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रायगढ़ जिले में चरणबद्ध तरीके से शुरू होंगे 18 गौधाम,पहले चरण में 6 का होगा संचालन निर्देश जारी।
Raigarh Chhattisgarh
रायगढ़ जिले में चरणबद्ध तरीके से शुरू होंगे 18 गौधाम,पहले चरण में 6 का होगा संचालन निर्देश जारी।
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- तिलकेजा पंचायत में करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप जनपद सदस्य ने कलेक्टर से कि शिकायत1
- भगवती मानव कल्याण संगठन द्वारा नशा विरोधी आंदोलन चलाया जा रहा है अवैध शराब पकड़ी जा रही है1
- Good Touch-Bad Touch से साइबर अपराध तक, रतनपुर पुलिस ने छात्राओं को किया जागरूक रतनपुर पुलिस ने स्वामी आत्मानंद कन्या स्कूल में महिला एवं बाल सुरक्षा को लेकर चेतना जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में छात्राओं को Good Touch-Bad Touch, POCSO एक्ट, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध, ऑनलाइन फ्रॉड और नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। पुलिस ने छात्राओं को 112, 1098 और 181 जैसे महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी देते हुए विपरीत परिस्थितियों में निडर होकर आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को जागरूक, सुरक्षित और सशक्त बनाना रहा।2
- रायगढ़ जिले में अगस्त में मिलेगा तीन महीने का राशन,शासन के आदेश पर तैयारियां तेज।1
- *जशपुर भूमि महाघोटाला: 11 साल पुराना जमीन सौदा, ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी चूक और प्रशासनिक मिलीभगत से रची गई साजिश की परत-दर-परत इनसाइड स्टोरी...* जशपुर। जिले में प्रशासनिक लापरवाही, पटवारियों की मिलीभगत और भू-माफियाओं के आपराधिक गठजोड़ का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ही कृषि जमीन को वैध रूप से बेचने के वर्षों बाद, ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी खामी का फायदा उठाकर उसी जमीन की दोबारा फर्जी रजिस्ट्री कराने का एक बड़ा खेल उजागर हुआ है। इस पूरे प्रकरण में पीड़ित खरीदार पिछले एक दशक से न्याय के लिए तहसीलों से लेकर पुलिस मुख्यालय तक की ठोकरें खाने को मजबूर है, लेकिन रसूखदारों के आगे कानून के हाथ भी बेबस नजर आते हैं। *परत-दर-परत खुली आपराधिक साजिश की दास्तान...* * चरण 1: वैध तरीके से हुआ था जमीन का सौदा (वर्ष 2015) : पीड़ित रविकान्त शर्मा ने 11 मई 2015 को उपपंजीयक कार्यालय बगीचा में विधिवत स्टाम्प शुल्क अदा करते हुए विक्रेता रमेश प्रसाद से ग्राम सन्ना स्थित खसरा नंबर 1764/2278/6 (रकबा 0.29 हे.) का बैनामा कराया था। इस सौदे में गवाहों (संदीप राम भगत और नरेश कुमार पटेल) की मौजूदगी में पूरा प्रतिफल नकद चुकाया गया था। उस समय कानूनी प्रक्रिया के तहत जमीन का नामांतरण हुआ और पीड़ित के नाम पर शासकीय ऋणपुस्तिका (पुस्तिका क्रमांक: P-1368589) भी जारी की गई थी। * चरण 2: पटवारी की तकनीकी चूक ने दिया फर्जीवाड़े को जन्म : वर्षों बाद जब राजस्व अभिलेखों को डिजिटाइज्ड कर 'भुइयां' ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा था, तब हल्का पटवारी की बड़ी लापरवाही सामने आई। कागजों पर नाम दर्ज होने के बावजूद, ऑनलाइन पोर्टल पर तकनीकी त्रुटि के कारण विक्रेता रमेश प्रसाद का नाम ही मुख्य रूप से प्रदर्शित होता रहा। * चरण 3: लालच में आकर रची गई फर्जी रजिस्ट्री की साजिश : ऑनलाइन पोर्टल पर अपना पुराना नाम चमकता देख विक्रेता रमेश प्रसाद की नीयत में खोट आ गया। उसने अपने भतीजे रीशु केसरी (प्रियांशु केशरी) के साथ मिलकर एक आपराधिक षड्यंत्र रचा। दोनों को अच्छी तरह मालूम था कि यह जमीन पहले ही वैध रूप से बिक चुकी है और रमेश प्रसाद के सभी स्वत्व समाप्त हो चुके हैं। इसके बावजूद, ऑनलाइन रिकॉर्ड का फायदा उठाते हुए उन्होंने उसी खसरा नंबर की एक और 'फर्जी रजिस्ट्री' प्रियांशु केशरी के नाम पर करवा दी। *प्रशासनिक चौखट से लेकर पुलिस दरबार तक लंबी कानूनी जंग दर-दर भटकता पीड़ित :* जब 18 जून 2025 को पीड़ित को इस दोहरी रजिस्ट्री के षड्यंत्र की भनक लगी, तो उसने फौरन थाना सन्ना, पुलिस अधीक्षक (SP) जशपुर, अनुविभागीय अधिकारी (SDO राजस्व) बगीचा, उपपंजीयक और कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इन शिकायतों के बाद आनन-फानन में उस अवैध रजिस्ट्री के नामांतरण की प्रक्रिया पर रोक लगाई गई। *तहसीलदार न्यायालय का ऐतिहासिक आदेश (16 जून 2026) :* मामले की लंबी सुनवाई के बाद, तहसीलदार सन्ना के न्यायालय ने राजस्व प्रकरण क्रमांक 202603032500023/अ-6/2025-26 में यह स्पष्ट माना कि मूल खरीदार रविकान्त शर्मा का दावा पूर्णतः वैध है। न्यायालय ने 16 जून 2026 को स्पष्ट आदेश पारित किया कि विक्रेता रमेश प्रसाद का नाम विलोपित कर खसरा नंबर 1764/2278/6 पर वैध क्रेता रविकान्त शर्मा का नाम दर्ज किया जाए और हल्का पटवारी को अभिलेख दुरुस्त करने का कड़ा निर्देश दिया गया। *नया मोड़ : न्यायालय के आदेश को ठेंगा, भ्रष्ट तंत्र की साठगांठ -* न्यायालय से न्याय मिलने के बावजूद भ्रष्टाचार का ऐसा खेल सामने आया जिसने सबको हैरान कर दिया। आरोप है कि आरोपी पक्ष (प्रियांशु केशरी) ने स्थानीय राजस्व व तकनीकी अमले के साथ साठगांठ कर ली और तहसीलदार के स्पष्ट आदेश के उलट, पोर्टल पर फिर से हेरफेर कर प्रियांशु केशरी का नाम दर्ज कराने का कुत्सित प्रयास किया गया। जब पीड़ित ने तहसील कार्यालय में इस बाबत जानकारी चाही, तो नायब तहसीलदार रोशनी तिर्की द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया। कलेक्टर कार्यालय में गुहार लगाने के बावजूद जब कोई ठोस और त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला शीर्ष प्रशासनिक चौखट तक जा पहुंचा। *अब डीजीपी (DGP) के दरबार में गुहार :* उठी सख्त FIR की मांग स्थानीय प्रशासन और राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत और लगातार मिल रही मानसिक प्रताड़ना से त्रस्त होकर पीड़ित रविकान्त शर्मा ने अब सीधे छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) को विस्तृत शिकायत प्रेषित की है। शिकायत के माध्यम से यह पुरजोर मांग की गई है कि : * धोखाधड़ी, कूट रचना और षड्यंत्र में लिप्त मुख्य आरोपी रमेश प्रसाद और उसके भतीजे प्रियांशु केशरी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक और सख्त धाराओं के तहत तत्काल FIR दर्ज की जाए। * इस पूरी फर्जी रजिस्ट्री प्रक्रिया को कानूनी रूप से शून्य (Null and Void) घोषित किया जाए। * इस पूरे घटनाक्रम में संलिप्त भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय विभागीय जाँच कराई जाए, ताकि आम जनता का न्याय व्यवस्था से भरोसा न उठे।4
- हेपेटाइटिस से बचाव के लिए जागरूकता शिविर, आयुर्वेद एवं योग चिकित्सा विशेषज्ञों ने दिए स्वास्थ्य संबंधी सुझाव कोरबा में वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे के अवसर पर लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट और आयुष मेडिकल एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में नि:शुल्क आयुर्वेद एवं योग चिकित्सा परामर्श शिविर का आयोजन किया गया। निहारिका रोड स्थित पतंजलि चिकित्सालय में आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में अंचलवासियों ने स्वास्थ्य परामर्श का लाभ लिया। शिविर में छत्तीसगढ़ के अनुभवी आयुर्वेद चिकित्सा विशेषज्ञ नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा सहित धरमजयगढ़ के डॉ. खुर्शीद खान, पेंड्रा के डॉ. सोमेश कुशवाहा और पंतोरा के डॉ. सुरेंद्र मिश्रा ने मरीजों को हेपेटाइटिस यानी यकृत शोथ से बचाव, उपचार और जीवनशैली से जुड़ी जरूरी जानकारी दी। डॉ. नागेंद्र शर्मा ने बताया कि मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तंबाकू, शराब, पित्तवर्धक आहार और जरूरत से ज्यादा भोजन जैसी आदतें लिवर के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने पीलापन, गहरे रंग का पेशाब, अत्यधिक थकान, जी मिचलाना, भूख कम लगना, उल्टी और पेट में दर्द या सूजन जैसे लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर चिकित्सकीय जांच कराने की सलाह दी।वहीं डॉ. खुर्शीद खान ने हेपेटाइटिस से बचाव के लिए नशे से दूर रहने और जीवनशैली को बेहतर बनाने पर जोर दिया। डॉ. सोमेश कुशवाहा ने सात्विक और संतुलित आहार लेने की सलाह दी, जबकि डॉ. सुरेंद्र मिश्रा ने नियमित योग और प्राणायाम को स्वास्थ्य के लिए उपयोगी बताया। शिविर में लिवर स्वास्थ्य के लिए यकृत बूस्टर क्वाथ का नि:शुल्क सेवन कराया गया। इसके साथ ही लिवर के स्वास्थ्य से संबंधित पुस्तिकाएं भी लोगों को नि:शुल्क वितरित की गईं।कार्यक्रम में डॉ. प्रवीण श्रीवास, डॉ. विवेक साहू सहित श्री शिव औषधालय की संचालिका प्रतिभा शर्मा और अन्य सहयोगियों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिविर का उद्देश्य लोगों को हेपेटाइटिस के प्रति जागरूक करने के साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।कोरबा में आयोजित इस जागरूकता शिविर के जरिए लोगों को लिवर के स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेने का संदेश दिया गया।4
- चार दिन बाद बाढ़ से निकाली गई कार, पति-पत्नी एक-दूसरे का हाथ थामे मिले; पंजाब की निजी गोताखोर टीम ने किया रेस्क्यू, रो पड़ी पूरी भीड़ सारंगढ़-बिलाईगढ़ (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला ब्लॉक में लात नाला हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। चार दिनों तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद बुधवार को बाढ़ के पानी में बह गई कार को बाहर निकाला गया। कार के भीतर पूर्व सरपंच देवनारायण पटेल और उनकी पत्नी सविता पटेल के शव मिले। सबसे भावुक कर देने वाला दृश्य यह था कि दोनों आखिरी क्षण तक एक-दूसरे का हाथ थामे हुए थे। रविवार शाम देवनारायण पटेल अपनी पत्नी के साथ कार से सारंगढ़ मार्ग से गुजर रहे थे। इसी दौरान माधोपाली के पास उफनते लात नाला को पार करते समय कार अनियंत्रित होकर तेज बहाव में बह गई। बताया जाता है कि कार करीब डेढ़ किलोमीटर तक पानी के साथ बह गई थी। हादसे के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और डीडीआरएफ की टीमें लगातार तीन दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाती रहीं। छत्तीसगढ़ के चार जिलों से पहुंची विशेषज्ञ टीमों ने अथक प्रयास किए, लेकिन कार का पता नहीं चल सका। इसके बाद मंगलवार देर रात पंजाब से एक निजी गोताखोर टीम मौके पर पहुंची। बुधवार सुबह करीब नौ बजे टीम ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया और कुछ ही समय में कार की सटीक लोकेशन का पता लगा लिया। प्रशासन और ग्रामीणों की मदद से रस्सियों के सहारे कार को पानी से बाहर निकाला गया। जब कार का दरवाजा खोला गया तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। पति-पत्नी कार की पिछली सीट पर एक-दूसरे का हाथ थामे मिले। यह दृश्य इतना मार्मिक था कि रेस्क्यू में शामिल अनुभवी गोताखोर भी भावुक हो उठे। टीम के सदस्यों ने बताया कि करीब 37 वर्षों के रेस्क्यू अनुभव में उन्होंने पहली बार ऐसा हृदयविदारक दृश्य देखा। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। इस बीच स्थानीय लोगों ने कार और शवों को खोज निकालने वाली पंजाब की निजी गोताखोर टीम का आभार व्यक्त किया। यह हादसा न केवल बाढ़ के दौरान बरती जाने वाली सावधानी की अहमियत को याद दिलाता है, बल्कि जीवन के अंतिम क्षणों तक साथ निभाने वाले इस दंपती के अटूट रिश्ते की मार्मिक कहानी भी बयां करता है।3