बिहार के स्कूलों में दिन-दहाड़े हथियारों की मौजूदगी और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कई घटनाओं ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है, जिसमें एक सरकारी शिक्षक द्वारा स्कूल में बंदूक लाने और धमकी देने से लेकर एक बच्चे द्वारा स्कूल में गोली चलाने तक की वारदातें शामिल हैं। बीते 31 जुलाई को सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज के एक स्कूल में एक नर्सरी का बच्चा अपने स्कूल बैग में बंदूक लेकर पहुँच गया था। इस बच्चे ने तीसरी कक्षा के एक छात्र को गोली भी मार दी, हालाँकि सौभाग्य से वह छात्र बच गया। इसके अतिरिक्त, बिहार के एक सरकारी शिक्षक पर आरोप है कि वह स्कूल में बंदूक लेकर आते हैं, उसे लहराते हैं और "ठोक देंगे" जैसी धमकियाँ देते हैं। स्कूलों में हथियारों की यह समस्या केवल बिहार तक सीमित नहीं है, क्योंकि राघौगढ़ ब्लॉक के ग्रामीणों ने भी एक सरकारी स्कूल के शिक्षक पर बंदूक लेकर स्कूल आने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने इस पूरी घटना का एक वीडियो भी बनाया है, जो अब वायरल हो रहा है और जिसके बाद मामले में नोटिस जारी किया गया है। 1994 के गन-फ्री स्कूल्स एक्ट में यह प्रावधान है कि स्कूल में बंदूक लाने वाले छात्रों को ज़्यादातर मामलों में कम से कम एक साल के लिए निष्कासित कर दिया जाए। इन घटनाओं के बावजूद, यह स्पष्ट नहीं है कि स्कूलों में कितने बच्चे बंदूकों के साथ पकड़े जाते हैं, जो बच्चों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
बिहार के स्कूलों में दिन-दहाड़े हथियारों की मौजूदगी और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कई घटनाओं ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है, जिसमें एक सरकारी शिक्षक द्वारा स्कूल में बंदूक लाने और धमकी देने से लेकर एक बच्चे द्वारा स्कूल में गोली चलाने तक की वारदातें शामिल हैं। बीते 31 जुलाई को सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज के एक स्कूल में एक नर्सरी का बच्चा अपने स्कूल बैग में बंदूक लेकर पहुँच गया था। इस बच्चे ने तीसरी कक्षा के एक छात्र को गोली भी मार दी, हालाँकि सौभाग्य से वह छात्र बच गया। इसके अतिरिक्त, बिहार के एक सरकारी शिक्षक पर आरोप है कि वह स्कूल में बंदूक लेकर आते हैं, उसे लहराते हैं और "ठोक देंगे" जैसी धमकियाँ देते हैं। स्कूलों में हथियारों की यह समस्या केवल बिहार तक सीमित नहीं है, क्योंकि राघौगढ़ ब्लॉक के ग्रामीणों ने भी एक सरकारी स्कूल के शिक्षक पर बंदूक लेकर स्कूल आने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने इस पूरी घटना का एक वीडियो भी बनाया है, जो अब वायरल हो रहा है और जिसके बाद मामले में नोटिस जारी किया गया है। 1994 के गन-फ्री स्कूल्स एक्ट में यह प्रावधान है कि स्कूल में बंदूक लाने वाले छात्रों को ज़्यादातर मामलों में कम से कम एक साल के लिए निष्कासित कर दिया जाए। इन घटनाओं के बावजूद, यह स्पष्ट नहीं है कि स्कूलों में कितने बच्चे बंदूकों के साथ पकड़े जाते हैं, जो बच्चों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
- बिहार के स्कूलों में दिन-दहाड़े हथियारों की मौजूदगी और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कई घटनाओं ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है, जिसमें एक सरकारी शिक्षक द्वारा स्कूल में बंदूक लाने और धमकी देने से लेकर एक बच्चे द्वारा स्कूल में गोली चलाने तक की वारदातें शामिल हैं। बीते 31 जुलाई को सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज के एक स्कूल में एक नर्सरी का बच्चा अपने स्कूल बैग में बंदूक लेकर पहुँच गया था। इस बच्चे ने तीसरी कक्षा के एक छात्र को गोली भी मार दी, हालाँकि सौभाग्य से वह छात्र बच गया। इसके अतिरिक्त, बिहार के एक सरकारी शिक्षक पर आरोप है कि वह स्कूल में बंदूक लेकर आते हैं, उसे लहराते हैं और "ठोक देंगे" जैसी धमकियाँ देते हैं। स्कूलों में हथियारों की यह समस्या केवल बिहार तक सीमित नहीं है, क्योंकि राघौगढ़ ब्लॉक के ग्रामीणों ने भी एक सरकारी स्कूल के शिक्षक पर बंदूक लेकर स्कूल आने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने इस पूरी घटना का एक वीडियो भी बनाया है, जो अब वायरल हो रहा है और जिसके बाद मामले में नोटिस जारी किया गया है। 1994 के गन-फ्री स्कूल्स एक्ट में यह प्रावधान है कि स्कूल में बंदूक लाने वाले छात्रों को ज़्यादातर मामलों में कम से कम एक साल के लिए निष्कासित कर दिया जाए। इन घटनाओं के बावजूद, यह स्पष्ट नहीं है कि स्कूलों में कितने बच्चे बंदूकों के साथ पकड़े जाते हैं, जो बच्चों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।1
- गढ़वा जिले में अब आरओ मशीनें मात्र ₹4500 में उपलब्ध हैं। ये मशीनें 1 साल की गारंटी के साथ मिल रही हैं, जिससे परिवारों को शुद्ध और सुरक्षित पीने का पानी मिल सके। यह उन लोगों के लिए एक किफायती विकल्प बताया जा रहा है जो अपने परिवार के लिए स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करना चाहते हैं।1
- मुहर्रम पर्व के पावन अवसर पर शुक्रवार को रबदा खुरा-कंचनपुर में मोहर्रम उर्स कमिटी द्वारा भव्य मान-सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। सुबह आठ बजे से दश बजे तक चले इस कार्यक्रम का नेतृत्व कमिटी के सदर गुलजार अंसारी और सचिव असगर अंसारी ने किया। इस दौरान क्षेत्र के लोगों की भारी भीड़ उमड़ी और सभी ने पारंपरिक खेल-कूद व हैरतअंगेज करतबों का भरपूर आनंद लिया। कार्यक्रम में लाठी, डंडा और भाला सहित कई पारंपरिक युद्धक कलाओं का शानदार प्रदर्शन किया गया, जिसने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कलीम अंसारी ने अपने अद्भुत कौशल से सबसे अधिक आकर्षण बटोरा; उन्होंने मुंह से तलवार उठाने और आंख से सुई उठाने जैसे बेहद कठिन व रोमांचक करतब प्रस्तुत कर दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया, जिस पर लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। इसके अतिरिक्त, कमिटी के सदर जैनूल्हा अंसारी और उनके पोते हसनैन अंसारी ने लाठी-डंडे के पारंपरिक खेल का शानदार प्रदर्शन कर खूब मनोरंजन किया, उनकी फुर्ती और कौशल की दर्शकों ने जमकर सराहना की। इस अवसर पर रंका थाना प्रभारी रवि कुमार केसरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ उत्तरी जिला परिषद प्रतिनिधि सदस्य वीरेन्द्र तिवारी, रौशन पाठक, डॉ. इस्लाम, डॉ. एकरामुद्दीन, स्मिनुद्दीन खलीफा, कंचनपुर पंचायत के भावी मुखिया संजय राम, मुखिया प्रतिनिधि शेखर कुमार, उपमुखिया प्रतिनिधि चंद्रशेखर तिवारी, बीडीसी शिवशंकर राम सहित बड़ी संख्या में कमिटी के सदस्य, गणमान्य नागरिक एवं ग्रामीण मौजूद रहे।1
- पलामू जिले के पंडवा प्रखंड परिसर में कबाड़ और घास-फूस का एक अपार संग्रह देखा गया है।1
- पलामू ज़िले के सतबरवा प्रखंड और उसके आसपास के क्षेत्रों में मुहर्रम का पर्व पूरी श्रद्धा, अनुशासन और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न अखाड़ों द्वारा पारंपरिक ताज़िया जुलूस निकाले गए, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन के दौरान खामडीह के ताज़िया की विशेष चर्चा रही। मो. सदाम के नेतृत्व में और स्थानीय युवाओं के सहयोग से इसे बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया था, जिसने वहाँ मौजूद लोगों का ध्यान विशेष रूप से आकर्षित किया। जुलूस में शामिल लोगों ने शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखते हुए अनुशासन का उत्कृष्ट परिचय दिया और पूरे आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराया। इस सफल आयोजन में अब्दुल रहीम, समसूदीन, कुदूस, निजामुद्दीन अंसारी, अफरोज, कलम, मगरू, पिंटू, लड्डू, सुबहान, निजाम, मकसूद, मकबूल, नाजिम, भोलू, लाडले एवं असरफ सहित कई स्थानीय लोगों का सराहनीय योगदान रहा। मुहर्रम के इस अवसर पर, लोगों ने इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की, साथ ही शांति, भाईचारे और आपसी सौहार्द का महत्वपूर्ण संदेश दिया। पूरे कार्यक्रम को प्रशासन एवं पुलिस की कड़ी निगरानी में शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया गया।1
- पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड में 24 और 25 तारीख को एक जनकल्याण कार्यक्रम/शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कई ग्रामीण जनता ने आकर विभिन्न योजनाओं के लिए अपना पंजीकरण कराया। मुख्य रूप से आयुष्मान कार्ड, लाल कार्ड और गैस सिलेंडर के साथ-साथ पीएम आवास योजना के लिए भी रजिस्ट्रेशन किए गए। सभी से अनुरोध किया गया कि वे इस तरह के कैंप के तहत अपना-अपना लाभ उठाएं।2
- सोनभद्र जिले के रेणुकूट में मोहर्रम के पाक महीने की दसवीं तारीख पर श्रद्धा और अकीदत के साथ एक जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए, जिन्होंने 'या हुसैन' के नारे लगाते हुए मातम किया। इस अवसर पर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह मुस्तैदी बरती। रेणुकूट में निकला यह जुलूस सुंदर और शांत रहा।2
- झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल ही में राज्य के विभिन्न विभागों में हज़ारों महिलाओं को नियुक्ति-पत्र वितरित किए हैं। इन नियुक्तियों में 62 बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) और 237 महिला पर्यवेक्षिकाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने 319 शिक्षकों और 17 महिला पर्यवेक्षिकाओं को भी नियुक्ति-पत्र सौंपे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग को मज़बूत करने के उद्देश्य से 62 बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों (CDPO) और 237 महिला पर्यवेक्षकों को नियुक्ति-पत्र दिए गए। रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान 319 सहायक शिक्षकों और 17 महिला पर्यवेक्षकों को उनकी नियुक्तियां सौंपी गईं। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने के लिए 262 स्वास्थ्यकर्मियों को भी नियुक्ति-पत्र वितरित किए गए, जिनमें फूड सेफ्टी ऑफिसर, स्पेशलिस्ट मेडिकल ऑफिसर, सीनियर हॉस्पिटल मैनेजर और फाइनेंस मैनेजर जैसे पद शामिल हैं। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग की पासिंग आउट परेड में भी महिला भागीदारी की सराहना की, जहाँ 81 महिला पुलिस कांस्टेबलों ने अपना प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है।1