शाहाबाद, हरदोई में महिला लेखपाल प्रकरण को लेकर उपजिलाधिकारी शाहाबाद के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने और उनके स्थानांतरण की मांग पर अधिवक्ताओं का आंदोलन गुरुवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में ज़ोरदार नारेबाजी कर प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विमलेश सिंह लोधी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अधिवक्ता तहसील परिसर में एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम के विरुद्ध कार्रवाई की मांग दोहराते हुए स्पष्ट किया कि जब तक संबंधित अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें शाहाबाद से हटाया नहीं जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अधिवक्ताओं ने प्रशासन पर मामले की अनदेखी का आरोप लगाया, कहा कि महिला लेखपाल द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाने के बावजूद अब तक न तो मुकदमा दर्ज हुआ है और न ही कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई हुई है, जिससे न्याय व्यवस्था और प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा और जिले की सभी तहसीलों को जाम कर दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर उच्च अधिकारियों से मिलकर पूरे प्रकरण की शिकायत की जाएगी तथा बार एसोसिएशन आगे की रणनीति तय करेगा। यह विरोध तब शुरू हुआ जब महिला लेखपाल ने एसडीएम शाहाबाद के विरुद्ध कोतवाली में तहरीर दी थी। पहले दिन अधिवक्ताओं ने तहसील से कोतवाली तक प्रदर्शन कर मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी, जबकि दूसरे दिन बार एसोसिएशन ने एसडीएम न्यायालय के बहिष्कार का निर्णय लेते हुए चैंबर का घेराव किया था। वहीं, एसडीएम सुशील कुमार मिश्रा ने महिला लेखपाल द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का पहले ही खंडन कर दिया है। उन्होंने कहा कि संबंधित लेखपाल को केवल शासकीय कार्य और खतौनी फीडिंग के संबंध में पूछताछ के लिए बुलाया गया था, और लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिलाधिकारी द्वारा मामले की जाँच के लिए एक टीम गठित की गई है, जो गंभीरता से जाँच कर रही है, लेकिन जाँच के निष्कर्षों के बारे में अभी तक कोई अधिकारी बताने को तैयार नहीं है। समाचार लिखे जाने तक पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज करने या स्थानांतरण के संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया था। एसडीएम सुशील कुमार मिश्रा ने पत्रकारों को अपनी बाइट में बताया कि उनके कार्यालय में आर. के. शाहाबाद ने शिकायत की थी कि आलमनगर पछोहा की खतौनी की फीडिंग नहीं हो पा रही है। इस पर उन्होंने संबंधित कर्मचारी को बुलाया। उन्होंने बताया कि यह नई महिला लेखपाल हैं, जिनका बिलग्राम से यहाँ स्थानांतरण हुआ है। जब उनसे खतौनी फीडिंग न होने का कारण पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वह ऊपर कार्यालय में बैठती हैं, जबकि उन्हें भूलेख कार्यालय में अटैच किया गया था। लेखपाल ने अपनी आँखों में समस्या होने की बात कही, जिस पर एसडीएम ने उनसे डॉक्टर की रिपोर्ट मांगी, ताकि उन्हें क्षेत्र दिया जा सके। इसके बाद लेखपाल ने अपने पिताजी को फोन किया, और उनके पिताजी चार-पांच वकीलों के साथ उनके चैंबर में आकर बदतमीजी और अभद्रता करने लगे। उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें एफआईआर करने और कई धाराएं बढ़वाने की धमकी दी गई है। एसडीएम ने पुष्टि की कि इस दौरान उनके सहकर्मी सप्लाई इंस्पेक्टर, पेशकार, सुरक्षाकर्मी और आर.के. शाहाबाद उपस्थित थे। तीसरे दिन प्रदर्शन के बीच अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विमलेश सिंह लोधी ने अपनी बाइट में कहा कि एसडीएम मामले को तोड़-मरोड़कर समाज के सामने पेश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले दिन जब एसडीएम के चैंबर में पीड़िता बेटी के पिता से बात हुई, तो उन्होंने तत्काल अश्लीलता को स्पष्ट रूप से इसलिए नहीं बताया क्योंकि कोई पिता सीधे समाज में अपनी और अपनी बेटी की बदनामी सार्वजनिक नहीं कराना चाहता। इसके बावजूद, पिता ने मौके पर कहा था कि एसडीएम ने उनकी बेटी को दो बार परेशान किया, जबकि उन्हें बताया गया था कि यह उनकी बेटी है, फिर भी एसडीएम अपनी आदत से बाज नहीं आए। अधिवक्ता एसडीएम के विरुद्ध कार्रवाई की मांग पर तीसरे दिन भी डटे हैं, और एसडीएम का भविष्य जाँच कमेटी की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा, भले ही एसडीएम ने आरोपों को असत्य और निराधार बताया है।
शाहाबाद, हरदोई में महिला लेखपाल प्रकरण को लेकर उपजिलाधिकारी शाहाबाद के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने और उनके स्थानांतरण की मांग पर अधिवक्ताओं का आंदोलन गुरुवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में ज़ोरदार नारेबाजी कर प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विमलेश सिंह लोधी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में अधिवक्ता तहसील परिसर में एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम के विरुद्ध कार्रवाई की मांग दोहराते हुए स्पष्ट किया कि जब तक संबंधित अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें शाहाबाद से हटाया नहीं जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अधिवक्ताओं ने प्रशासन पर मामले की अनदेखी का आरोप लगाया, कहा कि महिला लेखपाल द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाने के बावजूद अब तक न तो मुकदमा दर्ज हुआ है और न ही कोई ठोस प्रशासनिक कार्रवाई हुई है, जिससे न्याय व्यवस्था और प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप
दिया जाएगा और जिले की सभी तहसीलों को जाम कर दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर उच्च अधिकारियों से मिलकर पूरे प्रकरण की शिकायत की जाएगी तथा बार एसोसिएशन आगे की रणनीति तय करेगा। यह विरोध तब शुरू हुआ जब महिला लेखपाल ने एसडीएम शाहाबाद के विरुद्ध कोतवाली में तहरीर दी थी। पहले दिन अधिवक्ताओं ने तहसील से कोतवाली तक प्रदर्शन कर मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी, जबकि दूसरे दिन बार एसोसिएशन ने एसडीएम न्यायालय के बहिष्कार का निर्णय लेते हुए चैंबर का घेराव किया था। वहीं, एसडीएम सुशील कुमार मिश्रा ने महिला लेखपाल द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का पहले ही खंडन कर दिया है। उन्होंने कहा कि संबंधित लेखपाल को केवल शासकीय कार्य और खतौनी फीडिंग के संबंध में पूछताछ के लिए बुलाया गया था, और लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिलाधिकारी द्वारा मामले की जाँच के लिए एक टीम गठित की गई है, जो गंभीरता से जाँच कर रही है, लेकिन जाँच के निष्कर्षों के बारे में अभी तक कोई अधिकारी
बताने को तैयार नहीं है। समाचार लिखे जाने तक पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज करने या स्थानांतरण के संबंध में कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया था। एसडीएम सुशील कुमार मिश्रा ने पत्रकारों को अपनी बाइट में बताया कि उनके कार्यालय में आर. के. शाहाबाद ने शिकायत की थी कि आलमनगर पछोहा की खतौनी की फीडिंग नहीं हो पा रही है। इस पर उन्होंने संबंधित कर्मचारी को बुलाया। उन्होंने बताया कि यह नई महिला लेखपाल हैं, जिनका बिलग्राम से यहाँ स्थानांतरण हुआ है। जब उनसे खतौनी फीडिंग न होने का कारण पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वह ऊपर कार्यालय में बैठती हैं, जबकि उन्हें भूलेख कार्यालय में अटैच किया गया था। लेखपाल ने अपनी आँखों में समस्या होने की बात कही, जिस पर एसडीएम ने उनसे डॉक्टर की रिपोर्ट मांगी, ताकि उन्हें क्षेत्र दिया जा सके। इसके बाद लेखपाल ने अपने पिताजी को फोन किया, और उनके पिताजी चार-पांच वकीलों के साथ उनके चैंबर में आकर बदतमीजी और अभद्रता करने लगे। उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें एफआईआर करने और कई
धाराएं बढ़वाने की धमकी दी गई है। एसडीएम ने पुष्टि की कि इस दौरान उनके सहकर्मी सप्लाई इंस्पेक्टर, पेशकार, सुरक्षाकर्मी और आर.के. शाहाबाद उपस्थित थे। तीसरे दिन प्रदर्शन के बीच अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विमलेश सिंह लोधी ने अपनी बाइट में कहा कि एसडीएम मामले को तोड़-मरोड़कर समाज के सामने पेश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले दिन जब एसडीएम के चैंबर में पीड़िता बेटी के पिता से बात हुई, तो उन्होंने तत्काल अश्लीलता को स्पष्ट रूप से इसलिए नहीं बताया क्योंकि कोई पिता सीधे समाज में अपनी और अपनी बेटी की बदनामी सार्वजनिक नहीं कराना चाहता। इसके बावजूद, पिता ने मौके पर कहा था कि एसडीएम ने उनकी बेटी को दो बार परेशान किया, जबकि उन्हें बताया गया था कि यह उनकी बेटी है, फिर भी एसडीएम अपनी आदत से बाज नहीं आए। अधिवक्ता एसडीएम के विरुद्ध कार्रवाई की मांग पर तीसरे दिन भी डटे हैं, और एसडीएम का भविष्य जाँच कमेटी की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा, भले ही एसडीएम ने आरोपों को असत्य और निराधार बताया है।
- सीतापुर में प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक और राष्ट्रीय सचिव अनूप गुप्ता के मकान समेत कुल 27 भवनों पर नोटिस चस्पा की है। यह कार्रवाई तहसील प्रशासन द्वारा जिलाधिकारी न्यायालय के आदेश पर शहर के शिवपुरी कॉलोनी क्षेत्र में की गई है, जहां संबंधित भूमि के स्वामित्व का मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। प्रशासन के अनुसार, ये मकान लगभग 25 बीघा जमीन पर बने हुए हैं, जो राजस्व अभिलेखों में ग्राम छावनी गोरा बारीक के नाम दर्ज है। जिलाधिकारी न्यायालय के निर्देश पर सभी भवन स्वामियों को 24 जुलाई तक अपना पक्ष और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब न देने पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, पूर्व विधायक अनूप गुप्ता ने इस नोटिस को गलत करार दिया है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने वर्ष 2004 में भूमि की विधिवत रजिस्ट्री कराई थी और उनके पास इस संबंध में सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं। गुप्ता ने विश्वास व्यक्त किया है कि वे न्यायालय में अपनी बात को मजबूती से रखेंगे। इस घटना के बाद से इलाके में खासी हलचल मची हुई है और स्थानीय लोगों के बीच यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की निगाहें 24 जुलाई को होने वाली सुनवाई और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।1
- नोएडा के सलारपुर क्षेत्र में सीवर लाइन निर्माण का अधूरा कार्य स्थानीय लोगों के लिए गंभीर परेशानी का सबब बन गया है। खुदाई के बाद कई गलियों को अधूरा छोड़ दिए जाने के कारण जल निकासी व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। गुरुवार को हुई बारिश के बाद गलियों में भारी जलभराव हो गया और यह पानी कई घरों में भी घुस गया, जिससे निवासियों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अधूरे निर्माण कार्य के चलते गलियों में आवाजाही मुश्किल हो गई है, जिसका खामियाजा विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को उठाना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि संबंधित विभाग ने सीवर लाइन का काम तो शुरू कर दिया, लेकिन उसे समय पर पूरा नहीं किया जा रहा है और न ही सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। बारिश के पानी से घरों में सामान को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई गई है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल मांग की है कि सीवर लाइन का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा किया जाए, क्षतिग्रस्त गलियों की तुरंत मरम्मत कराई जाए और जलभराव की इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।4
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हरदोई जिले के संदर्भ में वायरल हो रही एक नाबालिग लड़की के साथ 32 लोगों द्वारा दुष्कर्म किए जाने की खबर पूरी तरह से असत्य, तथ्यहीन और भ्रामक है। हरदोई पुलिस ने इस कथित घटना का स्पष्ट रूप से खंडन किया है और स्पष्ट किया है कि जनपद में ऐसी कोई घटना घटित नहीं हुई है। इस भ्रामक खबर का प्रचार-प्रसार करने वालों के खिलाफ पुलिस ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। थाना बिलग्राम में मु0अ0स0 302/26 और धारा 353(2) BNS के तहत मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी सुबोध गौतम ने भी अपनी बाइट के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की है। हरदोई पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे इस तरह की भ्रामक खबरों को प्रसारित न करें, अन्यथा संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।1
- हरदोई में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर एक नाबालिग लड़की के साथ 32 लोगों द्वारा दुष्कर्म किए जाने की खबर वायरल हो रही है। हरदोई पुलिस ने इस दावे को पूरी तरह असत्य, तथ्यहीन और भ्रामक करार देते हुए स्पष्ट किया है कि जनपद में ऐसी कोई घटना घटित नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि यह खबर आमजन को भ्रमित करने के उद्देश्य से फर्जी तरीके से फैलाई जा रही है। इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने भ्रामक खबर का प्रचार करने वाले व्यक्ति के खिलाफ थाना बिलग्राम में मु.अ.सं. 302/2026 और धारा 353(2) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया है। अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी सुबोध गौतम ने भी इस वायरल खबर का खंडन करते हुए जनता से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक एवं सत्यापित सूचनाओं पर ही विश्वास करें। पुलिस ने चेतावनी दी है कि भविष्य में भी यदि कोई व्यक्ति ऐसी झूठी खबरें फैलाता पाया गया, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।1
- उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में पुलिस ने साइबर अपराधियों के ख़िलाफ़ एक बड़ी कार्रवाई की है। एक विशेष अभियान चलाकर पुलिस ने कुल 25 साइबर ठगों को गिरफ़्तार किया है।4
- हरदोई में साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस अधीक्षक के कुशल पर्यवेक्षण में, जनपदीय पुलिस द्वारा एक विशेष अभियान चलाया गया, जिसके तहत कुल 25 शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है।1
- हरदोई पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ एक बड़ा एक्शन लिया है। पुलिस अधीक्षक महोदय के कुशल पर्यवेक्षण में, जनपदीय पुलिस द्वारा साइबर अपराधियों के विरुद्ध एक विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत कुल 25 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है।1
- दुद्धी के हर्षित अस्पताल पर एक नवजात शिशु को कथित तौर पर रोके रखने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित पिता का आरोप है कि अस्पताल ने अतिरिक्त पैसों की मांग की, जिसके कारण उन्होंने करीब दो घंटे तक बच्चे को परिजनों को नहीं सौंपा। यह घटना तब हुई जब बच्चे की माँ को गंभीर हालत में जिला अस्पताल रेफर किया गया था। पिता के अनुसार, पत्नी की नाजुक हालत बताने के बावजूद भी अस्पताल नहीं पसीजा और उनकी बात नहीं मानी गई। अस्पताल पर यह भी आरोप है कि पहले से ₹5000 जमा होने के बावजूद अतिरिक्त रकम की मांग की गई। बताया गया है कि इलाज के बाद भी नवजात की हालत में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ था। अंततः, ग्राम प्रधान के हस्तक्षेप के बाद ही नवजात को उसके परिजनों को सौंपा जा सका। दुद्धी कोतवाली क्षेत्र के इस मामले में एक शिकायत मिलने पर एडिशनल सीएमओ ने जांच का भरोसा दिया है, साथ ही यह भी कहा है कि अगर आरोप सही पाए गए तो अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।1
- हरदोई जिले के पलिया चौराहे पर एक चलती सीएनजी कार में अचानक भीषण आग लग गई। आग की तेज लपटें उठते ही कार सवारों ने तुरंत वाहन रोककर बाहर कूदकर अपनी जान बचाई, जिससे घटना स्थल पर हड़कंप मच गया। आग को तेजी से फैलता देख स्थानीय ग्रामीणों ने तत्काल तत्परता दिखाते हुए भारी मशक्कत के बाद उस पर काबू पाया। ग्रामीणों की सूझबूझ और सक्रियता के कारण एक बड़ा हादसा होने से टल गया। इस घटना में किसी के भी हताहत होने की कोई खबर नहीं है, हालांकि कार पूरी तरह जलकर क्षतिग्रस्त हो गई है। पुलिस अब आग लगने के कारणों की जांच कर रही है।1