Tata Steel Company के jhariya Division के अंतर्गत सिजुआ क्षेत्र के रामपुर व कंचनपुर जो लीज होल्ड एरिया के अंतर्गत आता है!जिस एरिया मे कोयला का उतखनन बड़े पैमाने मे होता है जिस कारण लगभग दर्जानाधिक नए एवं पुराने घरों मे दरार का होना आम बात हो गई है जिससे ग्रामीणों मे भय का माहौल बना हुआ है इसको लेकर ग्रामीणों ने अपने अपने घरों का रिपेयरिंग के लिए प्रबंधन से वार्ता करने के पश्चात वर्ष 2019 से कई बार आवेदन भी दे चुके है परन्तु अभी तक कोई साकारात्मक पहल नही कि जा रही है दबाव पड़ने पर कुछ नामचीन वयक्ति का कार्य किया गया है जो उचित नही था भुक्तभोगी और अत्यंत निर्धन जब भी इस विषय को लेकर मौखिक एवं लिखित रूप से वार्तालाप करता है तो टालमटोल करने लगते है कभी पुराने दर होने के कारण ठीकेदारों के द्वारा कार्य नही करने एवं पुनः नए दर पर टेंडर निकलने कि बात बोलकर आज लगभग 5 से 6 वर्षो से ग्रामीणों को यही कहानी सुनाया जा रहा है प्रश्न तो यह है कि खनन प्रभावित एरिया मे जनहित कि मुद्दे पर प्रबंधन कितना संवेदनशील है इससे अनुमान लगाया जा सकता है!
Tata Steel Company के jhariya Division के अंतर्गत सिजुआ क्षेत्र के रामपुर व कंचनपुर जो लीज होल्ड एरिया के अंतर्गत आता है!जिस एरिया मे कोयला का उतखनन बड़े पैमाने मे होता है जिस कारण लगभग दर्जानाधिक नए एवं पुराने घरों मे दरार का होना आम बात हो गई है
जिससे ग्रामीणों मे भय का माहौल बना हुआ है इसको लेकर ग्रामीणों ने अपने अपने घरों का रिपेयरिंग के लिए प्रबंधन से वार्ता करने के पश्चात वर्ष 2019 से कई बार आवेदन भी दे चुके है परन्तु अभी तक कोई साकारात्मक पहल नही कि जा रही है दबाव
पड़ने पर कुछ नामचीन वयक्ति का कार्य किया गया है जो उचित नही था भुक्तभोगी और अत्यंत निर्धन जब भी इस विषय को लेकर मौखिक एवं लिखित रूप से वार्तालाप करता है तो टालमटोल करने लगते है कभी पुराने दर होने के कारण ठीकेदारों के द्वारा कार्य नही
करने एवं पुनः नए दर पर टेंडर निकलने कि बात बोलकर आज लगभग 5 से 6 वर्षो से ग्रामीणों को यही कहानी सुनाया जा रहा है प्रश्न तो यह है कि खनन प्रभावित एरिया मे जनहित कि मुद्दे पर प्रबंधन कितना संवेदनशील है इससे अनुमान लगाया जा सकता है!
- Tata Steel Company के jhariya Division के अंतर्गत सिजुआ क्षेत्र के रामपुर व कंचनपुर जो लीज होल्ड एरिया के अंतर्गत आता है!जिस एरिया मे कोयला का उतखनन बड़े पैमाने मे होता है जिस कारण लगभग दर्जानाधिक नए एवं पुराने घरों मे दरार का होना आम बात हो गई है जिससे ग्रामीणों मे भय का माहौल बना हुआ है इसको लेकर ग्रामीणों ने अपने अपने घरों का रिपेयरिंग के लिए प्रबंधन से वार्ता करने के पश्चात वर्ष 2019 से कई बार आवेदन भी दे चुके है परन्तु अभी तक कोई साकारात्मक पहल नही कि जा रही है दबाव पड़ने पर कुछ नामचीन वयक्ति का कार्य किया गया है जो उचित नही था भुक्तभोगी और अत्यंत निर्धन जब भी इस विषय को लेकर मौखिक एवं लिखित रूप से वार्तालाप करता है तो टालमटोल करने लगते है कभी पुराने दर होने के कारण ठीकेदारों के द्वारा कार्य नही करने एवं पुनः नए दर पर टेंडर निकलने कि बात बोलकर आज लगभग 5 से 6 वर्षो से ग्रामीणों को यही कहानी सुनाया जा रहा है प्रश्न तो यह है कि खनन प्रभावित एरिया मे जनहित कि मुद्दे पर प्रबंधन कितना संवेदनशील है इससे अनुमान लगाया जा सकता है!4
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