विशेष रिपोर्ट: मनमानी के साये में लोकतंत्र — देश से लेकर जिले तक बेलगाम प्रशासनिक रवैये पर सवाल लोकतांत्रिक ढांचे की मूल नींव ‘कानून के शासन’ और ‘जवाबदेही’ पर आधारित होती है, लेकिन हालिया दौर में केंद्र, राज्य और जिला प्रशासन के स्तर पर मनमाने फैसलों और प्रशासनिक मनमानी की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं। जमीनी मुद्दों की अनदेखी, नीतियों के अचानक क्रियान्वयन और स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की तानाशाही के चलते आम जनता के मन में यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या शासन अब संविधान की भावना के बजाय अपनी सहूलियत और मनमर्जी से चलाया जा रहा है?प्रशासनिक मनमानी के तीन स्तर:राष्ट्रीय स्तर (देश): नीतिगत फैसलों में सार्वजनिक हितधारकों और विपक्ष से पर्याप्त विचार-विमर्श की कमी। कई महत्वपूर्ण अध्यादेशों व नियमों को बिना व्यापक चर्चा के लागू कर देने से नीतिगत अस्थिरता का माहौल बनता है।राज्य स्तर: राजनीतिक प्रतिशोध, लोकलुभावन योजनाओं के नाम पर वित्तीय बजट का अनियोजित प्रयोग और बुलडोजर कार्रवाई या कठोर कानूनों (जैसे गुंडा एक्ट व रासुका) का मनमाना उपयोग। अदालतों ने भी कई बार स्पष्ट किया है कि सख्त कानूनों का दुरुपयोग नागरिकों के अधिकारों का हनन है।जिला स्तर: स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही में भारी कमी। अतिक्रमण हटाने की आड़ में पक्षपातपूर्ण कार्रवाई, शिकायत निवारण तंत्र की विफलता, और नौकरशाही का जनता से संवाद खत्म होना। आम नागरिक को एक छोटे से काम के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।मनमाने रवैये का जनता पर प्रभाव स्थानीय स्तर पर जब जिला प्रशासन और पुलिस विभाग नियमों को ताक पर रखकर फैसले लेते हैं, तो इसका सीधा असर आम नागरिक के अधिकारों पर पड़ता है। विकास कार्य कागजों तक सीमित रह जाते हैं और प्रशासनिक भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।विशेषज्ञों की राय कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग पर सख्त जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक आम जनमानस में असंतोष बढ़ता रहेगा। कार्यपालिका का मुख्य काम संविधान के दायरे में रहकर जनता की सेवा करना है, न कि अपने विशेषाधिकारों का मनमाना प्रदर्शन करना।
विशेष रिपोर्ट: मनमानी के साये में लोकतंत्र — देश से लेकर जिले तक बेलगाम प्रशासनिक रवैये पर सवाल लोकतांत्रिक ढांचे की मूल नींव ‘कानून के शासन’ और ‘जवाबदेही’ पर आधारित होती है, लेकिन हालिया दौर में केंद्र, राज्य और जिला प्रशासन के स्तर पर मनमाने फैसलों और प्रशासनिक मनमानी की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं। जमीनी मुद्दों की अनदेखी, नीतियों के अचानक क्रियान्वयन और स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की तानाशाही के चलते आम जनता के मन में यह सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या शासन अब संविधान की भावना के बजाय अपनी सहूलियत और मनमर्जी से चलाया जा रहा है?प्रशासनिक मनमानी के तीन स्तर:राष्ट्रीय स्तर (देश): नीतिगत फैसलों में सार्वजनिक हितधारकों और विपक्ष से पर्याप्त विचार-विमर्श की कमी। कई महत्वपूर्ण अध्यादेशों व नियमों को बिना व्यापक चर्चा के लागू कर देने से नीतिगत अस्थिरता का माहौल बनता है।राज्य स्तर: राजनीतिक प्रतिशोध, लोकलुभावन योजनाओं के नाम पर वित्तीय बजट का अनियोजित प्रयोग और बुलडोजर कार्रवाई या कठोर कानूनों (जैसे गुंडा एक्ट व रासुका) का मनमाना उपयोग। अदालतों ने भी कई बार स्पष्ट किया है कि सख्त कानूनों का दुरुपयोग नागरिकों के अधिकारों का हनन है।जिला स्तर: स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही में भारी कमी। अतिक्रमण हटाने की आड़ में पक्षपातपूर्ण कार्रवाई, शिकायत निवारण तंत्र की विफलता, और नौकरशाही का जनता से संवाद खत्म होना। आम नागरिक को एक छोटे से काम के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।मनमाने रवैये का जनता पर प्रभाव स्थानीय स्तर पर जब जिला प्रशासन और पुलिस विभाग नियमों को ताक पर रखकर फैसले लेते हैं, तो इसका सीधा असर आम नागरिक के अधिकारों पर पड़ता है। विकास कार्य कागजों तक सीमित रह जाते हैं और प्रशासनिक भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।विशेषज्ञों की राय कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग पर सख्त जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक आम जनमानस में असंतोष बढ़ता रहेगा। कार्यपालिका का मुख्य काम संविधान के दायरे में रहकर जनता की सेवा करना है, न कि अपने विशेषाधिकारों का मनमाना प्रदर्शन करना।
- समाजवादी PDA के मंच से मायावती जी के राजनैतिक क्षेत्र से गायब होने वाले बयान से बहुजन समाज मे आक्रोश। समाजवादी PDA के मंच से मायावती जी के राजनैतिक क्षेत्र से गायब होने वाले बयान से बहुजन समाज मे आक्रोश। Neelam Express रिपोर्टर:- प्रहलाद बौद्ध बात सच की ....1
- barish Ka sambhavna hai sham tak le barish hone ki anuman hai barish Ki sambhavna hai sham tak le barish hone ki purv armaan Hai1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर मऊ पहुंचे ऊर्जा मंत्री एके शर्मा, वृद्धाश्रम में बांटे वस्त्र और फल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर मऊ पहुंचे ऊर्जा मंत्री एके शर्मा, वृद्धाश्रम में बांटे वस्त्र और फल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा मऊ के मोहम्मदाबाद गोहना स्थित वृद्धाश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने बुजुर्गों से मुलाकात की और वस्त्र, फल व मिष्ठान समेत सामग्री का वितरण किया।1
- मऊ में पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर ने सुनीं जनशिकायतें, प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण के निर्देश जनशिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक मऊ कमलेश बहादुर द्वारा पुलिस कार्यालय में जनसुनवाई की गई। इस दौरान फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को शिकायतों के शीघ्र एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए गए। एसपी ने कहा कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त प्रत्येक शिकायत का नियमानुसार निस्तारण कराया जाए तथा पीड़ितों को अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े। अधिकारियों को शिकायतों के निस्तारण में समयबद्धता और पारदर्शिता बनाए रखने के भी निर्देश दिए गए।3
- ग्रामीणों के साथ चकबंदी की उठाई मांग, डीएम को सौंपा ज्ञापन; मीडिया के सामने रखी अपनी बात #चकबंदी #डीएमज्ञापन #ग्रामीणसमस्या #मऊएक्सप्रेसन्यूज1
- हृदय गति रुकने से पंच तत्व में विलीन हुए पूर्व सूबेदार सोभनाथ गुप्ता 🇮🇳हृदय गति रुकने से पंचतत्व में विलीन हुए पूर्व हवलदार {भारतीय सेना} सोभनाथ गुप्ता🇮🇳 चहनियाँ विकास खंड के अंतर्गत स्थित रामगढ़ निवासी शोभनाथ जी का आज हेरिटेज हास्पिटल में ईलाज के दौरान मौत हो गई। शोभनाथ गुप्ता को विगत रात से सीने में दर्द हुआ परिवार के सदस्य उनको आनन फानन में साधन की ब्यवस्था कर बनारस स्थित हेरिटेज हास्पिटल ले गये जहाँ उनका ईलाज चालू हुआ। परिवार के लोग और डाक्टर ने इनको बचाने के लिए पूरा जोर लगा दिया लेकिन सारा कोशिश शोभनाथ जी को जीवन दान न दे सकी अंततः उनकी हृदय गति रुकने से अस्पताल में अपना दम तोड़ दिया। परिवार के लोग आज उनको लेकर घर आये और बडे सम्मान और सौहार्द के साथ अंतिम संस्कार के लिए तैयारी में लग गए। आपको बताते चलें कि शोभनाथ गुप्ता जी भारतीय सेना में एक मजबूत सिपाही के पद पर आसीन होकर देश सेवा काम लगे रहें उनकी कुशल और बीर गाथा से उनका प्रमोशन हवलदार पद तक गया और हवलदार पद से सेवानिवृत हुए। सेवानिवृत होकर घर आने पर भी उनके देश भक्ति का जज्बा नहीं रुका वह हमेशा सामाजिक और देश से संबंधित सभी कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेते थें। शोभनाथ जी के दो बेटे हैं ओमप्रकाश गुप्ता जो भारतीय सेना में सूबेदार पद से रिटायरमेंट हुए हैं और दूसरे सारनाथ गुप्ता जो अपना स्वरोजगार करते हैं और उनके बेटे अमित गुप्ता विशाल गुप्ता और सूरज गुप्ता हैं।और शोभनाथ गुप्ता जी की पत्नी का नाम रामवती देवी है जिनका रो रो कर बुरा हाल है। आज सुबह जब उनका शव गांव में पहुंचातो लोगों की काफी भीड़ थी उन्हें तिरंगा में लपेटकर तिरंगा यात्रा निकाली गई तथा तथा उनके विभाग से संबंधित सभी अधिकारियों व गांव के पूर्व सेना के लोगों ने उनको सलामी दीऔर उनका अंतिम संस्कार के लिए बलुआ घाट पर लाया गया और उनका दाह संस्कार किया गया। इस मौके पर गांव के बहुत से लोग उपस्थित थें सभी लोगों ने मिलकर इस भारतीय सेना के जवान को अंतिम सलामी दी और जय हिंद के घोष से साथ दाह संस्कार किया। रौशन जो वतन का नाम करते हैं 🇮🇳 बाद मरने के उन्हें सब सलाम करते हैं🇮🇳 तारीख उन्हीं की याद रहती है 🇮🇳 जो वतन के लिए खुद को कुर्बान कर देते हैं.🇮🇳।3
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- गाजीपुर समाजवादी पार्टी के सदर ब्लाॅक अध्यक्ष संतोष जी PDA सम्मान समारोह मे।1