गौ सम्मान आह्वान अभियान अयोध्या चलो! "गौ माता को मिले सेवा, सुरक्षा और सम्मान — बने राष्ट्र माता, बने केंद्रीय कानून गौ सम्मान आह्वान अभियान अयोध्या चलो! "गौ माता को मिले सेवा, सुरक्षा और सम्मान — बने राष्ट्र माता, बने केंद्रीय कानून!" सूर्यकुंड में संतों की बैठक में बड़ा निर्णय 26 जुलाई को सूर्यकुंड, दर्शन नगर में पूज्य संतों की उपस्थिति में आगामी रणनीति तय की गई। राष्ट्रीय लक्ष्य: पूरे भारत से 40 करोड़ हस्ताक्षर एकत्र कर जिलाधिकारियों के माध्यम से सरकार तक पहुँचाना। अयोध्या में उपलब्धि: अयोध्या जिले में 5 लाख से अधिक हस्ताक्षर पूरे हो चुके हैं! द्वितीय चरण (पदयात्रा): सूर्यकुंड, दर्शन नगर से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय (अयोध्या) तक विशाल पैदल यात्रा निकाली जाएगी। ज्ञापन समर्पण: 27 जुलाई को 50,000+ गौभक्त एवं साधु-संत अयोध्या जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपेंगे। (नोट: प्रथम चरण में तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा जा चुका है।) अभियान की 3 प्रमुख माँगें सेवा: गौ माता के पालन-पोषण हेतु उचित अनुदान एवं व्यवस्था मिले। सुरक्षा: भारत में गौ हत्या पूरी तरह समाप्त हो और कड़ा केंद्रीय कानून बने। सम्मान: गौ माता को आधिकारिक रूप से 'राष्ट्र माता' का दर्जा दिया जाए। अभियान के अटूट नियम एवं मर्यादा कोई पोस्टर/फ़ोटो नहीं: बैनर और होल्डिंग पर किसी संत, नेता या कार्यकर्ता का चित्र नहीं होगा—केवल श्री नंदी महाराज एवं गौ माता का चित्र रहेगा। कोई मंच या माइक नहीं: भाषणबाजी नहीं होगी; केवल हरि संकीर्तन, पदयात्रा और प्रार्थना पत्र से बात रखी जाएगी। कोई व्यक्तिगत नेतृत्व नहीं: अभियान किसी संस्था या झंडे के तले नहीं है। सभी गौ प्रेमी, संत और कार्यकर्ता समान रूप से सेवा करेंगे। पूर्णतः अहिंसक एवं गैर-राजनीतिक: यह अभियान संविधान के दायरे में, शांतिपूर्ण तथा किसी दल या सरकार के विरोध में न होकर केवल गौ माता के अधिकार के लिए है। समस्त सनातनियों से नम्र अपील "आपका थोड़ा सा समय, गौ माता को दिला सकता है न्याय!" भारतीय परंपरा के सभी आचार्य, पूज्य संत, गोरक्षक, गोसेवक, गोपालक और समस्त सनातनी भाई-बहन 27 जुलाई को प्रातः समय निकालकर अयोध्या जिलाधिकारी कार्यालय अवश्य पहुँचें। जय गोमाता! जय गोपाल
गौ सम्मान आह्वान अभियान अयोध्या चलो! "गौ माता को मिले सेवा, सुरक्षा और सम्मान — बने राष्ट्र माता, बने केंद्रीय कानून गौ सम्मान आह्वान अभियान अयोध्या चलो! "गौ माता को मिले सेवा, सुरक्षा और सम्मान — बने राष्ट्र माता, बने केंद्रीय कानून!" सूर्यकुंड में संतों की बैठक में बड़ा निर्णय 26 जुलाई को सूर्यकुंड, दर्शन नगर में पूज्य संतों की उपस्थिति में आगामी रणनीति तय की गई। राष्ट्रीय लक्ष्य: पूरे भारत से 40 करोड़ हस्ताक्षर एकत्र कर जिलाधिकारियों के माध्यम से सरकार तक पहुँचाना। अयोध्या में उपलब्धि: अयोध्या जिले में 5 लाख से अधिक हस्ताक्षर पूरे हो चुके हैं! द्वितीय चरण (पदयात्रा): सूर्यकुंड, दर्शन नगर से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय (अयोध्या) तक विशाल पैदल यात्रा निकाली जाएगी। ज्ञापन समर्पण: 27 जुलाई को 50,000+ गौभक्त एवं साधु-संत अयोध्या जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपेंगे। (नोट: प्रथम चरण में तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा जा चुका है।) अभियान की 3 प्रमुख माँगें सेवा: गौ माता के पालन-पोषण हेतु उचित अनुदान एवं व्यवस्था मिले। सुरक्षा: भारत में गौ हत्या पूरी तरह समाप्त हो और कड़ा केंद्रीय कानून बने। सम्मान: गौ माता को आधिकारिक रूप से 'राष्ट्र माता' का दर्जा दिया जाए। अभियान के अटूट नियम एवं मर्यादा कोई पोस्टर/फ़ोटो नहीं: बैनर और होल्डिंग पर किसी संत, नेता या कार्यकर्ता का चित्र नहीं होगा—केवल श्री नंदी महाराज एवं गौ माता का चित्र रहेगा। कोई मंच या माइक नहीं: भाषणबाजी नहीं होगी; केवल हरि संकीर्तन, पदयात्रा और प्रार्थना पत्र से बात रखी जाएगी। कोई व्यक्तिगत नेतृत्व नहीं: अभियान किसी संस्था या झंडे के तले नहीं है। सभी गौ प्रेमी, संत और कार्यकर्ता समान रूप से सेवा करेंगे। पूर्णतः अहिंसक एवं गैर-राजनीतिक: यह अभियान संविधान के दायरे में, शांतिपूर्ण तथा किसी दल या सरकार के विरोध में न होकर केवल गौ माता के अधिकार के लिए है। समस्त सनातनियों से नम्र अपील "आपका थोड़ा सा समय, गौ माता को दिला सकता है न्याय!" भारतीय परंपरा के सभी आचार्य, पूज्य संत, गोरक्षक, गोसेवक, गोपालक और समस्त सनातनी भाई-बहन 27 जुलाई को प्रातः समय निकालकर अयोध्या जिलाधिकारी कार्यालय अवश्य पहुँचें। जय गोमाता! जय गोपाल
- आस्था और श्रद्धा के महासागर में डूबी रामनगरी, गुरु पूर्णिमा पर सरयू तट से मंदिरों तक उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब। मोनू अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और सनातन परंपरा की गरिमा के साथ मनाया गया। ब्रह्ममुहूर्त से ही रामनगरी का वातावरण आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो उठा। हजारों श्रद्धालु पवित्र सरयू नदी के घाटों पर पहुंचे और विधि-विधान से स्नान कर दान-पुण्य किया। हर-हर महादेव और जय श्रीराम के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।सरयू स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने श्रीराम जन्मभूमि, हनुमानगढ़ी, कनक भवन सहित विभिन्न मंदिरों और आश्रमों में दर्शन-पूजन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और लोककल्याण की कामना की। नगर के मठों, मंदिरों और आश्रमों में दिनभर भजन-कीर्तन, सत्संग, वेदपाठ, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता रहा, जिससे पूरी रामनगरी आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत दिखाई दी। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शिष्यों ने अपने गुरुजनों का पूजन-अर्चन कर उनके चरण पखारे तथा पुष्प, फल, वस्त्र और दक्षिणा अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।संत-महात्माओं ने अपने प्रवचनों में गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। सनातन संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है, क्योंकि गुरु ही जीव को सत्य और मोक्ष का मार्ग दिखाते हैं।महंतों और संतों ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान, जप-तप और गुरु सेवा का विशेष महत्व है। इस दिन किए गए पुण्य कर्मों का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से गुरु के बताए मार्ग पर चलकर धर्म, सत्य और मानव सेवा का पालन करने का संदेश दिया।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाई जाती है। महर्षि वेदव्यास ने वेदों का विभाजन, महाभारत की रचना तथा अनेकों पुराणों की रचना कर सनातन ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया। इसी कारण इस दिन उन्हें आदिगुरु के रूप में स्मरण कर श्रद्धापूर्वक नमन किया जाता है।गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अयोध्या की धर्मनगरी एक बार फिर भक्ति, श्रद्धा और गुरु-शिष्य परंपरा की अनुपम छटा से आलोकित दिखाई दी। श्रद्धालुओं ने गुरु कृपा और भगवान श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की।4
- गुरु पूर्णिमा पर जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि आलोक सिंह रोहित ने संत-महात्माओं से लिया आशीर्वाद अयोध्या। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि आलोक सिंह रोहित ने रामनगरी अयोध्या के विभिन्न मठों एवं मंदिरों में पहुंचकर संत-महात्माओं और अपने गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान उन्होंने गुरु परंपरा के महत्व को नमन करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु ही व्यक्ति के जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं और ज्ञान के प्रकाश से अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करते हैं। आलोक सिंह रोहित ने कहा कि "गुरु के बिना जीवन अधूरा है। माता-पिता हमें जन्म देते हैं, लेकिन गुरु हमें जीवन जीने की सही राह दिखाते हैं। गुरु का आशीर्वाद ही व्यक्ति की सबसे बड़ी पूंजी होता है।" उन्होंने कहा कि भारत की सनातन परंपरा में गुरु-शिष्य संबंध सदियों से हमारी संस्कृति की पहचान रहा है। भगवान श्रीराम से लेकर भगवान श्रीकृष्ण तक ने भी गुरु का सम्मान कर समाज को आदर्श संदेश दिया। गुरु पूर्णिमा का पर्व हमें अपने गुरुओं के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर उन्होंने अयोध्या के विभिन्न मंदिरों और आश्रमों में जाकर संतों का आशीर्वाद लिया तथा प्रदेश और देशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। संत-महात्माओं ने भी उन्हें आशीर्वचन देते हुए समाज सेवा और जनकल्याण के कार्यों में निरंतर आगे बढ़ने की शुभकामनाएं दीं।1
- गौ सम्मान आह्वान अभियान अयोध्या चलो! "गौ माता को मिले सेवा, सुरक्षा और सम्मान — बने राष्ट्र माता, बने केंद्रीय कानून गौ सम्मान आह्वान अभियान अयोध्या चलो! "गौ माता को मिले सेवा, सुरक्षा और सम्मान — बने राष्ट्र माता, बने केंद्रीय कानून!" सूर्यकुंड में संतों की बैठक में बड़ा निर्णय 26 जुलाई को सूर्यकुंड, दर्शन नगर में पूज्य संतों की उपस्थिति में आगामी रणनीति तय की गई। राष्ट्रीय लक्ष्य: पूरे भारत से 40 करोड़ हस्ताक्षर एकत्र कर जिलाधिकारियों के माध्यम से सरकार तक पहुँचाना। अयोध्या में उपलब्धि: अयोध्या जिले में 5 लाख से अधिक हस्ताक्षर पूरे हो चुके हैं! द्वितीय चरण (पदयात्रा): सूर्यकुंड, दर्शन नगर से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय (अयोध्या) तक विशाल पैदल यात्रा निकाली जाएगी। ज्ञापन समर्पण: 27 जुलाई को 50,000+ गौभक्त एवं साधु-संत अयोध्या जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपेंगे। (नोट: प्रथम चरण में तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा जा चुका है।) अभियान की 3 प्रमुख माँगें सेवा: गौ माता के पालन-पोषण हेतु उचित अनुदान एवं व्यवस्था मिले। सुरक्षा: भारत में गौ हत्या पूरी तरह समाप्त हो और कड़ा केंद्रीय कानून बने। सम्मान: गौ माता को आधिकारिक रूप से 'राष्ट्र माता' का दर्जा दिया जाए। अभियान के अटूट नियम एवं मर्यादा कोई पोस्टर/फ़ोटो नहीं: बैनर और होल्डिंग पर किसी संत, नेता या कार्यकर्ता का चित्र नहीं होगा—केवल श्री नंदी महाराज एवं गौ माता का चित्र रहेगा। कोई मंच या माइक नहीं: भाषणबाजी नहीं होगी; केवल हरि संकीर्तन, पदयात्रा और प्रार्थना पत्र से बात रखी जाएगी। कोई व्यक्तिगत नेतृत्व नहीं: अभियान किसी संस्था या झंडे के तले नहीं है। सभी गौ प्रेमी, संत और कार्यकर्ता समान रूप से सेवा करेंगे। पूर्णतः अहिंसक एवं गैर-राजनीतिक: यह अभियान संविधान के दायरे में, शांतिपूर्ण तथा किसी दल या सरकार के विरोध में न होकर केवल गौ माता के अधिकार के लिए है। समस्त सनातनियों से नम्र अपील "आपका थोड़ा सा समय, गौ माता को दिला सकता है न्याय!" भारतीय परंपरा के सभी आचार्य, पूज्य संत, गोरक्षक, गोसेवक, गोपालक और समस्त सनातनी भाई-बहन 27 जुलाई को प्रातः समय निकालकर अयोध्या जिलाधिकारी कार्यालय अवश्य पहुँचें। जय गोमाता! जय गोपाल1
- किसान ने लगाया लेखपाल पर बड़ा आरोप नाली को लेकर बढ़ा विवाद अयोध्या बीकापुर तहसील से का मामले से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या 2 मीटर चौड़ी सरकारी नाली को कागजों में 7 मीटर चौड़ा दिखाया जा सकता है? आखिर ऐसा कैसे हुआ? यही सवाल उठा रहे हैं एक बुजुर्ग किसान। मामला ग्राम पंचायत हथिगो, मजरा पूरे राम आनंद राय का है। यहां के निवासी हौसला प्रसाद राय का आरोप है कि उनकी कृषि भूमि को प्रभावित करने के लिए सरकारी नाली की चौड़ाई को गलत तरीके से दर्ज किया गया है। पीड़ित का कहना है कि कई महीनों से वह न्याय की उम्मीद में तहसील के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समाधान मिलने के बजाय उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि विपक्षी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लेखपाल और कानूनगो की कथित मिलीभगत से तीन बार पैमाइश कराई गई। इतना ही नहीं, निशानदेही के नाम पर मौके पर खूंटे भी गाड़ दिए गए। सबसे बड़ा सवाल 25 मई 2026 की उस रिपोर्ट पर उठ रहा है, जिसमें क्षेत्रफल के आधार पर नाली की चौड़ाई 7 मीटर मानी गई। जबकि किसान का दावा है कि मौके पर मौजूद सरकारी नाली लगभग 2 मीटर चौड़ी है। यदि पीड़ित के आरोप सही साबित होते हैं, तो इससे उनकी कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि अब यह मामला केवल एक खेत या एक किसान तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि राजस्व अभिलेखों की पारदर्शिता और पैमाइश की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की निगाहें तहसील और जिला प्रशासन पर हैं। क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी? क्या पैमाइश की दोबारा सत्यापन कराया जाएगा? और यदि किसी स्तर पर अनियमितता मिलती है, तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी फिलहाल, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या जांच का अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है1
- *लगभग 45 मिनट की बारिश में नगर निगम के दावे की खुली पोल* ब्रेकिंग अयोध्या *अयोध्या* *लगभग 45 मिनट की बारिश में नगर निगम के दावे की खुली पोल* नाका मकबरा क्षेत्र में नाली हुआ ओवरफ्लो,बारिश का पानी और नाले की गंदगी दुकानों के सामने भर गाई है दुकानदार परेशान, लगभग 8 से 10 महीनों से नाले की सफाई नहीं हुई, कई बार शिकायत के बावजूद नगर निगम ने सफाई नहीं कराई राहगीरों और स्थानीय लोगों को हो रही समस्या ।3
- आज अयोध्या जिला में अंधाधुन बारिश हुई है और मौसम ठण्डक आनंद मय रहा बाराबांकी जिला में बिलकुल भी बारिश नहीं हुई है रिपोर्टिंग Lal Chand Soni।। ।।आज सुबह टाइम्स टीम लखनऊ ।।। आज अयोध्या जिला में अंधाधुन बारिश हुई है और मौसम ठण्डक आनंद मय रहा बाराबांकी जिला में बिलकुल भी बारिश नहीं हुई है रिपोर्टिंग Lal Chand Soni।। ।।आज सुबह टाइम्स टीम लखनऊ ।।।1
- 2 मीटर की सरकारी नाली आखिर 7 मीटर चौड़ी कैसे बनी "तहसील की पैमाइश पर उठे बड़े सवाल, बुजुर्ग किसान ने लेखपाल-कानूनगो पर लगाए गंभीर आरोप? (#बीकापुर अयोध्या) जनपद की चर्चित बीकापुर तहसील एक बार फिर सवालों के घेरे में इस बार मामला सरकारी नाली से जुड़ा है। जहां एक बुजुर्ग किसान ने राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि महज 2 मीटर चौड़ी सरकारी नाली को कागजों में 7 मीटर चौड़ी दिखाकर उसकी जमीन हड़पने की कोशिश की जा रही है। मामला ग्राम पंचायत हथिगो, मजरे पूरे राम आनंद राय का है। जहां के पीड़ित हौसला प्रसाद राय, पुत्र स्वर्गीय राम दुलारे राय ने अपने ज्येष्ठ पुत्र के साथ पत्रकारों के सामने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि वह कई महीनों से तहसील के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन न्याय मिलने के बजाय उन पर ही दबाव बनाया जा रहा है। पीड़ित का आरोप है कि विपक्षी राघव राम शुक्ला ,पूरे पराग मिश्र हथिगो को लाभ पहुंचाने के लिए लेखपाल और कानूनगो की कथित मिली भगत से अब तक तीन बार पैमाइश कराई गई। निशान देही के नाम पर कथित रूप से खूंटे भी गाड़ दिए गए, जबकि मौके पर मौजूद सरकारी नाली की वास्तविक चौड़ाई सिर्फ 2 मीटर है। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि 25 मई 2026 को लेखपाल द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में क्षेत्रफल का हवाला देकर 2 मीटर की नाली को 7 मीटर चौड़ा मान लिया गया। पीड़ित का कहना है कि यदि इसी आधार पर पैमाइश की गई तो उसकी बहुमूल्य कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा चला जाएगा और विपक्षी को सीधा फायदा मिलेगा। अब सवाल यह उठता है कि जब सरकारी नाली नक्शे में 2 मीटर की है, तो आखिर 7 मीटर चौड़ाई किस नियम और किस आधार पर तय कर दी गई ? क्या यह महज तकनीकी भूल है या फिर किसी को लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी अभिलेखों से खेल किया जा रहा है? पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि तहसील और पुलिस प्रशासन की ओर से लगातार उन पर दबाव बनाया जा रहा है, जबकि उनकी शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो रही। अब निगाहें तहसील प्रशासन और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी? क्या पैमाइश में गड़बड़ी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी? या फिर एक बुजुर्ग किसान न्याय के लिए यूं ही दफ्तरों की चौखट नापता रहेगा? यदि लगाए गए आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह मामला केवल एक किसान की जमीन का नहीं, बल्कि राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। ब्यूरो रिपोर्ट4
- गुरु पूर्णिमा पर अयोध्या में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, गुरु दर्शन और आशीर्वाद के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचे अयोध्या। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर धर्मनगरी अयोध्या में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहर के विभिन्न मठों, मंदिरों और आश्रमों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपने-अपने गुरुओं के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया और गुरु पूजन कर जीवन में उनके मार्गदर्शन के प्रति आस्था व्यक्त की। हनुमानगढ़ी, कनक भवन, नागेश्वरनाथ मंदिर सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कई स्थानों पर धार्मिक प्रवचन, भजन-कीर्तन और भंडारों का आयोजन भी किया गया। पूरी रामनगरी "गुरु वंदना" और "जय श्रीराम" के जयघोष से गूंज उठी। श्रद्धालुओं ने गुरु को ज्ञान, संस्कार और जीवन का सच्चा मार्गदर्शक बताते हुए उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए थे, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।2