुंचने पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एसडीएम यदुवीर सिंह को सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की। ज्ञापन में बाढ़ से बर्बाद फसलों का सर्वे कराकर पात्र किसानों को मुआवजा दिलाने, नगर पंचायत और ग्राम पंचायतों की बदहाल सड़कों की मरम्मत कराने तथा निघासन में निर्मित पोस्टमार्टम हाउस को जल्द चालू कराने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। संगठन के अनुसार, एसडीएम ने जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। वहीं, एक विवाद से जुड़े मामले में संगठन ने सीओ कार्यालय में भी ज्ञापन देकर वीडियो साक्ष्यों के डिलीट होने के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की। अब संबंधित विभागों की कार्रवाई पर लोगों की निगाहें टिकी हैं।1
- पुलिस अधिकारियों की बैठक में क्या हुआ? देखिए पूरी खबर | जनपद की बड़ी अपडेट #PoliceMeeting #PoliceNews #HindiNews #BreakingNews #UPNews #जनपद_की_खबर #पुलिस #ताजा_खबर1
- धान की फसल काटते समय एक अजगर सांप देखने से मौके पर किसने की भीड़ इकट्ठा हो गई जिला बहराइच थाना मोतीपुर ब्लॉक बल्हा तहसील मिहींपुरवा ग्राम सभा वेलहन महेशपुर मे एक किसान अपने खेत में धान काटने के लिए कंबाइन मशीन ले जाने लगा तभी खेत के अंदर एक विशाल अजगर कंबाइन की चपेट में आने से गंभीर रूप से घायल हो गया1
- नवरात्र के पहले दिन मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना कर रखा व्रत पलियाकलां। शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन रविवार को नगर के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। नवरात्र के शुभारंभ पर मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया। सुबह से ही देवी भक्तों ने मंदिरों में पहुंचकर मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। नगर के पाण्डेय बाबा मंदिर, श्रीराम जानकी मंदिर और माता कालरात्रि मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। भक्तों ने मां के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और नवरात्र व्रत का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मंदिरों में भक्तिमय माहौल बना रहा। वहीं, घरों में भी नवरात्र को लेकर विशेष तैयारियां की गईं। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से कलश स्थापना कर पूजन-अर्चन किया और मां दुर्गा की आराधना के साथ व्रत रखा। नवरात्र के पहले दिन नगर में भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिला।3
- लखीमपुर में संविदा कर्मचारियों के धरने पर पहुंचे सीएमओ, 15 मिनट में स्थल खाली करने की चेतावनी!1
- , आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से लोकसभा सांसद चंद्रशेखर आजाद को दिल्ली में उनके आवास (नार्थ एवेन्यू) के बाहर से दिल्ली पुलिस द्वारा रोके जाने और हिरासत में (डिटेन) किए जाने की खबरें सामने आई हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली में प्रस्तावित विभिन्न प्रदर्शनों और जंतर-मंतर की ओर जाने केिक कार्यक्रमों के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था और आवाजाही पर पाबंदियों के बीच यह कार्रवाई हुई। इस दौरान पुलिस और सांसद चंद्रशेखर आजाद के बीच तीखी नोकझोक व विरोध-प्रदर्शन की स्थिति भी देखने को मिली।1