नई दिल्ली में देश की बैंकिंग व्यवस्था और सार्वजनिक धन की सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARC), बैंकों और बड़े कर्जदारों के बीच कथित मिलीभगत को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने ARC के कामकाज और उन प्रक्रियाओं की गहन जांच की आवश्यकता बताई है, जिनके माध्यम से हजारों करोड़ रुपये के कर्ज बेहद कम कीमत पर निपटाए जा रहे हैं। यह मामला Prateeksha & Ors. v. Union of India & Ors. याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि नोएडा स्थित JKM इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व वाले सात बैंकों के कंसोर्टियम से लिए गए लगभग ₹1,537 करोड़ के कर्ज का अंततः मात्र ₹73.50 करोड़ में निपटारा कर लिया, जिससे सार्वजनिक धन को भारी नुकसान हुआ। याचिका के अनुसार, वर्ष 2018 में हुई फोरेंसिक ऑडिट में कथित तौर पर शेल कंपनियों, फर्जी बिलों और अन्य संदिग्ध माध्यमों से ₹902 करोड़ से अधिक राशि के डायवर्जन का खुलासा हुआ था। इन आरोपों के आधार पर पूरे लेनदेन और बैंकिंग प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि कुछ मामलों में बैंक भारी छूट पर कर्ज ARC को बेच देते हैं और बाद में कर्जदार बेहद कम राशि का भुगतान कर दायित्व से मुक्त हो जाते हैं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि यदि करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है तो इस पर न्यायिक निगरानी आवश्यक है। याचिका में केंद्र सरकार से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), सेबी (SEBI), एसएफआईओ (SFIO), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारियों वाली एक स्वतंत्र जांच समिति या न्यायिक आयोग गठित करने की मांग की गई है। मामले की सुनवाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित निजी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले को केवल एक कंपनी या एक कारोबारी समूह तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इससे देश की बैंकिंग व्यवस्था, कर्ज वसूली तंत्र और सार्वजनिक धन की सुरक्षा को लेकर व्यापक सवाल खड़े हो रहे हैं। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई और संभावित जांच पर टिकी हैं।
नई दिल्ली में देश की बैंकिंग व्यवस्था और सार्वजनिक धन की सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों (ARC), बैंकों और बड़े कर्जदारों के बीच कथित मिलीभगत को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने ARC के कामकाज और उन प्रक्रियाओं की गहन जांच की आवश्यकता बताई है, जिनके माध्यम से हजारों करोड़ रुपये के कर्ज बेहद कम कीमत पर निपटाए जा रहे हैं। यह मामला Prateeksha & Ors. v. Union of India & Ors. याचिका से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि नोएडा स्थित JKM इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व वाले सात बैंकों के कंसोर्टियम से लिए गए लगभग ₹1,537 करोड़ के कर्ज का अंततः मात्र ₹73.50 करोड़ में निपटारा कर लिया, जिससे सार्वजनिक धन को भारी नुकसान हुआ। याचिका के अनुसार, वर्ष 2018 में हुई फोरेंसिक ऑडिट में कथित तौर पर शेल कंपनियों, फर्जी बिलों और अन्य संदिग्ध माध्यमों से ₹902 करोड़ से अधिक राशि के डायवर्जन का खुलासा हुआ था। इन आरोपों के आधार पर पूरे लेनदेन और बैंकिंग प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि कुछ मामलों में बैंक भारी छूट पर कर्ज ARC को बेच देते हैं और बाद में कर्जदार बेहद कम राशि का भुगतान कर दायित्व से मुक्त हो जाते हैं। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि यदि करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है तो इस पर न्यायिक निगरानी आवश्यक है। याचिका में केंद्र सरकार से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), सेबी (SEBI), एसएफआईओ (SFIO), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारियों वाली एक स्वतंत्र जांच समिति या न्यायिक आयोग गठित करने की मांग की गई है। मामले की सुनवाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित निजी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले को केवल एक कंपनी या एक कारोबारी समूह तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इससे देश की बैंकिंग व्यवस्था, कर्ज वसूली तंत्र और सार्वजनिक धन की सुरक्षा को लेकर व्यापक सवाल खड़े हो रहे हैं। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई और संभावित जांच पर टिकी हैं।
- गुना जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत म्याना थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने राजस्थान से मध्य प्रदेश लाई जा रही डोडाचूरा की एक बड़ी खेप को पकड़ते हुए अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क को झटका दिया है। इस कार्रवाई में एक आरोपी को गिरफ्तार कर करीब 70 लाख रुपये मूल्य का मादक पदार्थ और तस्करी में प्रयुक्त वाहन जब्त किया गया है। जब्त किए गए डोडाचूरा की कुल मात्रा 106.460 किलोग्राम है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 55 लाख रुपये है, जबकि सफेद रंग की फोर्स ट्रैक्स गाड़ी की कीमत करीब 15 लाख रुपये आंकी गई है। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान देव सिंह पुत्र मोहनलाल बंजारा (32 वर्ष) निवासी मदनाखेड़ी, थाना बापचा, जिला बारां (राजस्थान) के रूप में हुई है। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि फतेहगढ़-बमोरी क्षेत्र से भारी मात्रा में डोडाचूरा एक सफेद फोर्स ट्रैक्स गाड़ी में भरकर पाटई हाईवे की ओर ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही म्याना थाना पुलिस ने एक विशेष टीम गठित कर ऊमरी-पाटई रोड पर नाकाबंदी की। कुछ समय बाद संदिग्ध वाहन दिखाई देने पर पुलिस ने उसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक वाहन को जंगल की ओर मोड़कर भागने लगा। पुलिस टीम ने पीछा करते हुए घेराबंदी कर आरोपी को मौके पर ही दबोच लिया। मामले में म्याना थाने में अपराध क्रमांक 158/26 दर्ज कर आरोपी के खिलाफ धारा 8/15 और 29 एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है। प्रारंभिक जांच में इस तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी तलाश और भूमिका की जांच अभी जारी है। पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई में म्याना थाना प्रभारी निरीक्षक बृजमोहन सिंह भदौरिया और ऊमरी चौकी प्रभारी बुंदेल सिंह सुनेरिया सहित पुलिस टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जिले में नशे के अवैध कारोबार में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और ऐसे तत्वों के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा।2
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर छबड़ा में योग और ध्यान कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र, अमीरपुर खेड़ी और ओशो आशीष ध्यान योग केंद्र, भुवाखेड़ी में उत्साहपूर्वक मनाया गया। केंद्र संचालक एस.एल. नागर ने कार्यक्रम का संचालन किया, जबकि स्वामी ध्यान गगन ने इसकी अध्यक्षता और सानिध्य प्रदान किया। इस दौरान अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रोटोकॉल के तहत विभिन्न योगासन, प्राणायाम और ध्यान अभ्यास करवाए गए, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ भाग लिया और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर, स्वामी ध्यान गगन ने योग को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताया, जो शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है। उन्होंने सभी लोगों से आह्वान किया कि वे अच्छे स्वास्थ्य, मानसिक शांति और सकारात्मक जीवन के लिए नियमित रूप से योग और ध्यान करें। केंद्र संचालक एस.एल. नागर ने भी योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं से बचा जा सकता है। उन्होंने उपस्थित लोगों को निरंतर योगाभ्यास के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में योगी सतीश शर्मा सहित अनेक योग साधक और श्रद्धालु उपस्थित रहे। अंत में, सभी प्रतिभागियों ने योग को जन-जन तक पहुंचाने और एक स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।4
- घर पर ही कपालभाति के साथ नाभि जटका प्रयोग का अभ्यास कर घुटनों के दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है। लोगों को इसे सीखने और स्वयं करने का आह्वान किया गया है।1
- छीपाबड़ौद में वीर गुर्जर विकास समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने विधायक प्रताप सिंह सिंघवी को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें गुर्जर समाज के छात्रों के लिए छात्रावास भूमि आवंटित करने की मांग की गई है। विधायक ने इस मांग पर सकारात्मक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। समिति के पदाधिकारियों ने अपने ज्ञापन में बताया कि क्षेत्र के कई छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए बाहर से आते हैं, लेकिन उचित छात्रावास व्यवस्था न होने के कारण उन्हें आवास सहित अन्य कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। समिति का मानना है कि गुर्जर समाज छात्रावास के लिए भूमि आवंटन होने से विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा मिल सकेगी और समाज को शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा प्राप्त होगी। प्रतिनिधिमंडल ने विधायक से आग्रह किया कि वे इस मांग पर सकारात्मक कार्रवाई करते हुए संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश दें। विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने समिति की मांग को गंभीरता से सुना और उचित स्तर पर विचार कर आवश्यक प्रयास करने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर वीर गुर्जर विकास समिति के पदाधिकारी और समाज के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे, जिन्होंने छात्रावास निर्माण को समाज के शैक्षणिक उत्थान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए भूमि आवंटन की मांग शीघ्र पूरी होने की अपेक्षा व्यक्त की।3
- आज विदिशा शहर के चार परीक्षा केंद्रों पर आयोजित री-नीट परीक्षा में गर्ल्स कॉलेज स्थित एक केंद्र पर तीन छात्राएं शामिल नहीं हो सकीं, जिसके कारण उनके परिजनों ने कॉलेज गेट पर हंगामा किया। परीक्षा से वंचित रहीं छात्राओं में स्नेहा दुबे निवासी आरएमपी नगर विदिशा और रागिनी विश्वकर्मा ग्राम कूड़ा तहसील कुरवाई शामिल हैं, जो निर्धारित समय पर कॉलेज में प्रवेश नहीं कर पाईं। प्रवेश का समय सुबह 11 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक था, लेकिन ये दोनों छात्राएं 1:30 बजे के 2 मिनट बाद पहुंची थीं। जानकारी मिलने पर परीक्षा की नोडल अधिकारी और केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्य गीता भदौरिया मौके पर पहुंचीं और दोनों छात्राओं को अंदर ले गईं। हालांकि, अंदर जाने के बाद भी उनका बायोमेट्रिक थंब सफल नहीं हो सका, जिसके चलते उन्हें परीक्षा से बाहर आना पड़ा। इसी केंद्र पर, विदिशा की ही निवासी एक तीसरी छात्रा अक्षिता श्रीवास्तव को भी परीक्षा देने से रोक दिया गया। अक्षिता ने कुछ दिन पूर्व हुई परीक्षा का ही प्रवेश फार्म निकाला था, जिसे इस री-नीट परीक्षा के लिए मान्य नहीं किया गया। इस प्रकार, तीनों छात्राओं को री-नीट परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिल सकी।4
- स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग के विषय में जानकारी दी गई है।1
- रविवार सुबह 9 बजे बारां जिले के शाहाबाद कस्बे में एक दुर्घटना हुई। शाहाबाद घाटी के ऊपर NH-27 हाईवे पर एक मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। इस हादसे में दो युवक घायल हो गए। दुर्घटनाग्रस्त बाइक का नंबर RJ28FS8362 बताया गया है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस जाप्ता मौके पर पहुंचा। एसआई सुमेर सिंह, 112 जाप्ते के साथ घटनास्थल पहुंचे और तुरंत दोनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहाबाद में भर्ती कराया। घायलों का उपचार अस्पताल में जारी है। हादसे के बाद कुछ देर के लिए हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।1