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*जशपुर भूमि महाघोटाला: 11 साल पुराना जमीन सौदा, ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी चूक और प्रशासनिक मिलीभगत से रची गई साजिश की परत-दर-परत इनसाइड स्टोरी...* जशपुर। जिले में प्रशासनिक लापरवाही, पटवारियों की मिलीभगत और भू-माफियाओं के आपराधिक गठजोड़ का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ही कृषि जमीन को वैध रूप से बेचने के वर्षों बाद, ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी खामी का फायदा उठाकर उसी जमीन की दोबारा फर्जी रजिस्ट्री कराने का एक बड़ा खेल उजागर हुआ है। इस पूरे प्रकरण में पीड़ित खरीदार पिछले एक दशक से न्याय के लिए तहसीलों से लेकर पुलिस मुख्यालय तक की ठोकरें खाने को मजबूर है, लेकिन रसूखदारों के आगे कानून के हाथ भी बेबस नजर आते हैं। *परत-दर-परत खुली आपराधिक साजिश की दास्तान...* * चरण 1: वैध तरीके से हुआ था जमीन का सौदा (वर्ष 2015) : पीड़ित रविकान्त शर्मा ने 11 मई 2015 को उपपंजीयक कार्यालय बगीचा में विधिवत स्टाम्प शुल्क अदा करते हुए विक्रेता रमेश प्रसाद से ग्राम सन्ना स्थित खसरा नंबर 1764/2278/6 (रकबा 0.29 हे.) का बैनामा कराया था। इस सौदे में गवाहों (संदीप राम भगत और नरेश कुमार पटेल) की मौजूदगी में पूरा प्रतिफल नकद चुकाया गया था। उस समय कानूनी प्रक्रिया के तहत जमीन का नामांतरण हुआ और पीड़ित के नाम पर शासकीय ऋणपुस्तिका (पुस्तिका क्रमांक: P-1368589) भी जारी की गई थी। * चरण 2: पटवारी की तकनीकी चूक ने दिया फर्जीवाड़े को जन्म : वर्षों बाद जब राजस्व अभिलेखों को डिजिटाइज्ड कर 'भुइयां' ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा था, तब हल्का पटवारी की बड़ी लापरवाही सामने आई। कागजों पर नाम दर्ज होने के बावजूद, ऑनलाइन पोर्टल पर तकनीकी त्रुटि के कारण विक्रेता रमेश प्रसाद का नाम ही मुख्य रूप से प्रदर्शित होता रहा। * चरण 3: लालच में आकर रची गई फर्जी रजिस्ट्री की साजिश : ऑनलाइन पोर्टल पर अपना पुराना नाम चमकता देख विक्रेता रमेश प्रसाद की नीयत में खोट आ गया। उसने अपने भतीजे रीशु केसरी (प्रियांशु केशरी) के साथ मिलकर एक आपराधिक षड्यंत्र रचा। दोनों को अच्छी तरह मालूम था कि यह जमीन पहले ही वैध रूप से बिक चुकी है और रमेश प्रसाद के सभी स्वत्व समाप्त हो चुके हैं। इसके बावजूद, ऑनलाइन रिकॉर्ड का फायदा उठाते हुए उन्होंने उसी खसरा नंबर की एक और 'फर्जी रजिस्ट्री' प्रियांशु केशरी के नाम पर करवा दी। *प्रशासनिक चौखट से लेकर पुलिस दरबार तक लंबी कानूनी जंग दर-दर भटकता पीड़ित :* जब 18 जून 2025 को पीड़ित को इस दोहरी रजिस्ट्री के षड्यंत्र की भनक लगी, तो उसने फौरन थाना सन्ना, पुलिस अधीक्षक (SP) जशपुर, अनुविभागीय अधिकारी (SDO राजस्व) बगीचा, उपपंजीयक और कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इन शिकायतों के बाद आनन-फानन में उस अवैध रजिस्ट्री के नामांतरण की प्रक्रिया पर रोक लगाई गई। *तहसीलदार न्यायालय का ऐतिहासिक आदेश (16 जून 2026) :* मामले की लंबी सुनवाई के बाद, तहसीलदार सन्ना के न्यायालय ने राजस्व प्रकरण क्रमांक 202603032500023/अ-6/2025-26 में यह स्पष्ट माना कि मूल खरीदार रविकान्त शर्मा का दावा पूर्णतः वैध है। न्यायालय ने 16 जून 2026 को स्पष्ट आदेश पारित किया कि विक्रेता रमेश प्रसाद का नाम विलोपित कर खसरा नंबर 1764/2278/6 पर वैध क्रेता रविकान्त शर्मा का नाम दर्ज किया जाए और हल्का पटवारी को अभिलेख दुरुस्त करने का कड़ा निर्देश दिया गया। *नया मोड़ : न्यायालय के आदेश को ठेंगा, भ्रष्ट तंत्र की साठगांठ -* न्यायालय से न्याय मिलने के बावजूद भ्रष्टाचार का ऐसा खेल सामने आया जिसने सबको हैरान कर दिया। आरोप है कि आरोपी पक्ष (प्रियांशु केशरी) ने स्थानीय राजस्व व तकनीकी अमले के साथ साठगांठ कर ली और तहसीलदार के स्पष्ट आदेश के उलट, पोर्टल पर फिर से हेरफेर कर प्रियांशु केशरी का नाम दर्ज कराने का कुत्सित प्रयास किया गया। जब पीड़ित ने तहसील कार्यालय में इस बाबत जानकारी चाही, तो नायब तहसीलदार रोशनी तिर्की द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया। कलेक्टर कार्यालय में गुहार लगाने के बावजूद जब कोई ठोस और त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला शीर्ष प्रशासनिक चौखट तक जा पहुंचा। *अब डीजीपी (DGP) के दरबार में गुहार :* उठी सख्त FIR की मांग स्थानीय प्रशासन और राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत और लगातार मिल रही मानसिक प्रताड़ना से त्रस्त होकर पीड़ित रविकान्त शर्मा ने अब सीधे छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) को विस्तृत शिकायत प्रेषित की है। शिकायत के माध्यम से यह पुरजोर मांग की गई है कि : * धोखाधड़ी, कूट रचना और षड्यंत्र में लिप्त मुख्य आरोपी रमेश प्रसाद और उसके भतीजे प्रियांशु केशरी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक और सख्त धाराओं के तहत तत्काल FIR दर्ज की जाए। * इस पूरी फर्जी रजिस्ट्री प्रक्रिया को कानूनी रूप से शून्य (Null and Void) घोषित किया जाए। * इस पूरे घटनाक्रम में संलिप्त भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय विभागीय जाँच कराई जाए, ताकि आम जनता का न्याय व्यवस्था से भरोसा न उठे।

9 hrs ago
user_Ajit gupta
Ajit gupta
Local News Reporter पत्थलगाँव, जशपुर, छत्तीसगढ़•
9 hrs ago

*जशपुर भूमि महाघोटाला: 11 साल पुराना जमीन सौदा, ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी चूक और प्रशासनिक मिलीभगत से रची गई साजिश की परत-दर-परत इनसाइड स्टोरी...* जशपुर। जिले में प्रशासनिक लापरवाही, पटवारियों की मिलीभगत और भू-माफियाओं के आपराधिक गठजोड़ का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ही कृषि जमीन को वैध रूप से बेचने के वर्षों बाद, ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी खामी का फायदा उठाकर उसी जमीन की दोबारा फर्जी रजिस्ट्री कराने का एक बड़ा खेल उजागर हुआ है। इस पूरे प्रकरण में पीड़ित खरीदार पिछले एक दशक से न्याय के लिए तहसीलों से लेकर पुलिस मुख्यालय तक की ठोकरें खाने को मजबूर है, लेकिन रसूखदारों के आगे कानून के हाथ भी बेबस नजर आते हैं। *परत-दर-परत खुली आपराधिक साजिश की दास्तान...* * चरण 1: वैध तरीके से हुआ था जमीन का सौदा (वर्ष 2015) : पीड़ित रविकान्त शर्मा ने 11 मई 2015 को उपपंजीयक कार्यालय बगीचा में विधिवत स्टाम्प शुल्क अदा करते हुए विक्रेता रमेश प्रसाद से ग्राम सन्ना स्थित खसरा नंबर 1764/2278/6 (रकबा 0.29 हे.) का बैनामा कराया था। इस सौदे में गवाहों (संदीप राम भगत और नरेश कुमार पटेल) की मौजूदगी में पूरा प्रतिफल नकद चुकाया गया

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था। उस समय कानूनी प्रक्रिया के तहत जमीन का नामांतरण हुआ और पीड़ित के नाम पर शासकीय ऋणपुस्तिका (पुस्तिका क्रमांक: P-1368589) भी जारी की गई थी। * चरण 2: पटवारी की तकनीकी चूक ने दिया फर्जीवाड़े को जन्म : वर्षों बाद जब राजस्व अभिलेखों को डिजिटाइज्ड कर 'भुइयां' ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा था, तब हल्का पटवारी की बड़ी लापरवाही सामने आई। कागजों पर नाम दर्ज होने के बावजूद, ऑनलाइन पोर्टल पर तकनीकी त्रुटि के कारण विक्रेता रमेश प्रसाद का नाम ही मुख्य रूप से प्रदर्शित होता रहा। * चरण 3: लालच में आकर रची गई फर्जी रजिस्ट्री की साजिश : ऑनलाइन पोर्टल पर अपना पुराना नाम चमकता देख विक्रेता रमेश प्रसाद की नीयत में खोट आ गया। उसने अपने भतीजे रीशु केसरी (प्रियांशु केशरी) के साथ मिलकर एक आपराधिक षड्यंत्र रचा। दोनों को अच्छी तरह मालूम था कि यह जमीन पहले ही वैध रूप से बिक चुकी है और रमेश प्रसाद के सभी स्वत्व समाप्त हो चुके हैं। इसके बावजूद, ऑनलाइन रिकॉर्ड का फायदा उठाते हुए उन्होंने उसी खसरा नंबर की एक और 'फर्जी रजिस्ट्री' प्रियांशु केशरी के नाम पर करवा दी। *प्रशासनिक चौखट से लेकर पुलिस दरबार तक लंबी कानूनी जंग दर-दर भटकता

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पीड़ित :* जब 18 जून 2025 को पीड़ित को इस दोहरी रजिस्ट्री के षड्यंत्र की भनक लगी, तो उसने फौरन थाना सन्ना, पुलिस अधीक्षक (SP) जशपुर, अनुविभागीय अधिकारी (SDO राजस्व) बगीचा, उपपंजीयक और कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इन शिकायतों के बाद आनन-फानन में उस अवैध रजिस्ट्री के नामांतरण की प्रक्रिया पर रोक लगाई गई। *तहसीलदार न्यायालय का ऐतिहासिक आदेश (16 जून 2026) :* मामले की लंबी सुनवाई के बाद, तहसीलदार सन्ना के न्यायालय ने राजस्व प्रकरण क्रमांक 202603032500023/अ-6/2025-26 में यह स्पष्ट माना कि मूल खरीदार रविकान्त शर्मा का दावा पूर्णतः वैध है। न्यायालय ने 16 जून 2026 को स्पष्ट आदेश पारित किया कि विक्रेता रमेश प्रसाद का नाम विलोपित कर खसरा नंबर 1764/2278/6 पर वैध क्रेता रविकान्त शर्मा का नाम दर्ज किया जाए और हल्का पटवारी को अभिलेख दुरुस्त करने का कड़ा निर्देश दिया गया। *नया मोड़ : न्यायालय के आदेश को ठेंगा, भ्रष्ट तंत्र की साठगांठ -* न्यायालय से न्याय मिलने के बावजूद भ्रष्टाचार का ऐसा खेल सामने आया जिसने सबको हैरान कर दिया। आरोप है कि आरोपी पक्ष (प्रियांशु केशरी) ने स्थानीय राजस्व व तकनीकी अमले के साथ साठगांठ कर ली और तहसीलदार के स्पष्ट आदेश के उलट, पोर्टल पर फिर से हेरफेर

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कर प्रियांशु केशरी का नाम दर्ज कराने का कुत्सित प्रयास किया गया। जब पीड़ित ने तहसील कार्यालय में इस बाबत जानकारी चाही, तो नायब तहसीलदार रोशनी तिर्की द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया। कलेक्टर कार्यालय में गुहार लगाने के बावजूद जब कोई ठोस और त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला शीर्ष प्रशासनिक चौखट तक जा पहुंचा। *अब डीजीपी (DGP) के दरबार में गुहार :* उठी सख्त FIR की मांग स्थानीय प्रशासन और राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत और लगातार मिल रही मानसिक प्रताड़ना से त्रस्त होकर पीड़ित रविकान्त शर्मा ने अब सीधे छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) को विस्तृत शिकायत प्रेषित की है। शिकायत के माध्यम से यह पुरजोर मांग की गई है कि : * धोखाधड़ी, कूट रचना और षड्यंत्र में लिप्त मुख्य आरोपी रमेश प्रसाद और उसके भतीजे प्रियांशु केशरी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक और सख्त धाराओं के तहत तत्काल FIR दर्ज की जाए। * इस पूरी फर्जी रजिस्ट्री प्रक्रिया को कानूनी रूप से शून्य (Null and Void) घोषित किया जाए। * इस पूरे घटनाक्रम में संलिप्त भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय विभागीय जाँच कराई जाए, ताकि आम जनता का न्याय व्यवस्था से भरोसा न उठे।

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    छात्रों पर कार्रवाई को लेकर विपक्ष का हंगामा, प्रमोद तिवारी ने अमित शाह से मांगा जवाब
राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी का केंद्र सरकार पर तीखा हमला।
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    सावन पर्व की तैयारियां तेज, शंकरघाट सेवा समिति ने जेसीबी से कराई मंदिर परिसर की साफ-सफाई
अंबिकापुर। भगवान शिव के पावन श्रावण (सावन) मास के शुभारंभ को लेकर शंकरघाट सेवा समिति द्वारा तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं। इसी क्रम में समिति के तत्वावधान में शंकरघाट मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र की जेसीबी मशीन लगाकर व्यापक साफ-सफाई कराई गई, ताकि सावन माह में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सावन मास का प्रारंभ 30 जुलाई 2026 से माना जा रहा है।
सफाई अभियान के दौरान समिति के अध्यक्ष एवं मंदिर के पुजारी पंडित राधेश्याम गुप्ता, उपाध्यक्ष शिव राम, कृष्णा यादव, सचिव राजशेखर पांडेय तथा संरक्षक विधेश्वर शरद सिंहदेव (बिंकी बाबा) सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि सावन माह में प्रतिदिन बड़ी संख्या में शिवभक्त जलाभिषेक एवं दर्शन के लिए शंकरघाट पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, स्वच्छता एवं सुव्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सभी तैयारियां तेजी से की जा रही हैं।
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    Himanshu raj Raj
    Social Media Manager अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
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  • किसान के खेत में लगे धान को ट्रैक्टर से रौंदा सालभर पहले सागौन पौधे भी उजाड़े,थाना प्रभारी से की शिकायत कार्रवाई की मांग।
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    किसान के खेत में लगे धान को ट्रैक्टर से रौंदा सालभर पहले सागौन पौधे भी उजाड़े,थाना प्रभारी से की शिकायत कार्रवाई की मांग।
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    Raigarh Chhattisgarh
    रायगढ़, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    17 min ago
  • *जशपुर भूमि महाघोटाला: 11 साल पुराना जमीन सौदा, ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी चूक और प्रशासनिक मिलीभगत से रची गई साजिश की परत-दर-परत इनसाइड स्टोरी...* जशपुर। जिले में प्रशासनिक लापरवाही, पटवारियों की मिलीभगत और भू-माफियाओं के आपराधिक गठजोड़ का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ही कृषि जमीन को वैध रूप से बेचने के वर्षों बाद, ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी खामी का फायदा उठाकर उसी जमीन की दोबारा फर्जी रजिस्ट्री कराने का एक बड़ा खेल उजागर हुआ है। इस पूरे प्रकरण में पीड़ित खरीदार पिछले एक दशक से न्याय के लिए तहसीलों से लेकर पुलिस मुख्यालय तक की ठोकरें खाने को मजबूर है, लेकिन रसूखदारों के आगे कानून के हाथ भी बेबस नजर आते हैं। *परत-दर-परत खुली आपराधिक साजिश की दास्तान...* * चरण 1: वैध तरीके से हुआ था जमीन का सौदा (वर्ष 2015) : पीड़ित रविकान्त शर्मा ने 11 मई 2015 को उपपंजीयक कार्यालय बगीचा में विधिवत स्टाम्प शुल्क अदा करते हुए विक्रेता रमेश प्रसाद से ग्राम सन्ना स्थित खसरा नंबर 1764/2278/6 (रकबा 0.29 हे.) का बैनामा कराया था। इस सौदे में गवाहों (संदीप राम भगत और नरेश कुमार पटेल) की मौजूदगी में पूरा प्रतिफल नकद चुकाया गया था। उस समय कानूनी प्रक्रिया के तहत जमीन का नामांतरण हुआ और पीड़ित के नाम पर शासकीय ऋणपुस्तिका (पुस्तिका क्रमांक: P-1368589) भी जारी की गई थी। * चरण 2: पटवारी की तकनीकी चूक ने दिया फर्जीवाड़े को जन्म : वर्षों बाद जब राजस्व अभिलेखों को डिजिटाइज्ड कर 'भुइयां' ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा था, तब हल्का पटवारी की बड़ी लापरवाही सामने आई। कागजों पर नाम दर्ज होने के बावजूद, ऑनलाइन पोर्टल पर तकनीकी त्रुटि के कारण विक्रेता रमेश प्रसाद का नाम ही मुख्य रूप से प्रदर्शित होता रहा। * चरण 3: लालच में आकर रची गई फर्जी रजिस्ट्री की साजिश : ऑनलाइन पोर्टल पर अपना पुराना नाम चमकता देख विक्रेता रमेश प्रसाद की नीयत में खोट आ गया। उसने अपने भतीजे रीशु केसरी (प्रियांशु केशरी) के साथ मिलकर एक आपराधिक षड्यंत्र रचा। दोनों को अच्छी तरह मालूम था कि यह जमीन पहले ही वैध रूप से बिक चुकी है और रमेश प्रसाद के सभी स्वत्व समाप्त हो चुके हैं। इसके बावजूद, ऑनलाइन रिकॉर्ड का फायदा उठाते हुए उन्होंने उसी खसरा नंबर की एक और 'फर्जी रजिस्ट्री' प्रियांशु केशरी के नाम पर करवा दी। *प्रशासनिक चौखट से लेकर पुलिस दरबार तक लंबी कानूनी जंग दर-दर भटकता पीड़ित :* जब 18 जून 2025 को पीड़ित को इस दोहरी रजिस्ट्री के षड्यंत्र की भनक लगी, तो उसने फौरन थाना सन्ना, पुलिस अधीक्षक (SP) जशपुर, अनुविभागीय अधिकारी (SDO राजस्व) बगीचा, उपपंजीयक और कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इन शिकायतों के बाद आनन-फानन में उस अवैध रजिस्ट्री के नामांतरण की प्रक्रिया पर रोक लगाई गई। *तहसीलदार न्यायालय का ऐतिहासिक आदेश (16 जून 2026) :* मामले की लंबी सुनवाई के बाद, तहसीलदार सन्ना के न्यायालय ने राजस्व प्रकरण क्रमांक 202603032500023/अ-6/2025-26 में यह स्पष्ट माना कि मूल खरीदार रविकान्त शर्मा का दावा पूर्णतः वैध है। न्यायालय ने 16 जून 2026 को स्पष्ट आदेश पारित किया कि विक्रेता रमेश प्रसाद का नाम विलोपित कर खसरा नंबर 1764/2278/6 पर वैध क्रेता रविकान्त शर्मा का नाम दर्ज किया जाए और हल्का पटवारी को अभिलेख दुरुस्त करने का कड़ा निर्देश दिया गया। *नया मोड़ : न्यायालय के आदेश को ठेंगा, भ्रष्ट तंत्र की साठगांठ -* न्यायालय से न्याय मिलने के बावजूद भ्रष्टाचार का ऐसा खेल सामने आया जिसने सबको हैरान कर दिया। आरोप है कि आरोपी पक्ष (प्रियांशु केशरी) ने स्थानीय राजस्व व तकनीकी अमले के साथ साठगांठ कर ली और तहसीलदार के स्पष्ट आदेश के उलट, पोर्टल पर फिर से हेरफेर कर प्रियांशु केशरी का नाम दर्ज कराने का कुत्सित प्रयास किया गया। जब पीड़ित ने तहसील कार्यालय में इस बाबत जानकारी चाही, तो नायब तहसीलदार रोशनी तिर्की द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया। कलेक्टर कार्यालय में गुहार लगाने के बावजूद जब कोई ठोस और त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला शीर्ष प्रशासनिक चौखट तक जा पहुंचा। *अब डीजीपी (DGP) के दरबार में गुहार :* उठी सख्त FIR की मांग स्थानीय प्रशासन और राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत और लगातार मिल रही मानसिक प्रताड़ना से त्रस्त होकर पीड़ित रविकान्त शर्मा ने अब सीधे छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) को विस्तृत शिकायत प्रेषित की है। शिकायत के माध्यम से यह पुरजोर मांग की गई है कि : * धोखाधड़ी, कूट रचना और षड्यंत्र में लिप्त मुख्य आरोपी रमेश प्रसाद और उसके भतीजे प्रियांशु केशरी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक और सख्त धाराओं के तहत तत्काल FIR दर्ज की जाए। * इस पूरी फर्जी रजिस्ट्री प्रक्रिया को कानूनी रूप से शून्य (Null and Void) घोषित किया जाए। * इस पूरे घटनाक्रम में संलिप्त भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय विभागीय जाँच कराई जाए, ताकि आम जनता का न्याय व्यवस्था से भरोसा न उठे।
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    *जशपुर भूमि महाघोटाला: 11 साल पुराना जमीन सौदा, ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी चूक और प्रशासनिक मिलीभगत से रची गई साजिश की परत-दर-परत इनसाइड स्टोरी...*
जशपुर। जिले में प्रशासनिक लापरवाही, पटवारियों की मिलीभगत और भू-माफियाओं के आपराधिक गठजोड़ का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ही कृषि जमीन को वैध रूप से बेचने के वर्षों बाद, ऑनलाइन पोर्टल की तकनीकी खामी का फायदा उठाकर उसी जमीन की दोबारा फर्जी रजिस्ट्री कराने का एक बड़ा खेल उजागर हुआ है। इस पूरे प्रकरण में पीड़ित खरीदार पिछले एक दशक से न्याय के लिए तहसीलों से लेकर पुलिस मुख्यालय तक की ठोकरें खाने को मजबूर है, लेकिन रसूखदारों के आगे कानून के हाथ भी बेबस नजर आते हैं।  
*परत-दर-परत खुली आपराधिक साजिश की दास्तान...*
* चरण 1: वैध तरीके से हुआ था जमीन का सौदा (वर्ष 2015) : पीड़ित रविकान्त शर्मा ने 11 मई 2015 को उपपंजीयक कार्यालय बगीचा में विधिवत स्टाम्प शुल्क अदा करते हुए विक्रेता रमेश प्रसाद से ग्राम सन्ना स्थित खसरा नंबर 1764/2278/6 (रकबा 0.29 हे.) का बैनामा कराया था। इस सौदे में गवाहों (संदीप राम भगत और नरेश कुमार पटेल) की मौजूदगी में पूरा प्रतिफल नकद चुकाया गया था। उस समय कानूनी प्रक्रिया के तहत जमीन का नामांतरण हुआ और पीड़ित के नाम पर शासकीय ऋणपुस्तिका (पुस्तिका क्रमांक: P-1368589) भी जारी की गई थी।  
* चरण 2: पटवारी की तकनीकी चूक ने दिया फर्जीवाड़े को जन्म : वर्षों बाद जब राजस्व अभिलेखों को डिजिटाइज्ड कर 'भुइयां' ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा था, तब हल्का पटवारी की बड़ी लापरवाही सामने आई। कागजों पर नाम दर्ज होने के बावजूद, ऑनलाइन पोर्टल पर तकनीकी त्रुटि के कारण विक्रेता रमेश प्रसाद का नाम ही मुख्य रूप से प्रदर्शित होता रहा।  
* चरण 3: लालच में आकर रची गई फर्जी रजिस्ट्री की साजिश : ऑनलाइन पोर्टल पर अपना पुराना नाम चमकता देख विक्रेता रमेश प्रसाद की नीयत में खोट आ गया। उसने अपने भतीजे रीशु केसरी (प्रियांशु केशरी) के साथ मिलकर एक आपराधिक षड्यंत्र रचा। दोनों को अच्छी तरह मालूम था कि यह जमीन पहले ही वैध रूप से बिक चुकी है और रमेश प्रसाद के सभी स्वत्व समाप्त हो चुके हैं। इसके बावजूद, ऑनलाइन रिकॉर्ड का फायदा उठाते हुए उन्होंने उसी खसरा नंबर की एक और 'फर्जी रजिस्ट्री' प्रियांशु केशरी के नाम पर करवा दी।  
*प्रशासनिक चौखट से लेकर पुलिस दरबार तक लंबी कानूनी जंग दर-दर भटकता पीड़ित :* जब 18 जून 2025 को पीड़ित को इस दोहरी रजिस्ट्री के षड्यंत्र की भनक लगी, तो उसने फौरन थाना सन्ना, पुलिस अधीक्षक (SP) जशपुर, अनुविभागीय अधिकारी (SDO राजस्व) बगीचा, उपपंजीयक और कलेक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। इन शिकायतों के बाद आनन-फानन में उस अवैध रजिस्ट्री के नामांतरण की प्रक्रिया पर रोक लगाई गई।  
*तहसीलदार न्यायालय का ऐतिहासिक आदेश (16 जून 2026) :* मामले की लंबी सुनवाई के बाद, तहसीलदार सन्ना के न्यायालय ने राजस्व प्रकरण क्रमांक 202603032500023/अ-6/2025-26 में यह स्पष्ट माना कि मूल खरीदार रविकान्त शर्मा का दावा पूर्णतः वैध है। न्यायालय ने 16 जून 2026 को स्पष्ट आदेश पारित किया कि विक्रेता रमेश प्रसाद का नाम विलोपित कर खसरा नंबर 1764/2278/6 पर वैध क्रेता रविकान्त शर्मा का नाम दर्ज किया जाए और हल्का पटवारी को अभिलेख दुरुस्त करने का कड़ा निर्देश दिया गया।  
*नया मोड़ : न्यायालय के आदेश को ठेंगा, भ्रष्ट तंत्र की साठगांठ -* न्यायालय से न्याय मिलने के बावजूद भ्रष्टाचार का ऐसा खेल सामने आया जिसने सबको हैरान कर दिया। आरोप है कि आरोपी पक्ष (प्रियांशु केशरी) ने स्थानीय राजस्व व तकनीकी अमले के साथ साठगांठ कर ली और तहसीलदार के स्पष्ट आदेश के उलट, पोर्टल पर फिर से हेरफेर कर प्रियांशु केशरी का नाम दर्ज कराने का कुत्सित प्रयास किया गया।  
जब पीड़ित ने तहसील कार्यालय में इस बाबत जानकारी चाही, तो नायब तहसीलदार रोशनी तिर्की द्वारा कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया। कलेक्टर कार्यालय में गुहार लगाने के बावजूद जब कोई ठोस और त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला शीर्ष प्रशासनिक चौखट तक जा पहुंचा।  
*अब डीजीपी (DGP) के दरबार में गुहार :* उठी सख्त FIR की मांग
स्थानीय प्रशासन और राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत और लगातार मिल रही मानसिक प्रताड़ना से त्रस्त होकर पीड़ित रविकान्त शर्मा ने अब सीधे छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) को विस्तृत शिकायत प्रेषित की है।  
शिकायत के माध्यम से यह पुरजोर मांग की गई है कि :
* धोखाधड़ी, कूट रचना और षड्यंत्र में लिप्त मुख्य आरोपी रमेश प्रसाद और उसके भतीजे प्रियांशु केशरी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक और सख्त धाराओं के तहत तत्काल FIR दर्ज की जाए।  
* इस पूरी फर्जी रजिस्ट्री प्रक्रिया को कानूनी रूप से शून्य (Null and Void) घोषित किया जाए।  
* इस पूरे घटनाक्रम में संलिप्त भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय विभागीय जाँच कराई जाए, ताकि आम जनता का न्याय व्यवस्था से भरोसा न उठे।
    user_Ajit gupta
    Ajit gupta
    Local News Reporter पत्थलगाँव, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    9 hrs ago
  • नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को लैलूंगा पुलिस ने चंद घंटों में दबोचा* 🚨 *लैलूंगा पुलिस ने आरोपित को दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तार कर भेजा जेल* 🚨 *रायगढ़ एसएसपी के निर्देशन में नाबालिग और महिला संबंधी शिकायतों पर की जा रही त्वरित कार्रवाई* 🚨 *एसएसपी शशि मोहन सिंह —महिला संबंधी शिकायत पर तत्काल, संवेदनशील और कानूनसम्मत कार्रवाई करना रायगढ़ पुलिस की प्राथमिकता।"* *जुलाई, रायगढ़* । एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह के निर्देशन पर महिला एवं बाल अपराधों के मामलों में त्वरित एवं संवेदनशील कार्रवाई के लिए रायगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘अभियान संवेदना’ के तहत लैलूंगा पुलिस ने कल नाबालिग से दुष्कर्म के एक बेहद संवेदनशील मामले में तत्परता दिखाते हुए आरोपी सूरज विश्वकर्मा (25 वर्ष) को रिपोर्ट दर्ज होने के कुछ ही घंटों के भीतर गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया। जानकारी के अनुसार, 28 जुलाई 2026 को एक महिला थाना लैलूंगा पहुंची और रिपोर्ट दर्ज कराई कि 27 जुलाई 2026 की शाम वह अपनी नातिन को घर पर छोड़कर खेत में रोपाई करने गई थी। वापस लौटने पर बच्ची रो रही थी। पूछताछ करने पर बच्ची ने बताया कि पडोस में रहने वाला सूरज विश्वकर्मा ने उसके साथ कमरे में दुष्कर्म किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी उप निरीक्षक गिरधारी साव ने तत्काल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह को घटना की जानकारी दी। उनके निर्देशन पर पुलिस टीम ने बिना विलंब कार्रवाई करते हुए आरोपी की तलाश शुरू की। पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी फरार होने की फिराक में है, जिस पर तत्काल उसके पडोस गांव ग्राम लिबरा के पास घेराबंदी कर हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपराध स्वीकार किया, जिसके बाद उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह के दिशा निर्देशन एवं एडिशनल एसपी श्री अनिल सोनी तथा डीएसपी श्री सुशांतो बनर्जी के कुशल मार्गदर्शन पर महिला एवं बाल अपराधों के प्रति संवेदनशीलता और त्वरित पुलिस कार्रवाई के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘अभियान संवेदना’ के तहत की गई इस कार्रवाई में थाना प्रभारी उप निरीक्षक गिरधारी साव, उपनिरीक्षक् चन्द्र कुमार सिंगार, एएसआई परमेश्वर सिंह पैंकरा, प्रधान आरक्षक जयशरण चन्द्रा, आरक्षक विनोद कुजूर, शशि उरांव और राजू तिग्गा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 👉 *एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह का संदेश* *"महिला एवं बाल अपराधों के मामलों में रायगढ़ पुलिस की नीति स्पष्ट है—महिला संबंधी शिकायत पर तत्काल, संवेदनशील और कानूनसम्मत कार्रवाई। ऐसे जघन्य अपराधों में शामिल आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाना और अपराधियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।"*
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    नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को लैलूंगा पुलिस ने चंद घंटों में दबोचा*
🚨 *लैलूंगा पुलिस ने आरोपित को दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तार कर भेजा जेल*
🚨 *रायगढ़ एसएसपी के निर्देशन में नाबालिग और महिला संबंधी शिकायतों पर की जा रही त्वरित कार्रवाई*
🚨 *एसएसपी शशि मोहन सिंह —महिला संबंधी  शिकायत पर तत्काल, संवेदनशील और कानूनसम्मत कार्रवाई करना रायगढ़ पुलिस की प्राथमिकता।"*  
*जुलाई, रायगढ़* । एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह के निर्देशन पर महिला एवं बाल अपराधों के मामलों में त्वरित एवं संवेदनशील कार्रवाई के लिए रायगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘अभियान संवेदना’ के तहत लैलूंगा पुलिस ने कल नाबालिग से दुष्कर्म के एक बेहद संवेदनशील मामले में तत्परता दिखाते हुए आरोपी सूरज विश्वकर्मा (25 वर्ष) को रिपोर्ट दर्ज होने के कुछ ही घंटों के भीतर गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।
जानकारी के अनुसार, 28 जुलाई 2026 को एक महिला थाना लैलूंगा पहुंची और रिपोर्ट दर्ज कराई कि 27 जुलाई 2026 की शाम वह अपनी नातिन को घर पर छोड़कर खेत में रोपाई करने गई थी। वापस लौटने पर बच्ची रो रही थी। पूछताछ करने पर बच्ची ने बताया कि पडोस में रहने वाला सूरज विश्वकर्मा ने उसके साथ कमरे में दुष्कर्म किया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी उप निरीक्षक गिरधारी साव ने तत्काल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह को घटना की जानकारी दी। उनके निर्देशन पर पुलिस टीम ने बिना विलंब कार्रवाई करते हुए आरोपी की तलाश शुरू की। पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी फरार होने की फिराक में है, जिस पर तत्काल उसके पडोस गांव ग्राम लिबरा के पास घेराबंदी कर हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपराध स्वीकार किया, जिसके बाद उसे विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह के दिशा निर्देशन एवं एडिशनल एसपी श्री अनिल सोनी तथा डीएसपी श्री सुशांतो बनर्जी के कुशल मार्गदर्शन पर महिला एवं बाल अपराधों के प्रति संवेदनशीलता और त्वरित पुलिस कार्रवाई के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘अभियान संवेदना’ के तहत की गई इस कार्रवाई में थाना प्रभारी उप निरीक्षक गिरधारी साव, उपनिरीक्षक् चन्द्र कुमार सिंगार, एएसआई परमेश्वर सिंह पैंकरा, प्रधान आरक्षक जयशरण चन्द्रा, आरक्षक विनोद कुजूर, शशि उरांव और राजू तिग्गा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
👉 *एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह का संदेश*
*"महिला एवं बाल अपराधों के मामलों में रायगढ़ पुलिस की नीति स्पष्ट है—महिला संबंधी  शिकायत पर तत्काल, संवेदनशील और कानूनसम्मत कार्रवाई। ऐसे जघन्य अपराधों में शामिल आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाना और अपराधियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।"*
    user_Ajit gupta
    Ajit gupta
    Local News Reporter पत्थलगाँव, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    9 hrs ago
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