प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत जारी अनुदान और उसके वास्तविक उपयोग की स्थिति स्पष्ट हो सकती है प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में करोड़ों के फर्जीवाड़े का आरोप, शिकायतकर्ता ने मंत्री के करीबी पर लगाए गंभीर सवाल तय मत्स्य आहार योजनाओं में अनियमितता का दावा, विभागीय कार्यप्रणाली पर भी उठे प्रश्न अम्बेडकरनगर। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत करोड़ों रुपये के सरकारी अनुदान में कथित अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोपों को लेकर जनपद में नया विवाद खड़ा हो गया है। विकास खंड जहांगीरगंज क्षेत्र के ग्राम जोतपुर-जोल्हापुर निवासी साकाराज साहनी पर शिकायतकर्ता शैलेंद्र कुमार ने गंभीर आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायत में दावा किया गया है कि राजनीतिक प्रभाव और विभागीय सांठगांठ के जरिए योजनाओं का लाभ बड़े पैमाने पर अपने परिवार और रिश्तेदारों को दिलाया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत साकाराज साहनी ने अपने चाचा, भाइयों तथा अन्य रिश्तेदारों के नाम पर विभिन्न परियोजनाओं में लगभग 20 करोड़ रुपये तक का सरकारी अनुदान प्राप्त किया। आरोप है कि जिन परियोजनाओं के नाम पर अनुदान स्वीकृत हुआ, उनमें से कई का धरातल पर संचालन नहीं दिखाई देता। शिकायतकर्ता का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों में योजनाएं सक्रिय दर्शाई गई हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग है। मामले को और गंभीर बनाते हुए शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अम्बेडकरनगर के अलावा महाराजगंज, आजमगढ़, गोरखपुर और खलीलाबाद जैसे जिलों में भी साकाराज साहनी के रिश्तेदारों के नाम पर करोड़ों रुपये का अनुदान लिया गया। शिकायत में साले अनिल कुमार, साली ललिता समेत अन्य परिजनों के नाम का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि करीब 10 करोड़ रुपये के अतिरिक्त अनुदान का लाभ विभिन्न रिश्तेदारों के नाम पर लिया गया, जबकि अधिकांश परियोजनाएं कागजों तक सीमित हैं। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि मत्स्य पालन विभाग की योजनाओं के नाम पर लोगों को सरकारी अनुदान दिलाने का झांसा देकर धन उगाही की गई। आरोप है कि योजना स्वीकृति के बदले कमीशन लिया जाता था और प्रभावशाली लोगों के जरिए लाभार्थियों का चयन प्रभावित किया जाता रहा। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया कि यदि करोड़ों रुपये का अनुदान जारी हुआ है तो जनपद में अब तक कोई बड़ी मत्स्य आहार मिल पूर्ण रूप से संचालित क्यों नहीं हो सकी। शिकायत में राजनीतिक संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि साकाराज साहनी निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मत्स्य राज्य मंत्री डॉ. संजय निषाद के बेहद करीबी माने जाते हैं और इसी प्रभाव के कारण विभागीय स्तर पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। आरोप यह भी लगाया गया कि मंत्री के कार्यक्रमों और होटल खर्च तक का भुगतान साकाराज साहनी द्वारा किया जाता है। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले साकाराज साहनी ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से संपत्ति अर्जित की है। आरोपों में लग्जरी वाहन स्कॉर्पियो-एन खरीदने सहित अन्य संपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि जहांगीरगंज थाने में उनके खिलाफ शिकायत होने पर भी प्रभाव के कारण कार्रवाई नहीं की जाती। मामले में मत्स्य पालन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि विभाग में वर्षों से जमे कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि विभागीय स्तर पर पारदर्शिता का अभाव है और लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती के कारण योजनाओं में मनमानी बढ़ी है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक आरोपित पक्ष या संबंधित विभागीय अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाती है तो प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत जारी अनुदान और उसके वास्तविक उपयोग की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत जारी अनुदान और उसके वास्तविक उपयोग की स्थिति स्पष्ट हो सकती है प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में करोड़ों के फर्जीवाड़े का आरोप, शिकायतकर्ता ने मंत्री के करीबी पर लगाए गंभीर सवाल तय मत्स्य आहार योजनाओं में अनियमितता का दावा, विभागीय कार्यप्रणाली पर भी उठे प्रश्न अम्बेडकरनगर। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत करोड़ों रुपये के सरकारी अनुदान में कथित अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोपों को लेकर जनपद में नया विवाद खड़ा हो गया है। विकास खंड जहांगीरगंज क्षेत्र के ग्राम जोतपुर-जोल्हापुर निवासी साकाराज साहनी पर शिकायतकर्ता शैलेंद्र कुमार ने गंभीर आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। शिकायत में दावा किया गया है कि राजनीतिक प्रभाव और विभागीय सांठगांठ के जरिए योजनाओं का लाभ बड़े पैमाने पर अपने परिवार और रिश्तेदारों को दिलाया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत साकाराज साहनी ने अपने चाचा, भाइयों तथा अन्य रिश्तेदारों के नाम पर विभिन्न परियोजनाओं में लगभग 20 करोड़ रुपये तक का सरकारी अनुदान प्राप्त किया। आरोप है कि जिन परियोजनाओं के नाम पर अनुदान स्वीकृत हुआ, उनमें से कई का धरातल पर संचालन नहीं दिखाई देता। शिकायतकर्ता का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों में योजनाएं सक्रिय दर्शाई गई हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग है। मामले को और गंभीर बनाते हुए शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अम्बेडकरनगर के अलावा महाराजगंज, आजमगढ़, गोरखपुर और खलीलाबाद जैसे जिलों में भी साकाराज साहनी के रिश्तेदारों के नाम पर करोड़ों रुपये का अनुदान लिया गया। शिकायत में साले अनिल कुमार, साली ललिता समेत अन्य परिजनों के नाम का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि करीब 10 करोड़ रुपये के अतिरिक्त अनुदान का लाभ विभिन्न रिश्तेदारों के नाम पर लिया गया, जबकि अधिकांश परियोजनाएं कागजों तक सीमित हैं। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि मत्स्य पालन विभाग की योजनाओं के नाम पर लोगों को सरकारी अनुदान दिलाने का झांसा देकर धन उगाही की गई। आरोप है कि योजना स्वीकृति के बदले कमीशन लिया जाता था और प्रभावशाली लोगों के जरिए लाभार्थियों का चयन प्रभावित किया जाता रहा। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया कि यदि करोड़ों रुपये का अनुदान जारी हुआ है तो जनपद में अब तक कोई बड़ी मत्स्य आहार मिल पूर्ण रूप से संचालित क्यों नहीं हो सकी। शिकायत में राजनीतिक संरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि साकाराज साहनी निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मत्स्य राज्य मंत्री डॉ. संजय निषाद के बेहद करीबी माने जाते हैं और इसी प्रभाव के कारण विभागीय स्तर पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। आरोप यह भी लगाया गया कि मंत्री के कार्यक्रमों और होटल खर्च तक का भुगतान साकाराज साहनी द्वारा किया जाता है। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले साकाराज साहनी ने पिछले कुछ वर्षों में तेजी से संपत्ति अर्जित की है। आरोपों में लग्जरी वाहन स्कॉर्पियो-एन खरीदने सहित अन्य संपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि जहांगीरगंज थाने में उनके खिलाफ शिकायत होने पर भी प्रभाव के कारण कार्रवाई नहीं की जाती। मामले में मत्स्य पालन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि विभाग में वर्षों से जमे कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि विभागीय स्तर पर पारदर्शिता का अभाव है और लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती के कारण योजनाओं में मनमानी बढ़ी है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक आरोपित पक्ष या संबंधित विभागीय अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाती है तो प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत जारी अनुदान और उसके वास्तविक उपयोग की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
- उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर में प्राचीन केवटला मठ की जमीन को लेकर विवाद गरमा गया है। यहाँ एक लेखपाल पर ₹50 हजार रिश्वत मांगने का आरोप लगा, जिसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने उस पर हमला कर दिया। ग्रामीण और बाबा मनीष दास मठ की जमीन बेचने की कथित साजिश का विरोध कर रहे हैं, जिसमें प्रशासनिक भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।1
- *अज्ञात कारणों से मिला माधवपुर गांव में मिला गोवंश का शव मौके पर जयसिंहपुर पुलिस पहुंची* जनपद सुल्तानपुर के कोतवाली जयसिंहपुर क्षेत्र के अंतर्गत माधवपुर ग्राम हाईवे रोड के बगल श्री रामचंद्र नारायण स्कूल के सामने की घटना है जहां पर सुबह ही दर्जनों गोवंश का मृत शरीर दिखने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया मौके पर जयसिंहपुर पुलिस पहुंच कर जांच में जुट गई है।4
- पंजाब में बिहार के लड़कों को बेरहमी से पीटा गया पंजाब में यह कोई नई बात नहीं है हर बार चहे बिहार का हो या युपी का थोडी सी गलती की सज़ा ज्यादा मिलती है पुलिस भी बिहार के लड़कों की गलती देती है1
- Jay ghatna Gram Sabha Etawah ki hai dance mein kuchh pagal Ho Gaye bakchod ho gaye hain Mar Gaye DJ Rohit1
- सुल्तानपुर के मुडिला बाजार स्थित राम जानकी मंदिर परिसर में भव्य संगीतमयी श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। अयोध्या और प्रयाग से पधारे कथा व्यास पंडित अमरनाथ शास्त्री व मानस माधुरी सुनीता शास्त्री के प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को भक्तिरस में डुबो दिया। इस आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक एकता का अनुपम संगम बताया गया।1
- उत्तर प्रदेश के धम्मौर में दबंगों ने एक दलित विधवा की ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा कर निर्माण शुरू कर दिया है। स्थगन आदेश के बावजूद पुलिस सुनवाई नहीं कर रही, जिससे परेशान महिला को जातिसूचक गालियाँ और जान से मारने की धमकियाँ मिल रही हैं।1
- बैंक या छलावा? नीलामी के नाम पर बैंक ऑफ इंडिया ने फंसाया, 18 महीने बाद भी खरीदार दर-दर को मोहताज अजीत मिश्रा (खोजी) अम्बेडकरनगर। क्या सरकारी बैंक अब 'सफेदपोश सूदखोरों' की तरह काम करने लगे हैं? क्या आम जनता की मेहनत की कमाई हड़पना ही अब बैंकिंग का नया नियम है? अम्बेडकरनगर में बैंक ऑफ इंडिया की कार्यप्रणाली ने इन सवालों को जन्म दे दिया है। मामला एक नीलामी का है, जहाँ बैंक ने पैसे तो झटक लिए, लेकिन कब्जा दिलाने के नाम पर 18 महीनों से खरीदार को 'तारीख पर तारीख' दे रहा है। नीलामी के नाम पर बड़ा 'खेल' पीड़िता निष्ठा पाण्डेय ने बैंक के झांसे में आकर एक मकान की नीलामी में हिस्सा लिया और अपनी गाढ़ी कमाई के 25 लाख रुपये बैंक के खाते में डाल दिए। बैंक ने पैसा लेते समय जो तत्परता दिखाई, वह कब्जा दिलाने के वक्त गायब हो गई। आज डेढ़ साल (18 महीने) बीत जाने के बाद भी खरीदार अपने ही खरीदे हुए घर की चौखट लांघने को तरस रहा है। डीएम की बैठक या बहानेबाजी की भेंट? हैरानी की बात यह है कि बैंक अपनी नाकामी का ठीकरा प्रशासन के सिर फोड़ रहा है। बैंक का तर्क है कि “डीएम की बैठक नहीं हो पा रही है”, इसलिए कब्जा नहीं मिल रहा। सवाल यह है कि क्या बैंक ऑफ इंडिया इतना लाचार है कि वह एक प्रशासनिक आदेश का पालन नहीं करवा पा रहा? या फिर सच यह है कि बैंक ने कब्जा सुनिश्चित किए बिना ही नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर जनता को गुमराह किया? ब्याज और सूदखोरों के जाल में फंसी पीड़िता बैंक की इस लापरवाही ने निष्ठा पाण्डेय को दोहरी मार झेलने पर मजबूर कर दिया है। नीलामी की राशि जुटाने के लिए उन्होंने भारी ब्याज पर कर्ज लिया था। आज स्थिति यह है कि एक तरफ बैंक कब्जा नहीं दे रहा, और दूसरी तरफ सूदखोरों का दबाव पीड़िता का जीना मुहाल किए हुए है। अगर इस बीच पीड़िता के साथ कोई अनहोनी होती है, तो क्या बैंक ऑफ इंडिया इसकी जिम्मेदारी लेगा? SARFAESI एक्ट की धज्जियां नियमों के मुताबिक, SARFAESI Act के तहत बैंक को यह सुनिश्चित करना होता है कि नीलामी की गई संपत्ति विवाद मुक्त और कब्जे के लिए तैयार हो। लेकिन अम्बेडकरनगर के इस मामले में बैंक ने सारे नियमों को ताक पर रख दिया। जनता पूछ रही है सवाल: क्या बैंक ने जानबूझकर विवादित संपत्ति को 'क्लीन' बताकर नीलाम किया? 18 महीने तक खरीदार के 25 लाख रुपये दबाकर रखने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? क्या जिले का प्रशासन बैंक की इस मनमानी से अनजान है? जांच की मांग तेज अब यह मामला केवल एक संपत्ति विवाद नहीं, बल्कि बैंकिंग प्रणाली के भरोसे का कत्ल है। स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषी बैंक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज कर दी है। पीड़िता ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द कब्जा न मिला, तो वे उग्र आंदोलन को विवश होंगी। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया बैंक प्रबंधन जागता है या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।1
- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भाजपा नेता चेतन तिवारी पर बदमाशों ने जानलेवा हमला कर दिया। भीड़भाड़ वाले तालकटोरा क्षेत्र में ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई गईं, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। गंभीर रूप से घायल नेता अस्पताल में भर्ती हैं; पुलिस बदमाशों की तलाश में जुटी है।1