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दिनाँक 02 मार्च 2026 फाल्गुन मास शुक्लपक्ष चतुर्दशी को खोली गई श्री सांवलिया सेठ की भण्डार दानपेटी के आज सातवें चरण की गणना से 08 लाख 05 हजार 642 रूपये की दानराशि प्राप्त हुई... आज दिनांक तक 07 चरणों में की गई गणना से... भंडार दानपेटी से प्राप्त कुल दानराशि - 36 करोड़ 57 लाख 87 हजार 642 रुपये भंडार दानपेटी/भेंटकक्ष कार्यालय से प्राप्त स्वर्ण (सोना) -02 किलोग्राम 967 ग्राम 480 मिलीग्राम भंडार दानपेटी/भेंटकक्ष कार्यालय से प्राप्त रजत (चांदी) -152 किलोग्राम 609 ग्राम मनीऑर्डर/ऑनलाइन /भेंट से प्राप्त 10 करोड़ 45 हजार 282 रुपये भंडार गणना का आज हुआ समापन... कुल दानराशि 46 करोड़ 58 लाख 32 हजार 924 रुपये

15 hrs ago
user_Lucky sukhwal
Lucky sukhwal
Priest चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
15 hrs ago

दिनाँक 02 मार्च 2026 फाल्गुन मास शुक्लपक्ष चतुर्दशी को खोली गई श्री सांवलिया सेठ की भण्डार दानपेटी के आज सातवें चरण की गणना से 08 लाख 05 हजार 642 रूपये की दानराशि प्राप्त हुई... आज दिनांक तक 07 चरणों में की गई गणना से... भंडार दानपेटी से प्राप्त कुल दानराशि - 36 करोड़ 57 लाख 87 हजार 642 रुपये भंडार दानपेटी/भेंटकक्ष कार्यालय से प्राप्त स्वर्ण (सोना) -02 किलोग्राम 967 ग्राम 480 मिलीग्राम भंडार दानपेटी/भेंटकक्ष कार्यालय से प्राप्त रजत (चांदी) -152 किलोग्राम 609 ग्राम मनीऑर्डर/ऑनलाइन /भेंट से प्राप्त 10 करोड़ 45 हजार 282 रुपये भंडार गणना का आज हुआ समापन... कुल दानराशि 46 करोड़ 58 लाख 32 हजार 924 रुपये

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  • बेगूँ। बेगूँ नगर सहित क्षेत्रभर के ग्रामीण क्षेत्रों में शीतला सप्तमी का पर्व बुधवार को बड़ी आस्था, उमंग और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर युवाओं, महिलाओं ओर युवतियों ओर बच्चों में रंगो का त्योहार मनाने को लेकर खासा उत्साह देखा गया। इस अवसर पर बुधवार को दोपहर एक बजे से पुराने बसस्टैंड से होली का जुलूस जिसे गैर का जूलूस भी कहा जाता हे प्रारंभहुआ जो लालबाई फूलबाई चोक, सदर बाजार, केसरिया चोक, लक्ष्मीनाथ मंदिर, तम्बोली चोक, छीपा मंदिर, मोमिन मोहल्ला, आखरियों का चौक, ब्रह्मपुरी होता हुआ लालबाई फूलवाई पहुँचा जहाँ इसका समापन हुआ। इस अवसर पर रास्ते भर में गुलाल व फूलों सज भरी हुयी मटकियाँ भी बांधी गयी जिनको युवाओं की टोलियो वे पिरामिड बनाकर ऊपर चढ़कर मटकी फोडने का कार्यक्रम किया। बैग नगर से होली का आयोजित हुआ। इस अवसर पर शानति व्यवस्था हेतु अतिरिक्त पुलिस जाफ्ता भी तैनात रहा। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रावतभाटा भगवतसिंह हिंगड, बेगू उपखंड अधिकारी अंकित सामरिया, बेगूँ पुलिस उपधीक्षक सुश्री अंजलीसिंह, बेगूं तहसीलदार गोपाल जीनगर, नायब तहसीलदार विष्णुलाल यादव, बेगें धानाधिकारी कमलचंद मीणा सहित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी शांति व्यवस्था के लिये जूलूस में उपस्थित रहे। विदित है कि बेगूँ क्षेत्र में रंगों का त्योहार होली पर्व धुलंडी पर नहीं मनाकर शीतलासप्तमी व रंगतेरस को मनाया जाता है। अब रंगतेरस का पर्व 17 मार्च बुधवार को मनाया जायेगा। शीतलामाता को लगाया भोगः मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार बीती रात से ही महिलाओं ने घरों में बासी पकवान (बसौड़ा) तैयार किए और सुबह शीतला माता के मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना की। परिवार की सुख समृद्धि के के लिये महिलाओं ने शीतला माता को ठंडे बासी व्यंजनों का भोग लगाया। मान्यता है कि यह व्रत आरोग्य प्रदान करता है और चेचक, खसरा जैसी संक्रामक बीमारियों से रक्षा करता है। परंपरा के अनुसार इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। परिवारों ने एक दिन पहले बने बासी भोजन (होलिया, मीठे चावल, पूड़ी, कढ़ी, पापड, पुआ पकौडी.) को ही प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।
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    बेगूँ। बेगूँ नगर सहित क्षेत्रभर के ग्रामीण क्षेत्रों में शीतला सप्तमी का पर्व बुधवार को बड़ी आस्था, उमंग और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस अवसर पर युवाओं, महिलाओं ओर युवतियों ओर बच्चों में रंगो का त्योहार मनाने को लेकर खासा उत्साह देखा गया। इस अवसर पर बुधवार को दोपहर एक बजे से पुराने बसस्टैंड से होली का जुलूस जिसे गैर का जूलूस भी कहा जाता हे प्रारंभहुआ जो लालबाई फूलबाई चोक, सदर बाजार, केसरिया चोक, लक्ष्मीनाथ मंदिर, तम्बोली चोक, छीपा मंदिर, मोमिन मोहल्ला, आखरियों का चौक, ब्रह्मपुरी होता हुआ लालबाई फूलवाई पहुँचा जहाँ इसका समापन हुआ। इस अवसर पर रास्ते भर में गुलाल व फूलों सज भरी हुयी मटकियाँ भी बांधी गयी जिनको युवाओं की टोलियो वे पिरामिड बनाकर ऊपर चढ़कर मटकी फोडने का कार्यक्रम किया। बैग नगर से होली का आयोजित हुआ। इस अवसर पर शानति व्यवस्था हेतु अतिरिक्त पुलिस जाफ्ता भी तैनात रहा। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रावतभाटा भगवतसिंह हिंगड, बेगू उपखंड अधिकारी अंकित सामरिया, बेगूँ पुलिस उपधीक्षक सुश्री अंजलीसिंह, बेगूं तहसीलदार गोपाल जीनगर, नायब तहसीलदार विष्णुलाल यादव, बेगें धानाधिकारी कमलचंद मीणा सहित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी शांति व्यवस्था के लिये जूलूस में उपस्थित रहे। विदित है कि बेगूँ क्षेत्र में रंगों का त्योहार होली पर्व धुलंडी पर नहीं मनाकर शीतलासप्तमी व रंगतेरस को मनाया जाता है। अब रंगतेरस का पर्व 17 मार्च बुधवार को मनाया जायेगा।
शीतलामाता को लगाया भोगः
मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार बीती रात से ही महिलाओं ने घरों में बासी पकवान (बसौड़ा) तैयार किए और सुबह शीतला माता के मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना की। परिवार की सुख समृद्धि के के लिये महिलाओं ने शीतला माता को ठंडे बासी व्यंजनों का भोग लगाया। मान्यता है कि यह व्रत आरोग्य प्रदान करता है और चेचक, खसरा जैसी संक्रामक बीमारियों से रक्षा करता है। परंपरा के अनुसार इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है। परिवारों ने एक दिन पहले बने बासी भोजन (होलिया, मीठे चावल, पूड़ी, कढ़ी, पापड, पुआ पकौडी.) को ही प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।
    user_The fact khabar
    The fact khabar
    बेगूं, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    18 hrs ago
  • Post by Hemraj Banjara
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    Post by Hemraj Banjara
    user_Hemraj Banjara
    Hemraj Banjara
    Security Guard बेगूं, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    22 hrs ago
  • Post by Roshah Goadri
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    Post by Roshah Goadri
    user_Roshah Goadri
    Roshah Goadri
    सहारा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • Post by न्यूज़ रिपोर्टर कमल मीणा
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    Post by न्यूज़ रिपोर्टर कमल मीणा
    user_न्यूज़ रिपोर्टर कमल मीणा
    न्यूज़ रिपोर्टर कमल मीणा
    Farmer छोटी सादड़ी, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • Post by Dev karan Mali
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    Post by Dev karan Mali
    user_Dev karan Mali
    Dev karan Mali
    Court reporter भीलवाड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    11 hrs ago
  • छोटी सादडी पक्षी किसान मित्र भी होते हैं और किसानों कभी-कभी किसानों से परेशान भी होते हैं जब खेत में पिलाई करते हैं तब सफेद बगुले रिटर्न को नअष्ट करते हैं और फसल हरी होती है खास करके अफीम की फसल तब तोते किसानों को इतना परेशान कर देते हैं की वह भगा भगाकर परेशान हो जाता है एक समय आता है उसके बाद में बोलता है की अभी इससे कब छूटकारा मिलेगा
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    छोटी सादडी पक्षी किसान मित्र भी होते हैं और किसानों कभी-कभी किसानों से परेशान भी होते हैं जब खेत में पिलाई करते हैं तब सफेद बगुले रिटर्न को नअष्ट करते हैं और फसल हरी होती है खास करके अफीम की फसल तब तोते किसानों को इतना परेशान कर देते हैं की वह भगा भगाकर परेशान हो जाता है एक समय आता है उसके बाद में बोलता है की अभी इससे कब छूटकारा मिलेगा
    user_Reporter ambalal suthar
    Reporter ambalal suthar
    Video Creator छोटी सादड़ी, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चंदेरिया क्षेत्र में प्रस्तावित हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के फर्टिलाइज़र प्लांट को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। 10 मार्च 2026 को आजोलिया का खेड़ा स्थित सगरा माता मंदिर प्रांगण में आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई के दौरान हजारों ग्रामीणों ने एकजुट होकर परियोजना का तीखा विरोध किया। प्रभावित गांवों से पहुंचे लोगों ने एक स्वर में कहा कि उन्हें ऐसा विकास स्वीकार नहीं जो उनके स्वास्थ्य, जल स्रोतों और कृषि भूमि के लिए खतरा बने। ग्रामीणों का आरोप है कि पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त होने से पहले ही संयंत्र का बड़ा हिस्सा तैयार कर दिया गया है, ऐसे में जनसुनवाई की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कई ग्रामीणों ने इसे “जनसुनवाई नहीं, केवल औपचारिकता” बताया। उनका कहना है कि जब केंद्र स्तर पर पर्यावरण मंजूरी बार-बार अटकी हुई है, तब इस तरह की जनसुनवाई आयोजित करना केवल औपचारिकता निभाने और नियमों को दरकिनार करने की कोशिश प्रतीत होता है। भारी सुरक्षा के बीच हुई जनसुनवाई जनसुनवाई के दौरान प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक, निरीक्षक स्तर के अधिकारी, सैकड़ों पुलिसकर्मी, रैपिड एक्शन टास्क फोर्स के जवान तथा निजी सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए थे। इसके बावजूद आजोलिया का खेड़ा, पुठोली, बिलिया, नगरी, धोरडिया, मूंगा का खेड़ा, सुवानिया और आसपास के आठ-दस गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण जनसुनवाई स्थल पर पहुंचे और परियोजना के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह जनसुनवाई वास्तविक जनमत जानने की प्रक्रिया नहीं बल्कि पहले से तय परियोजना को औपचारिक मंजूरी दिलाने का प्रयास है। आरोप: बिना मंजूरी 70 प्रतिशत निर्माण जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने दावा किया कि प्रस्तावित फर्टिलाइज़र संयंत्र का लगभग 70 प्रतिशत निर्माण पहले ही किया जा चुका है, जबकि परियोजना को अभी तक पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि निर्माण पहले ही हो चुका है तो जनसुनवाई का उद्देश्य क्या रह जाता है। उनके अनुसार यह पूरी प्रक्रिया “सुनवाई” से अधिक “औपचारिकता” बनकर रह गई है। पर्यावरण कानूनों का संभावित उल्लंघन? पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट के लिए पहले पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट तैयार होती है, इसके बाद सार्वजनिक जनसुनवाई, विशेषज्ञ समिति की समीक्षा और अंत में पर्यावरणीय मंजूरी दी जाती है। भारत में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रमुख कानूनों में Environment Protection Act 1986 और EIA Notification 2006 शामिल हैं। इन नियमों के अनुसार किसी भी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद ही शुरू किया जा सकता है। यदि इससे पहले निर्माण किया जाता है तो यह गंभीर नियम उल्लंघन माना जा सकता है। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए देश में National Green Tribunal (NGT) की स्थापना की गई है, जो पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर परियोजनाओं को रोकने या मुआवजा लगाने जैसे आदेश दे सकता है। 39 लोगों ने रखी अपनी बात, अधिकांश ने किया विरोध जनसुनवाई के दौरान कुल 39 लोगों ने अपनी बात रखी, जिनमें से 33 लोगों ने प्रस्तावित संयंत्र का विरोध किया, जबकि 6 लोगों ने परियोजना के समर्थन में अपनी राय व्यक्त की। विरोध करने वाले ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में पहले से संचालित औद्योगिक इकाइयों के कारण वायु और जल प्रदूषण की समस्या गंभीर हो चुकी है और नया संयंत्र लगने से स्थिति और खराब हो सकती है। प्रदूषण के आरोप: पशुओं की मौत और बढ़ती बीमारियां जनसुनवाई में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चंदेरिया क्षेत्र में पहले से संचालित औद्योगिक इकाइयों के कारण वायु और जल प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में जहरीली गैसों और रासायनिक प्रभाव के कारण हजारों गाय-भैंसों की मौत हो चुकी है। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में कैंसर, लकवा, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। कुछ किसानों ने दावा किया कि प्रदूषण के कारण उनकी जमीन की उर्वरता कम हो रही है और कई कुओं तथा तालाबों का पानी पीने योग्य नहीं रहा। ग्रामीणों की चुनौती: “अधिकारी हमारे गांव का पानी पीकर दिखाएं” जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन और कंपनी अधिकारियों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि क्षेत्र का पानी सुरक्षित है तो अधिकारी गांव के कुओं और तालाबों से लाया गया पानी पीकर दिखाएं। ग्रामीणों के अनुसार इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए कोई भी अधिकारी आगे नहीं आया। ग्राम सभाओं ने दर्ज कराया विरोध प्रस्ताव आजोलिया का खेड़ा और पुठोली ग्राम पंचायतों द्वारा आयोजित विशेष ग्राम सभाओं में पारित विरोध प्रस्ताव को भी जनसुनवाई के रिकॉर्ड में शामिल किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इन प्रस्तावों से स्पष्ट है कि प्रभावित गांवों की सामूहिक राय इस परियोजना के खिलाफ है। ‘प्रायोजित समर्थन’ के आरोप जनसुनवाई के दौरान कुछ ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन पर यह आरोप भी लगाया कि विरोध को कम दिखाने के लिए कुछ लोगों को पैसे देकर समर्थन में बोलने के लिए खड़ा किया गया। इस आरोप को लेकर कार्यक्रम स्थल पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी बन गई। “हमें विकास नहीं, सुरक्षित जीवन चाहिए” कंपनी की ओर से बताया गया कि लगभग 2700 करोड़ रुपये के निवेश से बनने वाले इस संयंत्र से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है और किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। हालांकि ग्रामीणों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा विकास स्वीकार नहीं जो उनके स्वास्थ्य, पशुधन और कृषि भूमि के लिए खतरा बन जाए। ग्रामीणों का कहना था कि यदि नया संयंत्र स्थापित होता है तो क्षेत्र में प्रदूषण और बढ़ने का खतरा है। कई ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें रोजगार या विकास के नाम पर ऐसा उद्योग स्वीकार नहीं जो उनके जीवन, जल, जंगल और जमीन के लिए खतरा बने। उनका कहना था—“हमें विकास नहीं, शुद्ध हवा और पानी चाहिए।” पहले भी विवाद में रहा प्रोजेक्ट यह परियोजना पहले भी विवादों में रह चुकी है। पूर्व में राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रस्तावित दौरे और भूमिपूजन कार्यक्रम को भी विवाद के बाद रद्द करना पड़ा था। ग्रामीणों का आरोप है कि उस समय भी परियोजना से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी। “सुनवाई का अधिकार” और प्राकृतिक न्याय कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरणीय परियोजनाओं में जनसुनवाई केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह नागरिकों के “सुनवाई के अधिकार” से जुड़ी होती है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के आधार पर प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत लागू होता है, जिसमें दोनों पक्षों को सुनने का सिद्धांत शामिल है। इसका उद्देश्य किसी भी न्यायिक या प्रशासनिक निर्णय में निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। यदि किसी परियोजना में जनसुनवाई से पहले ही निर्माण हो चुका हो तो पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। कंपनी का पक्ष कंपनी की ओर से जारी प्रेस नोट में दावा किया गया कि जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने रोजगार, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास से जुड़े सुझाव दिए तथा परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। हालांकि विरोध कर रहे ग्रामीणों ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति को दबाने की कोशिश की जा रही है। उग्र आंदोलन की चेतावनी क्षेत्र के युवाओं और ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस विवादित जनसुनवाई के आधार पर परियोजना को मंजूरी दी गई तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि वे अपने गांवों के अस्तित्व और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। बड़ा सवाल: पर्यावरण पहले या औद्योगिक विस्तार? चित्तौड़गढ़ में उठे इस विवाद ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या औद्योगिक विकास के नाम पर पर्यावरणीय नियमों और स्थानीय समुदायों की चिंताओं को नजरअंदाज किया जा सकता है? अब निगाहें प्रशासन, पर्यावरण मंत्रालय और न्यायिक संस्थाओं पर हैं कि वे जनसुनवाई में उठे सवालों और आरोपों की जांच कर क्या निर्णय लेते हैं।
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    चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चंदेरिया क्षेत्र में प्रस्तावित हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के फर्टिलाइज़र प्लांट को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। 10 मार्च 2026 को आजोलिया का खेड़ा स्थित सगरा माता मंदिर प्रांगण में आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई के दौरान हजारों ग्रामीणों ने एकजुट होकर परियोजना का तीखा विरोध किया। प्रभावित गांवों से पहुंचे लोगों ने एक स्वर में कहा कि उन्हें ऐसा विकास स्वीकार नहीं जो उनके स्वास्थ्य, जल स्रोतों और कृषि भूमि के लिए खतरा बने।
ग्रामीणों का आरोप है कि पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त होने से पहले ही संयंत्र का बड़ा हिस्सा तैयार कर दिया गया है, ऐसे में जनसुनवाई की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कई ग्रामीणों ने इसे “जनसुनवाई नहीं, केवल औपचारिकता” बताया। उनका कहना है कि जब केंद्र स्तर पर पर्यावरण मंजूरी बार-बार अटकी हुई है, तब इस तरह की जनसुनवाई आयोजित करना केवल औपचारिकता निभाने और नियमों को दरकिनार करने की कोशिश प्रतीत होता है।
भारी सुरक्षा के बीच हुई जनसुनवाई
जनसुनवाई के दौरान प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक, निरीक्षक स्तर के अधिकारी, सैकड़ों पुलिसकर्मी, रैपिड एक्शन टास्क फोर्स के जवान तथा निजी सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए थे। इसके बावजूद आजोलिया का खेड़ा, पुठोली, बिलिया, नगरी, धोरडिया, मूंगा का खेड़ा, सुवानिया और आसपास के आठ-दस गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण जनसुनवाई स्थल पर पहुंचे और परियोजना के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह जनसुनवाई वास्तविक जनमत जानने की प्रक्रिया नहीं बल्कि पहले से तय परियोजना को औपचारिक मंजूरी दिलाने का प्रयास है।
आरोप: बिना मंजूरी 70 प्रतिशत निर्माण
जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने दावा किया कि प्रस्तावित फर्टिलाइज़र संयंत्र का लगभग 70 प्रतिशत निर्माण पहले ही किया जा चुका है, जबकि परियोजना को अभी तक पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि निर्माण पहले ही हो चुका है तो जनसुनवाई का उद्देश्य क्या रह जाता है। उनके अनुसार यह पूरी प्रक्रिया “सुनवाई” से अधिक “औपचारिकता” बनकर रह गई है।
पर्यावरण कानूनों का संभावित उल्लंघन?
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट के लिए पहले पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट तैयार होती है, इसके बाद सार्वजनिक जनसुनवाई, विशेषज्ञ समिति की समीक्षा और अंत में पर्यावरणीय मंजूरी दी जाती है।
भारत में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रमुख कानूनों में Environment Protection Act 1986 और EIA Notification 2006 शामिल हैं। इन नियमों के अनुसार किसी भी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद ही शुरू किया जा सकता है। यदि इससे पहले निर्माण किया जाता है तो यह गंभीर नियम उल्लंघन माना जा सकता है।
ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए देश में National Green Tribunal (NGT) की स्थापना की गई है, जो पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर परियोजनाओं को रोकने या मुआवजा लगाने जैसे आदेश दे सकता है।
39 लोगों ने रखी अपनी बात, अधिकांश ने किया विरोध
जनसुनवाई के दौरान कुल 39 लोगों ने अपनी बात रखी, जिनमें से 33 लोगों ने प्रस्तावित संयंत्र का विरोध किया, जबकि 6 लोगों ने परियोजना के समर्थन में अपनी राय व्यक्त की। विरोध करने वाले ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में पहले से संचालित औद्योगिक इकाइयों के कारण वायु और जल प्रदूषण की समस्या गंभीर हो चुकी है और नया संयंत्र लगने से स्थिति और खराब हो सकती है।
प्रदूषण के आरोप: पशुओं की मौत और बढ़ती बीमारियां
जनसुनवाई में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चंदेरिया क्षेत्र में पहले से संचालित औद्योगिक इकाइयों के कारण वायु और जल प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में जहरीली गैसों और रासायनिक प्रभाव के कारण हजारों गाय-भैंसों की मौत हो चुकी है।
कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में कैंसर, लकवा, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। कुछ किसानों ने दावा किया कि प्रदूषण के कारण उनकी जमीन की उर्वरता कम हो रही है और कई कुओं तथा तालाबों का पानी पीने योग्य नहीं रहा।
ग्रामीणों की चुनौती: “अधिकारी हमारे गांव का पानी पीकर दिखाएं”
जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन और कंपनी अधिकारियों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि क्षेत्र का पानी सुरक्षित है तो अधिकारी गांव के कुओं और तालाबों से लाया गया पानी पीकर दिखाएं। ग्रामीणों के अनुसार इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए कोई भी अधिकारी आगे नहीं आया।
ग्राम सभाओं ने दर्ज कराया विरोध प्रस्ताव
आजोलिया का खेड़ा और पुठोली ग्राम पंचायतों द्वारा आयोजित विशेष ग्राम सभाओं में पारित विरोध प्रस्ताव को भी जनसुनवाई के रिकॉर्ड में शामिल किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इन प्रस्तावों से स्पष्ट है कि प्रभावित गांवों की सामूहिक राय इस परियोजना के खिलाफ है।
‘प्रायोजित समर्थन’ के आरोप
जनसुनवाई के दौरान कुछ ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन पर यह आरोप भी लगाया कि विरोध को कम दिखाने के लिए कुछ लोगों को पैसे देकर समर्थन में बोलने के लिए खड़ा किया गया। इस आरोप को लेकर कार्यक्रम स्थल पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी बन गई।
“हमें विकास नहीं, सुरक्षित जीवन चाहिए”
कंपनी की ओर से बताया गया कि लगभग 2700 करोड़ रुपये के निवेश से बनने वाले इस संयंत्र से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है और किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
हालांकि ग्रामीणों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा विकास स्वीकार नहीं जो उनके स्वास्थ्य, पशुधन और कृषि भूमि के लिए खतरा बन जाए। ग्रामीणों का कहना था कि यदि नया संयंत्र स्थापित होता है तो क्षेत्र में प्रदूषण और बढ़ने का खतरा है। कई ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें रोजगार या विकास के नाम पर ऐसा उद्योग स्वीकार नहीं जो उनके जीवन, जल, जंगल और जमीन के लिए खतरा बने। उनका कहना था—“हमें विकास नहीं, शुद्ध हवा और पानी चाहिए।”
पहले भी विवाद में रहा प्रोजेक्ट
यह परियोजना पहले भी विवादों में रह चुकी है। पूर्व में राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रस्तावित दौरे और भूमिपूजन कार्यक्रम को भी विवाद के बाद रद्द करना पड़ा था। ग्रामीणों का आरोप है कि उस समय भी परियोजना से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी।
“सुनवाई का अधिकार” और प्राकृतिक न्याय
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरणीय परियोजनाओं में जनसुनवाई केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह नागरिकों के “सुनवाई के अधिकार” से जुड़ी होती है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के आधार पर प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत लागू होता है, जिसमें दोनों पक्षों को सुनने का सिद्धांत शामिल है। इसका उद्देश्य किसी भी न्यायिक या प्रशासनिक निर्णय में निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
यदि किसी परियोजना में जनसुनवाई से पहले ही निर्माण हो चुका हो तो पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
कंपनी का पक्ष
कंपनी की ओर से जारी प्रेस नोट में दावा किया गया कि जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने रोजगार, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास से जुड़े सुझाव दिए तथा परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। हालांकि विरोध कर रहे ग्रामीणों ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति को दबाने की कोशिश की जा रही है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
क्षेत्र के युवाओं और ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस विवादित जनसुनवाई के आधार पर परियोजना को मंजूरी दी गई तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि वे अपने गांवों के अस्तित्व और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
बड़ा सवाल: पर्यावरण पहले या औद्योगिक विस्तार?
चित्तौड़गढ़ में उठे इस विवाद ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या औद्योगिक विकास के नाम पर पर्यावरणीय नियमों और स्थानीय समुदायों की चिंताओं को नजरअंदाज किया जा सकता है?
अब निगाहें प्रशासन, पर्यावरण मंत्रालय और न्यायिक संस्थाओं पर हैं कि वे जनसुनवाई में उठे सवालों और आरोपों की जांच कर क्या निर्णय लेते हैं।
    user_Alert Nation News
    Alert Nation News
    चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • पिछली भीषण बरसात के दौरान आज़ाद नगर पन्नाधाय सर्किल क्षेत्र में जलभराव की गंभीर समस्या सामने आई थी। उस समय अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया गया और लोगों की परेशानी को करीब से समझा गया। जनता की इस समस्या को देखते हुए तुरंत बड़े नाले के निर्माण के निर्देश दिए गए। विधायक अनुशंसा से UIT द्वारा अब यह नाला बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका है। अब इस क्षेत्र के निवासियों को बरसात के समय होने वाले जलभराव से राहत मिलेगी और समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा। 📍 स्थान: आज़ाद नगर, पन्नाधाय सर्किल क्षेत्र
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    पिछली भीषण बरसात के दौरान आज़ाद नगर पन्नाधाय सर्किल क्षेत्र में जलभराव की गंभीर समस्या सामने आई थी। उस समय अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया गया और लोगों की परेशानी को करीब से समझा गया।
जनता की इस समस्या को देखते हुए तुरंत बड़े नाले के निर्माण के निर्देश दिए गए। विधायक अनुशंसा से UIT द्वारा अब यह नाला बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका है।
अब इस क्षेत्र के निवासियों को बरसात के समय होने वाले जलभराव से राहत मिलेगी और समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा।
📍 स्थान: आज़ाद नगर, पन्नाधाय सर्किल क्षेत्र
    user_Dev karan Mali
    Dev karan Mali
    Court reporter भीलवाड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    11 hrs ago
  • Post by Narendra kumar Regar
    1
    Post by Narendra kumar Regar
    user_Narendra kumar Regar
    Narendra kumar Regar
    Physiotherapist भीलवाड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    19 hrs ago
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