अपमान या राजनीति? बयान, गिरफ्तारी और मानसिक प्रताड़ना के दावे पर बड़ा सवाल — कानून सब पर बराबर लागू होगा या नहीं?” क्या किसी को तंज़ या उपमा देकर संबोधित करना अपराध है? हाल ही में दिए गए बयान, उसके बाद हुई गिरफ्तारी और फिर अपमान व मानसिक प्रताड़ना के आरोप — इस पूरे घटनाक्रम ने कानून, राजनीति और अभिव्यक्ति की सीमा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इस वीडियो में हम विस्तार से समझते हैं: किस बयान से विवाद शुरू हुआ गिरफ्तारी का समय और कारण अपमान और मानसिक दबाव का दावा कितना कानूनी आधार रखता है क्या कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है? पूरी सच्चाई जानने के लिए वीडियो अंत तक देखें और अपनी राय जरूर बताएं। #SamratChaudhary #PappuYadav #BiharPolitics #BiharNews #PoliticalControversy #DefamationLaw #FreeSpeechDebate #BiharPolice #IndianPolitics #BreakingNews #निष्पक्ष_ख़बरें_अब_तक_बिहार #Ankesh_Thakur
अपमान या राजनीति? बयान, गिरफ्तारी और मानसिक प्रताड़ना के दावे पर बड़ा सवाल — कानून सब पर बराबर लागू होगा या नहीं?” क्या किसी को तंज़ या उपमा देकर संबोधित करना अपराध है? हाल ही में दिए गए बयान, उसके बाद हुई गिरफ्तारी और फिर अपमान व मानसिक प्रताड़ना के आरोप — इस पूरे घटनाक्रम ने कानून, राजनीति और अभिव्यक्ति की सीमा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इस वीडियो में हम विस्तार से समझते हैं: किस बयान से विवाद शुरू हुआ गिरफ्तारी का समय और कारण अपमान और मानसिक दबाव का दावा कितना कानूनी आधार रखता है क्या कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है? पूरी सच्चाई जानने के लिए वीडियो अंत तक देखें और अपनी राय जरूर बताएं। #SamratChaudhary #PappuYadav #BiharPolitics #BiharNews #PoliticalControversy #DefamationLaw #FreeSpeechDebate #BiharPolice #IndianPolitics #BreakingNews #निष्पक्ष_ख़बरें_अब_तक_बिहार #Ankesh_Thakur
- अपमान या राजनीति? बयान, गिरफ्तारी और मानसिक प्रताड़ना के दावे पर बड़ा सवाल — कानून सब पर बराबर लागू होगा या नहीं?” क्या किसी को तंज़ या उपमा देकर संबोधित करना अपराध है? हाल ही में दिए गए बयान, उसके बाद हुई गिरफ्तारी और फिर अपमान व मानसिक प्रताड़ना के आरोप — इस पूरे घटनाक्रम ने कानून, राजनीति और अभिव्यक्ति की सीमा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इस वीडियो में हम विस्तार से समझते हैं: किस बयान से विवाद शुरू हुआ गिरफ्तारी का समय और कारण अपमान और मानसिक दबाव का दावा कितना कानूनी आधार रखता है क्या कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है? पूरी सच्चाई जानने के लिए वीडियो अंत तक देखें और अपनी राय जरूर बताएं। #SamratChaudhary #PappuYadav #BiharPolitics #BiharNews #PoliticalControversy #DefamationLaw #FreeSpeechDebate #BiharPolice #IndianPolitics #BreakingNews #निष्पक्ष_ख़बरें_अब_तक_बिहार #Ankesh_Thakur1
- minapur madaripur panchayat ke Rampur hari gao me aaye naga baba bhi log unka ashirwad lete huye 🙏🙏1
- प्रशांत किशोर पहुंचे गोपालगंज, कार्यकर्ताओं के साथ की बैठक, संगठन मजबूत करने की कही बात। *--महिलाओं को दो लाख मिले इसके लिए करेंगे काम राज्य सरकार पर लगाया भ्रष्टाचार, अशिक्षा और बेरोजगारी बढ़ाने का आरोप।* (रवि कुमार भार्गव संपादक दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार) (दीपक कुमार साहनी स्वतंत्र संवाददाता दैनिक अयोध्या टाइम्स बिहार) गोपालगंज 20 फरवरी 2026 गोपालगंज:-जनसुराज के संयोजक प्रशांत किशोर शुक्रवार को गोपालगंज पहुंचे। इस दौरान कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठन का पुनर्गठन करने का ऐलान किया और जनता से आह्वान किया कि सरकार को सबक सिखाया जाएगा। प्रेस को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ने इस भ्रष्ट सरकार को वोट देकर खुद को बर्बाद करने का फैसला किया है। भ्रष्टाचार, शिक्षा की दुर्दशा और बेरोजगारी बढ़ना तय था। इसकी मार हर वर्ग पर पड़ रही है। उन्होंने पश्चिम चंपारण में एक दिन के उपवास में बहुत से जिले के लोग नहीं पहुंच पाए थे इसलिए हम सभी जिले में जाकर संगठन में काम करने वाले लोगों के साथ राय मशवारा कर रहे हैं ताकि संगठन को पुनर्गठित कर हर जिले में जड़ें मजबूत करेंगे। उनके दौरे का यह यह नौवा जिला है।महिलाओं को मिले दो लाख की राशि।एक सवाल के जवाब में प्रशांत किशोर ने राज्य सरकार को खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने महिलाओं को 2 लाख रुपये देने का वादा किया था। अगर हिम्मत है तो पूरा करें। यह वादाखिलाफी जनता भूलने वाली नहीं। उन्होंने बेरोजगारी पर बोलते हुए कहा कि युवाओं को नौकरियां देने के नाम पर सिर्फ जुमले ही हैं। शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है, जहां बच्चे बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। मौके पर ये रहे मौजूद मौके पर पूर्व जिलाध्यक्ष राधारमण मिश्रा, बरौली विधानसभा प्रत्याशी मो फैज, हथुआ विधानसभा प्रत्याशी, प्रोफेसर संतोष कुमार सुमन, अधिवक्ता विनोद कुमार सिंह सहित कई सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।1
- Kal raat Shyambengoli Gang ne apne doston ke saath dhamakedar party ki aur pura mahaul hi badal diya 💥 Music, masti aur full energy ke saath har moment ko enjoy kiya gaya. Video jaise hi social media par upload hua, turant viral hone laga. Log gang ki unity, vibe aur attitude ko pasand kar rahe hain. Ye sirf ek party nahi thi, balki dosti aur bonding ka celebration tha. Shyambengoli Gang ne phir se proof kar diya ki jab saath ho apne log, to har pal special ban jata hai 🔥😎 #Shyambengoli #ShyambengoliGang #GangParty #ViralVideo #PartyNight #FullMasti #DostiVibes #TrendingNow #YouthPower #CelebrationMode1
- Motihari में रिफाइन तेल हेराफेरी गिरोह पर पुलिस की कार्रवाई — तस्करी के नेटवर्क पर सख्त प्रहार1
- “ रंगों का पर्व होली अभी भले ही कुछ दिन दूर हो, लेकिन बच्चों की दुनिया में होली की शुरुआत हो चुकी है। अबीर और गुलाल से पहले ‘गर्दा उड़ाओ’ होली ने माहौल को रंगीन बना दिया है। ऋतु और महीने के अनुसार भले ही कैलेंडर कुछ और कहे, लेकिन बच्चों का उत्साह किसी तारीख का मोहताज नहीं होता। कैमरे में कैद ये नजारे साफ बताते हैं कि होली का जादू बच्चों के सिर चढ़कर बोल रहा है। खुले मैदान में, गलियों में और मोहल्लों में बच्चे मस्ती के साथ धूल उड़ाते नजर आ रहे हैं। रंगों की होली भले अभी दूर हो, लेकिन ‘गर्दा होली’ ने त्योहार की आहट दे दी है। बच्चों के चेहरों पर मुस्कान, हंसी-ठिठोली और बेफिक्र अंदाज़ यह दर्शाता है कि होली सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि भावनाओं और उमंगों का उत्सव है। बसंत की हल्की आहट और मौसम की करवट के साथ बच्चों का यह उत्साह बता रहा है कि त्योहारों की असली खुशी इन्हीं मासूम चेहरों में बसती है।1
- उनका बिहार में एक भी सीट नहीं आया विधानसभा क्षेत्र में क्योंकि लोग जो उसमें काम कर रहे थे सिर्फ नाम के थे काम के नहीं थे1
- भीड़ बनकर फैसला सुनाने वाला हर व्यक्ति अपराधी है — भीड़ न पुलिस है, न कोर्ट, न कचहरी” देश में बढ़ती अफवाहें और शक के आधार पर भीड़ द्वारा लोगों को पीटने की घटनाएँ समाज और कानून दोनों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं। हाल के मामलों ने दिखा दिया है कि बिना जांच-पड़ताल किसी को दोषी ठहरा देना न्याय नहीं, अपराध है। कानून साफ कहता है कि सज़ा देने का अधिकार सिर्फ अदालत को है, भीड़ को नहीं। इस वीडियो में जानिए क्यों भीड़तंत्र लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है, और क्यों ऐसे मामलों में शामिल हर व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। वीडियो देखें, सच समझें और जागरूकता फैलाने के लिए शेयर जरूर करें। #MobLynching #ChildTheftRumor #LawAndOrder #निष्पक्ष_ख़बरें_अब_तक_बिहार #Ankesh_Thakur1