Ample foundation का महिला दिवस पर गाजीपुर में संगोष्ठी, दहेज रूपी अभिशाप को खत्म करने का लिया.... “एक बेटी की पुकार” संगोष्ठी में दहेज प्रथा के खिलाफ उठी मजबूत आवाज, समाज को जागरूक करने का लिया संकल्प... गाजीपुर। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर “एक बेटी की पुकार : दहेज रूपी अभिशाप से मुक्ति की ओर एक संकल्प” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन संगम पैलेस, बवेडी गाजीपुर में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। संगोष्ठी के दौरान अंजली, आकांक्षा, शिखा, प्रियंका और ऐंजल ने दहेज प्रथा के खिलाफ एक प्रभावशाली एकांकी प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा। वहीं आद्या सिंह उर्फ सोनी सिंह ने जब मंच से दहेज प्रथा के कारण बच्चियों पर होने वाले अत्याचारों का उल्लेख किया तो कार्यक्रम में मौजूद कई लोगों की आंखें नम हो गईं और माहौल भावुक हो उठा। कार्यक्रम में नन्ही बच्ची अक्षिता सिंह ने भी दहेज प्रथा के खिलाफ अपनी भावुक बात रखी, जिसने सभी का दिल छू लिया। संगोष्ठी में आस्था पटेल ने दहेज प्रथा को समाज के लिए गंभीर अभिशाप बताते हुए इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया। डा. रितु श्रीवास्तव ने कहा कि जब पूरा विश्व महिला सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब भी दहेज जैसी कुरीतियाँ बेटियों के सम्मान और जीवन के लिए चुनौती बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि विवाह जैसे पवित्र संस्कार को दहेज की लालच ने कलंकित कर दिया है, जिसके कारण अनेक बेटियाँ मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं। इस दौरान आद्या सिंह ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में हर वर्ष हजारों महिलाएं दहेज से जुड़ी हिंसा और उत्पीड़न का शिकार होती हैं। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 6 हजार से अधिक महिलाओं की मृत्यु दहेज संबंधी घटनाओं में होती है, जबकि प्रतिदिन औसतन 18 से 20 महिलाओं की जान दहेज की लालच के कारण चली जाती है। मुख्य अतिथि डा. दीप्ति सिंह ने कहा कि बेटियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता इस समस्या के समाधान की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है। जब महिलाएं शिक्षित और आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तब वे अन्याय के खिलाफ मजबूती से आवाज उठा सकेंगी। विशिष्ट अतिथि नगर पालिका परिषद गाजीपुर की चेयरमैन सरिता अग्रवाल ने कहा कि जब तक समाज की हर बेटी को सम्मान और सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक महिला सशक्तिकरण का सपना अधूरा रहेगा। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने संकल्प लिया कि न तो दहेज लेंगे और न ही दहेज देंगे तथा समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता फैलाने का कार्य करेंगे। कार्यक्रम का संचालन जयति और संजीव ने संयुक्त रूप से किया, जबकि प्रभात सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
Ample foundation का महिला दिवस पर गाजीपुर में संगोष्ठी, दहेज रूपी अभिशाप को खत्म करने का लिया.... “एक बेटी की पुकार” संगोष्ठी में दहेज प्रथा के खिलाफ उठी मजबूत आवाज, समाज को जागरूक करने का लिया संकल्प... गाजीपुर। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर “एक बेटी की पुकार : दहेज रूपी अभिशाप से मुक्ति की ओर एक संकल्प” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन संगम पैलेस, बवेडी गाजीपुर में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। संगोष्ठी के दौरान अंजली, आकांक्षा, शिखा, प्रियंका और ऐंजल ने दहेज प्रथा के खिलाफ एक प्रभावशाली एकांकी प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा। वहीं आद्या सिंह उर्फ सोनी सिंह ने जब मंच से दहेज प्रथा के कारण बच्चियों पर होने वाले अत्याचारों का उल्लेख किया तो कार्यक्रम में मौजूद कई लोगों की आंखें नम हो गईं और माहौल भावुक हो उठा। कार्यक्रम में नन्ही बच्ची अक्षिता सिंह ने भी दहेज प्रथा के खिलाफ अपनी भावुक बात रखी, जिसने सभी का दिल छू लिया। संगोष्ठी में आस्था पटेल ने दहेज प्रथा को समाज के लिए गंभीर अभिशाप बताते हुए इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया। डा. रितु श्रीवास्तव ने कहा कि जब पूरा विश्व महिला सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब भी दहेज जैसी कुरीतियाँ बेटियों के सम्मान और जीवन के लिए चुनौती बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि विवाह जैसे पवित्र संस्कार को दहेज की लालच ने कलंकित कर दिया है, जिसके कारण अनेक बेटियाँ मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं। इस दौरान आद्या सिंह ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में हर वर्ष हजारों महिलाएं दहेज से जुड़ी हिंसा और उत्पीड़न का शिकार होती हैं। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 6 हजार से अधिक महिलाओं की मृत्यु दहेज संबंधी घटनाओं में होती है, जबकि प्रतिदिन औसतन 18 से 20 महिलाओं की जान दहेज की लालच के कारण चली जाती है। मुख्य अतिथि डा. दीप्ति सिंह ने कहा कि बेटियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता इस समस्या के समाधान की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है। जब महिलाएं शिक्षित और आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तब वे अन्याय के खिलाफ मजबूती से आवाज उठा सकेंगी। विशिष्ट अतिथि नगर पालिका परिषद गाजीपुर की चेयरमैन सरिता अग्रवाल ने कहा कि जब तक समाज की हर बेटी को सम्मान और सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक महिला सशक्तिकरण का सपना अधूरा रहेगा। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने संकल्प लिया कि न तो दहेज लेंगे और न ही दहेज देंगे तथा समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता फैलाने का कार्य करेंगे। कार्यक्रम का संचालन जयति और संजीव ने संयुक्त रूप से किया, जबकि प्रभात सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
- “एक बेटी की पुकार” संगोष्ठी में दहेज प्रथा के खिलाफ उठी मजबूत आवाज, समाज को जागरूक करने का लिया संकल्प... गाजीपुर। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर “एक बेटी की पुकार : दहेज रूपी अभिशाप से मुक्ति की ओर एक संकल्प” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन संगम पैलेस, बवेडी गाजीपुर में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। संगोष्ठी के दौरान अंजली, आकांक्षा, शिखा, प्रियंका और ऐंजल ने दहेज प्रथा के खिलाफ एक प्रभावशाली एकांकी प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा। वहीं आद्या सिंह उर्फ सोनी सिंह ने जब मंच से दहेज प्रथा के कारण बच्चियों पर होने वाले अत्याचारों का उल्लेख किया तो कार्यक्रम में मौजूद कई लोगों की आंखें नम हो गईं और माहौल भावुक हो उठा। कार्यक्रम में नन्ही बच्ची अक्षिता सिंह ने भी दहेज प्रथा के खिलाफ अपनी भावुक बात रखी, जिसने सभी का दिल छू लिया। संगोष्ठी में आस्था पटेल ने दहेज प्रथा को समाज के लिए गंभीर अभिशाप बताते हुए इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया। डा. रितु श्रीवास्तव ने कहा कि जब पूरा विश्व महिला सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब भी दहेज जैसी कुरीतियाँ बेटियों के सम्मान और जीवन के लिए चुनौती बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि विवाह जैसे पवित्र संस्कार को दहेज की लालच ने कलंकित कर दिया है, जिसके कारण अनेक बेटियाँ मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं। इस दौरान आद्या सिंह ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में हर वर्ष हजारों महिलाएं दहेज से जुड़ी हिंसा और उत्पीड़न का शिकार होती हैं। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 6 हजार से अधिक महिलाओं की मृत्यु दहेज संबंधी घटनाओं में होती है, जबकि प्रतिदिन औसतन 18 से 20 महिलाओं की जान दहेज की लालच के कारण चली जाती है। मुख्य अतिथि डा. दीप्ति सिंह ने कहा कि बेटियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता इस समस्या के समाधान की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है। जब महिलाएं शिक्षित और आर्थिक रूप से सशक्त होंगी, तब वे अन्याय के खिलाफ मजबूती से आवाज उठा सकेंगी। विशिष्ट अतिथि नगर पालिका परिषद गाजीपुर की चेयरमैन सरिता अग्रवाल ने कहा कि जब तक समाज की हर बेटी को सम्मान और सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक महिला सशक्तिकरण का सपना अधूरा रहेगा। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने संकल्प लिया कि न तो दहेज लेंगे और न ही दहेज देंगे तथा समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता फैलाने का कार्य करेंगे। कार्यक्रम का संचालन जयति और संजीव ने संयुक्त रूप से किया, जबकि प्रभात सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।1
- यह हमरे गाव की 20 वर्ष पूरानी मार्ग है जो आज भी वैसी है जैसी थी यह आज2
- Post by Karishnabala Pandey1
- Post by Shrikant Sagar1
- Post by Pradeep kumar1
- Post by RISHI RAI1
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- वाराणसी में भेलूपुर शकुलधारा पोखरा रोड पर मिजाहन हॉस्पिटल डॉ. मिजहन हुसैन” — इंटरनेट पर इस नाम से स्पष्ट अस्पताल की जानकारी बहुत कम मिलती है।1