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बताकर उनको कोप भवन में जाने को कहती है।तब महारानी कोप भवन *रामनगर_रामलीला_के आठवें _दिन_का_प्रसंग,🚩🙏* आज की कथा का शुभारंभ एक क्षेपक कथा से होता है जिसमें नारद जी भगवन राम से मिलने अयोध्या आते हैं।बड़े प्रेम से राम जी नारद जी का पाद्य प्रक्षालन करते है। नारद जी देवताओं की ओर से उन्हें यह कहने आते हैं कि अब वह लीला का समय आ गया जिसमें आप रावण को मारिए और देवता जनों को सनाथ करिए। तब भगवन कहते है कि इंद्र से कहिएगा की मुझे सब स्मरण है और मैं आप लोग के ही कार्यों में लगा हुआ हूं। तत्पश्चात कथा अयोध्या के राज महल से शुरू होता है जहां महाराज दशरथ आईने के सामने अपने केश को सफेद देखकर अपने आप को चौथेपन में देखकर भगवान श्रीराम को राजा बनाने की इच्छा सभी राजमहल के वरिष्ठ लोगों के सामने रखते है। ये सुनकर सभी बहुत प्रसन्न होते है। महाराज गुरु के पास श्री राम जी को महाराज बनाने के सभी उचित प्रबंध को पूछने के लिए जाते है। जब गुरु महाराज के द्वारा राम जी को यह पता चलता है कि उन्हें राजा बनाने की तैयारी की जा रही वो बहुत दुखी होते है।बाबा लिखते है कि,,जनमे एक संग सब भाई। भोजन सयन केलि लरिकाई॥करनबेध उपबीत बिआहा। संग संग सब भए उछाहा॥ अर्थ देखे तो हम सब भाई एक ही साथ जन्मे, खाना, सोना, लड़कपन के खेल-कूद, कनछेदन, यज्ञोपवीत और विवाह आदि उत्सव सब साथ-साथ ही हुए॥ बिमल बंस यहु अनुचित एकू। बंधु बिहाइ बड़ेहि अभिषेकू॥प्रभु सप्रेम पछितानि सुहाई। हरउ भगत मन कै कुटिलाई।पर इस निर्मल वंश में यही एक अनुचित बात हो रही है कि और सब भाइयों को छोड़कर राज्याभिषेक एक बड़े का ही (मेरा ही) होता है। (तुलसीदासजी कहते हैं कि) प्रभु श्री रामचन्द्रजी का यह सुंदर प्रेमपूर्ण पछतावा भक्तों के मन की कुटिलता को हरण करे॥ भगवन इस निर्णय से प्रसन्न नहीं होते। भगवन तो इतने दयालु है कि जब भरत जी वहां नहीं होते तो वो पूरा खेल ही रच देते है कि भरत जी का गुण सभी के सामने आए की वो कितने बड़े धर्मात्मा है। भगवन तो सर्वदा ही अपने भक्तों को ही बड़ाई देना चाहते। मुझे तो जो भी थोड़ा बहुत राम कृपा से भाव आता है कि रावण को तो मारने के लिए भगवन यह लीला तो रचते ही है परंतु भरत जी जैसे धर्मात्मा का गुण लोगो के सामने उजागर हो इसलिए भी भगवन यह खेल रचते है। तत्पश्चात चारो तरफ श्रीराम जी के राजा होने की चर्चा होती है और इसकी चर्चा अयोध्या ही नहीं आकाश में भी होती है ।सभी देवता ये सुनकर अधीर हो जाते है। इंद्र जी माता सरस्वती से अपने अधीर होने का कारण कहते है तब भगवन के ही संकेत से देवी सरस्वती यहां अयोध्या में बैठी मंथरा कुबड़ी की मती को फेर देती है तब वह महारानी केकई के पास जाकर उनको बहुत से कुचाली नीतियों को बताकर उनको कोप भवन में जाने को कहती है।तब महारानी कोप भवन में चली जाती हैं जब महाराज को ये खबर मिलती है तो वो वहां जाते है। महारानी की ये हालत देखकर वो उनके दुख का कारण पूछते है ।जब महाराज राम की सपथ लेते है तब महारानी उनसे दो वर मांगती है एक से भरत को राज्य को दूसरे से श्रीराम को चौदह वर्ष का वनवास मांगती हैं ।ये सुनकर महाराज वैसे हो जाते है जैसे जल के बिना मछली ।।।।।सारे अयोध्या वासी जब महाराज को अगली सुबह राज सभा में नहीं पाते तो मंत्री सुमंत्र को महाराज के पास भजते है। सुमंत्र जी सारा समाचार सुन के राम जी के पास जाते है।। राम जी कोप भवन जाकर पिता कि हालत देखकर दुखी होते है और उनसे उसका कारण पूछते है तब महारानी सभी बात को बताती हैं, राम जी महाराज दशरथ को बहुत समझाते हैं और कहते है मैं वही करूंगा जिसमे कुल की कीर्ति में कलंक ना हो।।सभी अयोध्यावासी तरह तरह की बातें करते है कोई महाराज को दोष तो कोई महारानी को दोष तो कोई भरत जी को तो कोई भाग्य को दोष देता है । तत्पश्चात राम जी माता कौशल्या के पास जाते है । वहां माता उनको मंगल कामना का आशीर्वाद देते है तब भगवान माता से कहते है कि पिता श्री ने मुझे वन का राज्य दिया है, मैं आपसे आज्ञा लेने आया हूं। माता कौशल्या सोच में पड़ जाती है तब राम जी के सचिव, माता कौशल्या को कैकेई जी की सारी कुचाल कहते है। माता कौशल्या जी श्री राम जी से कहती है, हे !पुत्र यदि पिता की आज्ञा हो तो माता को बड़ी जानकर मत जाओ और पिता माता दोऊ वन जाने को कहे तो वन तुमको सौ अयोध्या के समान है और ऐसा वो क्यों न कहे माता जो प्रभु श्री राम की है। वन जाने की सूचना सिया जी को मिलते ही वो व्याकुल मन से प्रभु श्री राम के पास आती है और साथ चलने की बात कहती है।यही आज के कथा का विश्राम हो जाता है ।आज की आरती में मुझे एक दुख की रेखा का अनुभव होता है आज की आरती माता कौशल्या जी के द्वारा होती है जय जय श्री सीता राम👏👏 हर हर महादेव🙌🙌🙌🙌 बोल दे बजरंग बली महाराज की जय👏 संत श्री गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज की जय👏 संत श्री काष्ठ जिह्वा स्वामी जी महाराज की जय👏

1 hr ago
user_गजेन्द्र कुमार सिंह
गजेन्द्र कुमार सिंह
Pindra, Varanasi•
1 hr ago
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बताकर उनको कोप भवन में जाने को कहती है।तब महारानी कोप भवन *रामनगर_रामलीला_के आठवें _दिन_का_प्रसंग,🚩🙏* आज की कथा का शुभारंभ एक क्षेपक कथा से होता है जिसमें नारद जी भगवन राम से मिलने अयोध्या आते हैं।बड़े प्रेम से राम जी नारद जी का पाद्य प्रक्षालन करते है। नारद जी देवताओं की ओर से उन्हें यह कहने आते हैं कि अब वह लीला का समय आ गया जिसमें आप रावण को मारिए और देवता जनों को सनाथ करिए। तब भगवन कहते है कि इंद्र से कहिएगा की मुझे सब स्मरण है और मैं आप लोग के ही कार्यों में लगा हुआ हूं। तत्पश्चात कथा अयोध्या के राज महल से शुरू होता है जहां महाराज दशरथ आईने के सामने अपने केश को सफेद देखकर अपने आप को चौथेपन में देखकर भगवान श्रीराम को राजा बनाने की इच्छा सभी राजमहल के वरिष्ठ लोगों के सामने रखते है। ये सुनकर सभी बहुत प्रसन्न होते है। महाराज गुरु के पास श्री राम जी को महाराज बनाने के सभी उचित प्रबंध को पूछने के लिए जाते है। जब गुरु महाराज के द्वारा राम जी को यह पता चलता है कि उन्हें राजा बनाने की तैयारी की जा रही वो बहुत दुखी होते है।बाबा लिखते है कि,,जनमे एक संग सब भाई। भोजन सयन केलि लरिकाई॥करनबेध उपबीत बिआहा। संग संग सब भए उछाहा॥ अर्थ देखे तो हम सब

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भाई एक ही साथ जन्मे, खाना, सोना, लड़कपन के खेल-कूद, कनछेदन, यज्ञोपवीत और विवाह आदि उत्सव सब साथ-साथ ही हुए॥ बिमल बंस यहु अनुचित एकू। बंधु बिहाइ बड़ेहि अभिषेकू॥प्रभु सप्रेम पछितानि सुहाई। हरउ भगत मन कै कुटिलाई।पर इस निर्मल वंश में यही एक अनुचित बात हो रही है कि और सब भाइयों को छोड़कर राज्याभिषेक एक बड़े का ही (मेरा ही) होता है। (तुलसीदासजी कहते हैं कि) प्रभु श्री रामचन्द्रजी का यह सुंदर प्रेमपूर्ण पछतावा भक्तों के मन की कुटिलता को हरण करे॥ भगवन इस निर्णय से प्रसन्न नहीं होते। भगवन तो इतने दयालु है कि जब भरत जी वहां नहीं होते तो वो पूरा खेल ही रच देते है कि भरत जी का गुण सभी के सामने आए की वो कितने बड़े धर्मात्मा है। भगवन तो सर्वदा ही अपने भक्तों को ही बड़ाई देना चाहते। मुझे तो जो भी थोड़ा बहुत राम कृपा से भाव आता है कि रावण को तो मारने के लिए भगवन यह लीला तो रचते ही है परंतु भरत जी जैसे धर्मात्मा का गुण लोगो के सामने उजागर हो इसलिए भी भगवन यह खेल रचते है। तत्पश्चात चारो तरफ श्रीराम जी के राजा होने की चर्चा होती है और इसकी चर्चा अयोध्या ही नहीं आकाश में भी होती है ।सभी देवता ये सुनकर अधीर हो जाते है। इंद्र जी माता सरस्वती से अपने

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अधीर होने का कारण कहते है तब भगवन के ही संकेत से देवी सरस्वती यहां अयोध्या में बैठी मंथरा कुबड़ी की मती को फेर देती है तब वह महारानी केकई के पास जाकर उनको बहुत से कुचाली नीतियों को बताकर उनको कोप भवन में जाने को कहती है।तब महारानी कोप भवन में चली जाती हैं जब महाराज को ये खबर मिलती है तो वो वहां जाते है। महारानी की ये हालत देखकर वो उनके दुख का कारण पूछते है ।जब महाराज राम की सपथ लेते है तब महारानी उनसे दो वर मांगती है एक से भरत को राज्य को दूसरे से श्रीराम को चौदह वर्ष का वनवास मांगती हैं ।ये सुनकर महाराज वैसे हो जाते है जैसे जल के बिना मछली ।।।।।सारे अयोध्या वासी जब महाराज को अगली सुबह राज सभा में नहीं पाते तो मंत्री सुमंत्र को महाराज के पास भजते है। सुमंत्र जी सारा समाचार सुन के राम जी के पास जाते है।। राम जी कोप भवन जाकर पिता कि हालत देखकर दुखी होते है और उनसे उसका कारण पूछते है तब महारानी सभी बात को बताती हैं, राम जी महाराज दशरथ को बहुत समझाते हैं और कहते है मैं वही करूंगा जिसमे कुल की कीर्ति में कलंक ना हो।।सभी अयोध्यावासी तरह तरह की बातें करते है कोई महाराज को दोष तो कोई महारानी को

दोष तो कोई भरत जी को तो कोई भाग्य को दोष देता है । तत्पश्चात राम जी माता कौशल्या के पास जाते है । वहां माता उनको मंगल कामना का आशीर्वाद देते है तब भगवान माता से कहते है कि पिता श्री ने मुझे वन का राज्य दिया है, मैं आपसे आज्ञा लेने आया हूं। माता कौशल्या सोच में पड़ जाती है तब राम जी के सचिव, माता कौशल्या को कैकेई जी की सारी कुचाल कहते है। माता कौशल्या जी श्री राम जी से कहती है, हे !पुत्र यदि पिता की आज्ञा हो तो माता को बड़ी जानकर मत जाओ और पिता माता दोऊ वन जाने को कहे तो वन तुमको सौ अयोध्या के समान है और ऐसा वो क्यों न कहे माता जो प्रभु श्री राम की है। वन जाने की सूचना सिया जी को मिलते ही वो व्याकुल मन से प्रभु श्री राम के पास आती है और साथ चलने की बात कहती है।यही आज के कथा का विश्राम हो जाता है ।आज की आरती में मुझे एक दुख की रेखा का अनुभव होता है आज की आरती माता कौशल्या जी के द्वारा होती है जय जय श्री सीता राम👏👏 हर हर महादेव🙌🙌🙌🙌 बोल दे बजरंग बली महाराज की जय👏 संत श्री गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज की जय👏 संत श्री काष्ठ जिह्वा स्वामी जी महाराज की जय👏

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  • बताकर उनको कोप भवन में जाने को कहती है।तब महारानी कोप भवन *रामनगर_रामलीला_के आठवें _दिन_का_प्रसंग,🚩🙏* आज की कथा का शुभारंभ एक क्षेपक कथा से होता है जिसमें नारद जी भगवन राम से मिलने अयोध्या आते हैं।बड़े प्रेम से राम जी नारद जी का पाद्य प्रक्षालन करते है। नारद जी देवताओं की ओर से उन्हें यह कहने आते हैं कि अब वह लीला का समय आ गया जिसमें आप रावण को मारिए और देवता जनों को सनाथ करिए। तब भगवन कहते है कि इंद्र से कहिएगा की मुझे सब स्मरण है और मैं आप लोग के ही कार्यों में लगा हुआ हूं। तत्पश्चात कथा अयोध्या के राज महल से शुरू होता है जहां महाराज दशरथ आईने के सामने अपने केश को सफेद देखकर अपने आप को चौथेपन में देखकर भगवान श्रीराम को राजा बनाने की इच्छा सभी राजमहल के वरिष्ठ लोगों के सामने रखते है। ये सुनकर सभी बहुत प्रसन्न होते है। महाराज गुरु के पास श्री राम जी को महाराज बनाने के सभी उचित प्रबंध को पूछने के लिए जाते है। जब गुरु महाराज के द्वारा राम जी को यह पता चलता है कि उन्हें राजा बनाने की तैयारी की जा रही वो बहुत दुखी होते है।बाबा लिखते है कि,,जनमे एक संग सब भाई। भोजन सयन केलि लरिकाई॥करनबेध उपबीत बिआहा। संग संग सब भए उछाहा॥ अर्थ देखे तो हम सब भाई एक ही साथ जन्मे, खाना, सोना, लड़कपन के खेल-कूद, कनछेदन, यज्ञोपवीत और विवाह आदि उत्सव सब साथ-साथ ही हुए॥ बिमल बंस यहु अनुचित एकू। बंधु बिहाइ बड़ेहि अभिषेकू॥प्रभु सप्रेम पछितानि सुहाई। हरउ भगत मन कै कुटिलाई।पर इस निर्मल वंश में यही एक अनुचित बात हो रही है कि और सब भाइयों को छोड़कर राज्याभिषेक एक बड़े का ही (मेरा ही) होता है। (तुलसीदासजी कहते हैं कि) प्रभु श्री रामचन्द्रजी का यह सुंदर प्रेमपूर्ण पछतावा भक्तों के मन की कुटिलता को हरण करे॥ भगवन इस निर्णय से प्रसन्न नहीं होते। भगवन तो इतने दयालु है कि जब भरत जी वहां नहीं होते तो वो पूरा खेल ही रच देते है कि भरत जी का गुण सभी के सामने आए की वो कितने बड़े धर्मात्मा है। भगवन तो सर्वदा ही अपने भक्तों को ही बड़ाई देना चाहते। मुझे तो जो भी थोड़ा बहुत राम कृपा से भाव आता है कि रावण को तो मारने के लिए भगवन यह लीला तो रचते ही है परंतु भरत जी जैसे धर्मात्मा का गुण लोगो के सामने उजागर हो इसलिए भी भगवन यह खेल रचते है। तत्पश्चात चारो तरफ श्रीराम जी के राजा होने की चर्चा होती है और इसकी चर्चा अयोध्या ही नहीं आकाश में भी होती है ।सभी देवता ये सुनकर अधीर हो जाते है। इंद्र जी माता सरस्वती से अपने अधीर होने का कारण कहते है तब भगवन के ही संकेत से देवी सरस्वती यहां अयोध्या में बैठी मंथरा कुबड़ी की मती को फेर देती है तब वह महारानी केकई के पास जाकर उनको बहुत से कुचाली नीतियों को बताकर उनको कोप भवन में जाने को कहती है।तब महारानी कोप भवन में चली जाती हैं जब महाराज को ये खबर मिलती है तो वो वहां जाते है। महारानी की ये हालत देखकर वो उनके दुख का कारण पूछते है ।जब महाराज राम की सपथ लेते है तब महारानी उनसे दो वर मांगती है एक से भरत को राज्य को दूसरे से श्रीराम को चौदह वर्ष का वनवास मांगती हैं ।ये सुनकर महाराज वैसे हो जाते है जैसे जल के बिना मछली ।।।।।सारे अयोध्या वासी जब महाराज को अगली सुबह राज सभा में नहीं पाते तो मंत्री सुमंत्र को महाराज के पास भजते है। सुमंत्र जी सारा समाचार सुन के राम जी के पास जाते है।। राम जी कोप भवन जाकर पिता कि हालत देखकर दुखी होते है और उनसे उसका कारण पूछते है तब महारानी सभी बात को बताती हैं, राम जी महाराज दशरथ को बहुत समझाते हैं और कहते है मैं वही करूंगा जिसमे कुल की कीर्ति में कलंक ना हो।।सभी अयोध्यावासी तरह तरह की बातें करते है कोई महाराज को दोष तो कोई महारानी को दोष तो कोई भरत जी को तो कोई भाग्य को दोष देता है । तत्पश्चात राम जी माता कौशल्या के पास जाते है । वहां माता उनको मंगल कामना का आशीर्वाद देते है तब भगवान माता से कहते है कि पिता श्री ने मुझे वन का राज्य दिया है, मैं आपसे आज्ञा लेने आया हूं। माता कौशल्या सोच में पड़ जाती है तब राम जी के सचिव, माता कौशल्या को कैकेई जी की सारी कुचाल कहते है। माता कौशल्या जी श्री राम जी से कहती है, हे !पुत्र यदि पिता की आज्ञा हो तो माता को बड़ी जानकर मत जाओ और पिता माता दोऊ वन जाने को कहे तो वन तुमको सौ अयोध्या के समान है और ऐसा वो क्यों न कहे माता जो प्रभु श्री राम की है। वन जाने की सूचना सिया जी को मिलते ही वो व्याकुल मन से प्रभु श्री राम के पास आती है और साथ चलने की बात कहती है।यही आज के कथा का विश्राम हो जाता है ।आज की आरती में मुझे एक दुख की रेखा का अनुभव होता है आज की आरती माता कौशल्या जी के द्वारा होती है जय जय श्री सीता राम👏👏 हर हर महादेव🙌🙌🙌🙌 बोल दे बजरंग बली महाराज की जय👏 संत श्री गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज की जय👏 संत श्री काष्ठ जिह्वा स्वामी जी महाराज की जय👏
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    बताकर उनको कोप भवन में जाने को कहती है।तब महारानी कोप भवन
*रामनगर_रामलीला_के आठवें _दिन_का_प्रसंग,🚩🙏*
आज की कथा का शुभारंभ एक क्षेपक कथा से होता है जिसमें नारद जी भगवन राम से मिलने अयोध्या आते हैं।बड़े प्रेम से राम जी नारद जी का पाद्य प्रक्षालन करते है। नारद जी देवताओं की ओर से उन्हें यह कहने आते हैं कि अब वह लीला का समय आ गया जिसमें आप रावण को मारिए और देवता जनों को सनाथ करिए। तब भगवन कहते है कि इंद्र से कहिएगा की मुझे सब स्मरण है और मैं आप लोग के ही कार्यों में लगा हुआ हूं। तत्पश्चात कथा अयोध्या के राज महल से शुरू होता है जहां महाराज दशरथ आईने के सामने अपने केश को सफेद देखकर अपने आप को चौथेपन में देखकर भगवान श्रीराम को राजा बनाने की इच्छा सभी राजमहल के वरिष्ठ लोगों के सामने रखते है। ये सुनकर सभी बहुत प्रसन्न होते है। महाराज गुरु के पास श्री राम जी को महाराज बनाने के सभी उचित प्रबंध को पूछने के लिए जाते है। जब गुरु महाराज के द्वारा राम जी को यह पता चलता है कि उन्हें राजा बनाने की तैयारी की जा रही वो बहुत दुखी होते है।बाबा लिखते है कि,,जनमे एक संग सब भाई। भोजन सयन केलि लरिकाई॥करनबेध उपबीत बिआहा। संग संग सब भए उछाहा॥ अर्थ देखे तो 
हम सब भाई एक ही साथ जन्मे, खाना, सोना, लड़कपन के खेल-कूद, कनछेदन, यज्ञोपवीत और विवाह आदि उत्सव सब साथ-साथ ही हुए॥
बिमल बंस यहु अनुचित एकू। बंधु बिहाइ बड़ेहि अभिषेकू॥प्रभु सप्रेम पछितानि सुहाई। हरउ भगत मन कै कुटिलाई।पर इस निर्मल वंश में यही एक अनुचित बात हो रही है कि और सब भाइयों को छोड़कर राज्याभिषेक एक बड़े का ही (मेरा ही) होता है। (तुलसीदासजी कहते हैं कि) प्रभु श्री रामचन्द्रजी का यह सुंदर प्रेमपूर्ण पछतावा भक्तों के मन की कुटिलता को हरण करे॥ भगवन इस निर्णय से प्रसन्न नहीं होते। भगवन तो इतने दयालु है कि जब भरत जी वहां नहीं होते तो वो पूरा खेल ही रच देते है कि भरत जी का गुण सभी के सामने आए की वो कितने बड़े धर्मात्मा है। भगवन तो सर्वदा ही अपने भक्तों को ही बड़ाई देना चाहते। मुझे तो जो भी थोड़ा बहुत राम कृपा से भाव आता है कि रावण को तो मारने के लिए भगवन यह लीला तो रचते ही है परंतु भरत जी जैसे धर्मात्मा का गुण लोगो के सामने उजागर हो इसलिए भी भगवन यह खेल रचते है। तत्पश्चात चारो तरफ श्रीराम जी के राजा होने की  चर्चा होती है और इसकी चर्चा अयोध्या ही नहीं आकाश में भी होती है ।सभी देवता ये सुनकर अधीर हो जाते है। इंद्र जी माता सरस्वती से अपने अधीर होने का कारण कहते है तब भगवन के ही संकेत से देवी सरस्वती यहां अयोध्या में बैठी मंथरा कुबड़ी की मती को फेर देती है तब वह महारानी केकई के पास जाकर उनको बहुत से कुचाली नीतियों को बताकर उनको कोप भवन में जाने को कहती है।तब महारानी कोप भवन में चली जाती हैं जब महाराज को ये खबर मिलती है तो वो वहां जाते है। महारानी की ये हालत देखकर वो उनके  दुख का कारण पूछते है ।जब महाराज राम की सपथ लेते है तब महारानी उनसे दो वर मांगती है एक से भरत को राज्य को दूसरे से श्रीराम को चौदह वर्ष का वनवास मांगती हैं ।ये सुनकर महाराज वैसे हो जाते है जैसे जल के बिना मछली ।।।।।सारे अयोध्या वासी जब महाराज को अगली सुबह राज सभा में नहीं पाते तो मंत्री सुमंत्र को महाराज के पास भजते है। सुमंत्र जी सारा समाचार सुन के राम जी के पास जाते है।। राम जी कोप भवन जाकर पिता कि हालत देखकर दुखी होते है और उनसे उसका कारण पूछते है तब महारानी सभी बात को बताती हैं, राम जी महाराज दशरथ को बहुत समझाते हैं और कहते है मैं वही करूंगा जिसमे कुल की कीर्ति में कलंक ना हो।।सभी अयोध्यावासी तरह तरह की बातें करते है कोई महाराज को दोष तो कोई महारानी को दोष तो कोई भरत जी को तो कोई भाग्य को दोष देता है । तत्पश्चात राम जी माता कौशल्या के पास जाते है । वहां माता उनको मंगल कामना का आशीर्वाद देते है तब भगवान माता से कहते है कि पिता श्री ने मुझे वन का राज्य दिया है, मैं आपसे आज्ञा लेने आया हूं। माता कौशल्या सोच में पड़ जाती है तब राम जी के सचिव, माता कौशल्या  को कैकेई जी की सारी कुचाल कहते है। माता कौशल्या जी श्री राम जी से कहती है, हे !पुत्र यदि पिता की आज्ञा हो तो माता को बड़ी जानकर मत जाओ और पिता माता दोऊ वन जाने को कहे तो वन तुमको सौ  अयोध्या के समान है और ऐसा वो क्यों न कहे माता जो प्रभु श्री राम की है। वन जाने की सूचना सिया जी को मिलते ही वो व्याकुल मन से प्रभु श्री राम के पास आती है और साथ चलने की बात कहती है।यही आज के कथा का विश्राम हो जाता है ।आज की आरती में मुझे एक दुख की रेखा का अनुभव होता है आज की आरती माता कौशल्या जी के द्वारा होती है
जय जय श्री सीता राम👏👏
हर हर महादेव🙌🙌🙌🙌
बोल दे बजरंग बली महाराज की जय👏
संत श्री गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज की जय👏
संत श्री काष्ठ जिह्वा स्वामी जी महाराज की जय👏
    user_गजेन्द्र कुमार सिंह
    गजेन्द्र कुमार सिंह
    Pindra, Varanasi•
    1 hr ago
  • मंजूषा नदी में डूबे 14 वर्षीय किशोर का शव करीब 18 घंटे बाद बरामद मंजूषा नदी में डूबे 14 वर्षीय किशोर का शव करीब 18 घंटे बाद बरामद अहरौला। थाना क्षेत्र के शमशाबाद (बरसातीगंज) के पास शुक्रवार दोपहर मंजूषा नदी में नहाने के दौरान डूबे 14 वर्षीय किशोर प्रियांशु गौतम का शव करीब 18 घंटे की तलाश के बाद शनिवार सुबह बरामद कर लिया गया। शव घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर मिला। सजनी अनुसूचित बस्ती निवासी पप्पू गौतम का पुत्र प्रियांशु गौतम शुक्रवार को अपने साथियों के साथ नदी किनारे मछली पकड़ने गया था। दोपहर करीब 12 बजे नहाने के दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। साथियों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। सूचना पर थानाध्यक्ष रामकिशोर शर्मा पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। फूलपुर तहसील के राजस्व निरीक्षक सुनील कुमार और लेखपाल हरिदर्शन भी मौके पर पहुंचे। स्थानीय गोताखोरों के साथ तलाश शुरू की गई। देर रात तक सफलता नहीं मिलने पर रौनापार से प्रशिक्षित गोताखोरों की टीम को भी बुलाया गया। शनिवार सुबह करीब छह बजे नदी में उस स्थान से एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर प्रियांशु का शव बरामद हुआ, जहां वह नहाने के लिए नदी में उतरा था। थानाध्यक्ष रामकिशोर शर्मा ने बताया पुलिस शव को थाने लाकर पंचनामा भरने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रियांशु कक्षा पांच का छात्र था। उसके पिता रोजी के सिलसिले में खाड़ी देश में हैं। घटना से परिवार में कोहराम मच गया है।
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    मंजूषा नदी में डूबे 14 वर्षीय किशोर का शव करीब 18 घंटे बाद बरामद
मंजूषा नदी में डूबे 14 वर्षीय किशोर का शव करीब 18 घंटे बाद बरामद
अहरौला। थाना क्षेत्र के शमशाबाद (बरसातीगंज) के पास शुक्रवार दोपहर मंजूषा नदी में नहाने के दौरान डूबे 14 वर्षीय किशोर प्रियांशु गौतम का शव करीब 18 घंटे की तलाश के बाद शनिवार सुबह बरामद कर लिया गया। शव घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर मिला।
सजनी अनुसूचित बस्ती निवासी पप्पू गौतम का पुत्र प्रियांशु गौतम शुक्रवार को अपने साथियों के साथ नदी किनारे मछली पकड़ने गया था। दोपहर करीब 12 बजे नहाने के दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। साथियों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।
सूचना पर थानाध्यक्ष रामकिशोर शर्मा पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। फूलपुर तहसील के राजस्व निरीक्षक सुनील कुमार और लेखपाल हरिदर्शन भी मौके पर पहुंचे। स्थानीय गोताखोरों के साथ तलाश शुरू की गई। देर रात तक सफलता नहीं मिलने पर रौनापार से प्रशिक्षित गोताखोरों की टीम को भी बुलाया गया।
शनिवार सुबह करीब छह बजे नदी में उस स्थान से एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर प्रियांशु का शव बरामद हुआ, जहां वह नहाने के लिए नदी में उतरा था। थानाध्यक्ष रामकिशोर शर्मा ने बताया पुलिस  शव को थाने लाकर पंचनामा भरने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
प्रियांशु कक्षा पांच का छात्र था। उसके पिता रोजी के सिलसिले में खाड़ी देश में हैं। घटना से परिवार में कोहराम मच गया है।
    user_RUPESH TIWARI
    RUPESH TIWARI
    फूलपुर, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • जौनपुर ब्रेकिंग बड़ी राहत जलालपुर चौराहा से केराकत जाने वाले मार्ग पर स्थित जलालगंज रेलवे फाटक संख्या 30/C जो मरम्मत कार्य के कारण बंद था, वह निर्धारित समय से पहले ही आज शाम को चालू कर दिया गया है। अब आवागमन सुचारू रूप से शुरू हो गया है। जौनपुर ब्रेकिंग बड़ी राहत जलालपुर चौराहा से केराकत जाने वाले मार्ग पर स्थित जलालगंज रेलवे फाटक संख्या 30/C जो मरम्मत कार्य के कारण बंद था, वह निर्धारित समय से पहले ही आज शाम को चालू कर दिया गया है। अब आवागमन सुचारू रूप से शुरू हो गया है। शाम को रास्ता बहाल हो जाने से गांव ग्रामीण में राहगीर बहुत खुशी मिली
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    जौनपुर ब्रेकिंग बड़ी राहत जलालपुर चौराहा से केराकत जाने वाले मार्ग पर स्थित जलालगंज रेलवे फाटक संख्या 30/C जो मरम्मत कार्य के कारण बंद था, वह निर्धारित समय से पहले ही आज शाम को चालू कर दिया गया है। अब आवागमन सुचारू रूप से शुरू हो गया है।
जौनपुर ब्रेकिंग बड़ी राहत जलालपुर चौराहा से केराकत जाने वाले मार्ग पर स्थित जलालगंज रेलवे फाटक संख्या 30/C जो मरम्मत कार्य के कारण बंद था, वह निर्धारित समय से पहले ही आज शाम को चालू कर दिया गया है। अब आवागमन सुचारू रूप से शुरू हो गया है। शाम को रास्ता बहाल हो जाने से गांव ग्रामीण में राहगीर बहुत खुशी मिली
    user_Jitendra bahadur Dubey
    Jitendra bahadur Dubey
    Nurse केराकत, जौनपुर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • ,माँ चंडी धाम मंदिर से चांदी का मुकुट और सोने की नथिया चोरी होने का मामला। जनपद जौनपुर तहसील केराकत क्षेत्र के विकास खंड मुफ्तीगंज के ग्रामसभा विरमपुर केवटी स्थित,माँ चंडी धाम मंदिर से चांदी का मुकुट और सोने की नथिया चोरी होने का मामला।आप लोगो को बतादे कि बीते दिन में,सामने आया है, घटना की मुख्य बातें माँ चंडी धाम मंदिर का शिकायतकर्ता मंदिर के पुजारी राजकिशोर शुक्ला ने बताया कि एक आरोपी एक अज्ञात व्यक्ति जो खुद को जनपद अंबेडकर निवासी योगी कमलेंश नाथ बताकर 19 अगस्त से 21 अगस्त तक मंदिर परिसर में,रुका था।चोरी गया सामान चांदी का मुकुट और सोने की नथिया वारदात का आरोपी साफ-सफाई के दौरान अलमारी की चाबी हासिल कर उसमें रखे आभूषण लेकर फरार हो गया।वही पुलिस कार्रवाई में, पुजारी ने केराकत थाने में,अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है। और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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    ,माँ चंडी धाम मंदिर से चांदी का मुकुट और सोने की नथिया चोरी होने का मामला।
जनपद  जौनपुर तहसील केराकत  क्षेत्र के विकास खंड मुफ्तीगंज के ग्रामसभा विरमपुर केवटी स्थित,माँ चंडी धाम मंदिर से चांदी का मुकुट और सोने की नथिया चोरी होने का मामला।आप लोगो को बतादे कि बीते दिन में,सामने आया है, 
घटना की मुख्य बातें माँ चंडी धाम मंदिर का शिकायतकर्ता मंदिर के पुजारी राजकिशोर शुक्ला ने बताया कि एक आरोपी एक अज्ञात व्यक्ति जो खुद को जनपद अंबेडकर निवासी योगी कमलेंश नाथ बताकर 19 अगस्त से 21 अगस्त तक मंदिर परिसर में,रुका था।चोरी गया सामान चांदी का मुकुट और सोने की नथिया
वारदात का आरोपी साफ-सफाई के दौरान अलमारी की चाबी हासिल कर उसमें रखे आभूषण लेकर फरार हो गया।वही 
पुलिस कार्रवाई में, पुजारी ने केराकत थाने में,अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है। और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
    user_पत्रकार विकास पाठक जनपद जौनपुर
    पत्रकार विकास पाठक जनपद जौनपुर
    Farmer केराकत, जौनपुर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • न्यूज टू इंडिया से सम्पादक हाजी हफीजुल्ला वारसी की खास रिपोर्ट सुल्तानपुर, प्रधानाचार्य राकेश मणि त्रिपाठी सरस्वती विद्या मन्दिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ज्ञान कुंज विवेकानंद नगर सुल्तानपुर में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री एवं राष्ट्र पिता महात्मा गांधी की जयंती धूमधाम से मनाई गई, इस अवसर पर विद्यालय परिसर में प्रधानाचार्य राकेश मणि त्रिपाठी ने ध्वजारोहण किया, वरिष्ठ आचार्य अनिल पाण्डेय ने अतिथि परिचय कराया तत्पश्चात् शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य राकेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि गांधी जी ने सनातन संस्कृति के मूल में समाहित जिन सत्य, अहिंसा और दया आदि पावन विचारों को सम्पूर्ण मानव जीवन में अनुप्राणित करने के व्रत के साथ स्वतंत्रता आन्दोलन में महती भूमिका निभाई, वहीं नैतिक मूल्य पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के जीवन-दर्शन का अभिन्न अंग बन गए, ये महापुरुष सादगी एवं सच्चाई की प्रतिमूर्ति रहे, इनका राष्ट्रीय चरित्र हमारे लिए प्रेरणास्रोत है, गांधी जी ने आत्मनिर्भरता और स्वदेशी का जो संदेश दिया वह हमारे लिए अनुकरणीय है वरिष्ठ आचार्य धनंजय पाण्डेय ने महापुरुष द्वय की जयंती मनाने की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला, कार्यक्रम को उप प्रधानाचार्य रमेश मिश्र, वरिष्ठ आचार्य शरद श्रीवास्तव, सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य ब्रह्म नारायण शुक्ल, संयोजक आचार्य प्रवीण कुमार सिंह ने भी संबोधित किया, कार्यक्रम में विद्यालय के सभी आचार्य बन्धु भगिनी एवं भैया बहनें उपस्थित रहे।
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    न्यूज टू इंडिया से सम्पादक हाजी हफीजुल्ला वारसी की खास रिपोर्ट
सुल्तानपुर, प्रधानाचार्य राकेश मणि त्रिपाठी सरस्वती विद्या मन्दिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ज्ञान कुंज विवेकानंद नगर सुल्तानपुर में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री एवं राष्ट्र पिता महात्मा गांधी की जयंती धूमधाम से मनाई गई, इस अवसर पर विद्यालय परिसर में प्रधानाचार्य राकेश मणि त्रिपाठी ने ध्वजारोहण किया, वरिष्ठ आचार्य अनिल पाण्डेय ने अतिथि परिचय कराया तत्पश्चात् शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य राकेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि गांधी जी ने सनातन संस्कृति के मूल में समाहित जिन सत्य, अहिंसा और दया आदि पावन विचारों को सम्पूर्ण मानव जीवन में अनुप्राणित करने के व्रत के साथ स्वतंत्रता आन्दोलन में महती भूमिका निभाई, वहीं नैतिक मूल्य पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी के जीवन-दर्शन का अभिन्न अंग बन गए, ये महापुरुष सादगी एवं सच्चाई की प्रतिमूर्ति रहे, इनका राष्ट्रीय चरित्र हमारे लिए प्रेरणास्रोत है, गांधी जी ने आत्मनिर्भरता और स्वदेशी का जो संदेश दिया वह हमारे लिए अनुकरणीय है वरिष्ठ आचार्य धनंजय पाण्डेय ने महापुरुष द्वय की जयंती मनाने की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला, कार्यक्रम को उप प्रधानाचार्य रमेश मिश्र, वरिष्ठ आचार्य शरद श्रीवास्तव, सरस्वती शिशु मंदिर के प्रधानाचार्य ब्रह्म नारायण शुक्ल, संयोजक आचार्य प्रवीण कुमार सिंह ने भी संबोधित किया, कार्यक्रम में विद्यालय के सभी आचार्य बन्धु भगिनी एवं भैया बहनें उपस्थित रहे।
    user_NEWS 2 INDIA
    NEWS 2 INDIA
    TV News Anchor सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • आज दोपहर 3 बजे होगा पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान #RajasthanPanchayatElection #PanchayatElection #RajasthanNews #BreakingNews #LatestNews #ElectionNews #RajasthanElection #StateElectionCommission #PanchayatChunav #BreakingUpdate जनता न्यूज़ टीवी
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    आज दोपहर 3 बजे होगा पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान

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जनता न्यूज़ टीवी
    user_जनता न्यूज टीवी
    जनता न्यूज टीवी
    TV News Anchor सदर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • मां की .ममता#सतीश पाल का मां के ऊपर दर्द भरा #song#जन्मदाता #मां ही #पुजा#जितीया#व्रत #jbj#muick#prjent#up#
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    मां की .ममता#सतीश पाल  का  मां के ऊपर दर्द  भरा #song#जन्मदाता #मां ही #पुजा#जितीया#व्रत #jbj#muick#prjent#up#
    user_Satish pal
    Satish pal
    भदोही, भदोही, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • बेनिया में नाबालिग टोटो चालक की दबंगई, पर्यटक महिला को धक्का देकर किया घायल बेनिया में नाबालिग टोटो चालक की दबंगई, पर्यटक महिला को धक्का देकर किया घायल वाराणसी। बेनिया मजार के सामने शुक्रवार को उस समय हंगामा मच गया, जब बाहर से आए पर्यटक परिवार पैदल चल रहे थे तभी पीछे से तेज रफ्तार में नाबालिग टोटो चालक ने जोर से महिला को धक्का मार दिया। मिली जानकारी के अनुसार पर्यटक एक टेंपो से उतर रहे थे। इसी दौरान करीब 12-13 वर्ष के नाबालिग टोटो चालक ने महिला को जोरदार धक्का दे दिया, जिससे वह सड़क पर गिरकर घायल हो गईं। महिला के पैर में गंभीर चोट लगी और खून निकलने लगा।घटना के बाद महिला के साथ मौजूद पति ने टोटो चालक को पकड़ लिया। मौके पर जुटे लोगों ने भी नाबालिग को समझाते हुए पकड़कर पुलिस चौकी पहुंचाया। पर्यटक महिला का उपचार कराया जा रहा है । घटना को लेकर मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। पुलिस चौकी पर नाबालिक ड्राइवर और टोटो खड़ा है।
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    बेनिया में नाबालिग टोटो चालक की दबंगई, पर्यटक महिला को धक्का देकर किया घायल
बेनिया में नाबालिग टोटो चालक की दबंगई, पर्यटक महिला को धक्का देकर किया घायल
वाराणसी। बेनिया मजार के सामने शुक्रवार को उस समय हंगामा मच गया, जब बाहर से आए पर्यटक परिवार पैदल चल रहे थे तभी पीछे से तेज रफ्तार में  नाबालिग टोटो चालक ने जोर से महिला को धक्का मार दिया। मिली जानकारी के अनुसार पर्यटक एक टेंपो से उतर रहे थे। इसी दौरान करीब 12-13 वर्ष के नाबालिग टोटो चालक ने महिला को जोरदार धक्का दे दिया, जिससे वह सड़क पर गिरकर घायल हो गईं। महिला के पैर में गंभीर चोट लगी और खून निकलने लगा।घटना के बाद महिला के साथ मौजूद पति ने टोटो चालक को पकड़ लिया। मौके पर जुटे लोगों ने भी नाबालिग को समझाते हुए पकड़कर पुलिस चौकी पहुंचाया। पर्यटक महिला का उपचार कराया जा रहा है । घटना को लेकर मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। पुलिस चौकी पर नाबालिक ड्राइवर और टोटो खड़ा है।
    user_गजेन्द्र कुमार सिंह
    गजेन्द्र कुमार सिंह
    Pindra, Varanasi•
    2 hrs ago
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