जालौन जिले के कालपी में डिस्ट्रिक्ट प्रेस क्लब कालपी के तत्वावधान में शनिवार को राजा पैलेस कालपी में हिंदी पत्रकारिता दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पधारे पूर्व पुलिस महानिदेशक डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने वर्तमान पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गलत लोगों और माफियाओं का गठजोड़ निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए एक बड़ा खतरा है, और पत्रकारिता के व्यवसायीकरण से कलम की धार कुंद हो रही है, जिसमें सुधार की अत्यंत आवश्यकता है। डॉ. शुक्ला ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए सभी पत्रकारों से अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वाह करने में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ डॉ. शुक्ला द्वारा सरस्वती प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण से किया गया। कालपी महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्या डॉ. सुधा गुप्ता ने अपने संबोधन में हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए बताया कि स्वतंत्रता संग्राम (1857-1947) में पत्रकारिता ने आज़ादी की लड़ाई के सबसे बड़े हथियार के रूप में काम किया था। उन्होंने राजा राममोहन राय के 'मिरात-उल-अखबार', भारतेन्दु हरिश्चंद्र के 'कविवचन सुधा', बाल गंगाधर तिलक के 'केसरी' और महात्मा गांधी के 'यंग इंडिया' व 'नवजीवन' जैसे चेतना जगाने वाले पत्रों का उल्लेख किया, जिन्होंने जनता को अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपजिलाधिकारी अमित शेखर ने राष्ट्रभाषा हिंदी के सर्वत्र प्रयोग पर जोर दिया, जिससे सद्भावना कायम होती है। उन्होंने क्रांतिकारियों की आवाज बने गणेश शंकर विद्यार्थी के 'प्रताप' और माखनलाल चतुर्वेदी के 'कर्मवीर प्रभा' जैसे पत्रों के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम में पत्रकारिता के योगदान पर प्रकाश डाला, और बताया कि विद्यार्थी जी 1921 के रायबरेली किसान आंदोलन की रिपोर्टिंग कर जेल भी गए थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक नरेंद्र पाल सिंह जादौन ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक पत्रकारिता के योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता। उन्होंने 'उदन्त मार्तण्ड' से शुरू होकर 'हिंदुस्तान', 'आज', 'भारत मित्र' और 'दैनिक जागरण' तक के पत्रकारिता के सफर का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों ने प्रेस एक्ट 1910 और वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट 1878 जैसे कानूनों से आवाज़ दबाने की कोशिश की, पर कलम नहीं रुकी, कई संपादक जेल गए और प्रेस ज़ब्त हुए, फिर भी अखबार निकलते रहे। श्री जादौन ने 1975-77 के आपातकाल को हिंदी पत्रकारिता के लिए सबसे कठिन दौर बताया, जब देश में सेंसरशिप लागू कर दी गई थी और खबरें सरकारी अफसरों से पास करानी पड़ती थीं। उन्होंने 'इंडियन एक्सप्रेस' के रामनाथ गोयनका द्वारा खाली संपादकीय छापकर विरोध करने, तथा 'जनसत्ता' के प्रभाष जोशी, 'दिनमान' के रघुवीर सहाय और 'रविवार' के एस.पी. सिंह द्वारा जोखिम लेकर सच लिखने का उदाहरण दिया। उन्होंने भूमिगत पत्रों के प्रचलन, कुलदीप नैयर की किताब 'इमरजेंसी रीटोल्ड' और एल.के. आडवाणी के कथन 'आपने झुकने को कहा तो ये रेंगने लगे' का भी जिक्र किया। पूर्व विधायक ने जोर दिया कि हिंदी पत्रकारिता दिवस सिर्फ 'उदन्त मार्तण्ड' को याद करने का नहीं, बल्कि उन लाखों 'शब्द-सिपाहियों' को नमन करने का दिन है जिन्होंने आज़ादी और लोकतंत्र बचाने के लिए कलम को तलवार बनाया। उन्होंने अंत में कहा कि आज डिजिटल युग में चुनौतियाँ नई हैं, पर जिम्मेदारी वही पुरानी है – सच बोलना, डटे रहना; क्योंकि लोकतंत्र में अखबार सिर्फ खबर नहीं छापते, जनता की आवाज़ बनते हैं। इस दौरान जय खत्री, रवीन्द्र नाथ गुप्ता, शरद खन्ना, देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, कल्लू सिंह यादव, भारत सिंह यादव और पूर्व चेयरमैन कमर अहमद सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी हिंदी पत्रकारिता दिवस पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन हरमोहन सिंह यादव द्वारा किया गया। इस आयोजन में वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश गुप्ता, रामकुमार तिवारी, सत्यप्रकाश विश्नोई, महेन्द्र कुमार गौतम, राजीव पुरवार, अशोक पुरवार, सभासद राकेश यादव, राजयोगिनी रजनी पाल, ब्राह्मण समाज के नगर अध्यक्ष सज्जन त्रिपाठी, राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हर्षेन्द्र प्रताप सिंह, वरिष्ठ उपनिरीक्षक उदयप्रताप सिंह यादव, रविंद्र कोरी, राकेश यादव सहित वरिष्ठ पत्रकार, अधिवक्ता, व्यापारी, समाजसेवी एवं समाजसेवी संगठनों के प्रमुख उपस्थित थे। संगठन के संरक्षक शरद खन्ना, तहसील अध्यक्ष सलीम अंसारी, नगर अध्यक्ष राज नारायण शुक्ला, महामंत्री अमित यादव सहित कई पत्रकार एवं बुद्धिजीवियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की और अतिथियों को शाल ओढ़ाकर तथा माला पहनाकर सम्मानित किया।
जालौन जिले के कालपी में डिस्ट्रिक्ट प्रेस क्लब कालपी के तत्वावधान में शनिवार को राजा पैलेस कालपी में हिंदी पत्रकारिता दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर पधारे पूर्व पुलिस महानिदेशक डॉ. सूर्य कुमार शुक्ला ने वर्तमान पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि गलत लोगों और माफियाओं का गठजोड़ निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए एक बड़ा खतरा है, और पत्रकारिता के व्यवसायीकरण से कलम की धार कुंद हो रही है, जिसमें सुधार की अत्यंत आवश्यकता है। डॉ. शुक्ला ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए सभी पत्रकारों से अपने दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वाह करने में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ डॉ. शुक्ला द्वारा सरस्वती प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण से किया गया। कालपी महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्या डॉ. सुधा गुप्ता ने अपने संबोधन में हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए बताया कि स्वतंत्रता संग्राम (1857-1947) में पत्रकारिता ने आज़ादी की लड़ाई के सबसे बड़े हथियार के रूप में काम किया था।
उन्होंने राजा राममोहन राय के 'मिरात-उल-अखबार', भारतेन्दु हरिश्चंद्र के 'कविवचन सुधा', बाल गंगाधर तिलक के 'केसरी' और महात्मा गांधी के 'यंग इंडिया' व 'नवजीवन' जैसे चेतना जगाने वाले पत्रों का उल्लेख किया, जिन्होंने जनता को अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपजिलाधिकारी अमित शेखर ने राष्ट्रभाषा हिंदी के सर्वत्र प्रयोग पर जोर दिया, जिससे सद्भावना कायम होती है। उन्होंने क्रांतिकारियों की आवाज बने गणेश शंकर विद्यार्थी के 'प्रताप' और माखनलाल चतुर्वेदी के 'कर्मवीर प्रभा' जैसे पत्रों के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम में पत्रकारिता के योगदान पर प्रकाश डाला, और बताया कि विद्यार्थी जी 1921 के रायबरेली किसान आंदोलन की रिपोर्टिंग कर जेल भी गए थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक नरेंद्र पाल सिंह जादौन ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज तक पत्रकारिता के योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता। उन्होंने 'उदन्त मार्तण्ड' से शुरू होकर 'हिंदुस्तान', 'आज', 'भारत मित्र' और 'दैनिक जागरण' तक के पत्रकारिता के सफर का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों ने प्रेस
एक्ट 1910 और वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट 1878 जैसे कानूनों से आवाज़ दबाने की कोशिश की, पर कलम नहीं रुकी, कई संपादक जेल गए और प्रेस ज़ब्त हुए, फिर भी अखबार निकलते रहे। श्री जादौन ने 1975-77 के आपातकाल को हिंदी पत्रकारिता के लिए सबसे कठिन दौर बताया, जब देश में सेंसरशिप लागू कर दी गई थी और खबरें सरकारी अफसरों से पास करानी पड़ती थीं। उन्होंने 'इंडियन एक्सप्रेस' के रामनाथ गोयनका द्वारा खाली संपादकीय छापकर विरोध करने, तथा 'जनसत्ता' के प्रभाष जोशी, 'दिनमान' के रघुवीर सहाय और 'रविवार' के एस.पी. सिंह द्वारा जोखिम लेकर सच लिखने का उदाहरण दिया। उन्होंने भूमिगत पत्रों के प्रचलन, कुलदीप नैयर की किताब 'इमरजेंसी रीटोल्ड' और एल.के. आडवाणी के कथन 'आपने झुकने को कहा तो ये रेंगने लगे' का भी जिक्र किया। पूर्व विधायक ने जोर दिया कि हिंदी पत्रकारिता दिवस सिर्फ 'उदन्त मार्तण्ड' को याद करने का नहीं, बल्कि उन लाखों 'शब्द-सिपाहियों' को नमन करने का दिन है जिन्होंने आज़ादी और लोकतंत्र बचाने के लिए कलम को तलवार बनाया। उन्होंने अंत में कहा कि आज डिजिटल
युग में चुनौतियाँ नई हैं, पर जिम्मेदारी वही पुरानी है – सच बोलना, डटे रहना; क्योंकि लोकतंत्र में अखबार सिर्फ खबर नहीं छापते, जनता की आवाज़ बनते हैं। इस दौरान जय खत्री, रवीन्द्र नाथ गुप्ता, शरद खन्ना, देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, कल्लू सिंह यादव, भारत सिंह यादव और पूर्व चेयरमैन कमर अहमद सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी हिंदी पत्रकारिता दिवस पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन हरमोहन सिंह यादव द्वारा किया गया। इस आयोजन में वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश गुप्ता, रामकुमार तिवारी, सत्यप्रकाश विश्नोई, महेन्द्र कुमार गौतम, राजीव पुरवार, अशोक पुरवार, सभासद राकेश यादव, राजयोगिनी रजनी पाल, ब्राह्मण समाज के नगर अध्यक्ष सज्जन त्रिपाठी, राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हर्षेन्द्र प्रताप सिंह, वरिष्ठ उपनिरीक्षक उदयप्रताप सिंह यादव, रविंद्र कोरी, राकेश यादव सहित वरिष्ठ पत्रकार, अधिवक्ता, व्यापारी, समाजसेवी एवं समाजसेवी संगठनों के प्रमुख उपस्थित थे। संगठन के संरक्षक शरद खन्ना, तहसील अध्यक्ष सलीम अंसारी, नगर अध्यक्ष राज नारायण शुक्ला, महामंत्री अमित यादव सहित कई पत्रकार एवं बुद्धिजीवियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की और अतिथियों को शाल ओढ़ाकर तथा माला पहनाकर सम्मानित किया।
- उत्तर प्रदेश के कालपी तहसील के कुरहना आलमगीर गाँव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर के साथ छेड़छाड़ और अपमान का एक बेहद शर्मनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। गाँव के एक युवक ने मुख्यमंत्री की तस्वीर पर गोबर लगाकर एक बेहद गंदी और घिनौनी हरकत को अंजाम दिया है, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी तनाव और आक्रोश व्याप्त हो गया है। यह घटना 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर कालपी विधानसभा से भाजपा के संभावित दावेदार गौरव पटेल उर्फ राम जी भैया की एक होर्डिंग से संबंधित है। कुरहना आलमगीर क्षेत्र में लगी इस होर्डिंग पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी गरिमापूर्ण तस्वीर मौजूद थी। आरोप है कि गाँव के ही एक सिरफिरे युवक ने जानबूझकर माहौल बिगाड़ने और मुख्यमंत्री का अपमान करने की नीयत से यह कार्य किया। इस शर्मनाक हरकत की तस्वीर सोशल मीडिया पर आते ही क्षेत्र का राजनीतिक और सामाजिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पोस्टर पर गोबर लगाने की इस घिनौनी हरकत को लेकर कालपी तहसील और आसपास के इलाकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।1
- उरई शहर में तैनात होमगार्ड जवान राजीव कुमार पांचाल ने अपनी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 31 मई को दोपहर लगभग 12 बजे उरई स्थित पीली कोठी क्षेत्र के एक किराना व्यापारी का मोबाइल स्कूटी से चलते समय रास्ते में गिर गया था। इसी दौरान एक मोटरसाइकिल सवार युवक ने मोबाइल उठाया और मौके से निकलने की कोशिश करने लगा, लेकिन ड्यूटी पर मौजूद होमगार्ड राजीव कुमार पांचाल की पैनी नजरों ने उसे बचकर निकलने नहीं दिया और उन्होंने उसे तुरंत रोका। राजीव कुमार पांचाल ने तत्परता दिखाते हुए मोटरसाइकिल सवार युवक से मोबाइल वापस लेकर उसे सुरक्षित अपने कब्जे में रखा। उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ मोबाइल के असली मालिक के संपर्क में आने का इंतजार किया। लगभग एक घंटे बाद जब मोबाइल पर कॉल आई, तब उन्होंने पूरी सच्चाई बताते हुए अपना परिचय दिया। सूचना मिलने पर मोबाइल मालिक मौके पर पहुंचे और अपना खोया हुआ मोबाइल पाकर राहत महसूस की। इस घटना ने न केवल राजीव कुमार पांचाल की कर्तव्यनिष्ठा को उजागर किया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि ईमानदारी और सजगता आज भी कायम है। होमगार्ड जवानों को अक्सर धूप हो या बारिश, लगातार घंटों तक यातायात व्यवस्था संभालते देखा जाता है, और वे कई बार ट्रैफिक पुलिस से भी अधिक समय तक ड्यूटी करते हैं, बावजूद इसके उन्हें उतनी पहचान नहीं मिलती। इस सराहनीय कार्य के लिए स्थानीय लोगों ने राजीव कुमार पांचाल को सम्मानित करने की मांग उठाई है। होमगार्ड जवान की इस ईमानदारी ने जनता का दिल जीत लिया है और इंसानियत की एक असली मिसाल पेश की है, खासकर तब जब वे सीमित संसाधनों के साथ सबसे ज्यादा ड्यूटी करते हैं।1
- कानपुर देहात के रुरा थाना क्षेत्र के एक गांव से एक युवती अचानक लापता हो गई है। जानकारी के अनुसार, युवती बिना किसी को बताए घर से निकली थी, और जब देर शाम तक वह वापस नहीं लौटी तो परिजनों ने उसकी गहनता से खोजबीन की। तमाम प्रयासों के बाद भी जब युवती का कोई पता नहीं चल सका, तो उसके पिता ने रुरा थाने में अपनी पुत्री के लापता होने की तहरीर दी। इस संबंध में, थाना प्रभारी सुधीर भारद्वाज ने बताया कि मामले में गुमशुदगी दर्ज कर ली गई है और लापता युवती की तलाश की जा रही है।1
- कानपुर देहात के मंगलपुर थाना क्षेत्र की संदलपुर चौकी के अंतर्गत दो सप्ताह से एक नाबालिग लड़की के लापता होने के मामले में शनिवार को ग्रामीणों का भारी गुस्सा देखने को मिला। बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाओं ने पुलिस चौकी पहुंचकर न केवल प्रदर्शन किया, बल्कि पुलिस पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रैक्टर लगाकर सड़क भी जाम कर दी। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनकी नाबालिग बेटी पढ़ाई के लिए घर से निकली थी, लेकिन फिर वापस नहीं लौटी और काफी तलाश के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला। परिजनों का कहना है कि गांव का ही एक युवक विशाल उसे बहला-फुसलाकर ले गया है, जिस पर पहले भी लड़की को स्कूल आते-जाते समय परेशान करने का आरोप है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने समय पर कोई कार्रवाई नहीं की, और 22 मई को रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके अतिरिक्त, परिवार का यह भी दावा है कि उन्हें आरोपी पक्ष से धमकियां मिल रही हैं। इस घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने चौकी के बाहर जमकर नारेबाजी की और पुलिस से जल्द से जल्द नाबालिग की बरामदगी तथा आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की। हालांकि, पुलिस ने अपने ऊपर लगे लापरवाही के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच लगातार जारी है और नाबालिग की तलाश के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस ने यह भी दावा किया कि आवश्यक कानूनी कार्रवाई जल्द ही की जाएगी। इस पूरी घटना ने क्षेत्र में नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा और पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का स्पष्ट मत है कि यदि शुरुआत में ही पुलिस द्वारा प्रभावी कार्रवाई की गई होती, तो यह मामला इतना आगे नहीं बढ़ता और स्थिति इतनी बिगड़ती नहीं।2
- कानपुर देहात के फतेहपुर मुशनागर से मोहम्मद अनीश कुरैशी ने राजीव गांधी और कांग्रेस पार्टी के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनका यह साथ बचपन से लेकर जवानी तक चला आ रहा है, और इसी भावना के साथ कांग्रेस पार्टी के लिए "जिंदाबाद" का नारा लगाया।1
- जनपद कानपुर देहात के सिकंदरा थाना क्षेत्र स्थित जमुआ गांव में बालू माफियाओं के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बिना नंबर प्लेट वाले और ओवरलोड बालू से भरे डंपरों को लगातार सड़क पर दौड़ते देख आक्रोशित ग्रामीणों ने कई डंपरों को बीच सड़क पर रोक दिया। इस दौरान उन्होंने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में अवैध खनन और ओवरलोड बालू परिवहन का खेल लंबे समय से चल रहा है। उनके अनुसार, इसी कारण सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और भारी वाहनों की वजह से आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि बिना नंबर प्लेट के वाहन खुलेआम संचालित हो रहे हैं, लेकिन संबंधित विभाग और पुलिस प्रशासन इस पर कार्रवाई करने के बजाय मौन धारण किए हुए हैं। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने खनन विभाग और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्या का समाधान जल्द नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। फिलहाल, इस मामले को लेकर क्षेत्र में व्यापक चर्चा है और लोग प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।4
- कानपुर देहात के पुखरायां में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ संरक्षण के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ राजनीतिक दलों पर भी तीखा हमला बोला है। उन्होंने पुखरायां स्थित गौशाला और मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि गौ माता की रक्षा की बात करना कोई राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि देश की आस्था, सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा का विषय है। पुखरायां आगमन पर श्रद्धालुओं और गौभक्तों ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने गौ संरक्षण और गौ माता के सम्मान पर खुलकर बात रखी, यह भी कहा कि जो व्यक्ति गाय को दिल से अपनी माता मानता है, वही इस गंभीर विषय पर सार्थक चर्चा करे। उन्होंने गौ रक्षा को राजनीतिक चश्मे से देखने वालों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि समाज में अपनी मां की रक्षा करना राजनीति नहीं, तो फिर राष्ट्र के गौरव और आस्था की प्रतीक गौ माता की रक्षा के लिए आवाज़ उठाना राजनीति कैसे हो सकता है? सरकारों की नीतियों पर असंतोष व्यक्त करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि जनता के वोट से चुनी गईं सरकारें आज गाय को केवल एक 'पशु' मान रही हैं। उन्होंने किसी दल का नाम लिए बिना यह भी जोड़ा कि पूर्व की सरकारों से तो शिकायतें थीं ही, लेकिन जिन लोगों ने खुद को धुर गौभक्त और हिंदुत्व का सच्चा समर्थक बताकर सत्ता हासिल की, उनके शासनकाल में भी गौ माता की स्थिति में कोई अपेक्षित सुधार या बड़ा बदलाव नहीं दिखा है। अपने संबोधन में उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीति और वहां के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के एक कथित बयान का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने मांग की कि यदि गाय को माता माना जाता है, तो उसके संरक्षण और सुरक्षा को लेकर कोई विरोधाभास या ढुलमुल रवैया नहीं होना चाहिए और सरकारों को गौ माता के सम्मान व सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट तथा ठोस नीति बनानी होगी। शंकराचार्य ने देश और समाज के लोगों से गौ संरक्षण के कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि आने वाले समय में गौ रक्षा का मुद्दा देश का एक प्रमुख जन मुद्दा बनेगा, जिसके लिए पूरे समाज को एकजुट होकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।2
- कालपी कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत बुंदेलखंड गेस्ट हाउस बैरियर के समीप आज उस समय हड़कंप मच गया, जब भूसा भरे एक कमरे में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिसके परिणामस्वरूप कमरे में रखा लगभग 35 कुंतल भूसा जलकर पूरी तरह राख हो गया। इस घटना में पीड़ित भूसा मालिक की पहचान असलम अंसारी के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही यूपी डायल 112 और फायर ब्रिगेड की टीम ने तुरंत मौके पर पहुँचकर तत्परता दिखाई। दमकलकर्मियों ने स्थानीय लोगों की मदद से काफी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से काबू पाया, जिससे एक बड़ा हादसा होने से टल गया। इस घटना को लेकर भूसा मालिक असलम अंसारी का एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। उन्होंने आशंका व्यक्त करते हुए आरोप लगाया है कि यह आग किसी दुर्घटना का परिणाम नहीं है, बल्कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा रची गई साजिश का हिस्सा है।1