Shuru
Apke Nagar Ki App…
आस्था की कठिन डगर: 450 किमी का सफर! 🚩 आज पलेरा के वार्ड क्रमांक 11 से भज्जू (भगत जी) प्रजापति जी ने राजस्थान के झाज के लिए अपनी विशेष 'पैढ' भरी। डीजे पर बजते धार्मिक भजनों और सैकड़ों लोगों की उपस्थिति के बीच यह यात्रा रवाना हुई आस्था की कठिन डगर: 450 किमी का सफर! 🚩 आज पलेरा के वार्ड क्रमांक 11 से भज्जू (भगत जी) प्रजापति जी ने राजस्थान के झाज के लिए अपनी विशेष 'पैढ' भरी। डीजे पर बजते धार्मिक भजनों और सैकड़ों लोगों की उपस्थिति के बीच यह यात्रा रवाना हुई
MUHAMMAD KHWAJA JOURNALIST
आस्था की कठिन डगर: 450 किमी का सफर! 🚩 आज पलेरा के वार्ड क्रमांक 11 से भज्जू (भगत जी) प्रजापति जी ने राजस्थान के झाज के लिए अपनी विशेष 'पैढ' भरी। डीजे पर बजते धार्मिक भजनों और सैकड़ों लोगों की उपस्थिति के बीच यह यात्रा रवाना हुई आस्था की कठिन डगर: 450 किमी का सफर! 🚩 आज पलेरा के वार्ड क्रमांक 11 से भज्जू (भगत जी) प्रजापति जी ने राजस्थान के झाज के लिए अपनी विशेष 'पैढ' भरी। डीजे पर बजते धार्मिक भजनों और सैकड़ों लोगों की उपस्थिति के बीच यह यात्रा रवाना हुई
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- *सोना और पेट्रोलियम कम खर्च करने की बात देश की आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता के संदर्भ में है- अजय सिंह यादव* पेट्रोलियम पदार्थो एवं सोने का संयमित उपयोग यह देश की आर्थिक मजबूती एवं अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है आज पेट्रोलियम पदार्थों के आयात में मामले मे भारत दुनिया मे अग्रणी देश हैं साथ ही सोना के अत्यधिक आयात मे जो विदेशी मुद्रा बाहर जाती है वही मुद्रा अगर देश मे उद्योग, विकास कार्य एवं अर्थव्यवस्था के लिए निवेश हो तो देश को लाभ होगा यह किसी भी पदार्थ के उपयोग पर रोक की बात नहीं है बल्कि स्मार्ट कंस्यूमर वाली बात है इस तरह का उपयोग देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी ठीक है साथ ही विदेशी मुद्रा भी बचेगी जिससे आम आदमी के जीवन मे बड़ी सहायता होंगी. अजय सिंह यादव प्रदेश प्रवक्ता भाजपा *सोना और पेट्रोलियम कम खर्च करने की बात देश की आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता के संदर्भ में है- अजय सिंह यादव* पेट्रोलियम पदार्थो एवं सोने का संयमित उपयोग यह देश की आर्थिक मजबूती एवं अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है आज पेट्रोलियम पदार्थों के आयात में मामले मे भारत दुनिया मे अग्रणी देश हैं साथ ही सोना के अत्यधिक आयात मे जो विदेशी मुद्रा बाहर जाती है वही मुद्रा अगर देश मे उद्योग, विकास कार्य एवं अर्थव्यवस्था के लिए निवेश हो तो देश को लाभ होगा यह किसी भी पदार्थ के उपयोग पर रोक की बात नहीं है बल्कि स्मार्ट कंस्यूमर वाली बात है इस तरह का उपयोग देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी ठीक है साथ ही विदेशी मुद्रा भी बचेगी जिससे आम आदमी के जीवन मे बड़ी सहायता होंगी. अजय सिंह यादव प्रदेश प्रवक्ता भाजपा1
- आचार्यधाम समिति पर किसानों के साथ खुली लूट, 50 किलो के साथ 700 ग्राम अधिक तौल। किसानों ने उठाई कार्यवाही की मांग । मोहनगढ़ - टीकमगढ़ जिले की आचार्य धाम के गेहूं उपार्जन केंद्र पर 50 किलो की बोरी में 700 ग्राम से लेकर 1 किलो तक गेहूं अतिरिक्त (अधिक तौल) लिए जाने का मामला सामने आया है। मई 2026 में हुए निरीक्षण के बाद, इस अवैध वसूली और अनियमितता के कारण 4 समिति प्रबंधकों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। जिसके बाद भी मोहनगढ़ तहसील के अचरा में समिति प्रबंधक द्वारा तौल में धांधली की बात सामने आई है, जिसमें किसानों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है, ओर कलेक्टर विवेक श्रोतिय से इस मामले में कार्यवाही की मांग की है। शनिवार को जब खाद्य विभाग के अधिकारियों के औचक निरीक्षण में खुलासा हुआ कि हर बोरी में 50 किलो के बजाय 700 ग्राम से अधिक गेहूं लिया जा रहा था। साथ ही तौल के नाम पर किसानों से अवैध वसूली का खेल भी जारी है, जिस पर किसान अपने आप को ठगी का शिकार मान रहे है, एक तरफ जिले के मुखिया विवेक श्रोतिय किसान हितैषी है और लगातार किसानों की समस्याओं को सुनकर उनका निराकरण करते है लेकिन इस समय चल रही खरीदी के केंद्रों पर किसानों को अधिक तौल के नाम पर और तुलाई के नाम पर अवैध वसूली कर लूटा जा रहा है, जिसमें किसानों ने समिति प्रबंधक पर कार्यवाही करने और किसानों को न्याय दिलाने की मांग की है। बॉक्स - 4 पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई बीते दिनों गड़बड़ी मिलने पर कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने 4 समिति प्रबंधकों (ऋषभ कुमार जैन, पुष्पेंद्र कुमार जैन, साक्षी शर्मा, आदि) को निलंबित किया है। जिन केंद्राें में दरगुंवा, बड़ागांव धसान, समर्रा सहित कई अन्य केंद्रों पर गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं। जिसमें कलेक्टर ने 4 अलग-अलग जांच दल गठित किए थे ताकि उपार्जन व्यवस्था को सुचारु बनाया जा सके। अब देखना ये होगा कि आचार्य धाम समिति के किसानों के साथ कलेक्टर न्याय कर पाते है कि नहीं। आचार्यधाम समिति पर किसानों के साथ खुली लूट, 50 किलो के साथ 700 ग्राम अधिक तौल। किसानों ने उठाई कार्यवाही की मांग । मोहनगढ़ - टीकमगढ़ जिले की आचार्य धाम के गेहूं उपार्जन केंद्र पर 50 किलो की बोरी में 700 ग्राम से लेकर 1 किलो तक गेहूं अतिरिक्त (अधिक तौल) लिए जाने का मामला सामने आया है। मई 2026 में हुए निरीक्षण के बाद, इस अवैध वसूली और अनियमितता के कारण 4 समिति प्रबंधकों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। जिसके बाद भी मोहनगढ़ तहसील के अचरा में समिति प्रबंधक द्वारा तौल में धांधली की बात सामने आई है, जिसमें किसानों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है, ओर कलेक्टर विवेक श्रोतिय से इस मामले में कार्यवाही की मांग की है। शनिवार को जब खाद्य विभाग के अधिकारियों के औचक निरीक्षण में खुलासा हुआ कि हर बोरी में 50 किलो के बजाय 700 ग्राम से अधिक गेहूं लिया जा रहा था। साथ ही तौल के नाम पर किसानों से अवैध वसूली का खेल भी जारी है, जिस पर किसान अपने आप को ठगी का शिकार मान रहे है, एक तरफ जिले के मुखिया विवेक श्रोतिय किसान हितैषी है और लगातार किसानों की समस्याओं को सुनकर उनका निराकरण करते है लेकिन इस समय चल रही खरीदी के केंद्रों पर किसानों को अधिक तौल के नाम पर और तुलाई के नाम पर अवैध वसूली कर लूटा जा रहा है, जिसमें किसानों ने समिति प्रबंधक पर कार्यवाही करने और किसानों को न्याय दिलाने की मांग की है। बॉक्स - 4 पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई बीते दिनों गड़बड़ी मिलने पर कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने 4 समिति प्रबंधकों (ऋषभ कुमार जैन, पुष्पेंद्र कुमार जैन, साक्षी शर्मा, आदि) को निलंबित किया है। जिन केंद्राें में दरगुंवा, बड़ागांव धसान, समर्रा सहित कई अन्य केंद्रों पर गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं। जिसमें कलेक्टर ने 4 अलग-अलग जांच दल गठित किए थे ताकि उपार्जन व्यवस्था को सुचारु बनाया जा सके। अब देखना ये होगा कि आचार्य धाम समिति के किसानों के साथ कलेक्टर न्याय कर पाते है कि नहीं।1
- शोशल मीडिया पर वीडियो हुआ बॉयरल बॉयरल बीडीओ टीकमगढ़ जिले के थाना जतारा के अंतर्गत ग्राम पंचायत मगरई पाली का बताया जा रहा है जहां पर अवैध शराब बेचने का वीडियो पुलिस ने पकड़ा देखिए खास रिपोर्ट पुलिस जुटी जांच में1
- Post by Mahendra Kumar Dubey1
- अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन के द्वारा शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सतगुआ में जनचोपाल कार्यक्रम हुआ सम्पन्न जन चौपाल के दौरान, ग्रामीणों की समस्याओं पर चर्चा कर जल्द किया जायेगा निराकरण टीकमगढ़ जिले की जतारा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत सतगुआ में अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार सुरक्षा संगठन द्वारा जन चौपाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना के साथ हुआ। मंच संचालन चक्रवर्ती जी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सरपंच प्रतिनिधि प्रिंस यादव ने गांव की विभिन्न समस्याओं को उठाते हुए पंचायत क्षेत्र के विकास एवं ग्रामीणों की मूलभूत सुविधाओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों की समस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के साथ किया जाना चाहिए। इस दौरान अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार सुरक्षा संगठन के प्रदेश सचिव राम रतन दीक्षित ने उपस्थित ग्रामीणों को मानव अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए। उन्होंने जन चौपाल में पहुंचे ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और उनके समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों तक बात पहुंचाने का आश्वासन दिया। मंच के माध्यम से रामलोचन चक्रवर्ती ने मधुर शब्दों में संचालन किया गया कार्यक्रम में शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य सुनील जैन ,जनपद सदस्य संजू यादव अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन के जिला प्रभारी मंत्री रामलोचन चक्रवर्ती,जिला अध्यक्ष मोहम्मद जियाउदीन ,महिला जिला अध्यक्ष श्रीमति पिंकी गुप्ता, जिला मीडिया प्रभारी महेंद्र दुवे, अनिल मिश्रा,एडवोकेट हरनारायण खरे तहसील मंत्री अमित गुप्ता, तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन एवं संगठन के पदाधिकारीयों की उपस्थिति सराहनीय रही4
- टीकमगढ़ के पुलिस अधीक्षक मनोहर सिंह मंडलोई ने हेलमेट जागरूकता के संबंध में जनता से अपील की है। उन्होंने लोगों से सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करने और अपनी जान बचाने के लिए हेलमेट पहनने का आग्रह किया।1
- थलापति विजय की पार्टी ने चुनाव में 108 सीटें जीतकर तमिलनाडु की राजनीति में हलचल मचा दी है। मुफ्त गैस, ₹2500 और 200 यूनिट बिजली जैसे बड़े वादों ने जनता को खूब लुभाया। अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्या सहयोगी दलों के साथ वे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच पाएंगे।1
- *भीषण गर्मी में राहगीरों को मिलेगी राहत, जतारा में आकार ले रहा 'जन शीतल आश्रय'* *तपती धूप में राहत की छांव: जतारा में बनेगा 'जन शीतल आश्रय', कलेक्टर ने खुद परखीं व्यवस्थाएं* जतारा ।। जब पारा 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाए, तो बंद कमरों में भी चैन नहीं मिलता। ऐसे में उन लोगों की स्थिति की कल्पना करना भी डरावना है, जो मजबूरी में दवा के लिए अस्पताल, जरूरी कागजात के लिए तहसील या सफर के लिए बस स्टैंड की खाक छान रहे हैं। आमजन की इसी पीड़ा को समझते हुए प्रशासन ने जतारा में 'जन शीतल आश्रय' की परिकल्पना को धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है। कलेक्टर ने परखीं व्यवस्थाएं, दिए सख्त निर्देश हाल ही में जिले के संवेदनशील मुखिया, कलेक्टर विवेक श्रोतीय ने जतारा पहुंचकर निर्माणाधीन जन शीतल आश्रय का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को स्पष्ट लहजे में कहा कि इस आश्रय स्थल का उद्देश्य केवल औपचारिकता पूरी करना नहीं, बल्कि चिलचिलाती धूप में तप रहे व्यक्ति को 'आत्मीय ठंडक' देना है। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर के प्रमुख दिशा-निर्देश: ठंडा पानी सर्वोपरि: पेयजल के लिए वाटर कूलर की व्यवस्था सुनिश्चित हो, ताकि किसी को प्यासा न रहना पड़े। हवा का पर्याप्त इंतजाम: आश्रय स्थल में केवल शेड ही नहीं, बल्कि पर्याप्त संख्या में कूलर और पंखे लगाए जाएं। सुगम पहुंच: यह सुनिश्चित किया जाए कि अस्पताल और बस स्टैंड के पास आने वाले जरूरतमंदों को यहां तक पहुंचने में भटकना न पड़े। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रही मौजूदगी निरीक्षण के दौरान नगर परिषद अध्यक्ष अनुराग रामजी नायक भी साथ रहे। उन्होंने नगर परिषद की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी और विश्वास दिलाया कि स्थानीय प्रशासन इस जनहितैषी कार्य को प्राथमिकता से पूर्ण कराएगा। इस दौरान राजस्व और निकाय विभाग के तमाम अधिकारी-कर्मचारी भी मुस्तैद दिखे। इंसानियत का 'ठंडा' कोना खबर का नजरिया:प्रशासन का यह कदम सराहनीय है। अक्सर सरकारी फाइलों में योजनाएं तो बहुत बनती हैं, लेकिन 'जन शीतल आश्रय' जैसी जमीनी पहल सीधे तौर पर उस अंतिम व्यक्ति को राहत देती है, जो लू के थपेड़ों के बीच अपने परिवार के लिए संघर्ष कर रहा है। उम्मीद है कि अन्य नगरीय निकाय भी इस मॉडल को अपनाएंगे। *इनका कहना है:* "यह आश्रय स्थल उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा, जो तहसील या नगर पालिका के काम से मीलों दूर चलकर आते हैं। प्रशासन की यह संवेदनशीलता स्वागत योग्य है।"— *एक स्थानीय नागरिक* *इनका कहना है:* "भीषण गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए आमजन, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों के लिए 'जन शीतल आश्रय' तैयार किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि तहसील, अस्पताल या बस स्टैंड आने वाले किसी भी व्यक्ति को तपती धूप में परेशान न होना पड़े। यहाँ ठंडे पानी और बैठने की समुचित व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। निर्माण कार्य में गुणवत्ता और सुविधाओं से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।" — *विवेक श्रोतीय, कलेक्टर टीकमगढ़* *भीषण गर्मी में राहगीरों को मिलेगी राहत, जतारा में आकार ले रहा 'जन शीतल आश्रय'* *तपती धूप में राहत की छांव: जतारा में बनेगा 'जन शीतल आश्रय', कलेक्टर ने खुद परखीं व्यवस्थाएं* जतारा ।। जब पारा 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाए, तो बंद कमरों में भी चैन नहीं मिलता। ऐसे में उन लोगों की स्थिति की कल्पना करना भी डरावना है, जो मजबूरी में दवा के लिए अस्पताल, जरूरी कागजात के लिए तहसील या सफर के लिए बस स्टैंड की खाक छान रहे हैं। आमजन की इसी पीड़ा को समझते हुए प्रशासन ने जतारा में 'जन शीतल आश्रय' की परिकल्पना को धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है। कलेक्टर ने परखीं व्यवस्थाएं, दिए सख्त निर्देश हाल ही में जिले के संवेदनशील मुखिया, कलेक्टर विवेक श्रोतीय ने जतारा पहुंचकर निर्माणाधीन जन शीतल आश्रय का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को स्पष्ट लहजे में कहा कि इस आश्रय स्थल का उद्देश्य केवल औपचारिकता पूरी करना नहीं, बल्कि चिलचिलाती धूप में तप रहे व्यक्ति को 'आत्मीय ठंडक' देना है। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर के प्रमुख दिशा-निर्देश: ठंडा पानी सर्वोपरि: पेयजल के लिए वाटर कूलर की व्यवस्था सुनिश्चित हो, ताकि किसी को प्यासा न रहना पड़े। हवा का पर्याप्त इंतजाम: आश्रय स्थल में केवल शेड ही नहीं, बल्कि पर्याप्त संख्या में कूलर और पंखे लगाए जाएं। सुगम पहुंच: यह सुनिश्चित किया जाए कि अस्पताल और बस स्टैंड के पास आने वाले जरूरतमंदों को यहां तक पहुंचने में भटकना न पड़े। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की रही मौजूदगी निरीक्षण के दौरान नगर परिषद अध्यक्ष अनुराग रामजी नायक भी साथ रहे। उन्होंने नगर परिषद की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी और विश्वास दिलाया कि स्थानीय प्रशासन इस जनहितैषी कार्य को प्राथमिकता से पूर्ण कराएगा। इस दौरान राजस्व और निकाय विभाग के तमाम अधिकारी-कर्मचारी भी मुस्तैद दिखे। इंसानियत का 'ठंडा' कोना खबर का नजरिया:प्रशासन का यह कदम सराहनीय है। अक्सर सरकारी फाइलों में योजनाएं तो बहुत बनती हैं, लेकिन 'जन शीतल आश्रय' जैसी जमीनी पहल सीधे तौर पर उस अंतिम व्यक्ति को राहत देती है, जो लू के थपेड़ों के बीच अपने परिवार के लिए संघर्ष कर रहा है। उम्मीद है कि अन्य नगरीय निकाय भी इस मॉडल को अपनाएंगे।1