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27अप्रैल गौ माता सम्मान दिवस हस्ताक्षर अभियान तेज भारत के हर गाम हर घर में गौ माता सम्मान मिले
Brajvir Singh
27अप्रैल गौ माता सम्मान दिवस हस्ताक्षर अभियान तेज भारत के हर गाम हर घर में गौ माता सम्मान मिले
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- Post by RPR NEWS TV1
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- मथुरा 05 अप्रैल 2026 जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह द्वारा जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त फसलों का निरीक्षण किया गया। जनपद में हाल ही में आई तेज़ आंधी, बारिश एवं ओलावृष्टि के कारण किसानों की फसलों को हुए नुकसान के दृष्टिगत जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने प्रभावित ग्रामों का स्थलीय निरीक्षण किया। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने तहसील छाता के ग्राम चौमुंहा एवं पसौली तथा तहसील सदर के ग्राम देवी आटस का निरीक्षण किया। निरीक्षण में जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने उप जिलाधिकारी छाता वैभव गुप्ता को निर्देश दिए कि सभी किसानों के फसलों का सर्वे का कार्य सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि उक्त कार्य को प्राथमिकता के आधार पर करते हुए किसानों को मुआवजा देने की कार्यवाही को समयबद्धता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि सर्वे के कार्यों को पूर्ण पारदर्शिता से करे तथा किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आनी चाहिए। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने खेतों में जाकर फसलों की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया तथा किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। किसानों द्वारा बारी-बारी से अपनी समस्याओं से जिलाधिकारी महोदय को अवगत कराया गया। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि क्षति का आकलन शीघ्रता से पारदर्शी ढंग से किया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को शासन द्वारा निर्धारित राहत सहायता समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को हर संभव सहायता प्रदान करना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कृषि एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सर्वे कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और वास्तविक नुकसान का सही आंकलन प्रस्तुत किया जाए।4
- Post by Brijveer Jadoun Mathura India news 28 reporter2
- Post by Brajvir Singh1
- Post by Subhash Chand1
- Post by ATV INDIA HD (Ajeet chauhan)1
- RPRNEWSTV DIGITAL मथुरा। जनपद में अचानक बदले मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। रविवार को तेज बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने जनपद के बलदेव ,फरह सहित अन्य सभी ब्लॉक के गांवों में खेतों में खड़ी और कटी हुई गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई गांवों में हालात ऐसे हैं कि पूरी की पूरी फसल जमीन पर बिछ गई है, जिससे किसानों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि जिस समय किसान गेहूं की कटाई में जुटे थे, उसी दौरान तेज हवाओं के साथ बारिश और ओले गिरने लगे। देखते ही देखते खेतों में खड़ी फसल गिर गई, जबकि कटी हुई फसल भीगकर सड़ने लगी। इससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है—एक तरफ खड़ी फसल बर्बाद हुई, तो दूसरी तरफ तैयार अनाज भी खराब हो गया। ओलावृष्टि के बाद गांवों में बर्बादी का मंजर साफ देखा जा सकता है। जहां कुछ दिन पहले तक सुनहरी फसल लहलहा रही थी, वहां अब पानी में भीगे और गिरे हुए पौधे नजर आ रहे हैं। यह दृश्य देखकर ग्राम पटलौनी , करनऊ ,किलौनी,गढ़सौली के कई किसान भावुक हो उठे और फफक-फफक कर रोने लगे। उनका कहना है कि इस फसल पर ही उनके पूरे साल का खर्च और परिवार की उम्मीदें टिकी थीं। किसानों ने बताया कि उन्होंने महंगे बीज, खाद और सिंचाई के लिए कर्ज लेकर फसल तैयार की थी, लेकिन इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। अब उनके सामने न केवल परिवार के पालन-पोषण की समस्या है, बल्कि कर्ज चुकाने की भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। वहीं भारतीय किसान यूनियन अन्नदाता के प्रदेश अध्यक्ष भूरा पहलवान ने घटना पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि अतिवृष्टि और ओलावृष्टि ने किसानों की फसल पूरी तरह चौपट कर दी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल और पारदर्शी सर्वे कराया जाए तथा किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सर्वे कार्य केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि तहसीलदार और उपजिलाधिकारी (SDM) को स्वयं मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करना चाहिए। उनका आरोप है कि कई बार लेखपाल स्तर पर सर्वे में अनियमितताएं होती हैं, जिससे वास्तविक और कमजोर किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाता। भूरा पहलवान ने प्रदेश सरकार से यह भी मांग की कि इस आपदा को देखते हुए किसानों का कृषि ऋण पूरी तरह माफ किया जाए, ताकि वे इस संकट से उबर सकें और दोबारा खेती के लिए तैयार हो सकें। किसानों का कहना है कि उनकी पूरी जिंदगी खेती पर ही निर्भर होती है। बच्चों की पढ़ाई, बेटियों की शादी, परिवार का इलाज और बैंक का कर्ज—सब कुछ इसी फसल से चलता है। ऐसे में फसल की बर्बादी उनके सपनों और उम्मीदों को पूरी तरह चकनाचूर कर देती है। स्थानीय किसानों ने प्रशासन से अपील की है कि जल्द से जल्द नुकसान का आंकलन कर राहत कार्य शुरू किए जाएं, ताकि प्रभावित परिवारों को इस कठिन समय में सहारा मिल सके और वे दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो सकें।1