छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा दुर्ग जिले में भूमि मालिकों की ज़मीन पर लगभग 25 वर्षों तक बिना किसी आधिकारिक अधिग्रहण प्रक्रिया के अवैध कब्ज़ा बनाए रखने के मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला आया है। इस अवैध कब्ज़े के खिलाफ दायर मुकदमे के बाद, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को ज़मीन अधिग्रहण का मुआवजा तय करने और ज़मीन मालिकों को ₹5,380 प्रति वर्ग मीटर की दर से भुगतान करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने साल 2006 में मुकदमा दायर होने की तारीख से इस राशि पर ब्याज देने का भी आदेश दिया था। हालांकि, छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने इस बढ़े हुए मुआवजे और ब्याज दर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की और राज्य सरकार की याचिका को "पूरी तरह से बेबुनियाद" बताते हुए खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने ज़मीन मालिकों को दिए जाने वाले बढ़े हुए मुआवजे और ब्याज को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए उस पर ₹2 लाख का जुर्माना भी लगाया है। न्यायालय ने यह सख्त फैसला सुनाकर ज़मीन मालिकों के पक्ष में न्याय को प्राथमिकता दी है।
छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा दुर्ग जिले में भूमि मालिकों की ज़मीन पर लगभग 25 वर्षों तक बिना किसी आधिकारिक अधिग्रहण प्रक्रिया के अवैध कब्ज़ा बनाए रखने के मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला आया है। इस अवैध कब्ज़े के खिलाफ दायर मुकदमे के बाद, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को ज़मीन अधिग्रहण का मुआवजा तय करने और ज़मीन मालिकों को ₹5,380 प्रति वर्ग मीटर की दर से भुगतान करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने साल 2006 में मुकदमा दायर होने की तारीख से इस राशि पर ब्याज देने का भी आदेश दिया था। हालांकि, छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने इस बढ़े हुए मुआवजे और ब्याज दर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की और राज्य सरकार की याचिका को "पूरी तरह से बेबुनियाद" बताते हुए खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने ज़मीन मालिकों को दिए जाने वाले बढ़े हुए मुआवजे और ब्याज को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए उस पर ₹2 लाख का जुर्माना भी लगाया है। न्यायालय ने यह सख्त फैसला सुनाकर ज़मीन मालिकों के पक्ष में न्याय को प्राथमिकता दी है।
- सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दायर एक अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार को निर्देश दिया है कि वह आदेश जारी होने की तारीख से आठ हफ्तों के भीतर संबंधित जुर्माना राशि का भुगतान करे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि हाई कोर्ट द्वारा पहले से ही तय किए जा चुके मामले को फिर से उठाना जमीन मालिकों को बेवजह परेशान करने और उन्हें उनके हक से वंचित करने की कोशिश है।1
- पेपर लीक विवाद के बाद NEET-UG 2026 की परीक्षा आज देशभर के 564 शहरों में दोबारा आयोजित की जा रही है। इस ऐतिहासिक री-एग्जाम में देश और विदेश के परीक्षा केंद्रों को मिलाकर 22.79 लाख से अधिक छात्र शामिल हो रहे हैं। परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाया गया है। उत्तराखंड में, 10 जिलों में कुल 53 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहाँ 21 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने बताया कि राज्य सरकार ने परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं, जिसमें उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने सभी अभ्यर्थियों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार का मानसिक तनाव न लें और पूरे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दें।1
- देहरादून जिले के ऋषिकेश में निहंग सिखों और एक पर्यटक के बीच हुए विवाद से कुछ देर के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई। यह विवाद कहासुनी से शुरू होकर झगड़े तक पहुँच गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों को थाने पहुँचाया। इस झगड़े में पर्यटक को हल्की चोटें आईं। हालांकि, थाने में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी कानूनी कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने आपसी सहमति के आधार पर मामले को समझा-बुझाकर सुलझाया और सभी को छोड़ दिया।1
- रुड़की के कलियर क्षेत्र के दरियापुर गांव में कोल्ड ड्रिंक चोरी के शक में चार मासूम बच्चों को रस्सी से बांधकर बेरहमी से पीटने के मामले में पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इन तीनों की गिरफ्तारी की तैयारी कर रही है। यह पूरा मामला तब सामने आया और इसमें कार्रवाई हुई जब बच्चों को बांधकर डंडों से पिटाई करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस अमानवीय घटना को लेकर लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा था, और वे इसे गैरकानूनी बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे थे। लोगों का कहना था कि बच्चों से गलती होने पर भी उन्हें समझाया जा सकता था, न कि इस तरह की बर्बर सजा दी जानी चाहिए। एसपी देहात शेखर सुयाल ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि वायरल वीडियो में तीन लोगों की पहचान कर ली गई है, जिनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।1
- हरिद्वार जिले में, दिनांक 11.06.26 को गंगनहर कोतवाली में अफजाल निवासी ग्राम रामपुर की लिखित शिकायत पर एक गंभीर मुकदमा दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने बताया कि 5-6 युवकों ने घातक हथियारों से लैस होकर उनके पुत्र के दोस्त और उसके अन्य साथियों पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग की और उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी थी। इस संबंध में, गंगनहर कोतवाली में मु0अ0सं0 215/26 धारा 109, 190, 191(2), 191(3), 351(3) बीएनएस के तहत हत्या के प्रयास का मुकदमा पंजीकृत किया गया। जनपद में बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए एसएसपी हरिद्वार द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुपालन में, गंगनहर पुलिस ने तत्काल आरोपियों की तलाश शुरू कर दी। साक्ष्य संकलन की कार्यवाही के तहत, पुलिस टीम ने अपने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और ठोस सूचना के आधार पर कार्रवाई की। इसी क्रम में, घटना में शामिल नईम उर्फ लक्खा नामक युवक को दिनांक 20.06.26 को पाडली गुर्जर की तरफ जाने वाले रास्ते (मुर्गी फार्म के पास) से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार युवक, जिसकी पहचान नईम उर्फ लक्खा पुत्र शमीम निवासी पुहाना थाना भगवानपुर, जनपद हरिद्वार, उम्र 20 वर्ष के रूप में हुई है, के कब्जे से घटना में प्रयुक्त 01 तमंचा और 01 जिंदा कारतूस भी बरामद हुआ। अभियोग में धारा 3/25 आर्म्स एक्ट की बढ़ोतरी की गई है। पकड़े गए आरोपी को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है। इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली पुलिस टीम में उ0नि0 पंकज कुमार, हे0का0 युनुस, हे0का0 अरविंद कुमार, कानि0 प्रभाकर, कानि0 नितिन, कानि0 देवेश और कानि0 महिपाल (सीआईयू रुड़की) शामिल थे।1
- उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में सलेमपुर मार्ग से ग्राम मिलको को जोड़ते हुए नानौली जाने वाली खन्नन रोड पर 2 किलोमीटर सीसी सड़क के निर्माण की मांग की गई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और खनन महाराज को धन्यवाद ज्ञापित किया गया है। स्थानीय लोगों ने यह अपील की है कि उनके क्षेत्र का खनन से अर्जित पैसा उन्हीं के क्षेत्र के विकास में लगाया जाना चाहिए। इसी के साथ नेवाड़ से छिलकाना मार्ग को भी जल्द से जल्द बनवाने की मांग की गई है। यह निवेदन सहारनपुर जिले के DM मोदी के माध्यम से किया गया है, जिसमें पुनः इस बात पर जोर दिया गया है कि क्षेत्र का खनन का पैसा उनके ही क्षेत्र में लगाया जाए।1
- हरिद्वार से रोहित वर्मा की रिपोर्ट के अनुसार, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं निरंजनी अखाड़े के सचिव महन्त रविंद्र पुरी ने मनसा देवी मंदिर से जुड़ी कथित भ्रामक खबरों और अफवाहों के संबंध में एक पत्रकार वार्ता आयोजित की। इस वार्ता में उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि मंदिर से संबंधित कुछ समाचार तथ्यों के विपरीत प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं के बीच भ्रम फैल रहा है। महन्त रविंद्र पुरी महाराज ने दृढ़ता से कहा कि मंदिर प्रशासन पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य कर रहा है और मंदिर की व्यवस्था, विकास कार्यों के साथ-साथ श्रद्धालुओं की सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने सभी पत्रकारों से अपील की कि किसी भी समाचार को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले उसकी सत्यता की अवश्य जांच कर लें, ताकि समाज में कोई गलत संदेश न फैले। महन्त रविंद्र पुरी ने इस बात पर जोर दिया कि अफवाहें और भ्रामक खबरें धार्मिक आस्था को ठेस पहुँचाती हैं और भक्तों में अनावश्यक भ्रम पैदा करती हैं। पत्रकार वार्ता के दौरान, उन्होंने मंदिर से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत जानकारी साझा की और इस बात पर बल दिया कि सही तथ्यों को जनता के सामने लाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस अवसर पर उपस्थित पत्रकारों ने भी अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया।2
- छत्तीसगढ़ के लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा दुर्ग जिले में भूमि मालिकों की ज़मीन पर लगभग 25 वर्षों तक बिना किसी आधिकारिक अधिग्रहण प्रक्रिया के अवैध कब्ज़ा बनाए रखने के मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला आया है। इस अवैध कब्ज़े के खिलाफ दायर मुकदमे के बाद, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को ज़मीन अधिग्रहण का मुआवजा तय करने और ज़मीन मालिकों को ₹5,380 प्रति वर्ग मीटर की दर से भुगतान करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने साल 2006 में मुकदमा दायर होने की तारीख से इस राशि पर ब्याज देने का भी आदेश दिया था। हालांकि, छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने इस बढ़े हुए मुआवजे और ब्याज दर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की और राज्य सरकार की याचिका को "पूरी तरह से बेबुनियाद" बताते हुए खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने ज़मीन मालिकों को दिए जाने वाले बढ़े हुए मुआवजे और ब्याज को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए उस पर ₹2 लाख का जुर्माना भी लगाया है। न्यायालय ने यह सख्त फैसला सुनाकर ज़मीन मालिकों के पक्ष में न्याय को प्राथमिकता दी है।1