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सोशल मीडिया पर एक पोस्ट ने मनुष्य की क्रूरता पर गहरा सवाल उठाया है, जिसमें पूछा गया है कि कोई व्यक्ति इतना बेरहम कैसे हो सकता है। पोस्ट में इस तरह के कृत्यों को 'बहादुरी' कहने पर भी प्रश्नचिह्न लगाया गया है। उपयोगकर्ता ने अन्य लोगों से इन 'बहादुरों' के लिए कुछ 'मर्यादित शब्द' कहने का भी आग्रह किया है।
Abhishek Pandey
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट ने मनुष्य की क्रूरता पर गहरा सवाल उठाया है, जिसमें पूछा गया है कि कोई व्यक्ति इतना बेरहम कैसे हो सकता है। पोस्ट में इस तरह के कृत्यों को 'बहादुरी' कहने पर भी प्रश्नचिह्न लगाया गया है। उपयोगकर्ता ने अन्य लोगों से इन 'बहादुरों' के लिए कुछ 'मर्यादित शब्द' कहने का भी आग्रह किया है।
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- gramdevra painda gram dabra friend chhajje upar Sona rasta1
- रीवा कलेक्ट्रेट में आयोजित जन सुनवाई के दौरान घोर लापरवाही सामने आई। इस जन सुनवाई में विकलांग व्यक्तियों के लिए वीलचेयर की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी, जिसके कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।1
- ललितपुर जिले के आयुर्वेद व यूनानी विभाग के अधिकारी डॉ. अर्जुन लाल अहिरवार और सहायक क्लर्क राम किशोर गुप्ता को 50-50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। कुल एक लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में इन दोनों रिश्वतखोरों को गिरफ्तारी के बाद जेल भेज दिया गया है।1
- मैहर जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम कंचनपुर अंतर्गत जल्हा गांव में एक सीसी सड़क के निर्माण में ऐसा चौंकाने वाला नजारा सामने आया है, जिसे देखकर लोग और इंजीनियरिंग जगत भी हैरान हैं। यहां लगभग 100 मीटर लंबी यह सड़क, जिसकी लागत करीब 2.92 लाख रुपये बताई गई है, सड़क के बीच में खड़े उच्च वोल्टेज बिजली के खंभे को हटाए बिना ही बना दी गई है। खंभे को हटाने की जहमत न उठाते हुए, उसे सड़क के चारों ओर घेरकर मानो एक "स्मारक" का दर्जा दे दिया गया है। यह खंभा अब सड़क का स्थायी हिस्सा बन चुका है, जिससे वाहन चालकों, स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को रोजाना एक "इंजीनियरिंग अजूबे" का सामना करना पड़ रहा है। यह सड़क प्राथमिक पाठशाला की बाउंड्रीवाल से सटी होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। रात के समय किसी संभावित दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी एक बड़ा प्रश्न है। इस मामले में जब जिम्मेदार उपयंत्री योगेंद्र सिंह परमार से जानकारी मांगी गई, तो उनका जवाब और भी हैरान करने वाला था; उन्होंने साफ कहा कि "मैं तो जाकर देखा ही नहीं"। ऐसे में कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या सड़क निर्माण में खंभा हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं बनाया गया, संबंधित विभाग से समन्वय क्यों नहीं किया गया, और तकनीकी स्वीकृति देते समय इस खामी को किसी ने क्यों नहीं देखा। लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या सरकारी धन का उपयोग इसी तरह के निर्माण कार्यों में किया जाएगा। कुछ लोग व्यंग्यात्मक रूप से यह भी कह रहे हैं कि भविष्य में कहीं इस खंभे को "विकास स्तंभ" घोषित कर पर्यटन स्थल न बना दिया जाए, क्योंकि फिलहाल यह खंभा विकास कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर इस मामले की जांच करें और संभावित दुर्घटना को दावत देने वाली इस व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए। मौजूदा स्थिति में, यह निर्माण कार्य सड़क कम और सरकारी लापरवाही का जीता-जागता प्रदर्शन अधिक प्रतीत होता है।1
- रीवा-सीधी राष्ट्रीय राजमार्ग पर खड्डा स्थित टोल प्लाजा यात्रियों के लिए 'लूट का अड्डा' बन गया है, जहाँ टोल ठेकेदार द्वारा खुलेआम मनमानी और अवैध वसूली की जा रही है। शासन द्वारा तय किए गए नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, जिससे जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा यात्रियों के लिए टोल प्लाजा पर पानी और सुलभ व्यवस्थाएँ अनिवार्य की गई हैं, लेकिन यहाँ यात्री शौचालय बंद पड़ा हुआ है। इसके अतिरिक्त, टोल नाके पर मोटरसाइकिल निकलने वाले मार्ग पर भी वजन कांटा लगाया गया है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों को आवागमन में बाधा हो रही है। टोल प्लाजा पर बाहर से आने-जाने वाले वाहनों से नियम अनुसार तय टैक्स से भी अधिक अवैध वसूली की जाती है। यदि कोई वाहन मालिक नियमानुसार भुगतान करने का प्रयास करता है, तो टोल प्लाजा के कर्मचारी उसके साथ मारपीट करते हैं। सूत्रों के अनुसार, इस खड्डा टोल प्लाजा में दीपू सिंह नामक एक व्यक्ति द्वारा अवैध वसूली कराई जाती है। टोल प्लाजा के मैनेजर सदैव अपने चेंबर में बैठे रहते हैं, जबकि बाहर वाहन मालिकों के साथ खुलेआम 'नंगा नाच' किया जाता है। इस पूरे गोरखधंधे में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पुलिसकर्मियों की कथित संलिप्तता भी साफ नजर आती है, जिसके चलते टोल प्लाजा पर यह मनमानी बेरोकटोक जारी है, और आने-जाने वाले प्रत्येक वाहनों से जबरन वसूली की जा रही है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर आए दिन सड़क दुर्घटनाएं भी हो रही हैं, लेकिन टोल एंबुलेंस सही समय पर घायलों तक नहीं पहुँच पाती। यहाँ तक कि अगर एंबुलेंस पहुँच भी जाती है, तो उनमें न तो डॉक्टर उपलब्ध होते हैं और न ही आवश्यक दवाइयाँ। इस प्रकार, टोल मालिक द्वारा सुविधा के नाम पर खुलेआम असुविधाएँ दी जा रही हैं, जो राष्ट्रीय राजमार्ग के बनाए गए नियमों की धज्जियां बिखेर रहे हैं।3
- सतना जिले के रामपुर बाघेलन की ग्राम पंचायत केमार में आज शाम 5 बजे एक जन चौपाल का आयोजन किया गया, जहाँ पुलिस और जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। इस चौपाल का मुख्य फोकस नशा, साइबर फ्रॉड और कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं पर रहा। कार्यक्रम में बेला चौकी प्रभारी इंद्रवली सिंह ने साइबर अपराध से बचाव के तरीके विस्तार से बताए। उन्होंने ग्रामीणों को OTP, संदिग्ध लिंक और फर्जी कॉल से सावधान रहने, तथा किसी भी संदेहास्पद गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना देने की सलाह दी। इस जन चौपाल में जनपद सदस्य प्रजेश द्विवेदी, भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष लक्ष्मण रावत, जनपद सदस्य बद्री दहिया, राजेश सिंह तिवारी, बेला सरपंच प्रतिनिधि महेंद्र सिंह, केमार सरपंच प्रतिनिधि बृजेश सेन और भाजपा मंडल मीडिया प्रभारी रामदत्त दाहिया सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे। जन चौपाल में भारी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों ने नशा, अवैध शराब की बिक्री, सड़क-सुरक्षा और गाँव से संबंधित अन्य समस्याएँ सामने रखीं। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को उनकी सभी समस्याओं का त्वरित निराकरण करने का आश्वासन दिया। ग्राम पंचायत केमार के ग्रामीणों ने पुलिस और प्रशासन द्वारा की गई इस पहल की सराहना की। इस जन चौपाल का मुख्य उद्देश्य आम जनता को जागरूक करना और पुलिस तथा जनता के बीच समन्वय को मजबूत करना था।1
- मध्य प्रदेश के सीधी में स्थित एसडीएम कार्यालय में एक वकील अपनी बुलेट मोटरसाइकिल लेकर भीतर घुस गए। इस घटना के संबंध में अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह का बयान सामने आया है।1
- रायबरेली के जिला अस्पताल से एक परेशान करने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक मानसिक रूप से बीमार युवक के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। जानकारी के अनुसार, एक महिला वार्ड बॉय उस युवक को लातों से मार रही थी और उसे गालियां भी दे रही थी। यह युवक मानसिक रूप से बीमार बताया जा रहा है।1