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कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध भद्रकाली मंदिर मे आज, माता रानी के पावन दर्शन करने का सौभाग्य मिला। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती का दायां चरण गिरा था। कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध भद्रकाली मंदिर मे आज, माता रानी के पावन दर्शन करने का सौभाग्य मिला। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती का दायां चरण गिरा था। कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध भद्रकाली मंदिर (देवीकूप शक्तिपीठ) में, मनोकामना पूरी होने पर लकड़ी, मिट्टी या धातु के घोड़े का जोड़ा चढ़ाने की परंपरा है। पौराणिक मान्यता है कि महाभारत युद्ध में जीत के बाद पांडवों ने, माता को अपने घोड़े भेंट किए थे। श्रीकृष्ण का मुंडन भी यहीं हुआ था। जिसके बाद उन्होंने माता को घोड़ा समर्पित किया था। ऐतिहासिक मान्यता है महाभारत युद्ध से पहले, पांडवों ने यहां माता की आराधना की थी। यहां प्रथा की शुरुआत तब हुई जब युद्ध में विजय के बाद पांडवों ने कृतज्ञता स्वरूप, अपने रथ के घोड़े माता को समर्पित किए थे। मंदिर मे वर्तमान परंपरा है भक्त मन्नत पूरी होने पर, श्रद्धा के अनुसार, मिट्टी, लकड़ी या धातु के घोड़े का जोड़ा चढ़ाते हैं, जो शक्ति और विजय का प्रतीक है। यहां शनिदेव का प्रसिद्ध मंदिर भी है। जिसमे भक्त शनिदेव को प्रश्न करने के लिए तेल चढ़ाते है। और अपनी मन्नते पूरी करते है।

2 hrs ago
user_Gulshan Dhiman
Gulshan Dhiman
रादौर, यमुनानगर, हरियाणा•
2 hrs ago

कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध भद्रकाली मंदिर मे आज, माता रानी के पावन दर्शन करने का सौभाग्य मिला। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती का दायां चरण गिरा था। कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध भद्रकाली मंदिर मे आज, माता रानी के पावन दर्शन करने का सौभाग्य मिला। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती का दायां चरण गिरा था। कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध भद्रकाली मंदिर (देवीकूप शक्तिपीठ) में, मनोकामना पूरी होने पर लकड़ी, मिट्टी या धातु के घोड़े का जोड़ा चढ़ाने की परंपरा है। पौराणिक मान्यता है कि महाभारत युद्ध में जीत के बाद पांडवों ने, माता को अपने घोड़े भेंट किए थे। श्रीकृष्ण का मुंडन भी यहीं हुआ था। जिसके बाद उन्होंने माता को घोड़ा समर्पित किया था। ऐतिहासिक मान्यता है महाभारत युद्ध से पहले, पांडवों ने यहां माता की आराधना की थी। यहां प्रथा की शुरुआत तब हुई जब युद्ध में विजय के बाद पांडवों ने कृतज्ञता स्वरूप, अपने रथ के घोड़े माता को समर्पित किए थे। मंदिर मे वर्तमान परंपरा है भक्त मन्नत पूरी होने पर, श्रद्धा के अनुसार, मिट्टी, लकड़ी या धातु के घोड़े का जोड़ा चढ़ाते हैं, जो शक्ति और विजय का प्रतीक है। यहां शनिदेव का प्रसिद्ध मंदिर भी है। जिसमे भक्त शनिदेव को प्रश्न करने के लिए तेल चढ़ाते है। और अपनी मन्नते पूरी करते है।

  • user_Gulshan Dhiman
    Gulshan Dhiman
    रादौर, यमुनानगर, हरियाणा
    जय माता की 🙏🙏🙏❤️❤️❤️🌹🌹🌹🌹🌹💐💐💐💐
    1 hr ago
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  • कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध भद्रकाली मंदिर मे आज, माता रानी के पावन दर्शन करने का सौभाग्य मिला। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती का दायां चरण गिरा था। कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध भद्रकाली मंदिर (देवीकूप शक्तिपीठ) में, मनोकामना पूरी होने पर लकड़ी, मिट्टी या धातु के घोड़े का जोड़ा चढ़ाने की परंपरा है। पौराणिक मान्यता है कि महाभारत युद्ध में जीत के बाद पांडवों ने, माता को अपने घोड़े भेंट किए थे। श्रीकृष्ण का मुंडन भी यहीं हुआ था। जिसके बाद उन्होंने माता को घोड़ा समर्पित किया था। ऐतिहासिक मान्यता है महाभारत युद्ध से पहले, पांडवों ने यहां माता की आराधना की थी। यहां प्रथा की शुरुआत तब हुई जब युद्ध में विजय के बाद पांडवों ने कृतज्ञता स्वरूप, अपने रथ के घोड़े माता को समर्पित किए थे। मंदिर मे वर्तमान परंपरा है भक्त मन्नत पूरी होने पर, श्रद्धा के अनुसार, मिट्टी, लकड़ी या धातु के घोड़े का जोड़ा चढ़ाते हैं, जो शक्ति और विजय का प्रतीक है। यहां शनिदेव का प्रसिद्ध मंदिर भी है। जिसमे भक्त शनिदेव को प्रश्न करने के लिए तेल चढ़ाते है। और अपनी मन्नते पूरी करते है।
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    कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध भद्रकाली मंदिर मे आज, माता रानी के पावन दर्शन करने का सौभाग्य मिला। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती का दायां चरण गिरा था।
कुरुक्षेत्र के प्रसिद्ध भद्रकाली मंदिर (देवीकूप शक्तिपीठ) में, मनोकामना पूरी होने पर लकड़ी, मिट्टी या धातु के घोड़े का जोड़ा चढ़ाने की परंपरा है। पौराणिक मान्यता है कि महाभारत युद्ध में जीत के बाद पांडवों ने, माता को अपने घोड़े भेंट किए थे। श्रीकृष्ण का मुंडन भी यहीं हुआ था। जिसके बाद उन्होंने माता को घोड़ा समर्पित किया था।
ऐतिहासिक मान्यता है महाभारत युद्ध से पहले, पांडवों ने यहां माता की आराधना की थी।
यहां प्रथा की शुरुआत  तब हुई जब युद्ध में विजय के बाद पांडवों ने कृतज्ञता स्वरूप, अपने रथ के घोड़े माता को समर्पित किए थे।
मंदिर मे वर्तमान परंपरा  है भक्त मन्नत पूरी होने पर, श्रद्धा के अनुसार, मिट्टी, लकड़ी या धातु के घोड़े का जोड़ा चढ़ाते हैं, जो शक्ति और विजय का प्रतीक है।
यहां शनिदेव का प्रसिद्ध मंदिर भी है। जिसमे भक्त शनिदेव को प्रश्न करने के लिए तेल चढ़ाते है। और अपनी मन्नते पूरी करते है।
    user_Gulshan Dhiman
    Gulshan Dhiman
    रादौर, यमुनानगर, हरियाणा•
    2 hrs ago
  • water cooler damage
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    water cooler damage
    user_BENIWAL
    BENIWAL
    लाडवा, कुरुक्षेत्र, हरियाणा•
    14 hrs ago
  • “रक्तदान महादान” की मिसाल—यमुना नगर निरंकारी सत्संग भवन में 196 श्रद्धालुओं ने किया सेवा भाव से रक्तदान, इस रक्तदान शिविर का उद्घाटन मुख्य अतिथि उपायुक्त प्रीति ने रिबन काटकर किया।
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    “रक्तदान महादान” की मिसाल—यमुना नगर निरंकारी सत्संग भवन में 196 श्रद्धालुओं ने किया सेवा भाव से रक्तदान, इस रक्तदान शिविर का उद्घाटन मुख्य अतिथि उपायुक्त प्रीति ने रिबन काटकर किया।
    user_Jagadhri Breaking News
    Jagadhri Breaking News
    Local News Reporter जगाधरी, यमुनानगर, हरियाणा•
    9 hrs ago
  • Post by Gopal Chauhan
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    Post by Gopal Chauhan
    user_Gopal Chauhan
    Gopal Chauhan
    Taxi Driver जगाधरी, यमुनानगर, हरियाणा•
    16 hrs ago
  • Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी
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    Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी
    user_द कहर न्यूज़ एजेंसी
    द कहर न्यूज़ एजेंसी
    Journalist Saharanpur, Uttar Pradesh•
    9 hrs ago
  • Post by Kashyap
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    Post by Kashyap
    user_Kashyap
    Kashyap
    Plumber बिलासपुर, यमुनानगर, हरियाणा•
    10 hrs ago
  • Post by Nitish Kumar
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    Post by Nitish Kumar
    user_Nitish Kumar
    Nitish Kumar
    Saharanpur, Uttar Pradesh•
    14 hrs ago
  • अभिभावक सेवा मंच द्वारा आज प्रेस वार्ता की गई जिसमें स्कूल की बढ़ती फीस, डेवलपमेंट चार्ज, रिपोर्ट एडमिशन फीस, मासिक फीस, प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें, स्कूल के लोगों वाली नोटबुक, हर साल बदली जाने वाली वर्दी, स्कूलों के खिलाफ आंदोलन के चेतावनी। शैंकी गुप्ता जिलाध्यक्ष, विपिन गुप्ता, महेंद्र मित्तल, संजय मित्तल अन्य साथी मौजूद थे।
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    अभिभावक सेवा मंच द्वारा आज प्रेस वार्ता की गई जिसमें स्कूल की बढ़ती फीस, डेवलपमेंट चार्ज, रिपोर्ट एडमिशन फीस, मासिक फीस, प्राइवेट पब्लिकेशन की किताबें, स्कूल के लोगों वाली नोटबुक, हर साल बदली जाने वाली वर्दी, स्कूलों के खिलाफ आंदोलन के चेतावनी। शैंकी गुप्ता जिलाध्यक्ष, विपिन गुप्ता, महेंद्र मित्तल, संजय मित्तल अन्य साथी मौजूद थे।
    user_Jagadhri Breaking News
    Jagadhri Breaking News
    Local News Reporter जगाधरी, यमुनानगर, हरियाणा•
    9 hrs ago
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