6 साल के बच्चे को बताया 6 लाख सालाना कमाने वाला, आयकर विभाग की बड़ी चूक मुरैना जिले में आयकर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 6 साल के बच्चे के नाम पर 6 लाख रुपये वार्षिक आय दर्शाते हुए उसकी खाद्यान्न पर्ची बंद कर दी गई। जानकारी के अनुसार, आयकर विभाग द्वारा खाद्य विभाग को पत्र लिखकर बताया गया कि अंकित जाटव नामक व्यक्ति की वार्षिक आय 6 लाख रुपये है और वह खाद्यान्न योजना के दायरे में नहीं आता। इस सूचना के आधार पर खाद्य विभाग ने बिना गहराई से जांच किए संबंधित नाम पर कार्रवाई करते हुए खाद्यान्न पर्ची निरस्त कर दी। बाद में पता चला कि जिस अंकित जाटव के नाम पर नोटिस जारी किया गया, वह महज 6 साल का बच्चा है, जो कक्षा एक में पढ़ता है और उसकी कोई आय नहीं है। इस घटना के सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना सत्यापन के की गई ऐसी कार्रवाई गरीब परिवारों के साथ अन्याय है। अब देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या बच्चे के परिवार को दोबारा योजना का लाभ मिल पाता है
6 साल के बच्चे को बताया 6 लाख सालाना कमाने वाला, आयकर विभाग की बड़ी चूक मुरैना जिले में आयकर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 6 साल के बच्चे के नाम पर 6 लाख रुपये वार्षिक आय दर्शाते हुए उसकी खाद्यान्न पर्ची बंद कर दी गई। जानकारी के अनुसार, आयकर विभाग द्वारा खाद्य विभाग को पत्र लिखकर बताया गया कि अंकित जाटव नामक व्यक्ति की वार्षिक आय 6 लाख रुपये है और वह खाद्यान्न योजना के दायरे में नहीं आता। इस सूचना के आधार पर खाद्य विभाग ने बिना गहराई से जांच किए संबंधित नाम पर कार्रवाई करते हुए खाद्यान्न पर्ची निरस्त कर दी। बाद में पता चला कि जिस अंकित जाटव के नाम पर नोटिस जारी किया गया, वह महज 6 साल का बच्चा है, जो कक्षा एक में पढ़ता है और उसकी कोई आय नहीं है। इस घटना के सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना सत्यापन के की गई ऐसी कार्रवाई गरीब परिवारों के साथ अन्याय है। अब देखना होगा कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या बच्चे के परिवार को दोबारा योजना का लाभ मिल पाता है
- Post by JP NEWS झोलाछाप पत्रकार /Rohit bajouriya1
- स्थाई लोक अदालत का बड़ा फैसला: बिजली विभाग की लापरवाही को गंभीर मानते हुए उपभोक्ता को 1 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया धौलपुर। स्थायी लोक अदालत ने उपभोक्ता हित में एक अहम और मिसाल कायम करने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने गलत बिजली बिल जारी करने के मामले में बिजली विभाग की लापरवाही को गंभीर मानते हुए उपभोक्ता को 1 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। यह निर्णय प्रकरण संख्या 165/24, हरिओम शर्मा बनाम जे.वी.वी.एन.एल. में सुनाया गया। अदालत के अध्यक्ष सुरेश प्रकाश भट्ट तथा सदस्य राम दत्त श्रोति और वीरेंद्र उपाध्याय की पीठ ने संयुक्त रूप से यह फैसला दिया। मामले के अनुसार, प्रार्थी हरिओम शर्मा के घर पर लगा बिजली मीटर 28 अक्टूबर 2024 को हाई वोल्टेज और शॉर्ट सर्किट के कारण जल गया था। उपभोक्ता ने तुरंत बिजली विभाग को इसकी सूचना देकर मीटर बदलने का अनुरोध किया, लेकिन विभाग ने समय पर कोई उचित कार्रवाई नहीं की। इसके उलट, विभाग ने जले हुए मीटर से ही रीडिंग लेकर नवंबर 2024 के लिए 5872 यूनिट का अत्यधिक और अवास्तविक बिल ₹51,725.06 जारी कर दिया। जबकि उपभोक्ता का सामान्य मासिक उपभोग अधिकतम 500 यूनिट तक ही था। इस गलती के कारण उपभोक्ता को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जले हुए मीटर से रीडिंग लेना और असामान्य रूप से अधिक यूनिट दिखाना विभाग की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। साथ ही, मीटर समय पर न बदले जाने के कारण उपभोक्ता को लगभग एक महीने तक बिना बिजली के रहना पड़ा, जिससे उसे सामाजिक और मानसिक कष्ट भी झेलना पड़ा। अदालत ने आदेश दिया कि नवंबर 2024 का गलत बिल निरस्त किया जाए और औसत खपत (करीब 191 यूनिट) के आधार पर नया संशोधित बिल जारी किया जाए। उपभोक्ता संशोधित बिल मिलने के बाद ही भुगतान करेगा। इसके अलावा, अदालत ने विभाग के तत्कालीन सहायक अभियंता (ग्रामीण) को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए उनके वेतन से 1 लाख रुपये क्षतिपूर्ति एक माह के भीतर देने का निर्देश दिया। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया जाता है, तो इस राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा में इस प्रकार की लापरवाही अस्वीकार्य है। यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।1
- 13 साल से वेंटिलेटर पर बेटे की सही होने की उम्मीद लिए माता पिता ने आखिर क्यों मांगी इच्छामृत्यु? गाजियाबाद के हरीश राणा की कहानी और उनके माता - पिता के साहस और उम्मीद पर पूरे देश ने व्यक्त की संवेदनाएं1
- Post by Zassu1
- भारत में मध्य प्रदेश स्वतंत्रता के ९ वर्ष बाद एक राज्य के नाम से स्वतंत्र १९५६ में नाम मिला जिसमें ५६ जिले सामिल कर क्षेत्र को पहचान मिली वहीं मध्य प्रदेश के जिला मुरैना को भी इसी सन् से उत्तर प्रदेश व राजस्थान प्रदेश की सीमा से जुड़ा रहने का गौरवशाली इतिहास रहा है, मुरैना जिला कई ऐसे ऐतिहासिक स्थलों को अपने में समेटे हुए है जिसमें से कुछ आप को इस वीडियो के माध्यम से जागरूक करना चाहा है पसंद आने पर चैनल को सब्सक्राइब करें लाइक करें और प्लान लेकर हर छोटी - बड़ी खबर से जुड़े1
- ग्वालियर पुलिस ने गोली कांड की झूठी साज़िश का किया पर्दा फाश एस एस पी धर्मवीर सिंह यादव ने बताया पूरा मामला कैसे हुआ खुलासा।1
- Post by Zassu1
- संस्कार गार्डन में दिखा साम्प्रदायिक सौहार्द का रंग, ग्वालियर आए मध्यप्रदेश राज्य हजकमेटी के पूर्व चेयरमैन रफत बारसी1
- ग्वालियर रेलवे स्टेशन के नाम को लेकर एक बार फिर गरमाया मामला! ग्वालियर रेलवे स्टेशन नाम को लेकर एक बार विवादों में आता नजर दिख रहा है यहां संगठन,नेता और दल अपने हिसाब से महापुरुषों का नाम का प्रस्ताव सरकार को भेज रहे है!1