इटावा जिले की जसवंतनगर तहसील के भावलपुर ग्राम पंचायत में लगातार हो रही बारिश एक गरीब परिवार के लिए आफत बन गई है। देर रात हुई तेज बारिश के कारण कमलेश कुमार पुत्र छंगे लाल का कच्चा मकान भरभराकर ढह गया। सौभाग्य से, जिस स्थान पर परिवार और बच्चे सो रहे थे, छत उससे कुछ ही दूरी पर गिरी, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया और पूरा परिवार बाल-बाल बच गया। पीड़ित कमलेश कुमार ने बताया कि मकान गिरने से उनकी साइकिल मलबे में दबकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। घर में रखा अनाज, बिस्तर, कपड़े और अन्य घरेलू सामान भी नष्ट हो गया, जिससे उन्हें लगभग 50 हजार रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ है। इस घटना के बाद, परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने, हुए नुकसान का सर्वे कराने और पीड़ित परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है। यह घटना प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि योजना का उद्देश्य हर गरीब को सुरक्षित पक्का मकान उपलब्ध कराना है, फिर भी कई जरूरतमंद परिवार आज भी कच्चे और जर्जर मकानों में रहने को विवश हैं। यदि पीड़ित परिवार पात्र है और अब तक लाभ से वंचित है, तो यह जांच का विषय है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि का इंतजार करेगा, या फिर समय रहते ऐसे जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवास और राहत उपलब्ध कराएगा।
इटावा जिले की जसवंतनगर तहसील के भावलपुर ग्राम पंचायत में लगातार हो रही बारिश एक गरीब परिवार के लिए आफत बन गई है। देर रात हुई तेज बारिश के कारण कमलेश कुमार पुत्र छंगे लाल का कच्चा मकान भरभराकर ढह गया। सौभाग्य से, जिस स्थान पर परिवार और बच्चे सो रहे थे, छत उससे कुछ ही दूरी पर गिरी, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया और पूरा परिवार बाल-बाल बच गया। पीड़ित कमलेश कुमार ने बताया कि मकान गिरने से उनकी साइकिल मलबे में दबकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। घर में रखा अनाज, बिस्तर, कपड़े और अन्य घरेलू सामान भी नष्ट हो गया, जिससे उन्हें लगभग 50 हजार रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ है। इस घटना के बाद, परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने, हुए नुकसान का सर्वे कराने और पीड़ित परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है। यह घटना प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि योजना का उद्देश्य हर गरीब को सुरक्षित पक्का मकान उपलब्ध कराना है, फिर भी कई जरूरतमंद परिवार आज भी कच्चे और जर्जर मकानों में रहने को विवश हैं। यदि पीड़ित परिवार पात्र है और अब तक लाभ से वंचित है, तो यह जांच का विषय है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि का इंतजार करेगा, या फिर समय रहते ऐसे जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवास और राहत उपलब्ध कराएगा।
- जसवंतनगर क्षेत्र की प्रमुख सिरसा नदी की सफाई का काम अंतिम चरण में पहुँच गया है। सिंचाई विभाग द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान बरसात के मौसम में जलभराव से राहत दिलाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। सिंचाई खंड इटावा ने इस कार्य का ठेका विनय कंस्ट्रक्शन को दिया है, जिसके फर्म संचालक रामचंद्र यादव ने बताया कि बलरई के ग्राम बीबामऊ से महोला तक 40 किलोमीटर के दायरे में नदी की सफाई हो रही है। इस कार्य में सिल्ट और झाड़ियाँ हटाने के लिए 12 पोकलेन मशीनें तैनात की गई हैं। यह कार्य मूल रूप से 30 जून तक पूरा किया जाना था, लेकिन बीच में यमुना नदी का पानी आने से काम 10 दिनों के लिए बाधित हो गया था। अब पानी का स्तर कम होने पर सफाई कार्य तेजी से जारी है और इसे 10 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा। इस पूरे अभियान पर कुल 52 लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस सफाई से खेतों में होने वाले जलभराव की समस्या कम होगी, जिससे क्षेत्र के किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।1
- इटावा जिले की जसवंतनगर तहसील के भावलपुर ग्राम पंचायत में लगातार हो रही बारिश एक गरीब परिवार के लिए आफत बन गई है। देर रात हुई तेज बारिश के कारण कमलेश कुमार पुत्र छंगे लाल का कच्चा मकान भरभराकर ढह गया। सौभाग्य से, जिस स्थान पर परिवार और बच्चे सो रहे थे, छत उससे कुछ ही दूरी पर गिरी, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया और पूरा परिवार बाल-बाल बच गया। पीड़ित कमलेश कुमार ने बताया कि मकान गिरने से उनकी साइकिल मलबे में दबकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। घर में रखा अनाज, बिस्तर, कपड़े और अन्य घरेलू सामान भी नष्ट हो गया, जिससे उन्हें लगभग 50 हजार रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ है। इस घटना के बाद, परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने, हुए नुकसान का सर्वे कराने और पीड़ित परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है। यह घटना प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है, क्योंकि योजना का उद्देश्य हर गरीब को सुरक्षित पक्का मकान उपलब्ध कराना है, फिर भी कई जरूरतमंद परिवार आज भी कच्चे और जर्जर मकानों में रहने को विवश हैं। यदि पीड़ित परिवार पात्र है और अब तक लाभ से वंचित है, तो यह जांच का विषय है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी जनहानि का इंतजार करेगा, या फिर समय रहते ऐसे जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवास और राहत उपलब्ध कराएगा।1
- महानिदेशक राजकीय रेलवे पुलिस प्रकाश डी ने इटावा जीआरपी थाने का निरीक्षण किया। इस दौरान, उन्होंने थाने में तैनात महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों को नगद राशि देकर पुरस्कृत किया।1
- महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है, जिसके चलते पातालगंगा क्षेत्र स्थित एक LPG बॉटलिंग प्लांट में बड़ा हादसा सामने आया है। बाढ़ का पानी प्लांट परिसर में घुसने से वहां यार्ड में रखे लगभग 3 हजार गैस सिलेंडर तेज बहाव में बहकर पातालगंगा नदी में समा गए हैं। इस घटना के बाद जिला प्रशासन और कंपनी प्रबंधन में हड़कंप मच गया है, जिसके चलते प्रशासन ने तत्काल हाई अलर्ट जारी कर दिया है। जानकारी के अनुसार, पिछले कई दिनों से हो रही लगातार बारिश के कारण पातालगंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी। नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से प्लांट तक बाढ़ का पानी पहुंच गया, जिससे यार्ड में रखे भरे और खाली दोनों तरह के सिलेंडर पानी की चपेट में आकर नदी में बह गए। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, कंपनी प्रबंधन, पुलिस, दमकल विभाग और NDRF की टीमें मौके पर पहुंच गईं। स्थानीय गोताखोरों की सहायता से नदी में बहे सिलेंडरों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों और आसपास के क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी करते हुए लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें नदी में बहता हुआ कोई भी गैस सिलेंडर दिखाई दे, तो उसकी सूचना तत्काल पुलिस या प्रशासन को दें। उन्हें किसी भी स्थिति में सिलेंडर को छूने, खींचने या अपने स्तर पर निकालने का प्रयास न करने की चेतावनी दी गई है, क्योंकि इससे गंभीर दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि बह गए सिलेंडरों में कितने भरे हुए थे और कितने खाली, और न ही अब तक बरामद किए गए सिलेंडरों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि की गई है। कंपनी ने सुरक्षा कारणों से LPG बॉटलिंग प्लांट का संचालन अगले आदेश तक अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, जबकि जिला प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए राहत एवं बचाव कार्य जारी रखे हुए है।1
- इटावा जिले में हुई बारिश के कारण आगरा-कानपुर हाइवे की सर्विस रोड पर स्थित दलवीर नगर के पास जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस समस्या के चलते स्थानीय लोग काफी परेशानी का सामना कर रहे हैं।1
- ग्राम पंचायत खजुरारा इज़्ज़तपुर में सड़कें कई दिनों से खराब पड़ी हैं, जिससे स्थानीय निवासी खासे परेशान हैं। एक ग्रामीण का आरोप है कि पिछले 10 साल से ग्राम प्रधान के पद पर बैठे रामसरन यादव उनकी शिकायतें नहीं सुन रहे हैं। ग्रामीण ने बताया कि उन्होंने प्रधान से सड़क की मरम्मत को लेकर कई बार बात की है, लेकिन उनकी गुहार को लगातार अनसुना किया जा रहा है।1
- भिंड नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष और सभी पार्षदों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) यशवंत वर्मा को दोबारा भिंड नगर पालिका में पदस्थ करने की मांग को लेकर कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है। जनप्रतिनिधियों ने बताया कि सीएमओ वर्मा के कार्यकाल में नगर में विकास कार्यों, स्वच्छता, जल निकासी, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और निर्माण कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति हुई थी। उन्होंने जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर वार्डों की समस्याओं का गंभीरता से समाधान किया, जिससे आम नागरिकों का प्रशासन पर विश्वास बढ़ा। ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया गया कि वर्तमान में बारिश के दौरान नगर में जल निकासी और अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्य जारी हैं। ऐसे समय में यशवंत वर्मा का कार्यमुक्त होना नगर के हित में उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे चल रहे विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं और आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अध्यक्ष और पार्षदों ने कलेक्टर से शासन स्तर पर सकारात्मक अनुशंसा करते हुए यशवंत वर्मा को तुरंत भिंड नगर पालिका परिषद में दोबारा पदस्थ कराने की मांग की है, ताकि जनहित और विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहे। उनका कहना है कि उनकी सेवाएं वर्तमान समय में नगर के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।1
- जसवंतनगर के ग्राम भैतान में न्यायालय के आदेश पर दिलवाई गई जमीन पर दोबारा अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। पीड़ित ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि गाटा संख्या 473 पर बुधवार को राजस्व टीम और पुलिस की मौजूदगी में कब्जा दिलाया गया था, और मौके पर मेड़ व खूंटियां भी लगाई गई थीं। आरोप है कि न्यायालय से कब्जा मिलने के अगले ही दिन, आठ नामजद और पांच अज्ञात लोग मौके पर पहुंचे और गाली-गलौज की। उन्होंने लगाई गई खूंटियां उखाड़ दीं और जमीन पर दोबारा कब्जा कर लिया। विरोध करने पर पीड़ित को जान से मारने की धमकी भी दी गई। पीड़ित ने न्यायालय के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाते हुए जसवंतनगर थाना में इस मामले में कार्रवाई की मांग की है। थाना प्रभारी कमल भाटी ने पुष्टि की है कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच की जा रही है।1