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हसपुरा ,औरंगाबाद कांग्रेसियों ने प्रधानमंत्री का पुतला दहन किया हसपुरा बाजार के बड़ी खेल मैदान पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने देश मे गैस की किल्लत व महंगाई के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया
Prem Singh
हसपुरा ,औरंगाबाद कांग्रेसियों ने प्रधानमंत्री का पुतला दहन किया हसपुरा बाजार के बड़ी खेल मैदान पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने देश मे गैस की किल्लत व महंगाई के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया
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- हसपुरा, औरंगाबाद दिव्यांगजनो के बीच बैट्री चलित ट्राईसाइकिल वितरण किया गया हसपुरा ब्लॉक कैम्पस स्थित बुनियाद केंद्र पर सरकार के महत्वाकांक्षी योजना के तहत बैट्री चलित ट्राईसाइकिल वितरण किया गया1
- Post by Rakhi kumari1
- mahrajgang mod dekund jane wale raste me1
- गोह(औरंगाबाद) गोह प्रखंड की आशा कार्यकर्ताओं ने पिछले 9 महीनों से मानदेय का भुगतान न होने पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। बुधवार की सुबह करीब 9 बजे से देर शाम तक पीएचसी परिसर में आशा कार्यकर्ताओं ने एकदिवसीय हड़ताल पर रहे। कार्यकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि यदि 10 अप्रैल तक उनके बकाए का भुगतान नहीं होता है, तो 12 अप्रैल से अनिश्चत हड़ताल पर रहेंगे। आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि सिविल सर्जन, डीपीएम और डीसीएम से वार्ता करने पर केवल आश्वासन मिलता है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रेजरी में पैसा नहीं है। उनका कहना है कि अगर ट्रेजरी में पैसा नहीं है, तो अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को भुगतान कैसे हो रहा है? केवल आशा कार्यकर्ताओं के लिए ही बजट क्यों खत्म हो जाता है? यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ, तो टीकाकरण, प्रसव सहायता और अन्य ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी जाएंगी। ऐसे भी पूरी दिन ओपीडी सहित अन्य सेवा ठप रही, और मरीज को निराश होकर लौटना पड़ा। हड़ताल में शीला कुमारी, रजंती कुमारी, पूनम कुमारी, रूबी कुमारी, बबिता कुमारी सहित दर्जनों आशा कार्यकर्ता मौजूद रहे।1
- छापेमारी की आहट से सहमा बाजार, तीसरे दिन भी बंद रही दुकानें काराकाट /रोहतास।कच्छवाँ बाजार में लगातार तीसरे दिन भी कारोबार पूरी तरह ठप रहा। किसी आधिकारिक बंद की घोषणा नहीं होने के बावजूद राज्य कर विभाग की संभावित छापेमारी की खबर से व्यापारी दहशत में हैं। यही वजह रही कि गुरुवार को भी अधिकांश दुकानों के शटर नहीं खुले और पूरे बाजार में सन्नाटा पसरा रहा। सुबह जैसे ही विभागीय टीम के आने की चर्चा फैली, मुख्य बाजार की बड़ी दुकानों—किराना, कपड़ा, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मिठाई—के शटर गिरने लगे। हालात ऐसे हो गए कि बाजार में ग्राहकों की आवाजाही लगभग खत्म हो गई और दूर-दराज से खरीदारी करने आए लोग निराश होकर लौट गए। स्थिति यह रही कि जरूरी दवाओं के लिए भी लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ा। बाजार के चौक-चौराहों पर दिनभर व्यापारी आपस में संभावित कार्रवाई को लेकर चर्चा करते नजर आए। छोटे दुकानदारों ने भी किसी तरह का जोखिम लेने से बचते हुए अपनी दुकानें बंद रखना ही उचित समझा। कच्छवाँ बाजार, जो रोहतास का प्रमुख व्यापारिक केंद्र माना जाता है, वहां रोजाना लाखों रुपये का कारोबार होता है। इस अघोषित बंदी से न केवल व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि विभागीय सर्वे और जांच के नाम पर कागजी प्रक्रिया इतनी जटिल होती है कि छोटे दुकानदारों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी डर के कारण वे दुकानें खोलने से बच रहे हैं। तो वही काराकाट प्रखंड अंतर्गत सकला, चौगाईं, कुरूर,चिकसील सहित दर्जनों जगह दुकान बंद होने से आम आदमी परेशान रहे ।2
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- Post by Chandan chook kaup3
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