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जयपुर में ओला कंपनी में किस तरह बहुत ज्यादा काम आता है, इसे लेकर जस्ट जयपुर लाइव की एक खास रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में ओला कंपनी में भारी मात्रा में काम आने की पूरी प्रक्रिया और तरीके के बारे में विस्तार से दिखाया गया है।
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जयपुर में ओला कंपनी में किस तरह बहुत ज्यादा काम आता है, इसे लेकर जस्ट जयपुर लाइव की एक खास रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में ओला कंपनी में भारी मात्रा में काम आने की पूरी प्रक्रिया और तरीके के बारे में विस्तार से दिखाया गया है।
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- देश की शिक्षा व्यवस्था आज एक ऐसे दोराहे पर खड़ी है, जहाँ ज्ञान और नेतृत्व पैदा करने वाले संस्थान सिर्फ मुनाफे की मशीन बनकर रह गए हैं। सरकारी तंत्र की नाकामी, निजी स्कूलों की बेलगाम फीस और कोचिंग सेंटरों की दादागीरी ने मिलकर देश के मध्यवर्गीय और गरीब परिवारों की कमर तोड़ दी है। ज़मीनी हकीकत का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों का साफ मानना है कि अगर सरकारी स्कूल और कॉलेज विश्वस्तरीय स्तर पर सुधर जाएं, तो निजी शिक्षण संस्थानों और कोचिंग माफियाओं की अरबों रुपये की दुकानें एक दिन में बंद हो जाएंगी। यही कारण है कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार के चलते सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर को जानबूझकर सुधरने ही नहीं दिया जा रहा है। इस पूरे काले धंधे की नींव नेताओं और ऊंचे पदों पर बैठे प्रशासनिक अधिकारियों के निजी लालच पर टिकी है। कई बड़े प्राइवेट यूनिवर्सिटीज, मेडिकल-इंजीनियरिंग कॉलेजों और नामी कोचिंग सेंटरों के तार सीधे तौर पर सत्ता के गलियारों से जुड़े हैं। जब तक शिक्षा को समाज सुधार की सेवा के बजाय एक 'बिजनेस मॉडल' के रूप में देखा जाएगा, तब तक शीर्ष पर बैठे लोग कभी भी किसी बड़े सुधार को ज़मीन पर लागू नहीं होने देंगे। आज कॉलेज केवल डिग्रियां बांटने वाली मंडियां बन चुके हैं, जहाँ लाखों रुपये ऐंठने के बाद भी छात्रों के पास कोई वास्तविक स्किल नहीं होती। परीक्षाओं के दबाव और नंबरों की अंधी दौड़ ने युवाओं की रचनात्मकता, स्वतंत्र सोच और व्यावहारिक ज्ञान को पूरी तरह कुचल दिया है। कागज़ पर नीतियां तो बदलती हैं, लेकिन जब तक भ्रष्टाचार का यह नेक्सस नहीं टूटेगा, तब तक भावी पीढ़ी इस सिस्टम की बलिवेदी पर चढ़ती रहेगी। शिक्षा अब ज्ञान का जरिया नहीं, सिर्फ तिजोरी भरने का धंधा बन चुकी है और इस भ्रष्ट नेक्सस के खिलाफ आवाज़ उठाना अब बेहद ज़रूरी हो गया है।1
- जयपुर में ओला कंपनी में किस तरह बहुत ज्यादा काम आता है, इसे लेकर जस्ट जयपुर लाइव की एक खास रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में ओला कंपनी में भारी मात्रा में काम आने की पूरी प्रक्रिया और तरीके के बारे में विस्तार से दिखाया गया है।1
- राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें 10वीं (10th) को लेकर हुई बातचीत चर्चा का विषय बन गई है। वायरल वीडियो में एक छात्रा मंत्री से कहती दिख रही है कि "10th और 10वीं एक ही हैं", जिस पर मंत्री आश्चर्य व्यक्त करते हुए प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। विपक्ष और कई यूजर्स ने शिक्षा मंत्री की जानकारी पर सवाल उठाते हुए उनकी तीखी आलोचना की है, जबकि कुछ लोगों ने इसे शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए मंत्री के इस्तीफे की मांग भी की है। हालांकि, इस पूरे मामले पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और न ही इस वीडियो के रिकॉर्ड होने के संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि हुई है।1
- केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया है। कार्यभार ग्रहण करने के तुरंत बाद उन्होंने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पहली समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने शिक्षा मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं, वर्तमान में चल रही परियोजनाओं और आगामी कार्यों की विस्तृत जानकारी हासिल की। बैठक में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को शिक्षा में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान देने के स्पष्ट निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं के अनुसार शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और छात्र-केंद्रित बनाने पर जोर दिया। नए नेतृत्व के साथ अब शिक्षा क्षेत्र की भावी योजनाओं और प्रगति पर ध्यान केंद्रित रहेगा।1
- सामाजिक कार्यकर्ता रवि जोशी ने नाहरगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के आमेर सागर क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण कानूनों का उल्लंघन कर क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित करने का आरोप लगाया है। इस गंभीर मामले को लेकर उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री और प्रधान मुख्य वन संरक्षक को परिवाद सौंपा है, जिसमें नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले संबंधित लोगों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है। रवि जोशी के अनुसार सेंचुरी क्षेत्र में खेलकूद, भीड़भाड़ या किसी भी प्रकार के आयोजन से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके स्वाभाविक व्यवहार में खलल पड़ता है, जो कि नियम-कानूनों के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। आयोजकों और स्थानीय सोशल मीडिया पर अभयारण्य क्षेत्र के भीतर क्रिकेट टूर्नामेंट, मैच और खाना खाने से संबंधित तस्वीरें व वीडियो भी खुलेआम साझा किए गए हैं, जो वन विभाग के नियमों के सीधे उल्लंघन को दर्शाते हैं।1
- जंतर-मंतर पर आंदोलन के दौरान छात्रों को खाना बांटने वाले जुनैद को 24 जुलाई की रात दिल्ली पुलिस उठाकर उत्तराखंड ले गई। पुलिस ने पूरी रात उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर रखा। अगली सुबह एक अधिकारी ने जुनैद से पूछताछ की कि उन्हें फंडिंग कहां से आती है और वे इतना खाना कैसे बांट रहे हैं। इसके बाद वे जुनैद को मसूरी में छोड़कर चले गए, जहां से जुनैद 25 जुलाई को कैब करके वापस दिल्ली आ गए।1
- जयपुर के राजविलास होटल के पास गोनर रोड पर स्थित भगवान विहार (पिन कोड 302031) में सड़कों का पूरी तरह अभाव है। पूरी कॉलोनी में एक भी सड़क नहीं बनी है और जगह-जगह बहुत सारा गंदा पानी जमा हो रहा है, जिससे लोग भारी परेशानी झेल रहे हैं। स्थानीय निवासियों में शासन और प्रशासन की इस उपेक्षा को लेकर गहरा रोष है। निवासियों का कहना है कि इस गंभीर स्थिति पर ना तो क्षेत्रीय पार्षद कोई ध्यान दे रहे हैं और ना ही विधायक कोई सुनवाई कर रहे हैं। सरकार की तरफ से भी कॉलोनी की इस बदहाली पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जा रहा है।1
- असम में बाढ़ का कहर जारी है, जहाँ अब तक 61 लोगों की जान जा चुकी है और 7 लाख से अधिक लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। राज्य के 856 से अधिक गांव अब भी पानी में डूबे हुए हैं। घर बह गए हैं और बेजुबान जानवरों की मौत हो गई है, जिससे लाखों लोग बेघर हो चुके हैं। इसके अलावा 56,000 हेक्टेयर से ज़्यादा फसल बर्बाद हो चुकी है और 1.15 लाख से अधिक लोगों ने राहत शिविरों में शरण ली है। प्रभावित क्षेत्रों में सेना, NDRF, SDRF और स्थानीय प्रशासन लगातार राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं, लेकिन कई इलाकों तक सहायता पहुँचाना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस संकट की घड़ी में असम की पुकार पूरे देश तक पहुँचाने का आह्वान किया जा रहा है। अगर लोग आर्थिक मदद करने में असमर्थ हैं, तो कम से कम उनकी आवाज़ बन सकते हैं ताकि हर जगह यह सवाल पहुँचे कि क्या उनकी आवाज़ कोई सुनेगा।1