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नंदलाल पुरबिया न्यू द्वारकेश न्यूज़ चैनल नांदोली राजसमंद राजस्थान द्वारा जनहित में प्रसारित

9 hrs ago
user_फोटोग्राफर नंदलाल पुरबिया नांदोली राजसमंद राजस्थान
फोटोग्राफर नंदलाल पुरबिया नांदोली राजसमंद राजस्थान
Photographer राजसमंद, राजसमंद, राजस्थान•
9 hrs ago

नंदलाल पुरबिया न्यू द्वारकेश न्यूज़ चैनल नांदोली राजसमंद राजस्थान द्वारा जनहित में प्रसारित

More news from राजस्थान and nearby areas
  • राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन जिला शाखा उदयपुर ग्रामीण ने आयुष्मान आरोग्य अस्पतालों में दो समय ओपीडी संचालित करने के राज्य सरकार के आदेश का विरोध करते हुए इसे व्यावहारिक रूप से कठिन बताया है। इस संबंध में एसोसिएशन द्वारा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री, राजस्थान सरकार को उपखंड अधिकारी वल्लभनगर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया।
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    राजस्थान नर्सेज एसोसिएशन जिला शाखा उदयपुर ग्रामीण ने आयुष्मान आरोग्य अस्पतालों में दो समय ओपीडी संचालित करने के राज्य सरकार के आदेश का विरोध करते हुए इसे व्यावहारिक रूप से कठिन बताया है। इस संबंध में एसोसिएशन द्वारा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री, राजस्थान सरकार को उपखंड अधिकारी वल्लभनगर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया।
    user_Local Tv News Channel
    Local Tv News Channel
    वल्लभनगर, उदयपुर, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • पाली,कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने आज गुरूवार को पाली जिले के रामलीला मैदान में आयोजित संभागीय स्तरीय आयुर्वेद मेले का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मंत्री कुमावत ने कहा कि आरोग्य व स्वास्थ्य का हमारे जीवन में बेहद् महत्वपूर्ण स्थान है। शरीर स्वस्थ होता है तो व्यक्ति सब कुछ प्राप्त कर सकता है इसे ध्यान रखते हुये आमजन के लिये आरोग्य मेले का आयोजन किया गया है। केन्द्र व राज्य सरकार भी आमजन के स्वास्थ्य हितो को ध्यान में रखकर कार्य कर रही है। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित किए मिला आम जन के लिए उपयोगी हुआ क्योंकि पूर्व में सुमेरपुर में भी इस विभाग के द्वारा जो मेला लगाया गया था उसका आम जनता को बहुत लाभ मिला और विशेष कर बच्चों का भी सफल इलाज किया गया जो आयुष विभाग धन्यवाद का पात्र है आज के समय में आयुर्वेद इलाज बहुत ही उपयोगी है एलोपैथी से जल्दी ठीक हो सकते हैं परंतु साइड इफेक्ट ज्यादा है किंतु आयुर्वेद का इलाज धीरे है पर बीमारियों का जड़ों से नष्ट कर देता है हमारे ऋषि मुनियों के द्वारा उनके उपयोग किया जाता है क्योंकि आयुर्वेदिक विभाग में गुणवत्ता और फायदे ज्यादा है। आयोजित मेले में आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, योग एवँ प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा लाभान्वित किया जायेगा। शुभारंभ के पश्चात मंत्री कुमावत, आईएएस बिरजू गोपाल सुनील भंडारी, आयुक्त नगर निगम नवीन भारद्वाज, उपखंड अधिकारी विमलेंद्र सिंह राणावत द्वारा आरोग्य मेले में लगी समस्त व्यवस्थाओं एवँ आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी के विभिन्न काउंटरों का अवलोकन किया गया। समारोह को सुनील भंडारी एव पुख राज पटेल ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में संभाग नोडल अधिकारी अर्जुनसिंह, सयुक्त निदेशक बजरंग लाल शर्मा, उपनिदेशक जालोर डॉ भवानी सिंह, उपनिदेशक ब्यावर सीपी सिंह, पुखराज पटेल, देवीलाल मेघवाल, डॉ शिव कुमार शर्मा अन्य सभी आमजन मौजूद रहे। इसी प्रकार मेले में 13 से 14 मार्च 2026 दो दिन शाम 7 बजे भव्य संस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा। जिसमे राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कलाकार भाग लेंगे। सांस्कृतिक आयोजन में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर के सौजन्य से किया जाएगा।
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    पाली,कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने आज गुरूवार को पाली जिले के रामलीला मैदान में आयोजित संभागीय स्तरीय आयुर्वेद मेले का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मंत्री कुमावत ने कहा कि आरोग्य व स्वास्थ्य का हमारे जीवन में बेहद् महत्वपूर्ण स्थान है। शरीर स्वस्थ होता है तो व्यक्ति सब कुछ प्राप्त कर सकता है इसे ध्यान रखते हुये आमजन के लिये आरोग्य मेले का आयोजन किया गया है। केन्द्र व राज्य सरकार भी आमजन के स्वास्थ्य हितो को ध्यान में रखकर कार्य कर रही है।
जिला प्रशासन द्वारा आयोजित किए मिला आम जन के लिए उपयोगी हुआ क्योंकि पूर्व में सुमेरपुर में भी इस विभाग के द्वारा जो मेला लगाया गया था उसका आम जनता को बहुत लाभ मिला और विशेष कर बच्चों का भी सफल इलाज किया गया जो आयुष विभाग धन्यवाद का पात्र है आज के समय में आयुर्वेद इलाज बहुत ही उपयोगी है एलोपैथी से जल्दी ठीक हो सकते हैं परंतु साइड इफेक्ट ज्यादा है किंतु आयुर्वेद का इलाज धीरे है पर बीमारियों का जड़ों से नष्ट कर देता है हमारे ऋषि मुनियों के द्वारा उनके उपयोग किया जाता है क्योंकि आयुर्वेदिक विभाग में गुणवत्ता और फायदे ज्यादा है।
आयोजित मेले में आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, योग एवँ प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा लाभान्वित किया जायेगा। शुभारंभ के पश्चात मंत्री कुमावत, आईएएस बिरजू गोपाल सुनील भंडारी, आयुक्त नगर निगम नवीन भारद्वाज, उपखंड अधिकारी विमलेंद्र सिंह राणावत द्वारा आरोग्य मेले में लगी समस्त व्यवस्थाओं एवँ आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी के विभिन्न काउंटरों का अवलोकन किया गया। समारोह को सुनील भंडारी एव पुख राज पटेल ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम में संभाग नोडल अधिकारी अर्जुनसिंह, सयुक्त निदेशक बजरंग लाल शर्मा, उपनिदेशक जालोर डॉ भवानी सिंह, उपनिदेशक ब्यावर सीपी सिंह, पुखराज पटेल, देवीलाल मेघवाल, डॉ शिव कुमार शर्मा अन्य सभी आमजन मौजूद रहे।
इसी प्रकार मेले में 13 से 14 मार्च 2026 दो दिन शाम 7 बजे भव्य संस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा। जिसमे राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कलाकार भाग लेंगे। सांस्कृतिक आयोजन में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर के सौजन्य से किया जाएगा।
    user_मारवाड़ गोडवाड न्यूज़
    मारवाड़ गोडवाड न्यूज़
    Agricultural production बाली, पाली, राजस्थान•
    11 hrs ago
  • Post by Alert Nation News
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    Post by Alert Nation News
    user_Alert Nation News
    Alert Nation News
    चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • Post by (ND NEWS CHITTORGARH)Laxman Si
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    Post by (ND NEWS CHITTORGARH)Laxman Si
    user_(ND NEWS CHITTORGARH)Laxman Si
    (ND NEWS CHITTORGARH)Laxman Si
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • Post by LAKSA DHAMLi LAKSA DHAMLi
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    Post by LAKSA DHAMLi LAKSA DHAMLi
    user_LAKSA DHAMLi LAKSA DHAMLi
    LAKSA DHAMLi LAKSA DHAMLi
    मारवाड़ जंक्शन, पाली, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • Post by My Love
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    Post by My Love
    user_My Love
    My Love
    Taxi Driver Chittaurgarh, Chittorgarh•
    12 hrs ago
  • Post by फोटोग्राफर नंदलाल पुरबिया नांदोली राजसमंद राजस्थान
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    Post by फोटोग्राफर नंदलाल पुरबिया नांदोली राजसमंद राजस्थान
    user_फोटोग्राफर नंदलाल पुरबिया नांदोली राजसमंद राजस्थान
    फोटोग्राफर नंदलाल पुरबिया नांदोली राजसमंद राजस्थान
    Photographer राजसमंद, राजसमंद, राजस्थान•
    17 hrs ago
  • चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चंदेरिया क्षेत्र में प्रस्तावित हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के फर्टिलाइज़र प्लांट को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। 10 मार्च 2026 को आजोलिया का खेड़ा स्थित सगरा माता मंदिर प्रांगण में आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई के दौरान हजारों ग्रामीणों ने एकजुट होकर परियोजना का तीखा विरोध किया। प्रभावित गांवों से पहुंचे लोगों ने एक स्वर में कहा कि उन्हें ऐसा विकास स्वीकार नहीं जो उनके स्वास्थ्य, जल स्रोतों और कृषि भूमि के लिए खतरा बने। ग्रामीणों का आरोप है कि पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त होने से पहले ही संयंत्र का बड़ा हिस्सा तैयार कर दिया गया है, ऐसे में जनसुनवाई की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कई ग्रामीणों ने इसे “जनसुनवाई नहीं, केवल औपचारिकता” बताया। उनका कहना है कि जब केंद्र स्तर पर पर्यावरण मंजूरी बार-बार अटकी हुई है, तब इस तरह की जनसुनवाई आयोजित करना केवल औपचारिकता निभाने और नियमों को दरकिनार करने की कोशिश प्रतीत होता है। भारी सुरक्षा के बीच हुई जनसुनवाई जनसुनवाई के दौरान प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक, निरीक्षक स्तर के अधिकारी, सैकड़ों पुलिसकर्मी, रैपिड एक्शन टास्क फोर्स के जवान तथा निजी सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए थे। इसके बावजूद आजोलिया का खेड़ा, पुठोली, बिलिया, नगरी, धोरडिया, मूंगा का खेड़ा, सुवानिया और आसपास के आठ-दस गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण जनसुनवाई स्थल पर पहुंचे और परियोजना के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह जनसुनवाई वास्तविक जनमत जानने की प्रक्रिया नहीं बल्कि पहले से तय परियोजना को औपचारिक मंजूरी दिलाने का प्रयास है। आरोप: बिना मंजूरी 70 प्रतिशत निर्माण जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने दावा किया कि प्रस्तावित फर्टिलाइज़र संयंत्र का लगभग 70 प्रतिशत निर्माण पहले ही किया जा चुका है, जबकि परियोजना को अभी तक पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि निर्माण पहले ही हो चुका है तो जनसुनवाई का उद्देश्य क्या रह जाता है। उनके अनुसार यह पूरी प्रक्रिया “सुनवाई” से अधिक “औपचारिकता” बनकर रह गई है। पर्यावरण कानूनों का संभावित उल्लंघन? पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट के लिए पहले पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट तैयार होती है, इसके बाद सार्वजनिक जनसुनवाई, विशेषज्ञ समिति की समीक्षा और अंत में पर्यावरणीय मंजूरी दी जाती है। भारत में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रमुख कानूनों में Environment Protection Act 1986 और EIA Notification 2006 शामिल हैं। इन नियमों के अनुसार किसी भी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद ही शुरू किया जा सकता है। यदि इससे पहले निर्माण किया जाता है तो यह गंभीर नियम उल्लंघन माना जा सकता है। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए देश में National Green Tribunal (NGT) की स्थापना की गई है, जो पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर परियोजनाओं को रोकने या मुआवजा लगाने जैसे आदेश दे सकता है। 39 लोगों ने रखी अपनी बात, अधिकांश ने किया विरोध जनसुनवाई के दौरान कुल 39 लोगों ने अपनी बात रखी, जिनमें से 33 लोगों ने प्रस्तावित संयंत्र का विरोध किया, जबकि 6 लोगों ने परियोजना के समर्थन में अपनी राय व्यक्त की। विरोध करने वाले ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में पहले से संचालित औद्योगिक इकाइयों के कारण वायु और जल प्रदूषण की समस्या गंभीर हो चुकी है और नया संयंत्र लगने से स्थिति और खराब हो सकती है। प्रदूषण के आरोप: पशुओं की मौत और बढ़ती बीमारियां जनसुनवाई में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चंदेरिया क्षेत्र में पहले से संचालित औद्योगिक इकाइयों के कारण वायु और जल प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में जहरीली गैसों और रासायनिक प्रभाव के कारण हजारों गाय-भैंसों की मौत हो चुकी है। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में कैंसर, लकवा, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। कुछ किसानों ने दावा किया कि प्रदूषण के कारण उनकी जमीन की उर्वरता कम हो रही है और कई कुओं तथा तालाबों का पानी पीने योग्य नहीं रहा। ग्रामीणों की चुनौती: “अधिकारी हमारे गांव का पानी पीकर दिखाएं” जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन और कंपनी अधिकारियों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि क्षेत्र का पानी सुरक्षित है तो अधिकारी गांव के कुओं और तालाबों से लाया गया पानी पीकर दिखाएं। ग्रामीणों के अनुसार इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए कोई भी अधिकारी आगे नहीं आया। ग्राम सभाओं ने दर्ज कराया विरोध प्रस्ताव आजोलिया का खेड़ा और पुठोली ग्राम पंचायतों द्वारा आयोजित विशेष ग्राम सभाओं में पारित विरोध प्रस्ताव को भी जनसुनवाई के रिकॉर्ड में शामिल किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इन प्रस्तावों से स्पष्ट है कि प्रभावित गांवों की सामूहिक राय इस परियोजना के खिलाफ है। ‘प्रायोजित समर्थन’ के आरोप जनसुनवाई के दौरान कुछ ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन पर यह आरोप भी लगाया कि विरोध को कम दिखाने के लिए कुछ लोगों को पैसे देकर समर्थन में बोलने के लिए खड़ा किया गया। इस आरोप को लेकर कार्यक्रम स्थल पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी बन गई। “हमें विकास नहीं, सुरक्षित जीवन चाहिए” कंपनी की ओर से बताया गया कि लगभग 2700 करोड़ रुपये के निवेश से बनने वाले इस संयंत्र से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है और किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। हालांकि ग्रामीणों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा विकास स्वीकार नहीं जो उनके स्वास्थ्य, पशुधन और कृषि भूमि के लिए खतरा बन जाए। ग्रामीणों का कहना था कि यदि नया संयंत्र स्थापित होता है तो क्षेत्र में प्रदूषण और बढ़ने का खतरा है। कई ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें रोजगार या विकास के नाम पर ऐसा उद्योग स्वीकार नहीं जो उनके जीवन, जल, जंगल और जमीन के लिए खतरा बने। उनका कहना था—“हमें विकास नहीं, शुद्ध हवा और पानी चाहिए।” पहले भी विवाद में रहा प्रोजेक्ट यह परियोजना पहले भी विवादों में रह चुकी है। पूर्व में राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रस्तावित दौरे और भूमिपूजन कार्यक्रम को भी विवाद के बाद रद्द करना पड़ा था। ग्रामीणों का आरोप है कि उस समय भी परियोजना से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी। “सुनवाई का अधिकार” और प्राकृतिक न्याय कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरणीय परियोजनाओं में जनसुनवाई केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह नागरिकों के “सुनवाई के अधिकार” से जुड़ी होती है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के आधार पर प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत लागू होता है, जिसमें दोनों पक्षों को सुनने का सिद्धांत शामिल है। इसका उद्देश्य किसी भी न्यायिक या प्रशासनिक निर्णय में निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। यदि किसी परियोजना में जनसुनवाई से पहले ही निर्माण हो चुका हो तो पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। कंपनी का पक्ष कंपनी की ओर से जारी प्रेस नोट में दावा किया गया कि जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने रोजगार, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास से जुड़े सुझाव दिए तथा परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। हालांकि विरोध कर रहे ग्रामीणों ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति को दबाने की कोशिश की जा रही है। उग्र आंदोलन की चेतावनी क्षेत्र के युवाओं और ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस विवादित जनसुनवाई के आधार पर परियोजना को मंजूरी दी गई तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि वे अपने गांवों के अस्तित्व और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। बड़ा सवाल: पर्यावरण पहले या औद्योगिक विस्तार? चित्तौड़गढ़ में उठे इस विवाद ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या औद्योगिक विकास के नाम पर पर्यावरणीय नियमों और स्थानीय समुदायों की चिंताओं को नजरअंदाज किया जा सकता है? अब निगाहें प्रशासन, पर्यावरण मंत्रालय और न्यायिक संस्थाओं पर हैं कि वे जनसुनवाई में उठे सवालों और आरोपों की जांच कर क्या निर्णय लेते हैं।
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    चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चंदेरिया क्षेत्र में प्रस्तावित हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के फर्टिलाइज़र प्लांट को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। 10 मार्च 2026 को आजोलिया का खेड़ा स्थित सगरा माता मंदिर प्रांगण में आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई के दौरान हजारों ग्रामीणों ने एकजुट होकर परियोजना का तीखा विरोध किया। प्रभावित गांवों से पहुंचे लोगों ने एक स्वर में कहा कि उन्हें ऐसा विकास स्वीकार नहीं जो उनके स्वास्थ्य, जल स्रोतों और कृषि भूमि के लिए खतरा बने।
ग्रामीणों का आरोप है कि पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त होने से पहले ही संयंत्र का बड़ा हिस्सा तैयार कर दिया गया है, ऐसे में जनसुनवाई की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कई ग्रामीणों ने इसे “जनसुनवाई नहीं, केवल औपचारिकता” बताया। उनका कहना है कि जब केंद्र स्तर पर पर्यावरण मंजूरी बार-बार अटकी हुई है, तब इस तरह की जनसुनवाई आयोजित करना केवल औपचारिकता निभाने और नियमों को दरकिनार करने की कोशिश प्रतीत होता है।
भारी सुरक्षा के बीच हुई जनसुनवाई
जनसुनवाई के दौरान प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक, निरीक्षक स्तर के अधिकारी, सैकड़ों पुलिसकर्मी, रैपिड एक्शन टास्क फोर्स के जवान तथा निजी सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए थे। इसके बावजूद आजोलिया का खेड़ा, पुठोली, बिलिया, नगरी, धोरडिया, मूंगा का खेड़ा, सुवानिया और आसपास के आठ-दस गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण जनसुनवाई स्थल पर पहुंचे और परियोजना के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह जनसुनवाई वास्तविक जनमत जानने की प्रक्रिया नहीं बल्कि पहले से तय परियोजना को औपचारिक मंजूरी दिलाने का प्रयास है।
आरोप: बिना मंजूरी 70 प्रतिशत निर्माण
जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने दावा किया कि प्रस्तावित फर्टिलाइज़र संयंत्र का लगभग 70 प्रतिशत निर्माण पहले ही किया जा चुका है, जबकि परियोजना को अभी तक पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि निर्माण पहले ही हो चुका है तो जनसुनवाई का उद्देश्य क्या रह जाता है। उनके अनुसार यह पूरी प्रक्रिया “सुनवाई” से अधिक “औपचारिकता” बनकर रह गई है।
पर्यावरण कानूनों का संभावित उल्लंघन?
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट के लिए पहले पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट तैयार होती है, इसके बाद सार्वजनिक जनसुनवाई, विशेषज्ञ समिति की समीक्षा और अंत में पर्यावरणीय मंजूरी दी जाती है।
भारत में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रमुख कानूनों में Environment Protection Act 1986 और EIA Notification 2006 शामिल हैं। इन नियमों के अनुसार किसी भी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद ही शुरू किया जा सकता है। यदि इससे पहले निर्माण किया जाता है तो यह गंभीर नियम उल्लंघन माना जा सकता है।
ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए देश में National Green Tribunal (NGT) की स्थापना की गई है, जो पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर परियोजनाओं को रोकने या मुआवजा लगाने जैसे आदेश दे सकता है।
39 लोगों ने रखी अपनी बात, अधिकांश ने किया विरोध
जनसुनवाई के दौरान कुल 39 लोगों ने अपनी बात रखी, जिनमें से 33 लोगों ने प्रस्तावित संयंत्र का विरोध किया, जबकि 6 लोगों ने परियोजना के समर्थन में अपनी राय व्यक्त की। विरोध करने वाले ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में पहले से संचालित औद्योगिक इकाइयों के कारण वायु और जल प्रदूषण की समस्या गंभीर हो चुकी है और नया संयंत्र लगने से स्थिति और खराब हो सकती है।
प्रदूषण के आरोप: पशुओं की मौत और बढ़ती बीमारियां
जनसुनवाई में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चंदेरिया क्षेत्र में पहले से संचालित औद्योगिक इकाइयों के कारण वायु और जल प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में जहरीली गैसों और रासायनिक प्रभाव के कारण हजारों गाय-भैंसों की मौत हो चुकी है।
कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में कैंसर, लकवा, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। कुछ किसानों ने दावा किया कि प्रदूषण के कारण उनकी जमीन की उर्वरता कम हो रही है और कई कुओं तथा तालाबों का पानी पीने योग्य नहीं रहा।
ग्रामीणों की चुनौती: “अधिकारी हमारे गांव का पानी पीकर दिखाएं”
जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन और कंपनी अधिकारियों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि क्षेत्र का पानी सुरक्षित है तो अधिकारी गांव के कुओं और तालाबों से लाया गया पानी पीकर दिखाएं। ग्रामीणों के अनुसार इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए कोई भी अधिकारी आगे नहीं आया।
ग्राम सभाओं ने दर्ज कराया विरोध प्रस्ताव
आजोलिया का खेड़ा और पुठोली ग्राम पंचायतों द्वारा आयोजित विशेष ग्राम सभाओं में पारित विरोध प्रस्ताव को भी जनसुनवाई के रिकॉर्ड में शामिल किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इन प्रस्तावों से स्पष्ट है कि प्रभावित गांवों की सामूहिक राय इस परियोजना के खिलाफ है।
‘प्रायोजित समर्थन’ के आरोप
जनसुनवाई के दौरान कुछ ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन पर यह आरोप भी लगाया कि विरोध को कम दिखाने के लिए कुछ लोगों को पैसे देकर समर्थन में बोलने के लिए खड़ा किया गया। इस आरोप को लेकर कार्यक्रम स्थल पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी बन गई।
“हमें विकास नहीं, सुरक्षित जीवन चाहिए”
कंपनी की ओर से बताया गया कि लगभग 2700 करोड़ रुपये के निवेश से बनने वाले इस संयंत्र से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है और किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
हालांकि ग्रामीणों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा विकास स्वीकार नहीं जो उनके स्वास्थ्य, पशुधन और कृषि भूमि के लिए खतरा बन जाए। ग्रामीणों का कहना था कि यदि नया संयंत्र स्थापित होता है तो क्षेत्र में प्रदूषण और बढ़ने का खतरा है। कई ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें रोजगार या विकास के नाम पर ऐसा उद्योग स्वीकार नहीं जो उनके जीवन, जल, जंगल और जमीन के लिए खतरा बने। उनका कहना था—“हमें विकास नहीं, शुद्ध हवा और पानी चाहिए।”
पहले भी विवाद में रहा प्रोजेक्ट
यह परियोजना पहले भी विवादों में रह चुकी है। पूर्व में राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रस्तावित दौरे और भूमिपूजन कार्यक्रम को भी विवाद के बाद रद्द करना पड़ा था। ग्रामीणों का आरोप है कि उस समय भी परियोजना से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी।
“सुनवाई का अधिकार” और प्राकृतिक न्याय
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरणीय परियोजनाओं में जनसुनवाई केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह नागरिकों के “सुनवाई के अधिकार” से जुड़ी होती है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के आधार पर प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत लागू होता है, जिसमें दोनों पक्षों को सुनने का सिद्धांत शामिल है। इसका उद्देश्य किसी भी न्यायिक या प्रशासनिक निर्णय में निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
यदि किसी परियोजना में जनसुनवाई से पहले ही निर्माण हो चुका हो तो पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
कंपनी का पक्ष
कंपनी की ओर से जारी प्रेस नोट में दावा किया गया कि जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने रोजगार, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास से जुड़े सुझाव दिए तथा परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। हालांकि विरोध कर रहे ग्रामीणों ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति को दबाने की कोशिश की जा रही है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
क्षेत्र के युवाओं और ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस विवादित जनसुनवाई के आधार पर परियोजना को मंजूरी दी गई तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि वे अपने गांवों के अस्तित्व और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
बड़ा सवाल: पर्यावरण पहले या औद्योगिक विस्तार?
चित्तौड़गढ़ में उठे इस विवाद ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या औद्योगिक विकास के नाम पर पर्यावरणीय नियमों और स्थानीय समुदायों की चिंताओं को नजरअंदाज किया जा सकता है?
अब निगाहें प्रशासन, पर्यावरण मंत्रालय और न्यायिक संस्थाओं पर हैं कि वे जनसुनवाई में उठे सवालों और आरोपों की जांच कर क्या निर्णय लेते हैं।
    user_Alert Nation News
    Alert Nation News
    चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • Post by Lucky sukhwal
    1
    Post by Lucky sukhwal
    user_Lucky sukhwal
    Lucky sukhwal
    Priest चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    14 hrs ago
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