डिंडोरी जिले में लगातार गिरते जलस्तर के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर जल संकट गहरा गया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना भी गांवों में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। ताजा मामला ग्राम पंचायत नेवसा के पतेरा टोला से सामने आया है, जहाँ लगभग 40 से 45 परिवार भीषण पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं और दूषित कुएं का पानी इस्तेमाल करने पर मजबूर हैं। पंचायत की इस कथित लापरवाही से परेशान ग्रामीण कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में अपनी समस्या लेकर कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के सामने पहुंचे। ग्रामीणों ने कलेक्टर को बताया कि पतेरा टोला में पेयजल की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। पंचायत द्वारा न तो नियमित रूप से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है और न ही खराब पड़ी जल प्रणालियों को सुधारा जा रहा है। इस मजबूरी में ग्रामीणों को दूषित कुएं का पानी पीना पड़ रहा है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि पतेरा टोला में रहने वाला एक शिक्षक अपने निजी बोरिंग से पानी उपलब्ध कराता है, जिसके एवज में प्रत्येक परिवार से हर महीने 200 रुपए लिए जा रहे हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक अतिरिक्त बोझ बन गया है। ग्रामीणों ने आगे बताया कि उन्होंने कई बार पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की, लेकिन आज तक इस संबंध में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गर्मी बढ़ने के साथ यह जल संकट और भी विकराल हो गया है, जिससे महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्हें घंटों दूर जाकर पानी लाना पड़ता है, जो उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। समस्या की गंभीरता को दर्शाने के लिए ग्रामीण दूषित पानी बोतल में भरकर लाए थे, जिसे उन्होंने डिंडोरी कलेक्टर को दिखाया ताकि समस्या के निराकरण हेतु तत्काल प्रभाव से कार्रवाई शुरू हो सके। जनसुनवाई में पहुंचे इन ग्रामीणों की समस्या पर अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन कितनी तेजी से और प्रभावी ढंग से कार्रवाई करता है।
डिंडोरी जिले में लगातार गिरते जलस्तर के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर जल संकट गहरा गया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना भी गांवों में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। ताजा मामला ग्राम पंचायत नेवसा के पतेरा टोला से सामने आया है, जहाँ लगभग 40 से 45 परिवार भीषण पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं और दूषित कुएं का पानी इस्तेमाल करने पर मजबूर हैं। पंचायत की इस कथित लापरवाही से परेशान ग्रामीण कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई में अपनी समस्या लेकर कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के सामने पहुंचे। ग्रामीणों ने कलेक्टर को बताया कि पतेरा टोला में पेयजल की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। पंचायत द्वारा न तो नियमित रूप से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है और न ही खराब पड़ी जल प्रणालियों को सुधारा जा रहा है। इस मजबूरी में ग्रामीणों को दूषित कुएं का पानी पीना पड़ रहा है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि पतेरा टोला में रहने वाला एक शिक्षक अपने निजी बोरिंग से पानी उपलब्ध कराता है, जिसके एवज में प्रत्येक परिवार से हर महीने 200 रुपए लिए जा रहे हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक अतिरिक्त बोझ बन गया है। ग्रामीणों ने आगे बताया कि उन्होंने कई बार पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की, लेकिन आज तक इस संबंध में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गर्मी बढ़ने के साथ यह जल संकट और भी विकराल हो गया है, जिससे महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्हें घंटों दूर जाकर पानी लाना पड़ता है, जो उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। समस्या की गंभीरता को दर्शाने के लिए ग्रामीण दूषित पानी बोतल में भरकर लाए थे, जिसे उन्होंने डिंडोरी कलेक्टर को दिखाया ताकि समस्या के निराकरण हेतु तत्काल प्रभाव से कार्रवाई शुरू हो सके। जनसुनवाई में पहुंचे इन ग्रामीणों की समस्या पर अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन कितनी तेजी से और प्रभावी ढंग से कार्रवाई करता है।
- डिंडोरी जिला मुख्यालय के पुल घाट स्थित माँ नर्मदा तट पर बनाई गई सीढ़ियों के बीच एक लोहे का स्ट्रक्चर खड़ा किए जाने का आरोप शनि सेवा समिति पुल घाट ने एक समाज विशेष पर लगाया है। समिति के सदस्यों ने बताया कि बीते सोमवार की शाम, एक समाज विशेष के लोग नर्मदा किनारे घाट की सीढ़ियों पर पहुंचे और पूजा-पाठ कर यह लोहे का स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया, यह दावा करते हुए कि यह उनके धर्म का है। शनि सेवा समिति के सदस्यों का कहना है कि वे विगत तीन वर्षों से प्रतिदिन विधि-विधान से भगवान शनि देव की पूजा-आराधना करते आ रहे हैं और प्रत्येक शनिवार को समिति द्वारा भंडारा कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। जिस स्थान पर यह लोहे का स्ट्रक्चर खड़ा किया गया है, वहीं से श्रद्धालु भगवान शनि देव की पूजा-पाठ करने के लिए उनके स्थान तक पहुंचते हैं। समिति का आरोप है कि यदि इस लोहे के स्ट्रक्चर को रास्ते के बीच में खड़ा रहने दिया गया, तो आवागमन में बाधा उत्पन्न होगी और श्रद्धालुओं को भंडारा संपन्न कराने तथा भगवान की पूजा-पाठ करने में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। समिति के सदस्यों ने यह भी कहा कि यदि समाज विशेष के लोग उनकी बातों को नहीं मानते हैं, तो वे सभी सदस्य मिलकर जिला प्रशासन से शिकायत करेंगे और न्याय की गुहार लगाएंगे।1
- शहडोल का मेवाड़ हॉस्पिटल एक बार फिर सुर्खियों में है, जहाँ मरीज द्वारा बिल मांगे जाने पर इलाज करने से कथित तौर पर मना कर दिया गया। इस घटना से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, इस वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं की जा सकती है।1
- सोमवार को दोपहर लगभग 1:20 बजे शहडोल के शासकीय उच्च विश्रामगृह में कांग्रेस की एक पत्रकार वार्ता संपन्न हुई। इस वार्ता का आयोजन 'इंदिरा ज्योति यात्रा' को लेकर किया गया था, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भास्कर राव रोकड़े ने जानकारी दी। इस अवसर पर कांग्रेस जिला अध्यक्ष अजय अवस्थी और प्रवक्ता पीयूष शुक्ला भी मौजूद रहे। जिले के पत्रकार भी उच्च विश्रामगृह में उपस्थित थे।1
- शहडोल जिले के गोहपारू थाना क्षेत्र के पास रीवा की ओर से आ रही दीपक ट्रेवल्स की एक तेज रफ्तार बस और शहडोल की ओर से आ रही एक कार के बीच भीषण आमने-सामने की भिड़ंत हो गई। इस जोरदार टक्कर में कार के इंजन के परखच्चे उड़ गए। दुर्घटना के समय कार में चार लोग सवार थे, जिनमें से दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोहपारू में भर्ती कराया गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची।1
- शहडोल में गंगा दशहरा के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश शासन के 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत नगर पालिका परिषद द्वारा एक भव्य कलश यात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण, जल स्रोतों के संवर्धन और पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाना था, जिससे पूरा नगर इस जन-जागरूकता के अनूठे अभियान से गूंज उठा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर कमिश्नर सुरभि गुप्ता, कलेक्टर केदार सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल, जिला अध्यक्ष अमिता चपरा, एसडीएम अमृता गर्ग, सीओ शिवम प्रजापति, पार्षद सिल्लू रजक, एसी आनंद सिन्हा, मुद्रिका सिंह सहित नगर पालिका शहडोल की सीएमओ श्रीमती आशा भंडारी और अन्य कर्मचारी जैसे सुखेंद्र सिंह तोमर, पुनीत त्रिपाठी, मोतीलाल सिंह, सत्यकाम मिश्रा, मयंक मिश्रा, अनिल महोबिया, सौरभ निगम और विजय वर्मा उपस्थित रहे। इन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने जल को जीवन का आधार बताते हुए इसके संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। एनयूएलएम योजना के अंतर्गत संचालित महिला स्वसहायता समूहों ने भी रंगोली बनाकर और कलश यात्रा निकालकर अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन के दौरान निकाली गई भव्य कलश यात्रा ने नगरवासियों का ध्यान जल संरक्षण के महत्व की ओर आकर्षित किया, वहीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों और कलाकारों ने जल बचाने तथा प्रकृति संरक्षण का प्रभावी संदेश दिया। सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य धरोहर है, जिसके संरक्षण, वर्षा जल संचयन और नदियों-तालाबों के पुनर्जीवन के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। इस अवसर पर सभी ने जल संरक्षण को एक जन आंदोलन बनाने का संकल्प लिया। नगर पालिका परिषद द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा रहा, बल्कि जल संरक्षण के प्रति सामाजिक चेतना जगाने का भी एक सशक्त माध्यम बना। गंगा दशहरा के इस पावन अवसर पर दिया गया यह संदेश लोगों को जल बचाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित करता है।2
- शहडोल जिले के मुख्यालय से लगभग 6 से 7 किलोमीटर दूर स्थित सिंहपुर मार्ग पर बिजली विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है, जहाँ सड़क किनारे कई दिनों से एक टूटी हुई बिजली की तार नीचे लटक रही है। विभाग द्वारा इसे सुधारने के लिए अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण यह तार लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बनी हुई है, जिससे स्थानीय निवासियों और राहगीरों में भारी नाराजगी और डर का माहौल है। ग्रामीणों और राहगीरों का कहना है कि सिंहपुर मार्ग पर रोजाना सैकड़ों लोगों की आवाजाही रहती है, जिनमें बाइक सवार, स्कूली छात्र-छात्राएं, मजदूर, किसान और छोटे वाहन शामिल हैं। मवेशियों का आवागमन भी इस मार्ग पर बना रहता है। यह तार दूर से स्पष्ट दिखाई नहीं देती और बारिश या अंधेरा होने पर स्थिति और अधिक खतरनाक हो सकती है। लोगों का कहना है कि कई बार छोटे बच्चे और मवेशी इस तार के बेहद करीब पहुँच चुके हैं, जिससे हर समय किसी बड़ी अनहोनी की आशंका बनी रहती है। उन्हें डर है कि यदि यह तार अचानक चालू हालत में आ गई या किसी वाहन की चपेट में आकर टूट गई, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, इस समस्या की जानकारी कई बार बिजली विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को दी जा चुकी है, लेकिन उन्हें अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। विभाग की इस अनदेखी से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है, और ग्रामीण आरोप लगा रहे हैं कि बिजली विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से इस मामले का तत्काल संज्ञान लेने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने और लटक रही बिजली तार को तुरंत हटाकर मरम्मत कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे बिजली विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते सुधार कार्य नहीं किया गया तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।4
- डिंडोरी मुख्यालय से लगे ग्राम देवरा के भर्रा टोला में पानी की पाइप लाइन बिछाने के लिए पूरी सड़क खोद दी गई है। इस वजह से स्थानीय लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, और ग्रामीणों का कहना है कि आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। हालांकि, सड़क सुधार का काम अब तक शुरू नहीं किया गया है। इस स्थिति से आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्या का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि ऐसी स्थिति में होने वाली किसी भी घटना की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और पीएचई विभाग की होगी।1
- शहडोल RTO कार्यालय में पदस्थ अधिकारी अनपा खान पर शासकीय कार्यालय में धर्म विशेष की दान पेटी रखकर चंदा संग्रह करने का गंभीर आरोप लगा है। समाज के कुछ लोगों द्वारा जानकारी दिए जाने के बाद कि दिसंबर-जनवरी माह से उनके शासकीय केबिन में यह गतिविधि चल रही है, आशंका जताई गई है कि इस धन का उपयोग देश विरोधी गतिविधियों या धर्म परिवर्तन के लिए फंडिंग में किया जा रहा है। बजरंग दल ने इसकी लिखित शिकायत सोहागपुर थाना को दी, लेकिन अधिकारियों द्वारा 'जांच का विषय' कहकर पल्ला झाड़ लिया गया। इसके बाद, कमिश्नर महोदय जी को फोटो-वीडियो के साथ लिखित ज्ञापन सौंपा गया, जिन्होंने तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच अधिकारी भेजे। जांच अधिकारियों के सामने ही RTO के केबिन के अंदरूनी कमरे से दान पेटी बरामद हुई। जब अधिकारी अनपा खान से पेटी के संबंध में पूछा गया, तो उन्होंने पहले कहा कि कुछ दिन पहले रिश्तेदार के यहाँ गमी होने के कारण पेटी लाई थी और इसे मदरसा भिजवाना था, लेकिन भिजवा नहीं पाईं। थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना बयान बदलते हुए कहा कि पेटी सुबह गाड़ी में छूट गई थी, इसलिए लाकर केबिन में रख ली। उन्होंने अपने शासकीय पियून कर्मचारियों को भी डांटते हुए पूछा कि पेटी को कल्याणपुर मस्जिद क्यों नहीं पहुँचाया। एक पत्रकार द्वारा पेटी के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इसका जवाब वह न्यायपालिका को देंगी। बाद में, अनशन पर बैठे लोगों के पास रुककर उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने षडयंत्रपूर्वक दोपहर में पेटी उनके केबिन में रख दी है और उनसे पैसे की मांग कर रहे हैं। उनके बार-बार बयान बदलने से यह विषय और विवादित हो गया है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा अधिकारी के केबिन को खोलने का आग्रह करने पर कर्मचारियों ने पहले मैडम की अनुमति के बिना खोलने से मना किया, लेकिन जब अधिकारियों के साथ बजरंग दल केबिन में पहुंचा तो उनके ही कर्मचारियों ने पेटी को केबिन से उठाकर अंदर वाले कमरे में रख दिया था। अधिकारियों के कहने पर पेटी को अंदर से बाहर लाया गया, तो उसमें लगभग 22-24 इस्लामी किताबें मिलीं, जिन पर उर्दू में कुछ लिखा था। पेटी को छुपाना और तत्काल ना दिखाना यह स्पष्ट करता है कि कुछ तो गड़बड़ की गई है। इस घटना से पहले भी 23 अप्रैल 2023 को भोपाल में अनपा खान के खिलाफ इसी प्रकार के मामले और भ्रष्टाचार की शिकायत हुई थी, जिस पर 25 अप्रैल 2023 को उच्च अधिकारियों द्वारा कार्रवाई करते हुए उन्हें अटैच कर ग्वालियर भेज दिया गया था। जून 2025 में उन्हें ग्वालियर से सीधे शहडोल में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के रूप में पदस्थ किया गया था, और जून के बाद अगस्त से ही वह धर्म विशेष समुदाय को लाभ पहुँचाने के लिए लगातार विवादों में रही हैं। शासकीय कार्यालय का उपयोग किसी धर्म विशेष के प्रचार हेतु किया जाना भारत के संविधान की धर्मनिरपेक्षता और मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का उल्लंघन है। ऐसे विवादित अधिकारियों को जनजाति जिले की कमान सौंपने पर सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि जनजाति समाज अत्यंत सरल और भोले-भाले होते हैं, और ऐसे अधिकारियों के दबाव में धर्म परिवर्तन करना आसान हो सकता है। हिंदू समाज ने माननीय मुख्यमंत्री और जिले के सत्ताधारी लोगों से इस विषय पर विशेष ध्यान देने और तत्काल उचित कार्रवाई करने की मांग की है। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो हिंदू समाज अनिश्चितकाल के लिए आंदोलन करने को विवश रहेगा, जैसा कि पूर्व में भी विहिप द्वारा प्रशासन को सूचना दिए जाने के बावजूद तब तक मौन रहने का अनुभव रहा है, जब तक कोई बड़ी घटना नहीं हो गई, जैसे कि हाल ही का केशवाही का मुद्दा।3
- मध्य प्रदेश शासन के 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत, रविवार को शहडोल नगर पालिका परिषद ने संघ कार्यालय के पास स्थित हेडगेवार पार्क तालाब परिसर में एक व्यापक स्वच्छता और जन जागरूकता अभियान चलाया। इस अभियान में नगर पालिका के अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, सफाई मित्र और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिन्होंने मिलकर तालाब क्षेत्र की साफ-सफाई की और जल संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश दिया। इस दौरान, तालाब के आसपास फैले कूड़े और प्लास्टिक कचरे को हटाकर परिसर को स्वच्छ बनाने का प्रयास किया गया। उपस्थित अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि जल स्रोतों का संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, और यह तभी संभव है जब इसमें जनभागीदारी सुनिश्चित हो। अभियान का मुख्य उद्देश्य आमजन को जल बचाने, जल स्रोतों को साफ रखने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। इसमें शामिल लोगों ने “जल है तो कल है” का संदेश देते हुए नागरिकों से अपील की कि वे जलाशयों में कचरा न डालें और वर्षा जल संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं। इस पहल को शहडोल में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने वाला एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। अभियान में जिला कलेक्टर केदार सिंह, नगरपालिका अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल, पार्षद सिल्लू रजक, प्रभात पांडेय, co शिवम् प्रजापति, sdm अमृता गर्ग, मुख्य नगरपालिका अधिकारी आशा भंडारी, पूर्व अध्यक्ष प्रकाश जगवानी, समूह की कार्यकर्ता, इंजीनियर और स्वच्छता कर्मचारियों सहित कई प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत शहर के विभिन्न जल स्रोतों, तालाबों और सार्वजनिक स्थलों पर नियमित रूप से स्वच्छता और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके। इस अभियान के दौरान लोगों में काफी उत्साह देखा गया और नागरिकों ने प्रशासन के इस प्रयास की सराहना की।4