संभल ब्लाक के मिलक मिथोली गांव में बिजली विभाग की कथित लापरवाही के कारण ग्रामीणों को भीषण गर्मी में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव में पिछले 15 दिनों से बिजली गुल है, जिससे ग्रामीण बेहाल हैं और उनमें बिजली विभाग के प्रति गहरा आक्रोश है। बिजली न आने का मुख्य कारण गांव का 25 केवीए का ट्रांसफार्मर खराब होना बताया गया है। इस समस्या से गांव के लगभग 50 कनेक्शनधारी उपभोक्ता प्रभावित हैं, जो बिना बिजली के जीवनयापन करने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी के कारण ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। परेशान ग्रामीणों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए गांव में ही प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि बिजली न होने से न केवल पानी की गंभीर किल्लत हो गई है, बल्कि छोटे बच्चे भी अपनी पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों ने बिजली विभाग से जल्द से जल्द खराब ट्रांसफार्मर को बदलवाने की मांग की है।
संभल ब्लाक के मिलक मिथोली गांव में बिजली विभाग की कथित लापरवाही के कारण ग्रामीणों को भीषण गर्मी में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव में पिछले 15 दिनों से बिजली गुल है, जिससे ग्रामीण बेहाल हैं और उनमें बिजली विभाग के प्रति गहरा आक्रोश है। बिजली न आने का मुख्य कारण गांव का 25 केवीए का ट्रांसफार्मर खराब होना बताया गया है। इस समस्या से गांव के लगभग 50 कनेक्शनधारी उपभोक्ता प्रभावित हैं, जो बिना बिजली के जीवनयापन करने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी के कारण ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। परेशान ग्रामीणों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए गांव में ही प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि बिजली न होने से न केवल पानी की गंभीर किल्लत हो गई है, बल्कि छोटे बच्चे भी अपनी पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों ने बिजली विभाग से जल्द से जल्द खराब ट्रांसफार्मर को बदलवाने की मांग की है।
- संभल ब्लाक के मिलक मिथोली गांव में बिजली विभाग की कथित लापरवाही के कारण ग्रामीणों को भीषण गर्मी में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव में पिछले 15 दिनों से बिजली गुल है, जिससे ग्रामीण बेहाल हैं और उनमें बिजली विभाग के प्रति गहरा आक्रोश है। बिजली न आने का मुख्य कारण गांव का 25 केवीए का ट्रांसफार्मर खराब होना बताया गया है। इस समस्या से गांव के लगभग 50 कनेक्शनधारी उपभोक्ता प्रभावित हैं, जो बिना बिजली के जीवनयापन करने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी के कारण ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। परेशान ग्रामीणों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए गांव में ही प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि बिजली न होने से न केवल पानी की गंभीर किल्लत हो गई है, बल्कि छोटे बच्चे भी अपनी पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों ने बिजली विभाग से जल्द से जल्द खराब ट्रांसफार्मर को बदलवाने की मांग की है।3
- जनपद संभल के नखासा थाना क्षेत्र के कसेरुआ गाँव में जिला प्रशासन ने कब्रिस्तान और ग्राम समाज की जमीन पर बनी एक मस्जिद को बुलडोजर की मदद से ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) भी घटनास्थल पर मौजूद रहे।4
- संभल के थाना गाड़ी क्षेत्र के मिल्क मिथोली गांव में जलभराव की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि यह उनके गांव का मुख्य रास्ता है, जिसमें काफी लंबे समय से पानी भरा हुआ रहता है। इस जलभराव के कारण आने-जाने वाले राहगीरों को आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।2
- संभल जनपद में प्रशासन द्वारा अवैध कब्जों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत, थाना नखासा क्षेत्र के गांव कसेरवा में सरकारी कब्रिस्तान की भूमि पर बने एक कथित अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन का दावा है कि लगभग 1200 वर्गमीटर कब्रिस्तान की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किया गया था। यह कार्रवाई दिन में 10 बजे से भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ शुरू हुई, जिसमें 60 से अधिक पुलिस और पीएसी के जवानों के साथ पांच थानों की फोर्स मौके पर मौजूद रही। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए दो बुलडोजर, एक क्रेन मशीन और आधा दर्जन डंपर लगाए गए थे। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच पूरे क्षेत्र को अपने नियंत्रण में लिया, जबकि बुलडोजर एक्शन दोपहर 1 बजे से शुरू होकर शाम तक चलता रहा। इस दौरान ध्वस्त किए जाने से पहले एक ग्रामीण द्वारा आखिरी अजान भी दी गई। अभियान के दौरान अधिकारियों की निगरानी में बुलडोजर लगातार चलते रहे, और अवैध कब्जे को हटाया गया; गांव के मकानों की छतों पर पुलिस कमांडो भी तैनात किए गए थे। कार्रवाई का जायजा लेने के लिए जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई भी मौके पर पहुंचे। प्रशासन के अनुसार, निरीक्षण के दौरान कुछ झंडे और पंपलेट मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।6
- उत्तर प्रदेश के नोएडा में श्रमिक अत्यधिक जोखिम भरे और चुनौतीपूर्ण (मजाक भरा) कार्यों को बहुत कम दिहाड़ी पर करते हैं। जानकारी के अनुसार, इन मजदूरों को ठेकेदारों द्वारा प्रतिदिन केवल ₹600 का भुगतान किया जाता है, जबकि वे बेहद ख़तरनाक काम पूरा करते हैं। ऐसे लोगों के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया गया है जो इतनी मामूली दिहाड़ी के लिए भी अपनी जान जोखिम में डालकर अपना काम करते हैं; उनके इस समर्पण और कठिन परिश्रम को 'अच्छी बात' बताया गया है।1