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नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों युवाओं ने NEET, SSC GD, CBSE और CUET सहित विभिन्न परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक प्रकरणों के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बॉबी पंवार ने भी इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया, जिसमें उन्होंने उत्तराखंड के युवाओं की पीड़ा और चिंताओं को उठाया। पंवार ने स्पष्ट किया कि यदि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह आंदोलन भविष्य में और भी व्यापक रूप ले सकता है।

21 hrs ago
user_GROUND REPORT
GROUND REPORT
Court reporter बर्निगाड़, उत्तर काशी, उत्तराखंड•
21 hrs ago

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों युवाओं ने NEET, SSC GD, CBSE और CUET सहित विभिन्न परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक प्रकरणों के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बॉबी पंवार ने भी इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया, जिसमें उन्होंने उत्तराखंड के युवाओं की पीड़ा और चिंताओं को उठाया। पंवार ने स्पष्ट किया कि यदि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह आंदोलन भविष्य में और भी व्यापक रूप ले सकता है।

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  • सीजेपी ने दिल्ली के जंतर मंतर पर एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया। यह प्रदर्शन नीट पेपर यूजी (NEET paper UG) और अन्य परीक्षाओं में हुई धांधली के विरोध में किया गया, जिसके माध्यम से संगठन ने परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं के खिलाफ अपनी आवाज उठाई।
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    सीजेपी ने दिल्ली के जंतर मंतर पर एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया। यह प्रदर्शन नीट पेपर यूजी (NEET paper UG) और अन्य परीक्षाओं में हुई धांधली के विरोध में किया गया, जिसके माध्यम से संगठन ने परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं के खिलाफ अपनी आवाज उठाई।
    user_Rajkumar mehra press reporter
    Rajkumar mehra press reporter
    Real Estate Agent विकास नगर, देहरादून, उत्तराखंड•
    15 hrs ago
  • उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी पर स्नान के दौरान एक वृद्ध महिला अचानक फिसलकर गंगा के तेज बहाव में बहने लगी। यह घटना देखते ही वहाँ मौजूद लोगों ने तुरंत शोर मचाया और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर तुरंत रेस्क्यू अभियान चलाया। काफी प्रयासों के बाद, महिला को सुरक्षित रूप से बाहर निकाल लिया गया। समय पर मिली मदद के कारण एक बड़ा हादसा टल गया और वृद्ध महिला की जान बच गई।
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    उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी पर स्नान के दौरान एक वृद्ध महिला अचानक फिसलकर गंगा के तेज बहाव में बहने लगी। यह घटना देखते ही वहाँ मौजूद लोगों ने तुरंत शोर मचाया और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर तुरंत रेस्क्यू अभियान चलाया। काफी प्रयासों के बाद, महिला को सुरक्षित रूप से बाहर निकाल लिया गया। समय पर मिली मदद के कारण एक बड़ा हादसा टल गया और वृद्ध महिला की जान बच गई।
    user_Viral Zone
    Viral Zone
    Medical group विकास नगर, देहरादून, उत्तराखंड•
    16 hrs ago
  • उत्तराखण्ड के टिहरी जनपद के भिलंगना ब्लॉक के घनसाली क्षेत्र में स्थित बूढ़ा केदार मंदिर एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र तीर्थस्थल है। बाल गंगा और धर्म गंगा नदियों के संगम पर स्थित यह मंदिर पंच केदार (केदारनाथ) के प्रारंभिक या पाँचवें धाम के रूप में प्रतिष्ठित है, जो अपनी शांत और सुरम्य भौगोलिक स्थिति के लिए जाना जाता है। बूढ़ा केदार मंदिर समिति के सदस्य मनमोहन रावत के अनुसार, स्कन्द पुराण के छठवें अध्याय में वर्णित है कि बूढ़ा केदार का इतिहास क्षेत्र के कई अन्य प्रसिद्ध केदारनाथ तीर्थों से भी पुराना है। यहाँ तक कि चारों धाम की यात्रा को इस मंदिर के दर्शन के बिना अधूरा माना जाता है। महाभारत युद्ध के पश्चात् ब्रह्म और गोत्र हत्या के पापों से मुक्ति पाने के लिए पांडवों ने अपने गुरु वेदव्यास से मार्गदर्शन माँगा था। गुरु वेदव्यास ने उन्हें उत्तर हिमालय की दिशा में भगवान शिव के दर्शन से इन पापों से मुक्ति का मार्ग सुझाया। जब पांडव भगवान शिव का आशीर्वाद खोजते हुए हिमालय पहुँचे, तो शिव ने उन्हें दर्शन देने से बचने के लिए एक वृद्ध व्यक्ति का रूप धारण कर लिया। पांडवों के इस स्थान पर पहुँचने पर, वह वृद्ध व्यक्ति ध्यान में लीन हो गया और अचानक एक विशाल शिवलिंग प्रकट हुआ। इसी स्थान पर पांडवों ने शिवलिंग के रूप में भगवान शिव के दर्शन किए, जिसके कारण यह स्थान बूढ़ा केदार कहलाया। बूढ़ाकेदार मंदिर समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि इस मंदिर में स्थापित प्राकृतिक शिवलिंग उत्तर भारत का सबसे विशाल माना जाता है। इस शिवलिंग पर वृद्ध शिव, गणेश, नंदी के साथ-साथ पाँचों पांडवों और द्रौपदी की छवियाँ अंकित हैं। मंदिर पारंपरिक गढ़वाली वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो अपने जटिल शिल्प कौशल और नक्काशीदार लकड़ी व पत्थर के संयोजन के लिए विख्यात है। मंदिर के प्रांगण में नाथ संप्रदाय के आध्यात्मिक गुरुओं की समाधियाँ भी स्थित हैं, और मान्यता है कि स्वयं ऋषि गोरखनाथ ने एक बार इस स्थान पर ध्यान किया था। इस मंदिर की एक अनूठी विशेषता यह भी है कि यहाँ के पुजारी ब्राह्मण न होकर, नाथ संप्रदाय से शिक्षा प्राप्त राजपूत जाति के पंडित होते हैं। मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं के छोटे मंदिर भी मौजूद हैं। यह मंदिर नई टिहरी मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर घनसाली क्षेत्र में स्थित है और समुद्र तल से 1,535 मीटर की ऊँचाई पर है। घने देवदार के जंगल और सीढ़ीदार खेत इसे घेरे हुए हैं, जो यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं। महाशिवरात्रि यहाँ का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है, जिसमें हजारों भक्त प्रार्थनाओं और उत्सवों में भाग लेते हैं। इसके अतिरिक्त, जुलाई माह की पूर्णिमा से शुरू होने वाला तीन दिवसीय मेला भी हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। 180 गाँवों के इष्ट देवता गुरु कैलापीर का भव्य मेला सामान्य दीपावली के एक माह बाद बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिर तक पहुँचने के लिए ऋषिकेश और नई टिहरी से घनसाली के लिए सीधी बसें उपलब्ध हैं, जिसके बाद निजी टैक्सी या अन्य वाहन से मंदिर तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। मुख्य बूढ़ा केदार सड़क पर स्थित लोहे के पुल से 1 किलोमीटर की आसान और मनोरम ट्रेकिंग के बाद मंदिर तक पहुँचा जा सकता है। मार्च से जून और सितंबर से नवंबर तक का समय मंदिर भ्रमण के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और गढ़वाल हिमालय के मनमोहक दृश्य दिखाई देते हैं। बूढ़ा केदार महासर ताल, सहस्त्र ताल, जरार ताल और मंझार ताल जैसे कई सुंदर और ऊँचे तालों की ट्रेकिंग के लिए भी एक मुख्य मार्ग है। हमारी यात्रा के दौरान हमें रावल अमरनाथ योगी से साक्षात्कार का सौभाग्य मिला, जिन्होंने बूढ़ा केदार मंदिर के इतिहास, पौराणिक महत्व और परंपराओं के विषय में अत्यंत सरल एवं गहन जानकारी साझा की थी। उनके शब्दों में इस पावन धाम की आस्था और अध्यात्म की जीवंत झलक स्पष्ट रूप से अनुभव की जा सकती थी, और यह भेंट इस दिव्य स्थल की सांस्कृतिक आत्मा को समझने का एक सशक्त माध्यम बनी। दुर्भाग्यवश, हाल ही में उनके स्वर्गवास का समाचार प्राप्त हुआ, जिससे यह स्मृति और भी अधिक भावुक एवं अविस्मरणीय हो गई है, और बूढ़ा केदार की यह यात्रा आज भी उनकी स्मृतियों और मार्गदर्शन के प्रकाश में जीवंत प्रतीत होती है। अंततः, बूढ़ा केदार केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि गढ़वाल की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत का एक जीवंत प्रतीक है, जो श्रद्धा, इतिहास और प्रकृति का एक अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
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    उत्तराखण्ड के टिहरी जनपद के भिलंगना ब्लॉक के घनसाली क्षेत्र में स्थित बूढ़ा केदार मंदिर एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र तीर्थस्थल है। बाल गंगा और धर्म गंगा नदियों के संगम पर स्थित यह मंदिर पंच केदार (केदारनाथ) के प्रारंभिक या पाँचवें धाम के रूप में प्रतिष्ठित है, जो अपनी शांत और सुरम्य भौगोलिक स्थिति के लिए जाना जाता है।

बूढ़ा केदार मंदिर समिति के सदस्य मनमोहन रावत के अनुसार, स्कन्द पुराण के छठवें अध्याय में वर्णित है कि बूढ़ा केदार का इतिहास क्षेत्र के कई अन्य प्रसिद्ध केदारनाथ तीर्थों से भी पुराना है। यहाँ तक कि चारों धाम की यात्रा को इस मंदिर के दर्शन के बिना अधूरा माना जाता है। महाभारत युद्ध के पश्चात् ब्रह्म और गोत्र हत्या के पापों से मुक्ति पाने के लिए पांडवों ने अपने गुरु वेदव्यास से मार्गदर्शन माँगा था। गुरु वेदव्यास ने उन्हें उत्तर हिमालय की दिशा में भगवान शिव के दर्शन से इन पापों से मुक्ति का मार्ग सुझाया। जब पांडव भगवान शिव का आशीर्वाद खोजते हुए हिमालय पहुँचे, तो शिव ने उन्हें दर्शन देने से बचने के लिए एक वृद्ध व्यक्ति का रूप धारण कर लिया। पांडवों के इस स्थान पर पहुँचने पर, वह वृद्ध व्यक्ति ध्यान में लीन हो गया और अचानक एक विशाल शिवलिंग प्रकट हुआ। इसी स्थान पर पांडवों ने शिवलिंग के रूप में भगवान शिव के दर्शन किए, जिसके कारण यह स्थान बूढ़ा केदार कहलाया।

बूढ़ाकेदार मंदिर समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि इस मंदिर में स्थापित प्राकृतिक शिवलिंग उत्तर भारत का सबसे विशाल माना जाता है। इस शिवलिंग पर वृद्ध शिव, गणेश, नंदी के साथ-साथ पाँचों पांडवों और द्रौपदी की छवियाँ अंकित हैं। मंदिर पारंपरिक गढ़वाली वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो अपने जटिल शिल्प कौशल और नक्काशीदार लकड़ी व पत्थर के संयोजन के लिए विख्यात है। मंदिर के प्रांगण में नाथ संप्रदाय के आध्यात्मिक गुरुओं की समाधियाँ भी स्थित हैं, और मान्यता है कि स्वयं ऋषि गोरखनाथ ने एक बार इस स्थान पर ध्यान किया था। इस मंदिर की एक अनूठी विशेषता यह भी है कि यहाँ के पुजारी ब्राह्मण न होकर, नाथ संप्रदाय से शिक्षा प्राप्त राजपूत जाति के पंडित होते हैं। मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं के छोटे मंदिर भी मौजूद हैं।

यह मंदिर नई टिहरी मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर घनसाली क्षेत्र में स्थित है और समुद्र तल से 1,535 मीटर की ऊँचाई पर है। घने देवदार के जंगल और सीढ़ीदार खेत इसे घेरे हुए हैं, जो यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं। महाशिवरात्रि यहाँ का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है, जिसमें हजारों भक्त प्रार्थनाओं और उत्सवों में भाग लेते हैं। इसके अतिरिक्त, जुलाई माह की पूर्णिमा से शुरू होने वाला तीन दिवसीय मेला भी हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। 180 गाँवों के इष्ट देवता गुरु कैलापीर का भव्य मेला सामान्य दीपावली के एक माह बाद बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिर तक पहुँचने के लिए ऋषिकेश और नई टिहरी से घनसाली के लिए सीधी बसें उपलब्ध हैं, जिसके बाद निजी टैक्सी या अन्य वाहन से मंदिर तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। मुख्य बूढ़ा केदार सड़क पर स्थित लोहे के पुल से 1 किलोमीटर की आसान और मनोरम ट्रेकिंग के बाद मंदिर तक पहुँचा जा सकता है। मार्च से जून और सितंबर से नवंबर तक का समय मंदिर भ्रमण के लिए सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और गढ़वाल हिमालय के मनमोहक दृश्य दिखाई देते हैं। बूढ़ा केदार महासर ताल, सहस्त्र ताल, जरार ताल और मंझार ताल जैसे कई सुंदर और ऊँचे तालों की ट्रेकिंग के लिए भी एक मुख्य मार्ग है।

हमारी यात्रा के दौरान हमें रावल अमरनाथ योगी से साक्षात्कार का सौभाग्य मिला, जिन्होंने बूढ़ा केदार मंदिर के इतिहास, पौराणिक महत्व और परंपराओं के विषय में अत्यंत सरल एवं गहन जानकारी साझा की थी। उनके शब्दों में इस पावन धाम की आस्था और अध्यात्म की जीवंत झलक स्पष्ट रूप से अनुभव की जा सकती थी, और यह भेंट इस दिव्य स्थल की सांस्कृतिक आत्मा को समझने का एक सशक्त माध्यम बनी। दुर्भाग्यवश, हाल ही में उनके स्वर्गवास का समाचार प्राप्त हुआ, जिससे यह स्मृति और भी अधिक भावुक एवं अविस्मरणीय हो गई है, और बूढ़ा केदार की यह यात्रा आज भी उनकी स्मृतियों और मार्गदर्शन के प्रकाश में जीवंत प्रतीत होती है। अंततः, बूढ़ा केदार केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि गढ़वाल की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत का एक जीवंत प्रतीक है, जो श्रद्धा, इतिहास और प्रकृति का एक अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।
    user_Uklive Uttrakhand
    Uklive Uttrakhand
    टिहरी, टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड•
    19 hrs ago
  • उत्तराखंड के देहरादून स्थित पिट्ठूवाला के राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान में परीक्षा के दौरान नकल रोकने को लेकर जमकर हंगामा हुआ। आरोप है कि सिविल इंजीनियरिंग फाइनल ईयर के एक छात्र ने अपने दरोगा पिता, मामा और कुछ अन्य लोगों को बुला लिया, जिन्होंने संस्थान में घुसकर शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ मारपीट की। वायरल हुए एक वीडियो में कंट्रोल रूम के अंदर हंगामा और कुर्सियों से मारपीट के आरोप भी सामने आए हैं। वहीं, दूसरी ओर छात्र के दरोगा पिता ने संस्थान के शिक्षकों पर ही अपने बेटे के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है। इस घटना के बाद दोनों पक्षों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पुलिस मामले की जांच में जुटी है। नकल रोकने जैसी बात पर इतना बड़ा बवाल हो जाना एक गंभीर मुद्दा बन गया है।
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    उत्तराखंड के देहरादून स्थित पिट्ठूवाला के राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान में परीक्षा के दौरान नकल रोकने को लेकर जमकर हंगामा हुआ। आरोप है कि सिविल इंजीनियरिंग फाइनल ईयर के एक छात्र ने अपने दरोगा पिता, मामा और कुछ अन्य लोगों को बुला लिया, जिन्होंने संस्थान में घुसकर शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ मारपीट की।

वायरल हुए एक वीडियो में कंट्रोल रूम के अंदर हंगामा और कुर्सियों से मारपीट के आरोप भी सामने आए हैं। वहीं, दूसरी ओर छात्र के दरोगा पिता ने संस्थान के शिक्षकों पर ही अपने बेटे के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है।

इस घटना के बाद दोनों पक्षों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पुलिस मामले की जांच में जुटी है। नकल रोकने जैसी बात पर इतना बड़ा बवाल हो जाना एक गंभीर मुद्दा बन गया है।
    user_राजकुमार अग्रवाल डोईवाला रिपोर
    राजकुमार अग्रवाल डोईवाला रिपोर
    Lawyer डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड•
    3 hrs ago
  • दिनांक 06 जून 2026 को देर रात श्री कृष्णा आश्रम, संन्यास रोड से कनखल पुलिस को गंगा नदी के पार एक टापू पर एक महिला के फंसे होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही थाना कनखल पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और गंगा में तेज़ बहाव को देखते हुए जल पुलिस टीम को भी बुलाया गया। जल पुलिस ने नाव के ज़रिए टापू तक पहुँचकर महिला को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के बाद महिला को उपचार के लिए 108 एम्बुलेंस से जिला चिकित्सालय भेजा गया। पूछताछ में महिला ने अपना नाम मैमवती, उम्र 55 वर्ष, पति लखन, और निवास गैहरब, पलवल (हरियाणा) बताया। उसने अपने पुत्रों के नाम सुरेंद्र और मुकेश बताए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, महिला गंगा स्नान करते समय बहकर इस टापू पर पहुँच गई थी। पुलिस द्वारा महिला के परिजनों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। कनखल पुलिस और जल पुलिस की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से हरियाणा निवासी महिला की जान सुरक्षित बचाई जा सकी।
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    दिनांक 06 जून 2026 को देर रात श्री कृष्णा आश्रम, संन्यास रोड से कनखल पुलिस को गंगा नदी के पार एक टापू पर एक महिला के फंसे होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही थाना कनखल पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और गंगा में तेज़ बहाव को देखते हुए जल पुलिस टीम को भी बुलाया गया। जल पुलिस ने नाव के ज़रिए टापू तक पहुँचकर महिला को सुरक्षित बाहर निकाला।

रेस्क्यू के बाद महिला को उपचार के लिए 108 एम्बुलेंस से जिला चिकित्सालय भेजा गया। पूछताछ में महिला ने अपना नाम मैमवती, उम्र 55 वर्ष, पति लखन, और निवास गैहरब, पलवल (हरियाणा) बताया। उसने अपने पुत्रों के नाम सुरेंद्र और मुकेश बताए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, महिला गंगा स्नान करते समय बहकर इस टापू पर पहुँच गई थी।

पुलिस द्वारा महिला के परिजनों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। कनखल पुलिस और जल पुलिस की इस त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से हरियाणा निवासी महिला की जान सुरक्षित बचाई जा सकी।
    user_Dpk Chauhan
    Dpk Chauhan
    Farmer हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    1 hr ago
  • जबलपुर में, कुछ लड़के किन्नर के वेशभूषा में ट्रेन यात्रियों से जबरन उगाही का धंधा करते थे।
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    जबलपुर में, कुछ लड़के किन्नर के वेशभूषा में ट्रेन यात्रियों से जबरन उगाही का धंधा करते थे।
    user_Rajkumar mehra press reporter
    Rajkumar mehra press reporter
    Real Estate Agent विकास नगर, देहरादून, उत्तराखंड•
    16 hrs ago
  • हरिद्वार के सर्वानंद घाट के सामने देहरादून से दिल्ली जा रही एक चलती बस में अचानक भीषण आग लग गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह घटना बस से डीजल लीक होने के कारण सामने आई है। देखते ही देखते आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया और यात्रियों का सारा सामान तथा लगेज बस के साथ जलकर खाक हो गया। हालांकि, बस चालक की सूझबूझ और सतर्कता के चलते एक बड़ा हादसा टल गया। चालक और सभी यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बस से बाहर निकाल लिया गया, जिन्होंने अपनी जान बचाने के लिए बस से कूदना पड़ा। इस हादसे में किसी के भी हताहत होने की सूचना नहीं है। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर सफलतापूर्वक काबू पाया गया।
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    हरिद्वार के सर्वानंद घाट के सामने देहरादून से दिल्ली जा रही एक चलती बस में अचानक भीषण आग लग गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह घटना बस से डीजल लीक होने के कारण सामने आई है।

देखते ही देखते आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया और यात्रियों का सारा सामान तथा लगेज बस के साथ जलकर खाक हो गया। हालांकि, बस चालक की सूझबूझ और सतर्कता के चलते एक बड़ा हादसा टल गया। चालक और सभी यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बस से बाहर निकाल लिया गया, जिन्होंने अपनी जान बचाने के लिए बस से कूदना पड़ा।

इस हादसे में किसी के भी हताहत होने की सूचना नहीं है। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर सफलतापूर्वक काबू पाया गया।
    user_राजकुमार अग्रवाल डोईवाला रिपोर
    राजकुमार अग्रवाल डोईवाला रिपोर
    Lawyer डोईवाला, देहरादून, उत्तराखंड•
    15 hrs ago
  • हरिद्वार में सर्वानंद घाट के पास आज एक चलती बस में अचानक आग लग गई, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही यातायात पुलिस और कोतवाली नगर पुलिस की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और संबंधित विभागों के समन्वय से आग पर शीघ्र काबू पा लिया गया। पुलिस के अनुसार, आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी व्यक्ति के हताहत होने या घायल होने की कोई सूचना नहीं है। समय पर चलाए गए बचाव और राहत कार्यों के कारण एक बड़ा हादसा टल गया। आग लगने के बाद कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ, लेकिन पुलिस द्वारा तुरंत आवश्यक कार्रवाई करते हुए यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से सामान्य कर दिया गया। पुलिस प्रशासन ने जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना देने की अपील की है।
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    हरिद्वार में सर्वानंद घाट के पास आज एक चलती बस में अचानक आग लग गई, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही यातायात पुलिस और कोतवाली नगर पुलिस की टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और संबंधित विभागों के समन्वय से आग पर शीघ्र काबू पा लिया गया।

पुलिस के अनुसार, आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी व्यक्ति के हताहत होने या घायल होने की कोई सूचना नहीं है। समय पर चलाए गए बचाव और राहत कार्यों के कारण एक बड़ा हादसा टल गया।

आग लगने के बाद कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ, लेकिन पुलिस द्वारा तुरंत आवश्यक कार्रवाई करते हुए यातायात व्यवस्था को सुचारू रूप से सामान्य कर दिया गया। पुलिस प्रशासन ने जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल पुलिस को सूचना देने की अपील की है।
    user_A Bharat News 10
    A Bharat News 10
    Local News Reporter हरिद्वार, हरिद्वार, उत्तराखंड•
    4 hrs ago
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