शुक्रवार और शनिवार की मध्य रात्रि गोवर्धन से बरसाना रोड पर एक दर्दनाक सड़क हादसे में श्रद्धालुओं से भरे एक टेंपो और बलेनो कार की जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि टेंपो के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार श्रद्धालुओं में चीख-पुकार मच गई। इस हादसे में एक श्रद्धालु की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि करीब एक दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही गोवर्धन एसडीएम, क्षेत्राधिकारी और SHO गोवर्धन पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। पुलिस प्रशासन ने स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायल श्रद्धालुओं को गोवर्धन के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी डॉक्टर नेहा चौधरी के अनुसार, कुल 10 घायलों को लाया गया था, जिनमें से एक श्रद्धालु की अस्पताल पहुँचने से पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। प्राथमिक उपचार के बाद, 6 मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। इन 6 में से 3 श्रद्धालुओं की हालत बेहद गंभीर बताई गई है, जबकि बाकी अन्य घायलों को मामूली चोटें आई थीं, जिन्हें इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। घायल श्रद्धालुओं में से कुछ पटना और संभल के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
शुक्रवार और शनिवार की मध्य रात्रि गोवर्धन से बरसाना रोड पर एक दर्दनाक सड़क हादसे में श्रद्धालुओं से भरे एक टेंपो और बलेनो कार की जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि टेंपो के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार श्रद्धालुओं में चीख-पुकार मच गई। इस हादसे में एक श्रद्धालु की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि करीब एक दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही गोवर्धन एसडीएम, क्षेत्राधिकारी और SHO गोवर्धन पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। पुलिस प्रशासन ने स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायल श्रद्धालुओं को गोवर्धन के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी डॉक्टर नेहा चौधरी के अनुसार, कुल 10 घायलों को लाया गया था, जिनमें से एक श्रद्धालु की अस्पताल पहुँचने से पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। प्राथमिक उपचार के बाद, 6 मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। इन 6 में से 3 श्रद्धालुओं की हालत बेहद गंभीर बताई गई है, जबकि बाकी अन्य घायलों को मामूली चोटें आई थीं, जिन्हें इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। घायल श्रद्धालुओं में से कुछ पटना और संभल के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
- गलत ब्लड चढ़ाए जाने के आरोप के बाद ढाई साल की एक मासूम बच्ची इशिका जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही है। इस हृदय विदारक स्थिति के चलते बच्ची की माँ की चीखें थम नहीं रही हैं, और उसके पिता लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं। अब सवाल यह है कि आखिर इस मासूम इशिका को कौन बचाएगा?1
- शनिवार को वृंदावन परिक्रमा मार्ग से सटे कुंभ मेला क्षेत्र में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाते हुए लगभग आधा दर्जन झोपड़ियों को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए नगर निगम की टीम पुलिस बल और ईटीएफ के साथ मौके पर पहुंची, जहाँ जेसीबी की मदद से अतिक्रमणों को हटाया गया। कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों ने इसका विरोध भी जताया, लेकिन पुलिस बल और ईटीएफ की मौजूदगी के कारण उनका विरोध प्रभावी नहीं हो सका। प्रभावित लोगों ने प्रशासन पर पक्षपात का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जहाँ गरीबों की झोपड़ियों को निशाना बनाया जा रहा है, वहीं मेला क्षेत्र में बने पक्के अतिक्रमणों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। गजेंद्र नामक व्यक्ति ने इस भेदभाव को उजागर करते हुए प्रशासन से सभी अतिक्रमणों पर समान रूप से कार्रवाई करने की माँग की। वहीं, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का नेतृत्व कर रहे आर.के. सिंह ने बताया कि यह क्षेत्र पहले भी अतिक्रमणमुक्त कराया जा चुका है, बावजूद इसके कुछ लोग दोबारा झोपड़ियां बनाकर कब्जा कर लेते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई उच्च अधिकारियों के निर्देश पर दोबारा की गई है और भविष्य में भी सरकारी भूमि पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने यह भी दोहराया कि कुंभ मेला क्षेत्र और परिक्रमा मार्ग को पूरी तरह अतिक्रमणमुक्त रखने का अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।4
- मथुरा के थाना मांट क्षेत्र में, तहसील के किनारे लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण को प्रशासन ने पुलिस बल के साथ ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान, कुछ लोगों ने प्रशासन के बुलडोजर को रोकने की कोशिश की और वे एक टिन शेड पर चढ़ गए। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बड़ी मुश्किल से उन लोगों को समझा-बुझाकर हटाया, जिसके बाद अतिक्रमण हटाने का काम जारी रहा। इस अभियान के बाद, मांट तहसील का क्षेत्र अतिक्रमण मुक्त हो गया, जिसे हटाने में प्रशासन को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।1
- जनपद मथुरा के ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने के उद्देश्य से केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित किए गए आयुष्मान आरोग्य मंदिर कई स्थानों पर अपनी उपयोगिता खोते नजर आ रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इन स्वास्थ्य केंद्रों पर न तो पर्याप्त स्वास्थ्य कर्मी उपलब्ध हैं और न ही मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ मिल पा रही हैं। इन बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के कारण ग्रामीणों को मामूली बीमारी के उपचार के लिए भी कई किलोमीटर दूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल या निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकांश आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर नियमित रूप से डॉक्टर, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO), स्टाफ नर्स और अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद नहीं रहते। कई केंद्रों पर आवश्यक दवाओं का अभाव है, जबकि जाँच सुविधाएँ केवल सरकारी अभिलेखों तक सीमित दिखाई देती हैं। विकास खंड मांट के ग्राम दीवाना कला का मामला भी इसी बदहाली को दर्शाता है, जहाँ के निवासियों ने डॉक्टर, CHO, स्टाफ नर्स, दवाओं और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग उठाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने समस्याओं के समाधान के बजाय केवल एएनएम की तैनाती दर्शाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली, लेकिन आज भी ग्रामीणों को समुचित स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध नहीं हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन अधिकांश अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन केंद्रों पर प्रशिक्षित स्टाफ, आवश्यक दवाएँ और जाँच सुविधाएँ ही उपलब्ध नहीं होंगी, तो योजना का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा और करोड़ों रुपये से निर्मित भवन जनता के लिए केवल शोपीस बनकर रह जाएंगे। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का नियमित निरीक्षण कराया जाए, रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्तियाँ की जाएँ तथा दवाओं और जाँच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजनाएँ केवल बोर्ड और भवनों तक सीमित होकर रह जाएंगी। एक बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो आखिर मथुरा के कई आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मरीजों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएँ क्यों नहीं मिल पा रहीं।4
- मथुरा में यमुना मैया में लगातार गिर रहे गंदे नाले कभी भी बंद नहीं होंगे, इस बात पर जोर दिया गया है।2
- मथुरा की सदर तहसील में शनिवार को समाधान दिवस का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता सदर उप जिलाधिकारी आदेश कुमार ने की। इस अवसर पर विद्युत, राजस्व और चकबंदी सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में शिकायतकर्ता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचे, जिनमें लंबित मामलों के निस्तारण और पहली बार दर्ज कराई गई शिकायतें दोनों शामिल थीं। वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों को शिकायतों की जांच और उनके शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए। इस समाधान दिवस के दौरान, कुल करीब 42 शिकायतों में से 3 का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया।4
- कस्बा महावन के बंदी दरवाजा निवासी लक्ष्मण पाराशर ने एक ज्वेलर्स को अपनी पुरानी ज्वेलरी नई ज्वेलरी बनवाने के लिए दी थी, जिसका उद्देश्य शादी के लिए नई ज्वेलरी बनवाना था। पीड़ित का आरोप है कि ज्वेलर्स ने नई ज्वेलरी देने से मना कर दिया और ज्वेलरी देने से ही मुकर गया। पाराशर को लगता है कि उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है और वह सरकारी तंत्र के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने भी उनकी शिकायत नहीं सुनी और सबूत न होने की बात कही। इसके बाद, पीड़ित ने सभी अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई और तहसील दिवस में भी अपनी शिकायत दर्ज कराई है।1
- मथुरा में ब्रज प्रेस क्लब द्वारा 34वां पत्रकारिता दिवस समारोह आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम पत्रकारिता दिवस के उपलक्ष्य में ब्रज प्रेस क्लब द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण आयोजन था।4
- मथुरा जिले में गोवर्धन-बरसाना रोड पर शुक्रवार और शनिवार की मध्य रात्रि एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक श्रद्धालु की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि लगभग एक दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। श्रद्धालुओं से भरे एक टेंपो और बलेनो कार के बीच जोरदार भिड़ंत हुई, जो इतनी भीषण थी कि टेंपो के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार श्रद्धालुओं में चीख-पुकार मच गई। हादसे के शिकार हुए श्रद्धालु पटना और संभल के रहने वाले बताए गए हैं। हादसे की सूचना मिलते ही गोवर्धन एसडीएम, क्षेत्राधिकारी और SHO गोवर्धन पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। पुलिस प्रशासन ने स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायल श्रद्धालुओं को गोवर्धन के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्सक के मुताबिक, कुल 10 घायलों को लाया गया था, जिनमें से एक श्रद्धालु की अस्पताल पहुँचने से पहले ही मौत हो चुकी थी। प्राथमिक उपचार के बाद, 6 मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, जिनमें से 3 की हालत बेहद गंभीर बताई गई है। अन्य घायलों को मामूली चोटें आई थीं, जिन्हें इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।4