*उर्वरक वितरण के लिए ई-विकास प्रणाली लागू, लाइन में लगने से मिलेगा छुटकारा* रिपोर्ट भगवान सिंह चौहान खरगोन जिले सहित सभी क्षेत्रों में 07 जनवरी 2026। मध्य प्रदेश शासन द्वारा प्रदेश की कृषि व्यवस्था को डिजिटल, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 1 जनवरी 2026 से उर्वरक वितरण के लिए ई-विकास प्रणाली को प्रदेशभर में लागू कर दिया गया है। ई-विकास प्रणाली मध्यप्रदेश सरकार की एक नवीनतम डिजिटल पहल है, जिसका उददेश्य किसानों तक उर्वरक की समय पर, पारदर्शी एवं उत्तरदायित्वपूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इस प्रणाली के तहत किसान को पंजीयन के उपरांत उर्वरक प्राप्ति के लिए एक ई-टोकन जारी किया जाता है, जिसमें किसान का नाम, पंजीयन क्रमांक, उर्वरक का प्रकार एवं मात्रा, वितरण केंद्र, निर्धारित तिथि और समय अंकित होता है। यह टोकन एसएमएस, मोबाइल एप या वेब पोर्टल के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है, जिससे किसान निर्धारित समय पर संबंधित केंद्र से उर्वरक आसानी से प्राप्त कर सके। पारदर्शी वितरण प्रणाली प्रत्येक वितरण का डिजिटल रिकॉर्ड सरकारी निगरानी को आसान बनाता है। साथ ही समय की बचत करता है क्योंकि किसानों को लंबी कतारों में खड़े होने की आवश्यकता नहीं पड़ती, कालाबाजारी की रोकथाम करता है क्योंकि टोकन आधारित प्रणाली में बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाती है। रीयल-टाइम डेटा विश्लेषण के माध्यम से सरकार को उर्वरक की मांग और आपूर्ति पर नियंत्रण की सुविधा प्रदान करता है। किसानों को डिजिटल सशक्तिकरण देकर तकनीकी साधनों का उपयोग करने का अवसर देता है।
*उर्वरक वितरण के लिए ई-विकास प्रणाली लागू, लाइन में लगने से मिलेगा छुटकारा* रिपोर्ट भगवान सिंह चौहान खरगोन जिले सहित सभी क्षेत्रों में 07 जनवरी 2026। मध्य प्रदेश शासन द्वारा प्रदेश की कृषि व्यवस्था को डिजिटल, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 1 जनवरी 2026 से उर्वरक वितरण के लिए ई-विकास प्रणाली को प्रदेशभर में लागू कर दिया गया है। ई-विकास प्रणाली मध्यप्रदेश सरकार की एक नवीनतम डिजिटल पहल है, जिसका उददेश्य किसानों तक उर्वरक की समय पर, पारदर्शी एवं उत्तरदायित्वपूर्ण आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इस प्रणाली के तहत किसान को पंजीयन के उपरांत उर्वरक प्राप्ति के लिए एक ई-टोकन जारी किया जाता है, जिसमें किसान का नाम, पंजीयन क्रमांक, उर्वरक का प्रकार एवं मात्रा, वितरण केंद्र, निर्धारित तिथि और समय अंकित होता है। यह टोकन एसएमएस, मोबाइल एप या वेब पोर्टल के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है, जिससे किसान निर्धारित समय पर संबंधित केंद्र से उर्वरक आसानी से प्राप्त कर सके। पारदर्शी वितरण प्रणाली प्रत्येक वितरण का डिजिटल रिकॉर्ड सरकारी निगरानी को आसान बनाता है। साथ ही समय की बचत करता है क्योंकि किसानों को लंबी कतारों में खड़े होने की आवश्यकता नहीं पड़ती, कालाबाजारी की रोकथाम करता है क्योंकि टोकन आधारित प्रणाली में बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाती है। रीयल-टाइम डेटा विश्लेषण के माध्यम से सरकार को उर्वरक की मांग और आपूर्ति पर नियंत्रण की सुविधा प्रदान करता है। किसानों को डिजिटल सशक्तिकरण देकर तकनीकी साधनों का उपयोग करने का अवसर देता है।
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- *विश्व हिंदी भाषा दिवस पर साहित्यकार डॉ. चौरे का किया शिवसेना ने सम्मान* खंडवा। आज विश्व हिंदी दिवस पर शिवसेना प्रमुख गणेश भावसार एवं सिंधी, हिंदी साहित्यकार निर्मल कुमार मंगवानी ने सुरभि साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व प्राचार्य एवं विश्व साहित्यकार डॉ. जगदीशचंद्र चौरे (93 वर्षीय) के हरिगंज स्थित निवास स्थान पर पहुंचे। जहां उनका शाल, श्रीफल एवं मोतियों की माला से सम्मान कर बधाई देकर विश्व में हिंदी भाषा को प्रथम स्थान प्राप्त होने की कायम करने के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर डॉ. चौरे ने समस्त शिव सैनिकों एवं विश्व में निवासरत भारतीयों को हिंदी का अधिकाधिक उपयोग कर राष्ट्रीय की बिंदी बनाने का आह्वान किया।1
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