" खुद को मौका दें, जीत आपकी है "....................... एक सरकारी स्कूल में संदीप नाम का लड़का पढ़ता था। हमेशा आखिरी बेंच पर बैठता... चुपचाप, जैसे वो खुद को भीड़ से छुपाना चाहता हो। क्योंकि उसे लगता था, मैं कुछ खास नहीं हूँ। क्लास में जब टीचर सवाल पूछते, संदीप नजरें झुका लेता, डरता था कि गलत हो गया तो सब हँसेंगे। एक दिन स्कूल में एक नए सर आए। उन्होंने बोर्ड पर एक छोटा सा वाक्य लिखा- जो कोशिश करता है, वही खास बनता है। फिर उन्होंने बच्चों से पूछा, यहाँ कौन है जिसे लगता है कि वो कुछ नहीं कर सकता? पूरी क्लास चुप, लेकिन धीरे-धीरे संदीप का हाथ उठ गया। सर उसके पास गए, मुस्कुराए और बोले, बहुत अच्छा... क्योंकि अब तुम्हारी शुरुआत हो चुकी है। अगले दिन सर ने संदीप से सिर्फ एक आसान सवाल पूछा। संदीप डरते-डरते खड़ा हुआ, और जवाब दे दिया। जबाब सही था। पहली बार उसके लिए क्लास में ताली बजी, और पहली बार संदीप के चेहरे पर मुस्कान आई। अब यह रोज का सिलसिला बन गया, छोटे-छोटे सवाल... छोटे-छोटे जवाब. और हर दिन एक छोटी जीत। कुछ महीनों बाद, वही संदीप, जो आखिरी बेंच पर छुपता था, अब सबसे आगे बैठने लगा। वार्षिक परीक्षा हुआ, रिजल्ट आया, संदीप का नाम सबसे ऊपर था। टीचर ने कहा- संदीप तो बदल गया। संदीप ने हल्की मुस्कान के साथ कहा-सर, मैं नहीं बदला, बस मैंने खुद को मौका देना शुरू कर दिया। लब्बोलुआब यह, कई बार हम कमजोर नहीं होते, बस खुद को मौका ही नहीं देते। डर खत्म नहीं होता, लेकिन पहला कदम उठाने से छोटा जरूर हो जाता है। यकीन मानें, ज़िंदगी बदलने के लिए बड़ी छलांग नहीं, बस खुद पर भरोसे का पहला कदम काफी होता है।
" खुद को मौका दें, जीत आपकी है "....................... एक सरकारी स्कूल में संदीप नाम का लड़का पढ़ता था। हमेशा आखिरी बेंच पर बैठता... चुपचाप, जैसे वो खुद को भीड़ से छुपाना चाहता हो। क्योंकि उसे लगता था, मैं कुछ खास नहीं हूँ। क्लास में जब टीचर सवाल पूछते, संदीप नजरें झुका लेता, डरता था कि गलत हो गया तो सब हँसेंगे। एक दिन स्कूल में एक नए सर आए। उन्होंने बोर्ड पर एक छोटा सा वाक्य लिखा- जो कोशिश करता है, वही खास बनता है। फिर उन्होंने बच्चों से पूछा, यहाँ कौन है जिसे लगता है कि वो कुछ नहीं कर सकता? पूरी क्लास चुप, लेकिन धीरे-धीरे संदीप का हाथ उठ गया। सर उसके पास गए, मुस्कुराए और बोले, बहुत अच्छा... क्योंकि अब तुम्हारी शुरुआत हो चुकी है। अगले दिन सर ने संदीप से सिर्फ एक आसान सवाल पूछा। संदीप डरते-डरते खड़ा हुआ, और जवाब दे दिया। जबाब सही था। पहली बार उसके लिए क्लास में ताली बजी, और पहली बार संदीप के चेहरे पर मुस्कान आई। अब यह रोज का सिलसिला बन गया, छोटे-छोटे सवाल... छोटे-छोटे जवाब. और हर दिन एक छोटी जीत। कुछ महीनों बाद, वही संदीप, जो आखिरी बेंच पर छुपता था, अब सबसे आगे बैठने लगा। वार्षिक परीक्षा हुआ, रिजल्ट आया, संदीप का नाम सबसे ऊपर था। टीचर ने कहा- संदीप तो बदल गया। संदीप ने हल्की मुस्कान के साथ कहा-सर, मैं नहीं बदला, बस मैंने खुद को मौका देना शुरू कर दिया। लब्बोलुआब यह, कई बार हम कमजोर नहीं होते, बस खुद को मौका ही नहीं देते। डर खत्म नहीं होता, लेकिन पहला कदम उठाने से छोटा जरूर हो जाता है। यकीन मानें, ज़िंदगी बदलने के लिए बड़ी छलांग नहीं, बस खुद पर भरोसे का पहला कदम काफी होता है।
- लिए हम देखते हैं कि इस वीडियो में मोदी जी के बारे में ऐसा क्या हुआ वीडियो में लास्ट तक1
- रांची, रविवार को नगड़ी प्रखंड के एडचोरो पवित्र छठ घाट पर एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला। जिला परिषद सदस्य श्रीमती पूनम देवी ने छठ घाट सीढ़ी का शिलान्यास किया । जिसका आवंटन राशि 5 लाख 33 हजार है। यह छठ घाट पर सीढ़ी निर्माण से क्षेत्रवासियों की धार्मिक आस्था का नया केंद्र बनेगा, जो छठ महापर्व की भव्यता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। शिलान्यास समारोह में समाजसेवी श्री बजरंग महतो विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सामाजिक एकता का प्रतीक बताया। कार्यक्रम की शुरुआत छठ पूजा समिति के अध्यक्ष श्री प्रेमचंद कुमार साहू ने स्वागत भाषण में कहा कि यह घाट न केवल पूजा स्थल है, बल्कि ग्रामीणों की एकजुटता का प्रतीक भी है। समिति के कोषाध्यक्ष श्री दिलीप कुमार केसरी, सचिव श्री सतीश तिवारी, विमला देवी, शुभम केसरी अंकित साहू, अमित साहू, निरंजन ठाकुर, मोती महली, चतुर साहू, बबीता देवी, रामजीवन साहू, दिलीप साहू और शांति देवी, नंदकिशोर साहू, सहित सभी पदाधिकारीगण और सैकड़ों ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचे। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की भारी भीड़ ने शिलान्यास समारोह को उत्सव का रंग दे दिया। श्रीमती पूनम देवी ने शिलिन्यास के बाद कहा, यह घाट छठ माता की कृपा और ग्रामीणों के सहयोग से बना है। हमारा प्रयास है कि हर त्योहार पर क्षेत्र में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध हों, जो विकास और संस्कृति का संगम बनें।" समाजसेवी बजरंग महतो ने जोर देकर कहा कि यह सीढ़ी निर्माण कार्य प्रखंड के विकास की नई दिशा है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सीढ़ी निर्माण कार्य में गुणवत्ता पर नजर रखें।1
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