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श्योपुर- श्योपुर जिले के नवागत पुलिस अधीक्षक मोतीउर रहमान की पहल पर आज यातायात पुलिस ने ग्राम सौंईकलां में की चौपाल, सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमो की दी जानकारी, देहात थाना प्रभारी राहुल रघुवंशी सहित यातायात प्रभारी संजय राजपूत ने ग्रामीणो को किया जागरूक, राहवीर, प्रतिकर योजना सहित कई योजनाओं के प्रति किया जागरूक, सड़क सुरक्षा के प्रति आमजन को दिलाई शपथ।
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श्योपुर- श्योपुर जिले के नवागत पुलिस अधीक्षक मोतीउर रहमान की पहल पर आज यातायात पुलिस ने ग्राम सौंईकलां में की चौपाल, सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमो की दी जानकारी, देहात थाना प्रभारी राहुल रघुवंशी सहित यातायात प्रभारी संजय राजपूत ने ग्रामीणो को किया जागरूक, राहवीर, प्रतिकर योजना सहित कई योजनाओं के प्रति किया जागरूक, सड़क सुरक्षा के प्रति आमजन को दिलाई शपथ।
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- 167 करोड़ की चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की टेस्टिंग व भ्रष्टाचार की जांच की मांग को लेकर किसानों का धरना 1 अगस्त तक खेतों में पानी नहीं पहुंचा तो 2 अगस्त से उग्र आंदोलन होगा – राधेश्याम मीणा मूंड़ला श्योपुर, 27 जुलाई। श्योपुर जिले के 35 गांवों के किसानों के हित में लगभग 167 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की तत्काल टेस्टिंग कराकर किसानों को सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराने तथा परियोजना के निर्माण एवं क्रियान्वयन में हुई अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर दोषी कंपनी, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग को लेकर सोमवार को ग्राम चंद्रपुरा में किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया। दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक चले धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। इस दौरान किसानों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए परियोजना की शीघ्र टेस्टिंग, तकनीकी खामियों को दूर करने, भ्रष्टाचार की जांच तथा किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की मांग की। धरना-प्रदर्शन के पश्चात किसानों ने कलेक्टर, श्योपुर के नाम ज्ञापन सौंपा। किसान नेता राधेश्याम मीणा मूंड़ला ने बताया कि 35 गांवों के किसानों के लिए बनाई गई चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना का क्रियान्वयन सही एवं प्रभावी ढंग से नहीं किया गया। निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही एवं भ्रष्टाचार के कारण आज तक किसानों को परियोजना का लाभ नहीं मिल पाया है। जल संसाधन विभाग ने जून माह में परियोजना की टेस्टिंग कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक परीक्षण प्रारंभ नहीं किया गया। वर्तमान में चंबल मुख्य दाहिनी नहर में पर्याप्त जल प्रवाह होने के बावजूद किसानों को परियोजना का लाभ नहीं मिल रहा है। किसानों ने मांग की कि परियोजना की टेस्टिंग तत्काल प्रारंभ कराई जाए, सभी तकनीकी खामियों को दूर किया जाए, निर्माण एवं क्रियान्वयन में हुई अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए तथा 35 गांवों के किसानों को शीघ्र सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाए। धरना स्थल पर तहसीलदार बड़ौदा सुरेश राठौर एवं सिंचाई विभाग के एसडीओ आर.एन. तिवारी पहुंचे और किसानों से चर्चा की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि परियोजना की टेस्टिंग शीघ्र कराकर किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने की कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान आक्रोशित किसानों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए परियोजना का निर्माण करने वाली कंपनी एवं संबंधित विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। किसान नेता राधेश्याम मीणा मूंड़ला ने कहा कि 167 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लाभ आज तक किसानों को नहीं मिलना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि समय रहते परियोजना का परीक्षण कर उसे चालू नहीं किया गया और किसानों को सिंचाई का पानी उपलब्ध नहीं कराया गया, तो क्षेत्र के किसान बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 1 अगस्त तक किसानों के खेतों में पानी नहीं पहुंचा, तो 2 अगस्त से किसान पुनः धरना-प्रदर्शन शुरू कर उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि किसानों का यह संघर्ष केवल सिंचाई का पानी प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि परियोजना में हुए भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए भी है। धरना-प्रदर्शन में किसान नेता राधेश्याम मीणा मूंड़ला, किसान नेता हनुमान मीणा जैदा, अखिलेश मीणा लूंड, धर्मेंद्र सिंह चंद्रपुरा, मुकेश मीणा हिरनीखेड़ा, सरपंच धर्मराज मीणा लूंड, पूर्व सरपंच शिशुपाल मीणा भसुंदर, शुभम नागर, धर्म सिंह, शंकरलाल भसुंदर, रामभरत रामगांवाड़ी, मानसिंह बैरवा, महावीर सेन, गोकर्ण धाकड़, कुंज बिहारी, रोशन मीणा, गिर्राज मीणा, मनोहर, पवन, गिरिराज, बेनी प्रसाद, प्रदीप धाकड़, रुकमल, चेतन, जुगल किशोर, नंदबिहारी, दादा तिवारी, काशीराम, श्याम गुर्जर, दीनदयाल सेन, राम अवतार, रामसिंह, परीक्षित, दीनबंधु, दीपांशु, शिवचरण, केदार, रामप्रसाद, बिहारीलाल सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान उपस्थित रहे। 1 अगस्त तक खेतों में पानी नहीं पहुंचा तो 2 अगस्त से उग्र आंदोलन होगा – राधेश्याम मीणा मूंड़ला श्योपुर, 27 जुलाई। श्योपुर जिले के 35 गांवों के किसानों के हित में लगभग 167 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की तत्काल टेस्टिंग कराकर किसानों को सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराने तथा परियोजना के निर्माण एवं क्रियान्वयन में हुई अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर दोषी कंपनी, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग को लेकर सोमवार को ग्राम चंद्रपुरा में किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया। दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक चले धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। इस दौरान किसानों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए परियोजना की शीघ्र टेस्टिंग, तकनीकी खामियों को दूर करने, भ्रष्टाचार की जांच तथा किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने की मांग की। धरना-प्रदर्शन के पश्चात किसानों ने कलेक्टर, श्योपुर के नाम ज्ञापन सौंपा। किसान नेता राधेश्याम मीणा मूंड़ला ने बताया कि 35 गांवों के किसानों के लिए बनाई गई चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना का क्रियान्वयन सही एवं प्रभावी ढंग से नहीं किया गया। निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही एवं भ्रष्टाचार के कारण आज तक किसानों को परियोजना का लाभ नहीं मिल पाया है। जल संसाधन विभाग ने जून माह में परियोजना की टेस्टिंग कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक परीक्षण प्रारंभ नहीं किया गया। वर्तमान में चंबल मुख्य दाहिनी नहर में पर्याप्त जल प्रवाह होने के बावजूद किसानों को परियोजना का लाभ नहीं मिल रहा है। किसानों ने मांग की कि परियोजना की टेस्टिंग तत्काल प्रारंभ कराई जाए, सभी तकनीकी खामियों को दूर किया जाए, निर्माण एवं क्रियान्वयन में हुई अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए तथा 35 गांवों के किसानों को शीघ्र सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाए। धरना स्थल पर तहसीलदार बड़ौदा सुरेश राठौर एवं सिंचाई विभाग के एसडीओ आर.एन. तिवारी पहुंचे और किसानों से चर्चा की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि परियोजना की टेस्टिंग शीघ्र कराकर किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने की कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान आक्रोशित किसानों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए परियोजना का निर्माण करने वाली कंपनी एवं संबंधित विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। किसान नेता राधेश्याम मीणा मूंड़ला ने कहा कि 167 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लाभ आज तक किसानों को नहीं मिलना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि समय रहते परियोजना का परीक्षण कर उसे चालू नहीं किया गया और किसानों को सिंचाई का पानी उपलब्ध नहीं कराया गया, तो क्षेत्र के किसान बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 1 अगस्त तक किसानों के खेतों में पानी नहीं पहुंचा, तो 2 अगस्त से किसान पुनः धरना-प्रदर्शन शुरू कर उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि किसानों का यह संघर्ष केवल सिंचाई का पानी प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि परियोजना में हुए भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित कराने के लिए भी है। धरना-प्रदर्शन में किसान नेता राधेश्याम मीणा मूंड़ला, किसान नेता हनुमान मीणा जैदा, अखिलेश मीणा लूंड, धर्मेंद्र सिंह चंद्रपुरा, मुकेश मीणा हिरनीखेड़ा, सरपंच धर्मराज मीणा लूंड, पूर्व सरपंच शिशुपाल मीणा भसुंदर, शुभम नागर, धर्म सिंह, शंकरलाल भसुंदर, रामभरत रामगांवाड़ी, मानसिंह बैरवा, महावीर सेन, गोकर्ण धाकड़, कुंज बिहारी, रोशन मीणा, गिर्राज मीणा, मनोहर, पवन, गिरिराज, बेनी प्रसाद, प्रदीप धाकड़, रुकमल, चेतन, जुगल किशोर, नंदबिहारी, दादा तिवारी, काशीराम, श्याम गुर्जर, दीनदयाल सेन, राम अवतार, रामसिंह, परीक्षित, दीनबंधु, दीपांशु, शिवचरण, केदार, रामप्रसाद, बिहारीलाल सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय किसान उपस्थित रहे।1
- "मैं इस समय कराहल के सलमान्य पर मौजूद हूँ, बिना वैध रजिस्ट्रेशन और बिना योग्य डॉक्टर के यह क्लिनिक संचालित किया जा रहा है। आइए जानते हैं क्या हैं हकीकत और क्या कहते हैं जिम्मेदार।" **डॉक्टर की डिग्री और क्लिनिक का रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र दिखाने का अनुरोध करें।** "यदि यह क्लिनिक वास्तव में बिना आवश्यक अनुमति और योग्य चिकित्सक के संचालित हो रहा है, तो यह मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर विषय है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।" ध्यान रखें: छिपे कैमरे या निजी क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश जैसे कानूनी जोखिमों से बचें। "फर्जी डॉक्टर" जैसे शब्द तभी इस्तेमाल करें जब उसके समर्थन में आधिकारिक दस्तावेज या प्रशासनिक पुष्टि हो। अन्यथा "बिना वैध रजिस्ट्रेशन चलाने का आरोप" या "योग्यता पर सवाल" जैसी भाषा का प्रयोग करें। रिपोर्ट में संबंधित व्यक्ति का पक्ष अवश्य शामिल करें। इससे आपकी रिपोर्ट निष्पक्ष और पत्रकारिता के मानकों के अनुरूप "मैं इस समय कराहल के सलमान्य पर मौजूद हूँ, बिना वैध रजिस्ट्रेशन और बिना योग्य डॉक्टर के यह क्लिनिक संचालित किया जा रहा है। आइए जानते हैं क्या हैं हकीकत और क्या कहते हैं जिम्मेदार।" **डॉक्टर की डिग्री और क्लिनिक का रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र दिखाने का अनुरोध करें।** "यदि यह क्लिनिक वास्तव में बिना आवश्यक अनुमति और योग्य चिकित्सक के संचालित हो रहा है, तो यह मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर विषय है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।" ध्यान रखें: छिपे कैमरे या निजी क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश जैसे कानूनी जोखिमों से बचें। "फर्जी डॉक्टर" जैसे शब्द तभी इस्तेमाल करें जब उसके समर्थन में आधिकारिक दस्तावेज या प्रशासनिक पुष्टि हो। अन्यथा "बिना वैध रजिस्ट्रेशन चलाने का आरोप" या "योग्यता पर सवाल" जैसी भाषा का प्रयोग करें। रिपोर्ट में संबंधित व्यक्ति का पक्ष अवश्य शामिल करें। इससे आपकी रिपोर्ट निष्पक्ष और पत्रकारिता के मानकों के अनुरूप1
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