Shuru
Apke Nagar Ki App…
विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में सारंगपुर के सिविल न्यायालय परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रथम जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, व्यवहार न्यायाधीश मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास आकांक्षा कात्याल, अभिभाषक संघ सारंगपुर के अध्यक्ष पी.एस. मंडलोई, डब्ल्यू.एस. मंसूरी ग्रुप, सेवानिवृत्त न्यायालय नाजिर, और पर्यावरण प्रेमी लक्ष्मीनारायण त्रिकार सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त, अधिवक्ता आर.सी. शर्मा, ओमप्रकाश राठौर, जी.पी. सक्सेना, रामबाबू नारोलिया, अल्ताफ खान, लोकेश वर्मा, और मलखान सिसोदिया समेत कई अन्य अधिवक्तागण भी कार्यक्रम में मौजूद थे।
Salmankhansgpr
विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में सारंगपुर के सिविल न्यायालय परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रथम जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, व्यवहार न्यायाधीश मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास आकांक्षा कात्याल, अभिभाषक संघ सारंगपुर के अध्यक्ष पी.एस. मंडलोई, डब्ल्यू.एस. मंसूरी ग्रुप, सेवानिवृत्त न्यायालय नाजिर, और पर्यावरण प्रेमी लक्ष्मीनारायण त्रिकार सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त, अधिवक्ता आर.सी. शर्मा, ओमप्रकाश राठौर, जी.पी. सक्सेना, रामबाबू नारोलिया, अल्ताफ खान, लोकेश वर्मा, और मलखान सिसोदिया समेत कई अन्य अधिवक्तागण भी कार्यक्रम में मौजूद थे।
More news from Rajgarh and nearby areas
- सारंगपुर में पिछले दिनों चर्चा में रहा SDM और अधिवक्ता का विवाद अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले चुका है। पहले इसे एक प्रशासनिक अधिकारी और वकील के बीच टकराव के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन इसकी परतें खुलने पर अब यह मामला एक महिला की कथित प्रताड़ना और उसके डेढ़ वर्षीय बेटे की अभिरक्षा (कस्टडी) से जुड़ा सामने आया है। भाटखेड़ी निवासी राधाबाई ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता रहा। राधाबाई के अनुसार, उनके पति के साथ-साथ ननद और नंदोई भी उन पर दबाव बनाते थे, जिसमें नंदोई पेशे से अधिवक्ता हैं और अपनी वकालत का प्रभाव दिखाकर उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास करते थे। महिला ने बताया कि चार साल पहले उनकी शादी चाटक्या गांव में हुई थी, और डेढ़ साल पहले बेटे के जन्म के बाद पारिवारिक विवाद और बढ़ गए। आरोप है कि उन्हें लगातार ताने दिए गए, मारपीट की गई और अंततः उनके डेढ़ साल के बेटे को उनसे अलग कर दिया गया, जिसके बाद उन्हें घर से निकाल दिया गया और वह अपने मायके पहुंच गईं। पीड़िता ने पहले सामाजिक स्तर पर न्याय पाने का प्रयास किया, लेकिन समाधान न मिलने पर उन्होंने सारंगपुर SDM न्यायालय की शरण ली और अपने बेटे को वापस दिलाने की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने संबंधित पक्ष को कई बार नोटिस जारी किए, लेकिन निर्धारित तिथियों पर वे उपस्थित नहीं हुए, जिसके बाद न्यायालय ने सर्च वारंट जारी कर दिया। बताया जा रहा है कि इसी सर्च वारंट के बाद पूरा मामला विवादों में आया। महिला का आरोप है कि न्यायालय की कार्रवाई शुरू होने के बाद उन पर दबाव बनाया गया और धमकियां दी गईं। दूसरी ओर, अधिवक्ता रमेश धाकड़ ने SDM रोहित बम्होरे पर फोन पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा दिया। हालांकि, मामले का दूसरा पक्ष यह भी है कि उपलब्ध जानकारी और बातचीत के अनुसार, SDM रोहित बम्होरे लगातार न्यायालयीन आदेशों के पालन और बच्चे को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कराने की बात करते नजर आते हैं। दैनिक भास्कर को मिली कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग में भी SDM सर्च वारंट की पुष्टि करते हुए बच्चे और उसके पिता को न्यायालय में पेश करने के निर्देश देते सुनाई दे रहे हैं, जिसमें व्यक्तिगत हित की बजाय न्यायालयीन आदेश के पालन पर जोर दिखाई देता है। कानूनी जानकारों का मत है कि नाबालिग बच्चे की अभिरक्षा को लेकर विवाद होने और संबंधित पक्ष के न्यायालय के समक्ष उपस्थित न होने पर सर्च वारंट जारी करना न्यायिक प्रक्रिया का ही हिस्सा माना जाता है। अब यह पूरा मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के संज्ञान में पहुंच चुका है, जिसने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए राजगढ़ कलेक्टर को निर्देश दिए हैं। कलेक्टर को निर्धारित समयावधि में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि SDM पर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या यह विवाद वास्तव में एक प्रशासनिक अधिकारी के कथित व्यवहार का मामला है या फिर एक महिला द्वारा अपने मासूम बेटे को वापस पाने के लिए शुरू की गई कानूनी लड़ाई का परिणाम। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें सबसे बड़ा यह है कि यदि महिला की शिकायत और बच्चे की अभिरक्षा का मामला मूल केंद्र में था, तो फिर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर इतना बड़ा विवाद आखिर क्यों खड़ा हुआ। इसका जवाब कलेक्टर की जांच रिपोर्ट और आगे की न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने आएगा।1
- मोहन बड़ोदिया नगर में जिला कलेक्टर सुश्री ऋजु बाफना के निर्देश पर एक बड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान वर्ष 2016 में हुई इसी तरह की कार्रवाई के लगभग 10 साल बाद चलाया जा रहा है। गुरुवार दोपहर को राजस्व विभाग की टीम ने पुलिस बल की मौजूदगी में आगर-सारंगपुर रोड और नलखेड़ा रोड पर सड़क किनारे सीमा निर्धारण की प्रक्रिया पूरी की। आगर-सारंगपुर रोड पर सड़क के मध्य से दोनों ओर 25-25 फीट तक, वहीं नलखेड़ा रोड पर दोनों ओर 20-20 फीट तक सीमा चिन्हित कर चूना लाइन डाली गई। इस मुहिम के तहत प्रशासनिक टीम ने निर्धारित सीमा के भीतर आने वाले 50 से अधिक दुकानों के अतिक्रमण को चिन्हित किया। तीन जेसीबी मशीनों की सहायता से ठेले, अवैध गुमटियां, दुकानदारों के सामने रखे टीनशेड और नलखेड़ा रोड चौराहे के सामने स्थित प्रतीक्षालय का अतिक्रमण हटाया गया। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सड़कों को अतिक्रमण मुक्त बनाना और यातायात व्यवस्था को सुचारु करना है। अधिकारियों द्वारा सीमांकन का काम शुरू करते ही स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया और अतिक्रमण हटने पर राहत महसूस की, जबकि अतिक्रमण करने वालों में अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान तहसीलदार श्रीमती दिव्या जैन, नायब तहसीलदार मुकेश गुप्ता, मोहन बड़ोदिया थाना प्रभारी अरविंद सिंह तोमर, राजस्व विभाग के पटवारी, कोटवार और ग्राम पंचायत मोहन बड़ोदिया के सचिव अर्जुन सिंह चौहान सहित अन्य कर्मचारी व अधिकारी मौजूद रहे। तहसीलदार ने ग्राम पंचायत सचिव को प्रतीक्षालय की साफ-सफाई और पुताई करने के निर्देश भी दिए हैं।1
- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर दतिया जिले में "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान 2.0 के तहत पुलिस परिसर में एक वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े, पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल और वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) मोहम्मद माज ने पौधारोपण कर जिलेवासियों को पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास का संदेश दिया। इस दौरान अधिकारियों ने विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए और उनके संरक्षण तथा नियमित देखभाल का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम में पुलिस विभाग, वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों-कर्मचारियों ने भी सक्रिय रूप से पौधारोपण में भाग लिया। भीषण गर्मी को देखते हुए, अधिकारियों ने परिसर में रखे सकोरों में पक्षियों के लिए पानी और दाना भी डाला, साथ ही नागरिकों से अपील की कि वे अपने घरों, कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर पक्षियों के लिए पानी और दाने की व्यवस्था कर जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाएं और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखें। कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने ज़ोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का सामूहिक कर्तव्य है। उन्होंने प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए वृक्षारोपण की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि पौधा लगाने के साथ-साथ उसका संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल ने पेड़ों की पृथ्वी के प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में भूमिका पर प्रकाश डाला और पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने में हर व्यक्ति की भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। वन मंडलाधिकारी मोहम्मद माज ने "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान को प्रकृति और मातृत्व के सम्मान का प्रतीक बताते हुए, अधिक से अधिक वृक्षारोपण, जल संरक्षण, पक्षियों के संरक्षण और जैव विविधता के संवर्धन में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया। अधिकारियों ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण भावी पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपने स्तर पर पौधारोपण कर पर्यावरण को संरक्षित करने, लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने और गर्मी में पक्षियों के लिए पानी-दाने की व्यवस्था कर संवेदनशीलता का परिचय देने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए दतिया को हरा-भरा बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।1
- एक छोटे से चूहे को पकड़ने की साधारण सी कोशिश अप्रत्याशित रूप से एक ऐसी स्थिति में बदल गई जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी, और इसे ‘अब तक का सबसे महंगा चूहे का शिकार’ बताया जा रहा है। इस घटना से जुड़ी एक वायरल क्लिप में लोगों को उस छोटे से जानवर का पीछा करते हुए देखा जा सकता है।1
- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, 5 जून शुक्रवार को ग्राम पंचायत मोहन बड़ोदिया में एक विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। यह ग्राम सभा शाम 5 बजे तक चली, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और वृक्षारोपण के महत्व पर गहन चर्चा हुई। इस दौरान 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधारोपण भी किया गया। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत मोहन बड़ोदिया के सरपंच, सचिव अर्जुन सिंह चौहान, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाएं और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। उपस्थित जनों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने का संदेश दिया। ग्राम सभा में बताया गया कि वृक्षारोपण से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, प्रदूषण कम करने और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं हरित वातावरण प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलता है। इस अवसर पर लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का भी संकल्प लिया गया।1
- विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शाजापुर में बुलाना भाजपा मंडल ने वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान, मंडल ने 'एक पेड़ मां के नाम' लगाने का संकल्प लिया। यही संकल्प गोलन भाजपा मंडल की कामकाजी बैठक में भी लिया गया।1
- राजगढ़ जिले की नरसिंहगढ़ तहसील के ग्राम कोठरी कला में ताजीपुरा रोड पर अवैध उत्खनन का कारोबार जोरों पर फलफूल रहा है। खनन माफिया और स्थानीय दलाल रात-दिन सरकारी तालाब से मिट्टी, मुरम और अन्य खनिज संपदा निकालकर अपनी जेबें गर्म कर रहे हैं। इस बेखौफ गतिविधि को राजस्व विभाग के अधिकारियों के लिए एक खुली चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। यह सवाल उठाया गया है कि खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं, और क्या यह गोरखधंधा राजस्व विभाग के अधिकारियों की मदद से तो नहीं चल रहा है। आरोप है कि इस अवैध खनन से माफिया की चांदी हो रही है और उनका "आतंक" 1 अप्रैल तक बना रहेगा। प्रशासन से इस पर ध्यान देने और तत्काल कार्रवाई करने की मांग की गई है।1
- शाजापुर जिले के कालापीपल में वार्ड क्रमांक 2 राज कॉलोनी के निवासियों का गुस्सा आज फूट पड़ा, जहाँ 'रोड नहीं तो वोट नहीं' के नारे लगाते हुए उन्होंने न्यू बस स्टैंड चौराहे पर उग्र प्रदर्शन किया और चक्काजाम कर दिया। पिछले दस वर्षों से सड़क निर्माण का इंतजार कर रहे वार्ड वासियों ने भीषण धूप की परवाह न करते हुए बड़ी संख्या में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं के साथ सड़क पर धरना शुरू कर दिया। इस चक्काजाम के कारण कालापीपल-सीहोर मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे बीते एक दशक से राज कॉलोनी की जर्जर सड़क बनवाने की लगातार मांग कर रहे थे, लेकिन नगर परिषद पानखेड़ी के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें हर बार सिर्फ कोरे आश्वासन दिए। सड़क निर्माण को लेकर धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से निराश होकर ही उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। वार्ड वासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि प्रशासन और नगर परिषद द्वारा की गई वादाखिलाफी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने ऐलान किया है कि जब तक सड़क निर्माण का कार्य जमीनी स्तर पर शुरू नहीं हो जाता, तब तक उनका यह चक्काजाम और अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार जारी रहेगा।1