झारखंड में 25 मई को ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एआईडीएसओ) के नेतृत्व में विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने राज्यपाल के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में 'पुनर्गठन' और 'क्लस्टरिंग' व्यवस्था लागू करने के झारखंड सरकार के निर्णय के खिलाफ था। छात्रों ने राज्यपाल को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसके बाद राजभवन के अधिकारियों ने प्रभावित छात्रों के साथ राज्यपाल की वार्ता के लिए जल्द ही समय निर्धारित करने का आश्वासन दिया। झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने पत्रांक 05/प-08/2023898 के अनुसार, राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के अंतर्गत महाविद्यालयों को पुनर्गठित करते हुए क्लस्टरिंग करने का निर्णय लिया है। छात्रों का आरोप है कि इस निर्णय से आवागमन के लिए अतिरिक्त खर्च का आर्थिक बोझ बढ़ेगा, शिक्षकों के पद सरेंडर किए जाएंगे, और कई विषयों के विभागों को बंद कर दिया जाएगा, जिसका राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर बहुत ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस मौके पर एआईडीएसओ के प्रदेश अध्यक्ष समर महतो ने इस निर्णय को 'छात्र व शिक्षा विरोधी' करार देते हुए कहा कि सरकार शिक्षकों की बहाली करने के बजाय कई विषयों के विभाग ही बंद कर रही है और सार्वजनिक शिक्षा को छीनने का काम कर रही है। जुलूस का नेतृत्व कर रही संगठन की उपाध्यक्ष रिंकी बांसरियार ने बताया कि क्लस्टर सिस्टम से कॉलेज चुनिंदा संकायों तक सीमित हो जाएंगे, जिससे हर संस्थान में बुनियादी विषय उपलब्ध नहीं होंगे और पारंपरिक विषयों की पढ़ाई पूरी तरह संकुचित हो जाएगी। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि छात्राओं को अपनी पसंद के विषयों के लिए दूर-दराज के कॉलेजों में भटकना पड़ेगा, जिससे सुदूर क्षेत्रों में उनकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा होगा और कई छात्राओं की पढ़ाई बीच में ही छूट जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को विभिन्न विषयों की क्लास के लिए एक ही दिन में अलग-अलग कॉलेजों के चक्कर काटने पड़ेंगे, जिससे उन्हें भारी मानसिक और शारीरिक मशक्कत का सामना करना होगा। समर महतो ने आगे कहा कि झारखंड के अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। क्लस्टर सिस्टम लागू होने से उनका यात्रा और रहने का खर्च बढ़ेगा, जिससे सरकारी शिक्षा आम छात्रों की पहुँच से दूर हो जाएगी। सुरक्षा चिंताओं के कारण बड़ी संख्या में अभिभावक अपनी बेटियों को दूर भेजने से कतराएंगे, जिससे छात्राओं की ड्रॉप-आउट दर बढ़ जाएगी। संगठन ने इस निर्णय का जोरदार विरोध करते हुए चेतावनी दी है कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो सड़कों पर और भी तीव्र आंदोलन किए जाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर विश्वविद्यालयों में तालाबंदी भी होगी, साथ ही राजपाल भवन में हजारों की संख्या में छात्रों का विरोध प्रदर्शन होगा।
झारखंड में 25 मई को ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एआईडीएसओ) के नेतृत्व में विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने राज्यपाल के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में 'पुनर्गठन' और 'क्लस्टरिंग' व्यवस्था लागू करने के झारखंड सरकार के निर्णय के खिलाफ था। छात्रों ने राज्यपाल को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसके बाद राजभवन के अधिकारियों ने प्रभावित छात्रों के साथ राज्यपाल की वार्ता के लिए जल्द ही समय निर्धारित करने का आश्वासन दिया। झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने पत्रांक 05/प-08/2023898 के अनुसार, राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के अंतर्गत महाविद्यालयों को पुनर्गठित करते हुए क्लस्टरिंग करने का निर्णय लिया है। छात्रों का आरोप है कि इस निर्णय से आवागमन के लिए अतिरिक्त खर्च का आर्थिक बोझ बढ़ेगा, शिक्षकों के पद सरेंडर किए जाएंगे, और कई विषयों के विभागों को बंद कर दिया जाएगा, जिसका राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर बहुत ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस मौके पर एआईडीएसओ के प्रदेश अध्यक्ष समर महतो ने इस निर्णय को 'छात्र व शिक्षा विरोधी' करार देते हुए कहा कि सरकार शिक्षकों की बहाली करने के बजाय कई विषयों के विभाग ही बंद कर रही है और सार्वजनिक शिक्षा को छीनने का काम कर रही है। जुलूस का नेतृत्व कर रही संगठन की उपाध्यक्ष रिंकी बांसरियार ने बताया कि क्लस्टर सिस्टम से कॉलेज चुनिंदा संकायों तक सीमित हो जाएंगे, जिससे हर संस्थान में बुनियादी विषय उपलब्ध नहीं होंगे और पारंपरिक विषयों की पढ़ाई पूरी तरह संकुचित हो जाएगी। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि छात्राओं को अपनी पसंद के विषयों के लिए दूर-दराज के कॉलेजों में भटकना पड़ेगा, जिससे सुदूर क्षेत्रों में उनकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा होगा और कई छात्राओं की पढ़ाई बीच में ही छूट जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को विभिन्न विषयों की क्लास के लिए एक ही दिन में अलग-अलग कॉलेजों के चक्कर काटने पड़ेंगे, जिससे उन्हें भारी मानसिक और शारीरिक मशक्कत का सामना करना होगा। समर महतो ने आगे कहा कि झारखंड के अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। क्लस्टर सिस्टम लागू होने से उनका यात्रा और रहने का खर्च बढ़ेगा, जिससे सरकारी शिक्षा आम छात्रों की पहुँच से दूर हो जाएगी। सुरक्षा चिंताओं के कारण बड़ी संख्या में अभिभावक अपनी बेटियों को दूर भेजने से कतराएंगे, जिससे छात्राओं की ड्रॉप-आउट दर बढ़ जाएगी। संगठन ने इस निर्णय का जोरदार विरोध करते हुए चेतावनी दी है कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो सड़कों पर और भी तीव्र आंदोलन किए जाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर विश्वविद्यालयों में तालाबंदी भी होगी, साथ ही राजपाल भवन में हजारों की संख्या में छात्रों का विरोध प्रदर्शन होगा।
- हजारीबाग जिले में एक विशेष 'जल जांच अभियान' का शुभारंभ किया गया है। इस अभियान के तहत, पेयजल की गुणवत्ता की जांच 23 जून तक जारी रहेगी।1
- झारखंड में 25 मई को ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एआईडीएसओ) के नेतृत्व में विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने राज्यपाल के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में 'पुनर्गठन' और 'क्लस्टरिंग' व्यवस्था लागू करने के झारखंड सरकार के निर्णय के खिलाफ था। छात्रों ने राज्यपाल को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसके बाद राजभवन के अधिकारियों ने प्रभावित छात्रों के साथ राज्यपाल की वार्ता के लिए जल्द ही समय निर्धारित करने का आश्वासन दिया। झारखंड सरकार के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने पत्रांक 05/प-08/2023898 के अनुसार, राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के अंतर्गत महाविद्यालयों को पुनर्गठित करते हुए क्लस्टरिंग करने का निर्णय लिया है। छात्रों का आरोप है कि इस निर्णय से आवागमन के लिए अतिरिक्त खर्च का आर्थिक बोझ बढ़ेगा, शिक्षकों के पद सरेंडर किए जाएंगे, और कई विषयों के विभागों को बंद कर दिया जाएगा, जिसका राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर बहुत ही प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस मौके पर एआईडीएसओ के प्रदेश अध्यक्ष समर महतो ने इस निर्णय को 'छात्र व शिक्षा विरोधी' करार देते हुए कहा कि सरकार शिक्षकों की बहाली करने के बजाय कई विषयों के विभाग ही बंद कर रही है और सार्वजनिक शिक्षा को छीनने का काम कर रही है। जुलूस का नेतृत्व कर रही संगठन की उपाध्यक्ष रिंकी बांसरियार ने बताया कि क्लस्टर सिस्टम से कॉलेज चुनिंदा संकायों तक सीमित हो जाएंगे, जिससे हर संस्थान में बुनियादी विषय उपलब्ध नहीं होंगे और पारंपरिक विषयों की पढ़ाई पूरी तरह संकुचित हो जाएगी। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि छात्राओं को अपनी पसंद के विषयों के लिए दूर-दराज के कॉलेजों में भटकना पड़ेगा, जिससे सुदूर क्षेत्रों में उनकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा होगा और कई छात्राओं की पढ़ाई बीच में ही छूट जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को विभिन्न विषयों की क्लास के लिए एक ही दिन में अलग-अलग कॉलेजों के चक्कर काटने पड़ेंगे, जिससे उन्हें भारी मानसिक और शारीरिक मशक्कत का सामना करना होगा। समर महतो ने आगे कहा कि झारखंड के अधिकांश विद्यार्थी ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। क्लस्टर सिस्टम लागू होने से उनका यात्रा और रहने का खर्च बढ़ेगा, जिससे सरकारी शिक्षा आम छात्रों की पहुँच से दूर हो जाएगी। सुरक्षा चिंताओं के कारण बड़ी संख्या में अभिभावक अपनी बेटियों को दूर भेजने से कतराएंगे, जिससे छात्राओं की ड्रॉप-आउट दर बढ़ जाएगी। संगठन ने इस निर्णय का जोरदार विरोध करते हुए चेतावनी दी है कि यदि यह निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो सड़कों पर और भी तीव्र आंदोलन किए जाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर विश्वविद्यालयों में तालाबंदी भी होगी, साथ ही राजपाल भवन में हजारों की संख्या में छात्रों का विरोध प्रदर्शन होगा।1
- यह संदेश इस बात पर जोर देता है कि गलतियां और कमियां होने के बावजूद, व्यक्ति का दिल साफ और इरादे सच्चे होते हैं। इसमें कहा गया है कि लोगों को खुश करने के बजाय अपनी सच्चाई में जीना अधिक पसंद है। पोस्ट स्पष्ट रूप से बताती है कि "मैं परफेक्ट नहीं... लेकिन रियल हूं", यह मानते हुए कि नकली दिखावे से बेहतर अपनी असली पहचान के साथ जीना है।1
- ओरिया भला सिंह ने बोरवेल में फंसी सबमर्सिबल मोटर या किसी भी अन्य प्रकार के समर्सिबल उपकरण को बाहर निकालने के लिए अपनी सेवाएँ उपलब्ध कराई हैं। इस सुविधा के लिए 926288976 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके साथ ही, जो प्लंबर बोरिंग का पता लगवाएगा, उसे ₹200 का इनाम भी दिया जाएगा।1
- हजारीबाग के कोर्रा चौक स्थित मुसन साव गली में बने कुमार बॉयज हॉस्टल में गिरिडीह निवासी छात्र पंकज कुमार सिंह ने आत्महत्या कर ली है। पंकज कुमार सिंह बीसीए सेमेस्टर-1 का छात्र था और हॉस्टल के दूसरे तल्ले पर अकेले एक कमरा लेकर रह रहा था। बताया गया है कि वह पढ़ाई में बेहद होनहार विद्यार्थी था और उसकी तकनीक के क्षेत्र में भी अच्छी रुचि थी। पंकज ने दूर-दराज से पढ़ाई करने आने वाले छात्रों की परेशानी को देखते हुए 'One Near' नाम से एक एप्लीकेशन भी तैयार किया था, जिसका उद्देश्य नए छात्रों को कमरा खोजने में मदद करना था और इस प्रयास की लोग सराहना भी करते थे। घटना की जानकारी मिलने के बाद कोर्रा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए एसबीएमसीएच भेज दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पंकज के परिजनों से भी बातचीत की है। पंकज के परिजन हजारीबाग पहुंच गए हैं। हालांकि, आत्महत्या के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, और खबर लिखे जाने तक हॉस्टल के कमरे का दरवाजा नहीं खोला गया था।1
- झारखंड के हजारीबाग में एक ‘कोयला सिंडिकेट’ तेजी से पनप रहा है, जिससे क्षेत्र में गंभीर चिंता का माहौल है। यह सिंडिकेट नेताओं, माफियाओं और दलालों के एक संगठित गठजोड़ के कारण सक्रिय है, जिसके चलते पूरे कोल बेल्ट में स्थिति 'गर्म' हो रही है। मौजूदा हालात को देखते हुए यह खतरा मंडरा रहा है कि हजारीबाग में भी धनबाद जैसे भयावह और अस्थिर हालात उत्पन्न हो सकते हैं।1
- आगामी बकरीद पर्व 2026 को लेकर हजारीबाग पुलिस ने अपनी तैयारियों के तहत बड़कागांव थाना क्षेत्र के बड़कागांव चौक पर एक मॉक ड्रिल का आयोजन किया। यह मॉक ड्रिल पुलिस अधीक्षक हजारीबाग के निर्देशानुसार किया गया, जिसमें अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, बड़कागांव श्री अमित आनंद (भा. पु. से.), पुलिस निरीक्षक बड़कागांव, परिचरी प्रवर कुमार देवव्रत और थाना प्रभारी, बड़कागांव उपस्थित रहे। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे बकरीद पर्व को सौहार्दपूर्ण एवं शांतिपूर्ण तरीके से मनाएं। हजारीबाग पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बकरीद पर्व 2026 को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने हेतु वे 24x7 तत्पर हैं। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित होने वाले भ्रामक संदेशों के प्रति भी लोगों को आगाह किया। जनता से अनुरोध किया गया है कि व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर किसी भी तरह के भ्रामक मैसेज आने पर उसके बहकावे में न आएं, बल्कि तत्काल उसकी सूचना अपने नजदीकी थाना में दें। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि ऐसी सूचना का सत्यापन करते हुए अभिलंब कार्रवाई की जाएगी।4
- हजारीबाग जिले के बरही में सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों और उसकी क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए एक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास के दौरान लाइव फायरिंग और आंसू गैस का प्रयोग भी शामिल था, जिससे सुरक्षा बलों की मुस्तैदी और उनकी कार्रवाई करने की क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन हुआ। इस मॉक ड्रिल के माध्यम से यह दर्शाया गया कि क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से सुदृढ़ और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।1