ब्लू इकोनॉमी : भारत के सतत विकास की नई दिशा डॉ. संजीव कुमार सहायक प्रोफेसर, अर्थशास्त्र विभाग नवादा विधि महाविद्यालय नवादा, बिहार 21वीं सदी को महासागरों की सदी कहा जा रहा है। जिस प्रकार हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy) ने पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया, उसी प्रकार ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) समुद्र, तटीय क्षेत्रों और समुद्री संसाधनों का ऐसा सतत एवं उत्तरदायी उपयोग है, जिससे आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण एक साथ सुनिश्चित हो सके। भारत लगभग 7,500 किलोमीटर से अधिक लंबी समुद्री तटरेखा, विशाल विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) तथा समृद्ध समुद्री जैव-विविधता वाला देश है। मत्स्य पालन, बंदरगाह, समुद्री परिवहन, तटीय पर्यटन, अपतटीय पवन ऊर्जा (Offshore Wind Energy), समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी (Marine Biotechnology) तथा गहरे समुद्र के संसाधन भारत की ब्लू इकोनॉमी के प्रमुख आधार हैं। भारत सरकार द्वारा सागरमाला परियोजना सागरमाला कार्यक्रम ,(Deep Ocean Mission) तथा समुद्री मत्स्य संसाधनों के सतत दोहन से संबंधित विभिन्न पहलें ब्लू इकोनॉमी को नई गति प्रदान कर रही हैं। इन पहलों का उद्देश्य बंदरगाह आधारित विकास, समुद्री अनुसंधान, रोजगार सृजन और निर्यात क्षमता में वृद्धि करना है। हालाँकि ब्लू इकोनॉमी के समक्ष अनेक चुनौतियाँ भी हैं। समुद्री प्रदूषण, प्लास्टिक कचरा, जलवायु परिवर्तन, समुद्र के बढ़ते जलस्तर, अत्यधिक मत्स्य दोहन तथा तटीय पारिस्थितिकी तंत्र का क्षरण इसके प्रमुख अवरोध हैं। यदि समुद्री संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया गया तो भविष्य की पीढ़ियाँ इन अमूल्य संसाधनों से वंचित हो सकती हैं। इसलिए आर्थिक लाभ और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। भारत के लिए ब्लू इकोनॉमी केवल आर्थिक अवसर नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 की दिशा में एक रणनीतिक आधार भी है। समुद्री क्षेत्रों में अनुसंधान, नवाचार, हरित प्रौद्योगिकी, समुद्री कौशल विकास तथा निजी निवेश को बढ़ावा देकर लाखों नए रोजगार सृजित किए जा सकते हैं। साथ ही यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG-14: Life Below Water) की प्राप्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अंततः, ब्लू इकोनॉमी केवल समुद्र से आय अर्जित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि प्रकृति और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की एक समग्र विकास की अवधारणा है। यदि भारत वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रभावी नीतियों और जन भागीदारी के साथ इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो महासागर आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक समृद्धि, पर्यावरणीय सुरक्षा और वैश्विक नेतृत्व के नए द्वार खोल सकते हैं।
ब्लू इकोनॉमी : भारत के सतत विकास की नई दिशा डॉ. संजीव कुमार सहायक प्रोफेसर, अर्थशास्त्र विभाग नवादा विधि महाविद्यालय नवादा, बिहार 21वीं सदी को महासागरों की सदी कहा जा रहा है। जिस प्रकार हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy) ने पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया, उसी प्रकार ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) समुद्र, तटीय क्षेत्रों और समुद्री संसाधनों का ऐसा सतत एवं उत्तरदायी उपयोग है, जिससे आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण एक साथ सुनिश्चित हो सके। भारत लगभग 7,500 किलोमीटर से अधिक लंबी समुद्री तटरेखा, विशाल विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) तथा समृद्ध समुद्री जैव-विविधता वाला देश है। मत्स्य पालन, बंदरगाह, समुद्री परिवहन, तटीय पर्यटन, अपतटीय पवन ऊर्जा (Offshore Wind Energy), समुद्री जैव-प्रौद्योगिकी (Marine Biotechnology) तथा गहरे समुद्र के संसाधन भारत की ब्लू इकोनॉमी के प्रमुख आधार हैं। भारत सरकार द्वारा सागरमाला परियोजना सागरमाला कार्यक्रम ,(Deep Ocean Mission) तथा समुद्री मत्स्य संसाधनों के सतत दोहन से संबंधित विभिन्न पहलें ब्लू इकोनॉमी को नई गति प्रदान कर रही हैं। इन पहलों का उद्देश्य बंदरगाह आधारित विकास, समुद्री अनुसंधान, रोजगार सृजन और निर्यात क्षमता में वृद्धि करना है। हालाँकि ब्लू इकोनॉमी के समक्ष अनेक चुनौतियाँ भी हैं। समुद्री प्रदूषण, प्लास्टिक कचरा, जलवायु परिवर्तन, समुद्र के बढ़ते जलस्तर, अत्यधिक मत्स्य दोहन तथा तटीय पारिस्थितिकी तंत्र का क्षरण इसके प्रमुख अवरोध हैं। यदि समुद्री संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया गया तो भविष्य की पीढ़ियाँ इन अमूल्य संसाधनों से वंचित हो सकती हैं। इसलिए आर्थिक लाभ और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। भारत के लिए ब्लू इकोनॉमी केवल आर्थिक अवसर नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 की दिशा में एक रणनीतिक आधार भी है। समुद्री क्षेत्रों में अनुसंधान, नवाचार, हरित प्रौद्योगिकी, समुद्री कौशल विकास तथा निजी निवेश को बढ़ावा देकर लाखों नए रोजगार सृजित किए जा सकते हैं। साथ ही यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG-14: Life Below Water) की प्राप्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अंततः, ब्लू इकोनॉमी केवल समुद्र से आय अर्जित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि प्रकृति और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की एक समग्र विकास की अवधारणा है। यदि भारत वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रभावी नीतियों और जन भागीदारी के साथ इस दिशा में आगे बढ़ता है, तो महासागर आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक समृद्धि, पर्यावरणीय सुरक्षा और वैश्विक नेतृत्व के नए द्वार खोल सकते हैं।
- पटना एयरपोर्ट पर शनिवार को कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता इमरान प्रतापगढ़ी पहुंचे तो बाहर निकलते ही मीडिया ने उन्हें घेर लिया कांग्रेस-इमरान-प्रतापगढ़ी-बिहार-छात्र-लाठीचार्ज-फैक्ट-फाइंडिंग। पटना एयरपोर्ट पर शनिवार को कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता इमरान प्रतापगढ़ी पहुंचे तो बाहर निकलते ही मीडिया ने उन्हें घेर लिया। उनके साथ इस बार सांसद मनोज राम, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया और NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरुण चौधरी भी मौजूद थे। दरअसल ये सभी लोग कांग्रेस की तरफ से बनाई गई फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्य हैं और बिहार में बीते दिनों छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए यहां आए हैं। एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए इमरान प्रतापगढ़ी काफी आक्रामक दिखे। उन्होंने सीधे तौर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और कथित बर्बरता की निंदा की। उनका कहना था कि जो युवा अपने भविष्य और अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठा रहे थे उनके साथ इस तरह की हिंसा करना लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसके आदेश पर छात्रों पर बल प्रयोग किया गया और इसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा। उनके शब्दों से साफ लग रहा था कि सत्ता में बैठे लोगों को युवाओं की बात सुननी चाहिए न कि उन्हें डराना चाहिए। इमरान प्रतापगढ़ी ने बताया कि कांग्रेस ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है और इसी वजह से एक टीम बनाकर उसे बिहार के अलग जिलों में भेजा गया है। उनका मकसद सिर्फ बयान देना नहीं है बल्कि जमीन पर जाकर असलियत जानना है। उन्होंने कहा कि सीवान, पूर्णिया, जहानाबाद, भागलपुर, दरभंगा और पटना जैसे जिलों में अलग टीमें भेजी गई हैं। हर टीम वहां के पीड़ित छात्रों से मिलेगी, उनके परिवारों से बात करेगी और स्थानीय अधिकारियों से भी जानकारी लेगी। इसका उद्देश्य ये समझना है कि आंदोलन क्यों शुरू हुआ, प्रशासन ने क्या कदम उठाए और आम छात्रों पर इसका क्या असर पड़ा। उन्होंने आगे कहा कि ये फैक्ट फाइंडिंग सिर्फ एक रस्म नहीं है। सभी जिलों से रिपोर्ट आने के बाद कांग्रेस एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी और उसे पार्टी नेता राहुल गांधी को सौंपा जाएगा। इमरान प्रतापगढ़ी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस मुद्दे को यहीं खत्म नहीं होने देगी। इसे संसद के अंदर भी उठाया जाएगा और सड़क पर भी छात्रों के साथ खड़े रहा जाएगा। उनका जोर इस बात पर था कि सरकार को जवाबदेह ठहराया जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो। इस पूरे दौरे का राजनीतिक महत्व भी कम नहीं है क्योंकि बिहार में छात्र आंदोलन पहले से चर्चा में है और विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। इमरान प्रतापगढ़ी का नाम छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय है क्योंकि वो अक्सर युवाओं के मुद्दों को मुखरता से उठाते रहे हैं। इसलिए उनका बिहार आना और मीडिया के सामने आकर बात करना कांग्रेस के लिए एक संदेश भी है कि पार्टी छात्रों के साथ खड़ी है। मीडिया ने जब सवाल किया कि पप्पू यादव संसद में भगवा कपड़ा पहनकर राम मंदिर के पैसे की चोरी को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं तो इस पर इमरान ने कहा कि ये सवाल बीजेपी से पूछिए, चंदा चोर कौन है। कुल मिलाकर इस दौरे में इमरान प्रतापगढ़ी एक नेता से ज्यादा ऐसे व्यक्ति के रूप में दिखे जो छात्रों के दर्द को अपनी आवाज देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में युवाओं पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब देखना होगा कि कांग्रेस की ये फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में क्या नया मोड़ आता है और सरकार इस पर क्या जवाब देती है।1
- नरहट समाचार :- प्रखण्ड सभा कक्ष में बीसीओ सह बीईओ निशांत प्रियदर्शी के सम्मान में विदाई सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। नरहट :- प्रखण्ड सभा कक्ष में शनिवार को बीसीओ सह बीईओ निशांत प्रियदर्शी के सम्मान में विदाई सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रशांत कुमार, अंचल अधिकारी पूजा शर्मा सहित सैकड़ों की संख्या में प्रधानाध्यापक, शिक्षक एवं शिक्षा विभाग के कर्मी उपस्थित रहे।1
- रजौली हरदिया पंचायत में स्वच्छता कर्मी को एक साल से मानदेय नही मिलने पर प्रखंड कार्यालय पहुंचे लोग कहा मानदेय नहीं मिलने से हमारे घर का खर्चा नहीं चल रहा है और पढ़ाई लिखाई में भी दिक्कत हो रहा है1
- वीडियो ब्लॉगिंग न्यूज़ समचार भरस्टाचार के खिलाफ आवाज 🚩 बरही विधानसभा के 'बेंदी 2' गांव की बदहाली का कड़वा सच! 🚩 कोडरमा: कागजों पर विकास, ज़मीन पर सिर्फ विनाश! (बेंदी 2 गांव की लाइव तस्वीरें) 📸 मैं डिजिटल क्रिएटर जितेन्द्र अगेरी, इन तस्वीरों के माध्यम से कोडरमा जिला, चन्दवारा ब्लॉक के बेंदी पंचायत के 'बेंदी 2' गांव की वो खौफनाक हकीकत दिखा रहा हूँ, जिसे हमारा सिस्टम पिछले 15 सालों से छुपा रहा है पार्टियां आईं और गईं, पर हालात वही हैं: पिछले 15 सालों में सूबे (राज्य) में कई पार्टियां आईं और कई पार्टियां गईं, बरही विधानसभा में कई विधायक बदले, लेकिन हमारे गांव की इस सड़क का जो हाल था, वो आज भी वही है। सत्ता किसी के भी हाथ में हो, बेंदी 2 गांव की जनता को हमेशा सिर्फ धोखा ही मिला है। सिर्फ कागजी टेंडर और घोटाला: इस मार्ग के निर्माण के लिए हर चुनाव से पहले कागजों पर करोड़ों के टेंडर निकलते हैं, लेकिन धरातल पर कभी काम पूरा नहीं होता। यह पैसा जनता के विकास के बजाय सीधे भ्रष्टाचार और घोटालों की भेंट चढ़ जाता है। :तस्वीर नंबर 1 (सड़क का दलदल) : यह हमारे गांव की मुख्य सड़क है जो पिछले 15 सालों से ऐसी ही बदहाल है। हर बार चुनाव में बरही विधानसभा के विधायक बदलते हैं, टेंडर निकलते हैं, लेकिन धरातल पर सिर्फ घोटाला और भ्रष्टाचार दिखाई देता है। तस्वीर नंबर 2 (स्कूली बच्चों का दर्द): इस बरसात के मौसम में यह रास्ता मौत का कुआँ बन चुका है। स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों के कपड़े कीचड़ से सन जाते हैं, वे गिरते हैं और चोटिल होते हैं। नेताओं के घरों तक आलीशान सड़कें पहुँच जाती हैं, लेकिन हमारे बच्चों के लिए सिर्फ यह कीचड़ छोड़ दिया जाता है। तस्वीर नंबर 3 (खेतों का खतरा): आप खुद देखिए, सड़क के दोनों तरफ गहरे खेत हैं। यहाँ बिना गढ़वाल (Retaining Wall) के गाड़ी निकालना जान जोखिम में डालने जैसा है। क्या कोडरमा प्रशासन को यहाँ किसी बड़ी दुर्घटना या लाश के गिरने का इंतज़ार है? निकम्मे जनप्रतिनिधि और चमचे: ऐसा नहीं है कि स्थानीय मुखिया या नेताओं को इस रास्ते का पता नहीं है। सब जानते हुए भी आँखें मूंदकर बैठे हैं। जो प्रतिनिधि अपनी जनता को एक सुरक्षित रास्ता न दे सके, वो पूरी तरह फालतू है।ताज़ा बरसात की हकीकत: मैंने ये तस्वीरें बिल्कुल इसी बरसात के मौसम में ग्राउंड पर जाकर खुद क्लिक की हैं, ताकि सोए हुए अधिकारी और नेता अपनी आँखों से ताज़ा बर्बादी देख सकें। मेरा मकसद किसी राजनीतिक पार्टी, नेता या अधिकारी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना या उन्हें बदनाम करना बिल्कुल नहीं है। मैं सिर्फ अपने गांव का जल्द से जल्द शुरू किया जाए!1
- रजौली के हरदिया पंचायत में लगे सफाई कर्मियों को एक साल से नहीं मिला मानदेय, कर्मियों में आर्थिक संकट गहराया1
- रजौली के दुलरपुरा के पास हुआ सड़क हादसा, अनियंत्रित ट्रैक्टर ने बाइक पर सवार टेलर ड्राइवर को मारी टक्कर। प्राथमिक इलाज के बाद सदर अस्पताल नवादा रेफर।2